Saturday, November 17, 2012

दलित महिला से सामूहिक बलात्कार की कोशिश


नाकाम रहने पर पांव तोड़ा, पीडि़ता के परिवार ने गांव छोड़ा 

पीडि़ता कमला बलाई (बदला हुआ नाम) पैर पर लगी चोट दिखते हुए
भीलवाड़ा (लखन सालवी) - जिले के दंतेड़ी गांव के दो गुर्जर युवकों ने एक दलित परिवार की विवाहिता महिला के साथ न केवल बलात्कार करने का प्रयास किया बल्कि विरोध करने पर उसके घर पर धावा बोल कर उसके पति, ससुर, सास तथा देवर के साथ लाठियों से मारपीट की और पीडि़ता का पांव तोड़ दिया।
करेड़ा क्षेत्र में जमीनों को बेचने से मिले अपार धन के मद में मस्त लोगों की दादागिरी साफ दिखाई दे रही है। दंतेड़ी में बलाई जाति की विवाहित महिला के साथ हुआ बलात्कार का प्रयास इसी का एक उदाहरण है।
करेड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार 25 अगस्त को 23 वर्षीय कमला देवी (बदला हुआ नाम) अपने खेतों में बकरियां चरा रही थी। सायं करीब 4 बजे दंतेड़ी गांव के गुर्जर जाति के दो युवक गेहरू व भालू गुर्जर वहां आए। उन्होंने दूर से ही कमला को आवाज देकर कुकर्म करवाने को कहा। जब कमला उनके पास नहीं गई तो दोनों उसके पास पहुंच गए और उसे पकड़ कर उसके साथ छेडछाड़ की, उसे घसीटते हुए दूर तक ले गए और निर्वस्त्र कर बलात्कार करने की कोशिश की। बचाव के लिये कमला जोर-जोर से चिल्लाई तो वो दोनों उसे छोड़कर भाग छूटे। कमला वहां से तुरन्त घर गई और अपने पति को पूरी बात बताई। इतने में वो गेहरू व भालू गुर्जर पीडि़ता के घर से बाहर होकर जाते हुए दिखे तो पीडि़ता के पति ने उन्हें उलाहना दिया। इस पर वो पीडि़ता के पति को जातिगत गालियां निकालते हुए तथा जान से मार देने की धमकी देते हुए वहां से चले गए।
अत्याचारियों का इतने से भी मन नहीं भरा तो सायं करीब 6.30 बजे गेहरू व भालू गुर्जर अपनी जाति के अन्य 20-25 लोगों के साथ हाथों में लाठियां लेकर पीडि़ता के घर पहुंचे और गालियां देते हुए पीडि़ता के परिवार पर हमला कर दिया। पीडि़ता ने बताया कि गेहरू व भालू ने यह कहते हुए मुझे उठाकर पटका कि-बलाइटी तूने खेत वाली बात अपने पति को क्यों बताई ? उसने बताया कि जातिगत गालियां निकालते हुए केसु पिता नगजीराम गुर्जर, रेखा पिता बख्तावर गुर्जर, गिरधारी पिता बख्तावर गुर्जर, नारायण पिता बक्षु गुर्जर, मिट्ठु पिता बक्षु गुर्जर, नारायण पिता भोजा गुर्जर, ईश्वर पिता हीरा गुर्जर, राजु पिता हीरा गुर्जर ने मेरे पति, सास-ससुर एवं देवर सहित परिवार के सभी जनों के साथ लाठियों से बुरी तरह मारपीट की और भाग गए। परिवार के हम सभी लोग चोटिल हो गए, मेरा पति लहुलुहान हो गया तथा मेरा पैर फेक्चर हो गया। रात में हम भीलवाड़ा गए और चिकित्सालय में इलाज करवाया।
पीडि़ता ने 25 अगस्त को ही रात 11.15 बजे करेड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 143, 323, 447, 354, 452 तथा अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (i)(iii)(x)(xi)(xii) के तहत मामला दर्ज किया तथा मामले की जांच गंगापुर वृत्त के पुलिस उपाधीक्षक सत्यनारायण कन्नौजिया कर रहे है।
डीवाईएसपी सत्यनारायण कन्नोजियां ने बताया कि पीडि़ता की लिखित रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है। मौका परचा बना लिया गया है तथा पीडि़तों के बयान ले लिए गए है। 30 अगस्त को दंतेड़ी के गुर्जर जाति के लोग मेरे पास आए, उनका कहना है कि कमला बलाई ने कई निर्दोष युवकों के खिलाफ भी रिपोर्ट दी है। कन्नोजिया ने कहा कि 3 सितम्बर को दोनों पक्षों को आमने सामने बिठाकर असली आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।
अभी तक पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। आरोपी खुलेआम हाथों में लाठियां लेकर घूम रहे है। वहीं दंतेड़ी गांव में दलित बलाई समुदाय के 30-40 परिवार है। इस पूरे घटनाक्रम से सभी परिवारों के लोग सहमें हुए है। पीडि़त परिवार के लोग तो गांव छोड़कर अन्यत्र चले गए है। परिवार के मुखिया का कहना है कि आरोपी हम पर पुनः हमला कर हमें मार सकते है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही क्षेत्र में राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस व भाजपा से जुड़े गुर्जर नेता अपनी जाति के लोगों को बचाने की जुगत में लग गए है। वो पीडि़त पक्ष के लोगों को भावनाओं में बांधकर समझौता कर लेने के प्रयास कर रहे है। कुछ लोग डरा-धमका कर समझौता करने की प्रयास कर रहे है। तंग आकर दलित परिवार गांव छोड़कर अन्यत्र चला गया है।
शुद्र विकास सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल लालावत का कहना है कि गुर्जरों ने हमसलाह होकर दलित परिवार की महिलाओं व पुरूषों पर लाठियों से हमला कर उन्हें घायल कर दिया, विवाहित महिला के साथ बलात्कार करने की कोशीश की। इतने बड़े संगीन अपराध करने वालों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है, इससे साफ जाहिर है कि जिले का पुलिस प्रशासन दलितों के प्रति संवेदनशील नहीं है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधि संवेदनशील है।
दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के जिला संयोजक महादेव रेगर ने कहा कि अगर दलितों पर अत्याचार करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय पर विशाल जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।

ये सरकार बदलने की शुरूआत है


भीलवाड़ा (लखन सालवी). भीलवाड़ा नगर परिषद के पार्षद के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत और बारां के अटरू में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत को वर्तमान कांग्रेस सरकार को बदल देने का आगाज माना जा रहा था। लेकिन हाल में हुए कॉलेज चुनावों से यह स्पष्ट हो गया है कि अब हर कोई इस सरकार को बदलने पर आमादा है। कॉलेज चुनावों के परिणामों के बाद से लोगों में सरकार को लेकर खासी चर्चा है। लोग कह रहे है कि सरकार बदलने की शुरूआत युवाओं ने कर दी है और आगामी चुनावों में कांग्रेस सरकार को हार का मुंह देखना पड़ेगा।
भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और विकास के नाम में महज घोषणाओं के साथ ही कांग्रेस पार्टी की अन्दरूनी खींचातान ही उसे गर्त में लिए जा रही है जिसे बचा पाना शायद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बस की बात भी नहीं रही है।
19 अगस्त को भीलवाड़ा के माणिक्य लाल वर्मा ब्व्यॅाज कॉलेज, सेठ मुरलीधर मानसिंहका गर्ल्स कॉलेज, शाहपुरा के प्रतापसिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय, मांडलगढ़ के श्री शिवचरण माथुर राजकीय महाविद्यालय एवं गंगापुर के श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय के चुनाव परिणाम आए। इन पांचों कॉलेजों में एबीवीपी के प्रत्याशी अध्यक्ष बने।
उल्लेखनीय है इन कॉलेजों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व संयुक्त सचिव पदों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें में से महज श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय गंगापुर में सचिव व संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई के प्रत्याशियों की जीत हुई। बाकी सभी कॉलेजों में सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशी जीते है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी के संसदीय क्षेत्र में एनएसयूआई की करारी हार हुई है। विदित रहे कि भीलवाड़ा के माणिक्य लाल वर्मा ब्व्यॅाज कॉलेज में पिछले 15 सालों से एनएसयूआई के प्रत्याशी ही जीतते आए है। इस बार सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशियों की जीत हुई है। सेठ मुरलीधर मानसिंहका गल्र्स कॉलेज में भी एबीवीपी ने ही परचम लहराया है। भीलवाड़ा, मांडलगढ़, शाहपुरा व गंगापुर (सहाड़ा) चारों ही विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान में कांग्रेस के विधायक है। गंगापुर (सहाड़ा) के श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय के अलावा सभी कॉलेजों में एबीवीपी ने एकछत्र परचम लहराया है।
राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की गुटनीति को एनएसयूआई की हार का कारण बता रहे है। वैसे पिछले वर्ष के छात्रसंघ चुनाव से ही कांग्रेस की गुटनीति जगजाहिर हो गई थी। इस बार भी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव को जाट बनाम गुर्जर चुनाव करार दिया जा रहा था।
श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय इस जिले का एक मात्र ऐसा महाविद्यालय है जहां छात्र संघ के दो पदों (सचिव व संयुक्त सचिव) पर एनएसयूआई के प्रत्याशी जीत पाए है। देखा जाए तो यहीं एक मात्र कॉलेज है जहां अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में बहुत ही कम मतों के अन्तर से एबीवीपी के प्रत्याशियों की जीत हुई है।
यह कॉलेज विधायक कैलाश त्रिवेदी के क्षेत्र में है। सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति का केंद्र गंगापुर है। इस क्षेत्र में कभी भाजपा के डॉ. रतन लाल जाट (पूर्व खाद एवं बीज मंत्री) का दबदबा रहा था। पिछले 7-8 सालों से कांग्रेस के विधायक कैलाश त्रिवेदी की साख बनी है। वो लगातार दो बार डॉ. रतन लाल जाट को शिकस्त देकर विधायक चुने गए है। छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई का अध्यक्ष पद का प्रत्याशी केसरमल जाट एबीवीपी के बलवीर सिंह से महज 28 वोटों से हारा जबकि उपाध्यक्ष पद का प्रत्याशी दिनेश जाट 8 वोटों से हारा।
जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर सहित राज्य के 9 विश्वविद्यालयों में से एक में भी एनएसयूआई की जीत नहीं हुई। जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उदयपुर में केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी, अजमेर में संचार मंत्री सचिन पायलेट, कोटा में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल व वीरेन्द्र बेनीवाल का जादू नहीं चला।राजस्थान के 128 महाविद्यालयों में 107 महाविद्यालयों के चुनाव परिणाम घोषित हुए। इनमें से 38 में एनएसयूआई तथा 22 में एबीवीपी जीती है। शेष  पर निर्दलीय तथा अन्य ने जीत हासिल की है।
बहरहाल लोग एबीवीपी की जीत से आगामी विधानसभा चुनावों का अंदाजा लगा रहे है। लोगों का मानना है कि हालात देखते हुए आगामी सरकार भाजपा की ही बनेगी।

ये गुटों की खींचतान है या दिग्गजों की आपसी रंजिसों का नतीजा


  • लखन सालवी।
राजनीतिक संगठनों में राज्य, जिला व ग्राम स्तर पर कार्यकर्ताओं में निरन्तर खींचतान बढ़ती जा रही है। संगठन खेमों में बंटते जा रहे है और इन खेमों के लोग सक्रिय होकर स्वार्थ सिद्ध करने में लगे है। गुटों की खींचतान के कारण कांग्रेस संगठन के सभी कार्यक्रम फिस्स हो चुके है। न बूथ लेवल एजेन्टों की नियुक्तियां हुई ना ही पंचायत और वार्ड कमेटियों को गठन हो पाया। कुछ राजनीतिक सम्मेलन आयोजित हो पाए जिनमें भी गुटों की खींचतान सामने आई।
गुटों की शाखाएं तेजी से बढ़ रही है और ये शाखाएं मजबूत होकर पार्टियों को गर्त में ले जाने का कार्य कर रही है। गुटबाजी के मामले में कांग्रेस अव्वल है। अब तो छात्रसंघ के चुनावों में गुटबाजी सामने आने लगी है। भीलवाड़ा में राजनीति में प्रवेश की पहली सीढ़ी (छात्र राजनीति) ही गुटबाजी का शिकार हो रही है गुटों में बंट रहे पार्टियों के कार्यकर्ता न केवल एक दूसरे की टांग खींच रहे है बल्कि लात घुसे बरसाने तक से परहेज नहीं कर रहे है।
हाल ही में भीलवाड़ा में जिला कांग्रेस कार्यालय में एनएसयूआई के दो गुटों के बीच जूतम् पेजार (लात-घूसे) हुई। उल्लेखनीय है कि छात्रसंघ के चुनाव होने वाले है। चुनावों के मद्देनजर एनएसयूआई के चुनाव पर्यवेक्षक विकास बेनीवाल टिकट के दावेदारों से मिलने के लिए 7 अगस्त को भीलवाड़ा आए थे। वे कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष अनिल डांगी के साथ दावेदारों से मिल रहे थे। उनके साथ चुनाव प्रभारी राजू जाट भी मौजूद थे। राजू जाट को वहां देखकर एनएसयूआई के एक गुट के कार्यकर्ता भड़क गये और राजू जाट पर गत चुनाव में बागी उम्मीदवार का सहयोग देने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि राजू जाट ने खुल्लेआम बागी उम्मीदवार का सहयोग किया था तो किस आधार पर उसे चुनाव प्रभारी बनाया गया। पूर्व चुनाव में एनएसयूआई के अध्यक्ष पद हेतु प्रत्याशी रहे किशन जाट व भंवर गुर्जर ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल डांगी पर भी बागी गुट का सहयोग करने का आरोप लगाया। कांग्रेस जिला सचिव व चुनाव प्रभारी राजू जाट को तो धक्केमार कर कांग्रेस कार्यालय से ही बाहर निकाल दिया।
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता ने बताया कि गत वर्ष के चुनाव में एनएसयूआई की ओर से किशन जाट को उम्मीदवार बनाया गया था। जबकि कांग्रेस के मुख्य लोगों ने बागी उम्मीदवार कैलाश जाट को चुनाव जीताया। वहीं से एनएसयूआई दो गुटों में विभाजित हो गया।
जगजाहिर है कि किशन जाट को एनएसयूआई अध्यक्ष का टिकिट एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष धीरज गुर्जर के कारण मिला था यानि प्रदेशाध्यक्ष किशन जाट के पक्ष में थे। वहीं कैलाश जाट को निर्दलीय चुनाव लड़वाने में कांग्रेस के युवा नेता रामलाल जाट व डेयरी अध्यक्ष रतन लाल जाट का नाम सामने आया। यह जगजाहिर हो गया कि एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष धीरज गुर्जर किशन जाट के पक्ष में थे, जबकि पूर्व मंत्री रामलाल जाट कैलाश जाट के पक्ष में।
राजू जाट ने युवा जाट नेता की शह पर बगावत की और निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट का खुलकर सहयोग किया। एनएसयूआई के उम्मीदवार को हराकर निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट को जीताया। उल्लेखनीय है कि निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट का सहयोग करने के कारण पूर्व मंत्री रामलाल जाट से खफा किशन जाट के समर्थकों ने रामलाल जाट पर पत्थर भी फैंके थे।
बहरहाल राजनैतिक दिग्गजों के इशारों में स्थानीय छात्र नेता किशन जाट और कैलाश जाट गुट के बीच घमासान मचा हुआ है। छात्रसंघ अध्यक्ष कैलाश जाट गुट का नेतृत्व राजू जाट कर रहे है। इस गुट के दिनेश जाट ने अध्यक्ष, मुकेश विश्नोई ने उपाध्यक्ष, मयंक सुवालका ने महासचिव व सत्यनारायण तिवाड़ी ने संयुक्त सचिव के लिए टिकट मांगा है। गर्ल्स कॅालेज में अंकिता दाधीच ने अध्यक्ष, सरोज जाट ने उपाध्यक्ष, ज्योति लौहार ने महासचिव व चेतना सेन ने संयुक्त सचिव के लिए टिकट मांगा है। जबकि किशन जाट गुट का नेतृत्व पूर्व जिलाध्यक्ष रामेश्वर जाट कर रहे है। इस गुट के तीन जने अध्यक्ष पद के लिए टिकट मांग रहे है (विनोद जाट, गोपाल चौधरी व गौतम महावार)। कमलेश सिंह ने उपाध्यक्ष, मदन अहीर ने महासचिव व रमेश अहीर, ओमप्रकाश रेगर ने संयुक्त सचिव के लिए दावेदारी जताई है। गर्ल्स कॅालेज में राजकुमारी चौधरी ने अध्यक्ष, सोनल जांगिड़ ने उपाध्यक्ष, रूख्सार खान ने महासचिव व दीपाली पांडे ने सचिव के लिए दावेदारी जताई है। वहीं लोग इस चुनाव को छात्रसंघ चुनाव की बजाए धीरज गुर्जर बनाम रामलाल जाट का चुनाव करार दे रहे है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल डांगी का कहना है कि एनएसयूआई पार्टी का अग्रिम संगठन है। छोटे मोटे हो जाते है, हम मिलकर निपटायेंगे। एनएसयूआई जिसे टिकट देंगे हम उसी प्रत्याशी के साथ रहेंगे। राजू जाट को चुनाव प्रभारी लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो वरिष्ठ पदाधिकारियों की टीम और लगा देंगे।
वहीं टिकट के दावेदारों से मिलने आए चुनाव पर्यवेक्षक विकास बेनीवाल ने बताया कि हम कॅालेज के छात्रों से फीडबैक लेंगे तथा उसी को टिकट दिया जाएगा जो अनुशासन में रहेगा। गुटों के बारे में उन्होंने कहा कि हम शीघ्र ही बैठक करेंगे, कोशिश करेंगे कि गुट एक हो जाए।
गुटों की राजनीति के इस मामले में खबरकोश डॅाटकॅाम के उपसंपादक लखन सालवी ने धीरज गुर्जर से बातचीत की। उनसे हुई बातचीत के सम्पादित अंश यहां प्रकाशित किए जा रहे है - 
एनएसयूआई में गुटों में बंटता जा रहा है क्या कारण है ?
बड़ा संगठन है, विचारों में मतभेद हो सकते है, जिन्हें मिलकर निपटा लिए जाएंगे। सभी एक हो जाएंगे। वैसे मतभेद तो है नहीं पार्टी में।
गत चुनाव में किशन जाट को आपने टिकट दिलवाया ? पार्टी व संगठन से जुड़े लोगों ने बागी उम्मीदवार का सहयोग किया? इसके पीछे क्या कारण रहा ?
हां एनएसयूआई ने किशन जाट को टिकट दिया था। पार्टी से जुड़े कुछ राजनैतिक लोगों ने बागी उम्मीदवार का सहयोग किया। वो अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए छात्र संगठन को बांटने की कोशिशें कर रहे है, लेकिन वो इस बार सफल नहीं होंगे।
गत चुनाव में एनएसयूआई के प्रत्याशी को हराया गया, इसमें रामलाल जाट व उनके सहयोगियों का हाथ था ?
हां हां बिलकुल सही है, यह जगजाहिर हो चुका है, अखबारों में आ चुका है।
संगठन की बजाए गुट मजबूत होते जा रहे है, आप क्या करेंगे ?
मैंने अपने हाथों से एनएसयूआई को खड़ा किया है, छात्र शक्ति को जोड़ा है। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि एनएसयूआई राजनीति का अखाड़ा न बने।

वे अब हुए आजाद



  • लखन सालवी 
मीडिया पैरवी और लोगों की जागरूकता से आखिरकार आजादी की तहरीक के महानायक चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति अतिक्रमण से मुक्त हो गई।
उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित आजाद चौक में लगी चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति के आगे व्यवसायियों ने अस्थाई दूकानें बनाकर अतिक्रमण कर लिया था। जिस कारण आजाद की मूर्ति दिखाई ही नही पड़ रही थी।
अतिक्रमणकारियों के हौसेलें इतने बुलन्द थे कि आजाद चौक में जाने में मुख्य द्वारा को भी अवरूद्ध कर दिया। द्वार के पास लगी आजाद की मूर्ति की परवाह भी नही की। एक अस्थाई दूकान वाले ने कुछ माह पूर्व तक करीबन 8 फीट जगह पर अतिक्रमण किया था अब उसने करीब 40 फीट 25 फीट लम्बी व 8 फीट चौड़ी अस्थाई दूकान बना ली थी। जागरूक लोगों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन किसी ने अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाई। लोगों का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय नेताओं से जुड़े लोग अतिक्रमण करवाने में मदद कर रहे है और वो शिकायतों पर कार्यवाही नहीं होने दे रहे थे।

जागरूक जनता के प्रयासों से हटा अतिक्रमण

‘‘जिसने देश को आजादी दिलाई वो खुद आज अतिक्रमण झेल रहा है। 23 जुलाई को आजाद की जयंती थी लेकिन जयंती मनाने कोई नहीं आया। युवा क्रांतिकारी शहीद को सच्ची श्रृद्धाजंली उसी वक्त होगी जब वे आजाद को अतिक्रमण से मुक्त करायेंगे। ये लिखा हुआ एक बड़ा होर्डिंग आजाद चौक पर कुछ जागरूक लोगों ने लगवाया। इस होर्डिंग में एसपी व कलक्टर से गुहार की गई कि वे आजाद की मूर्ति को अतिक्रमण से मुक्त करावें। उसके बाद अनिल बदल्वा सहित जिला परिषद के 5-7 पार्षदगण पहूंचे थे।
उल्लेखनीय है कि जुलाई के प्रथम अंक में डायमण्ड इंडिया ने अतिक्रमण का मामला उठाया था। दूसरी ओर आजाद जयंती के अवसर पर जागरूक लोगों ने बड़ा बैनर लगवाकर अतिक्रमण का विरोध किया। नजीता यह रहा कि प्रशासन हरकत में आया और तुरन्त अतिक्रमण हटवाया। अतिक्रमण हटवाए जाने के बाद लोगों ने कहा कि आजाद अब हुए आजाद।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद की जयंती थी, आजाद को सलाम करने के लिए चंद राजनेताओं के अलावा कोई आया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कहां गए वो देशप्रेमी जो अपने आप को हिन्दू राष्ट्र के प्रति समर्पित बताते है।

यह प्राथमिक कबाड़खाना है !


  • लखन सालवी
कोशीथल गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य केंद्र नही बल्कि कबाड़खाना है। यहां डॉक्टर की कुर्सी कई महीनों से सूनी पड़ी है, मरीज डॉक्टर के कमरे में देखकर चलते बनते है। जो मजबूर यहां इलाज करवाने आते है वो परेशान है। बहिरंग वार्ड गीता सिस्टर व एक कम्पाउण्डर के भरोसे है। भर्ती वार्ड को सफाई का इंतजार है, दरिया व बेडशीट भी एक बार धुल जाएगी तो साफ दिखाई देने लगेगी। एक बार इलेक्ट्रीशियन से बिजली फिटिंग व्यवस्थित करवा दी जाए तो केंद्र में रोशनी हो सकती है। बहरहाल इन व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने की जहमत उठाने वाला कोई नहीं है।
चिकित्साधिकारी के कमरे में खाली पड़ी कुर्सियां
सहाड़ा तहसील के कोशीथल गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) खस्ता हाल है। व्यवस्थाएं चरमरा गई है। पीएचसी के नाम है तो महज बहिरंग और भर्ती वार्ड। वो भी गंदगी से सराबोर। चिकित्साधिकारी के कमरे में लगी चिकित्सकों की कुर्सियां खाली पड़ी है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी का पद कई महिनों से रिक्त है। डॅा. मोहित डाबी को यहां लगाया गया है लेकिन अभी तक उन्हें रायला से रिलीव नही किया गया है। ऐसे में पीएचसी पर एक भी चिकित्सक नहीं है। हाल में पीएचसी पर डॅा. शांतिलाल जीनगर सप्ताह में दो दिन अपनी सेवाएं दे रहे है। डॉक्टर साहब सप्ताह में 2 दिन यहां आ रहे। बाकी के दिनों में मरीज अपना इलाज गीता सिस्टर (फीमेल नर्स) से करवा रहे है। जब गीता सिस्टर इलाज के लिए हाथ खड़े कर देती है तो गंगापुर या भीलवाड़ा जाकर इलाज करवा रहे है।


बहिरंग वार्ड में सिस्टर व कम्पाण्डर के भरोसे

ग्रामीण अयूब मोहम्मद ने बताया कि ओपीडी एक कम्पाउण्डर व एक फिमेल नर्स गीता देवी के भरोसे है। वैसे इन दोनों की सेवाओं की बदौलत ही इस केंद्र का वजूद बचा है। ये दोनों कर्मचारी बेखूबी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे है। केंद्र का नाम लेते है कि हर किसी की जुबां पर गीता सिस्टर का नाम आता है। वो बुलावे पर मरीज के घर के जाकर भी ईलाज कर रही है। महिलाओं की चहेती है तथा केन्द्र में भर्ती मरीजों की सार-संभाल भी वो ही करती है।
बंद पड़ी ट्यूब लाइटें - जीर्णशीर्ण होता वार्ड
तुलछीराम, रोशन लाल, कैलाश चंद्र ने बताया कि पिछले एक दशक से केंद्र की दशा बिगड़ती जा रही है। पहले भर्ती वार्ड साफ-सुथरा रहता था, यहां महिला व पुरूष डॉक्टर के पद रिक्त नहीं होते थे। मरीजों की भीड़ रहती थी। परिसर में पेड़ पौधे थे। 5 साल से अधिक समय हो गया है यहां कोई महिला डॉक्टर नहीं है।
लोगों का कहना है कि डॅा. फरियाद मोहम्मद और डॅा. फरजाना के स्थानान्तरण के बाद यहां कोई संवेदनशील डॉक्टर नहीं आया। हालात ये है कि अधिकतर लोग गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी करवाने के लिए उन्हें शहरों के चिकित्सालयों में ले जाते है।
कुछ सालों तक तो ब्लॅाक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॅा. सतीश डाबी ने यहां बतौर डॉक्टर सेवाएं दी। वो भी अपने चैम्बर में बैठे अधिकतर समय पीकदान में गुटखा थूकते रहते रहते थे। निश्चित ही उनसे पे्ररणा लेकर कईयों ने गुटखा खाना भी आरंभ किया ही होगा। खैर, वर्तमान में डॅा. सतीश डाबी यहां के चिकित्सक नहीं है, अब वो ब्लॅाक  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का पद संभाले हुए है। उनका कहना है कि ‘‘पीएचसी पर चिकित्सक के 2, स्टाफ नर्स के 2, एएनएम के 2, लेबर टेक्नीशियन का 1, 2 वार्ड बॉय, 1 स्वीपर, 1 एलएचवी. 1 वरिष्ठ लिपिक तथा 1 ड्राइवर का पद है। इनमें से चिकित्साधिकारी व एक एनएनम का पद रिक्त है।’’ जबकि ग्रामीणों का कहना है कि इतना केंद्र में इतना स्टाफ कभी नजर नहीं आया। कोशीथल के 12 किलोमीटर के दायरे में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। इस पीएचसी के क्षेत्राधीन 15 गांव व 5 उपकेंद्र है। जबकि कोशीथल के आस-आस के 15 गांवों के लोग इलाज के लिए इस पीएचसी पर आते है।

चिकित्सालय है या कबाडखाना

केन्द्र  खस्ता हाल है। भवन व कमरों में कई बरसों से पुताई नहीं करवाई गई है। भर्ती वार्ड में सदियों पुराने बेड व दरियां अस्त-व्यस्त हो रहे है। किन्हीं पर गद्दे है तो कईयों पर फटी पुरानी दरियां बिछा रखी है, बेड सीटें गंदी हो रखी है, ट्यूबलाइटें लगी हुई है नहीं जलती नहीं है। कर्कश ध्वनी के साथ एक-दो पंखे जरूर घूमने लगते है।
वार्ड में अस्त व्यस्त पड़ा सामान
बहिरंग रोगियों का इलाज एक ऐसे कमरें में किया जाता है जहां बेड के नाम पर दो ब्रेंच है। जिन पर मटमैली गंदी दरियां बिछा रखी है। इस कमरे की खिड़कियों से बाहर पड़ी गंदगी की बदबू कमरों आती है। फील्ड कर्मचारियों का सामान भी इसी कमरे में रखा है। मरीजों इसे ‘‘कबाड़खाना’’ कहते है।
यह दशा है कोशीथल के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन। यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के बाद सरकार की बड़ी योजना है। महानरेगा, नाम आते ही आंखों के सामने दयनीय मजदूरों की व महानरेगा की ध्वस्त होती तस्वीर आ जाती है। महानरेगा में जहां मजदूरों को आवेदन की रसीदें नहीं दी जा रही, समय पर काम नहीं दिया जा रहा है तथा ना ही उन्हें समय पर काम का भुगतान किया जा रहा है। दूसरी ओर सरकारें जन कल्याण के लिए नित नई विकास योजना लागू कर रही है, गरीबों के हित सुरक्षित हो सके इसलिए कानून बनाकर अधिकार प्रदत कर रही है लेकिन भ्रष्ट तंत्र और प्रभावी क्रियान्विति के अभाव में सभी प्रयास दम तोड़ते नजर आ रहे है।
निजी चिकित्सालयों की ओर बढ़ा रूझान सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी और स्टाफ के असंवेदनशील रैवये के कारण उन्हें ईलाज मुहैया नहीं हो पा रहा है। प्रभावी मॅानिटरिंग व्यवस्था नहीं होना भी एक बड़ा कारण उभर कर सामने आया है। ब्लॅाक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय से महज 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित कोशीथल गावं के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की दशा इतनी दयनीय है तो अन्य दूर दराज के केंद्रो की क्या दशा क्या होगी इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।
लोग गांव के हो या शहर के उनका रूझान सरकारी चिकित्सालयों की बजाए निजी चिकित्सालयों की ओर बढ़ा है। जो लोग गरीब है, वो सरकारी चिकित्सालयों में ही इलाज करवाते है।

कहीं ये सरकार पलट देने का आगाज तो नहीं


  • लखन सालवी 
विजयी प्रत्याशी श्यामबिहारी मेहता साथ जुलूस निकालते समर्थक
भीलवाड़ा शहरवासियों की माने तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पडे़गा। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केंद्र तथा राज्य में कांग्रेस सरकार के होने, भीलवाड़ा के जिला परिषद और नगर परिषद में मुख्य पदों पर कांग्रेस का कब्जा होने के बावजूद वार्ड नम्बर 6 के पार्षद के उपचुनाव में भाजपा की प्रत्याशी की जीत हुई।
वहीं बारां जिले की अटरू पंचायत समिति के वार्ड संख्या 9 के सदस्य के उपचुनाव में भी कांग्रेसी प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा। कांग्रेसी विधायक पानाचंद मेघवाल के गृह पंचायत क्षेत्र से कांग्रेसी प्रत्याशी की करारी हार हुई।यहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 400 से अधिक मत मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 200 मत ही मिले। भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी श्यामबिहारी मेहता ने कांग्रेस के चन्द्रमोहन मेहता को 1058 वोटों से हराया। विजयी रहे श्यामबिहारी मेहता ने किसी कारणवश भाजपा का सिंबल नहीं मिलने के कारण निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
भीलवाड़ा नगर परिषद के वार्ड नम्बर 6 के लिए पार्षद के उपचुनाव में भाजपा की प्रत्याशी शारदा देवी चौधरी को 1389 वोट मिले। वो 741 वोटों से चुनाव जीती। कांग्रेस यहां तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस की रतना देवी को 625 वोट ही मिले जबकि भाजपा के बागी होकर चुनाव लड़ी कृष्णा कंवर को 648 वोट मिले। रतना देवी को भाजपा के बागी उम्मीदवार को कृष्णा कंवर से भी कम वोट मिले।
जीत के बाद जुलूस में पार्षद शारदा चौधरी, विधायक अवस्थी एवं समर्थक
बागी उम्मीदवार कृष्णा कंवर के चुनाव लड़ने की स्थिति से कांग्रेसी खुश थे, उनका मानना था कि भाजपा वाले आपस में ही लड़कर हार जाएंगे, भाजपा बागी उम्मीदवार के कारण वो अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे थे। ऐसा भी नहीं है कि वो हाथ पर हाथ धरे जीत का इंतजार कर रहे थे। कांग्रेसी उम्मीदवार रतना देवी को जिताने के लिए जिले के कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने दिन-रात एक किए थे। लेकिन हार के कारण कांग्रेस के खेमे में भारी निराशा का माहौल व्याप्त है।
वहीं भाजपा विधायक विठ्ठल शंकर अवस्थी सहित भाजपाईयों ने भाजपा प्रत्याशी के जीत जाने पर जमकर खुशियां मनाई। जीत के बाद शपथ लेने अपने पति चैनाराम चौधरी के साथ शारदा देवी कलक्टेªट पहुंची। जहां पार्षद ज्योति आशीर्वाद, निशा जैन, नंदलाल गुर्जर, अनिल जैन, पुरूषोत्तम बैरवा, मुकेश शर्मा, प्रकाश तथा भाजपा जिला महामंत्री राजेश पाठक, भाजपा जिला मंत्री राजकुमार आंचलिया, राजेन्द्र सिंह शेखावत ने उनका स्वागत किया।
शपथ के बाद मुख्य मार्गों पर रैली निकाली गई। इस दौरान विधायक अवस्थी ने इस जीत को कार्यतकर्ता व जनता की जीत बताते हुए कहा कि इस जीत से संकेत मिला है कि लोग कांग्रेस के राज से ऊब चुके है तथा सत्ता परिवर्तन चाहते है। जनता परेशान हो गई है, अब वो सत्ता परिवर्तन चाहती है। भाजपा से बगावत करने वालों को सावचेत करते हुए अवस्थी ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि जीत उसी की होगी जो अनुशासित रहेगा और जनता की सेवा करेगा।

और मुंह लटका कर चल दी जिला प्रमुख. . .


  •  लखन सालवी
‘‘सर्व विदित है कि भीलवाड़ा की जिला प्रमुख एक केलूपोश मकान में रहती थी, उसके पति रोशन लाल बच्चों को पढ़ाकर परिवार का खर्च चला रहे थे। अनुसूचित जाति की महिला आरक्षित सीट थी। मेघवंशी ने समाज के लोगों से चर्चा की और समाज की किसी पढ़ी लिखी युवा महिला का चयन कर उसे जिला परिषद सदस्य का चुनाव जिताने की अपील की। समाज के लोगों के सुझाव पर रोशन लाल की पत्नि सुशीला सालवी के लिए कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा गया। मेघवंशी समाज के लोगों के अथक प्रयास से सुशीला सालवी जिला को न केवल परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए टिकिट दिलवाया बल्कि जन-जन से सम्पर्क कर वोट दिलवाए। नतीजा . . सुशीला सालवी चुनाव जीती। समाज के लोगों ने सुशीला सालवी को जिला प्रमुख की कुर्सी दिलवाने में कई स्तर पर प्रयास किए। लेकिन सुशीला सालवी जिला प्रमुख बनने के बाद महज एक सप्ताह में ही अपने समाज के लोगों को भूल गई, मददगारों को भूल गई, चुनाव के दौरान किए गए वादों को भी भूल गई। आज समाज के लोग अपने आप को कोस रहे है और उनकी बर्बादी की दुआ कर रहे है।’’
शुक्रवार (20 जुलाई 12) शिवपुर में संत रतनदास जी महाराज के भण्डारे का आयोजन किया गया। महाराज के शिष्यों द्वारा आयोजित भण्डारे में कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़, पाली, जोधपुर, अजमेर सहित कई जिलों के लोग आए। रात में सत्संग का आयोजन था। भण्डारे में आए संतों ने भजन प्रस्तुत किए। उससे पूर्व अतिथियो का स्वागत किया गया। अतिथि दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के संस्थापक भंवर मेघवंशी का साफा बंधवाकर तथा जिला प्रमुख सुशीला सालवी का शॅाल  ओढाकर स्वागत किया गया।
जिला प्रमुख सालवी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्व. रतनदास जी महाराज ने समाज को दिशा दी। उनसे प्रेरणा लेकर हमें भी धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। जिला प्रमुख ने कहा कि मैं समाज की सेवा के लिए हर क्षण तैयार हूं। तभी सभा में बैठे एक व्यक्ति ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ‘‘प्रमुख साहिबा थाणा गांव के जयराम बलाई की जमीन को दबंगों ने अपने कब्जे में ले लिया। उसके खेत की चारदिवारी व खेत में बने कच्चे मकान को ढहा देने वालों के खिलाफ तो कार्यवाही करवा के जयराम की मदद नही कर रही हो ? खैर, उन बुजुर्ग जन की आवाज सुशीला सालवी तक तो नही पहुंची लेकिन हां आस-पास बैठे लोगों को जरूर जिला प्रमुख की छवि की जानकारी मिली।
इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने कहा कि संतो के समाज में जन्म पाकर मैं अपने आप को धन्य मानता हूं। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे समाज में रतनदास जी महाराज जैसे संतो ने जन्म लिया। सभा में आए हुए सभी संतों को नमन करते हुए डगर के संस्थापक मेघवंशी ने कहा कि संत दीपक लेकर समाज के आगे चलते है, उस दीपक की रोशनी में संतो के पीछे समाज चलता है, ऐसे संतो का शत-शत नमन जो समाज को नई दिशा दे रहे है तथा सत्य का मार्ग बता रहे है।

ऐसा क्या कह दिया मेघवंशी ने . . .

मेघवंशी ने सभा को संबोधित करते हुए समाज के अहसान फरामोश लोगों पर भी जमकर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग अहसानों को भूल गए है। समाज की सेवा करने का वादा कर चुनाव जीते और अब अमीर बन गए है, अब उन्हें समाज के गरीब लोग दिखाई ही नहीं दे रहे है। मेघवंशी ने अपने संबोधन में समाज की उपेक्षा कर रही जिला प्रमुख की जमकर खिंचाई की। मेघवंशी द्वारा बिना लाग लपेट दिए गए भाषण की चर्चा पूरी रात रही। मेघवंशी के भाषण के कुछ ही देर बाद जिला प्रमुख अपने साथ आई एक लड़की के साथ मंच से रवाना हो गई। समाज का एक भी व्यक्ति या महिला उसे गाड़ी तक छोड़ने के लिए भी उसके साथ नहीं गया।
संबोधित करते भंवर मेघवंशी और लोगों के बीच जिला प्रमुख (गोले में)
मेघवंशी ने कहा कि समाज की मेहरबानी से आजकल क्षेत्र में एक लालबत्ती वाली गाड़ी घूमती है। लालबत्ती में बैठने वाले लोग समाज के लोगों द्वारा की गई मेहरबानियों को भूल गए है। उन्होंने कहा कि लालबत्ती वाली गाड़ी में बैठने वाले कहते है कि वे अपनी योग्यता से बने है, मतलब वे योग्य थे इसलिए उन्हें लालबत्ती मिली। मैं पूछता हूं कि उन्होंने लालबत्ती प्राप्त करने के लिए कौनसी परीक्षा दी? कौनसे प्रमाण पत्रों के कारण उन्हें लालबत्ती दी गई? मेघवंशी ने कहा कि ऐेसे लोग भ्रम में है, वो जिस पद पर आज है वो किसी योग्यता के दम पर नहीं बल्कि समाज की महेरबानी की बदौलत है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को लालबत्ती में बैठने का मौका मिल गया है, उन्हें अगली बार फिर से लालबत्ती में बैठने का अवसर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि देखिए सरकार भी बीपीएल परिवार को लाभ देने के बाद दुबारा लाभ नहीं देती है, ठीक उसी प्रकार हमें भी लालबत्ती में बैठने का मौका एक ही बार देना है।
मेघवंशी ने आगामी चुनाव में अपनी समाज के प्रतिनिधि को लालबत्ती दिलवाने के लिए कमर कस लेने का आव्हान करते हुए कहा कि पिछले चुनावों में समाज को एक लालबत्ती दिलवाने के लिए शिवपुर गांव से ही अभियान आरंभ किया गया था और सफलता हासिल की थी। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में राजस्थान भर में समाज के लोगों को लालबत्ती की गाडि़यां मिले। उन्होंने समाज के लोगों से आव्हान् किया कि वे धूर्त लोगों को पहचान कर बाहर करे और सुझबुझ से ईमानदार लोगों का चुनाव कर उनके हाथों समाज का प्रतिनिधित्व सौंपे।

कैसे मिले केरोसीन, वह तो बसों के डीजल टेंक में भरा है!


  • लखन सालवी
राशन वितरण किसके लिए है ? ग्रामीणों के लिए या मोटर मालिकों के लिए ? राजस्थान के कोशीथल गांव की ग्राम सेवा सहकारी समिति के हालत देख तो ऐसा ही लगता है जैसे यहां केरोसीन आता ही इसलिए है कि मोटर मालिकों को वितरित किया जा सके। गांव का हरेक व्यक्ति जानता है कि केरोसीन कहां जा रहा, ग्रामीणों के घरों में या बसों के टेंको में! राशन की दूकानें हो या ग्राम सेवा सहकारी समितियां अधिकतर पर केरोसीन, खाद, गेहूं व चावल की कालाबाजारी बरसों से जारी है।
कोशीथल गांव की ग्राम सेवा सहकारी समिति में तो अमूमन केरोसीन का टेंकर रात में ही आता है। आधी रात में राजनीतिक लोगों से जुड़े चमचे केरोसीन को बड़े-बड़े ड्रमों में भरकर ट्रेक्टर में लोड कर ले जाते है। कई बार ग्रामीण देख चुके है और प्रशासन को अवगत करा चुके है। प्रशासनिक अधिकारी कार्यवाही करने आते है और अपने हिस्से का टुकड़ा मुंह में दबा कर दबे पांव चले जाते है। क्या कार्यवाही हुई इसकी भनक भी नही लगने देते है। शिकायतकर्ता सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं निकलवाने के लिए चक्कर लगाते रहता है। नतीजा . . . सिफर। सूचना के लिए दौड़ते रहो।
डेलाणा, कोशीथल, मौखुन्दा, खेमाणा, उम्मेदपुरा, चावण्डिया सहित सैकड़ों ऐसे गांव है जहां के लिए आ रहा केरोसीन कालाबाजारी के भेंट चढ़ रहा है। गंगापुर से आमेट, रानी-फालना चलने वाली किसी भी बस (निजी ट्रावेल्स) के डीजल टेंक को खोलकर देख लिजिए। उनमें केरोसीन भरा मिलेगा। कोशीथल गांव के दो-तीन बस मालिक तो सुबह होते ही केरोसीन की जुगत में ड्रम लेकर दौड़ने लगते है और कुछेक गांव में घरों से राशन कार्ड इक्कट्ठे करते हुए मिल जाएंगे। 5-10 रुपए के प्रलोभन पर राशन कार्ड इक्कट्ठे कर वो ग्राम सेवा सहकारी समिति से केरोसीन ले लेते है। उससे उनकी बसें सड़कों पर दौड़ लेती है ग्राम सेवा सहकारी समिति केरोसीन की अगली खेप आने तक।
आए दिन समाचार आते रहते है कि ‘‘केरोसीन नहीं मिल रहा है, केरोसीन के लिए लम्बी कतारें लगी है।’’ बसें केरोसीन से चल रही है, केरोसीन राशन डीलरों व ग्राम सेवा सहकारी समितियों से कालाबाजारी के मार्फत लाया जा सकता है। अब बताइये आमजन को कैसे मिलेगा पूरा केरोसीन? इस सच्चाई को सब जानते है, लेकिन आवाजें किसी ना किसी बोझ तले दबी है, प्रशासनिक अधिकारियों को कालाबाजारी की किस्तें समय पर मिल जाती है तो वो क्यों किस्तों को नकारेंगे?

गुरू बिन कैसे ज्ञान मिले रे ?


  • लखन सालवी
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कोशीथल गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं पेशोपेश में है कि करे तो क्या करे? इस विद्यालय की उच्च माध्यमिक कक्षाओं में प्रवेश ले चुके छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए अध्यापक ही नहीं है। व्याख्याताओं के 5 पद है, जो रिक्त है।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में उच्च माध्यमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए भूगोल, राजनीतिक विज्ञान, हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी साहित्य व संस्कृत जैसे विषय है। लेकिन इन विषयों को पढ़ाने के लिए व्याख्याता नही है। कुल 5 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत है लेकिन एक भी विशय का व्याख्याता नही है। अन्य कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के लिए द्वितीय श्रेणी के 4 पदों में से 2 पद रिक्त है। संस्थाप्रधान ने बताया कि विद्यालय में कुल 18 पद है जिनमें से 10 पद रिक्त है।

अब कैसे पढ़ेगी बेटियां और कैसे तरेगी पीढि़यां

‘‘बेटी पढ़े, पीढ़ी तरे’’ यह नारा जगह जगह सुनने और दीवारों पर छपा हुआ देखने को मिलता है। सरकार ने नारा तो जारी कर दिया लेकिन उसे मूर्त रूप देने के प्रयास नहीं किए। सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र के इस गांव की बेटियां पढ़ना तो चाहती है, लेकिन उन्हें गुरू ही नहीं है तो वो ज्ञान कैसे प्राप्त करेंगी?
विद्यालय में गत वर्ष 415 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया था, जिन में 350 लड़के तथा 65 लड़कियां थी। इस विद्यालय में लड़कियों को केवल कक्षा-11 व 12वीं में ही प्रवेश दिया जाता है। वर्तमान में विद्यालय में प्रवेश का दौर चल रहा है। छात्र-छात्राओं की संख्या इस वर्ष और बढ़ सकती है। सत्र आरंभ हुए एक हते से अधिक समय हो गया है। लेकिन अभी तक कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पाई है। बिना गुरू के बेटिया कैसे पढ़ेगी और क्या आने वाली पीढ़ी तिर पाएंगी। ये सबसे बड़ा सवाल है।

गुरूओं की गिरती जा रही है संख्या

संस्था प्रधान ने बताया कि विद्यालय में पहले द्वितीय श्रेणी के 5 पद थे, जिनमें से एक पद कम कर दिया गया है। 5 व्याख्याता थे, लेकिन आज एक भी व्याख्याता नहीं है। तृतीय श्रेणी के 2 पद में से एक पद कम कर दिया गया है। लायब्रेरियन व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद भी रिक्त हो गया है।
संस्थाप्रधान पारसमल जीनगर ने बताया कि लायब्रेरियन का हाल ही में स्थानान्तरण हो गया है ऐसे में लायबे्ररी को संभालने वाला कोई नहीं है। पुस्तकें वितरित करने की जिम्मेदारी भी अध्यापकों को दी गई है वो किताबें वितरित करने एवं छात्रवृत्ति वितरित करने के कामों में लगे हुए है। ऐसे में पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं करवा पा रहे है।
यहां छात्रावास भी है, छात्रावास में अन्य गांवों के छात्रों ने प्रवेश लिया है। फिलहाल सभी छात्र-छात्राएं विद्यालय में आ रहे है और स्वप्रेरणा से कुछ सीख रहे है।
वहीं ग्रामीणों का कहना है 12 किलोमीटर के दायरे में यह एक मात्र उच्च माध्यमिक विद्यालय है। पिछले दो साल से इस विद्यालय में अध्यापकों की कमी है। पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं करवाई जा रही है। ऐसे में हमें अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए अन्यत्र भेजना पड़ रहा है।
गांव के वरिष्ठ जन भंवर लाल टांक ने बताया कि छोटे व बड़े सभी सरकारी विद्यालयों की हालत कमोबेश ऐसी ही है। अध्यापकों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा पर फर्क पड़ रहा है। सरकारी विद्यालयों की बिगड़ती दशा को देखते हुए लोगों का रूझान निजी विद्यालयों की तरफ बढ़ रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर आयोजित


भीलवाड़ा। समाजसेवी स्वर्गीय श्री हरलाल जी जोगचंद की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी स्मृति में अखिल भारतीय मेघवंशी (सालवी) महासभा सेवा संस्थान आसीन्द की ओर से क्षेत्र के गांव रघुनाथपुरा में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।

संस्थान के अध्यक्ष बहादुर मेघवंशी ने बताया कि रघुनाथपुरा स्थित बाबा रामदेव कृषि फार्म पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 40 यूनिट रक्तदान किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के प्रदेश महासचिव एडवोकेट दौलतराज नागौड़ा, प्रदेश सह सचिव रतननाथ कालबेलिया, सांवरलाल मेघवंशी, धर्मीचंद मेघवंशी, नगर पालिका आसीन्द के पार्षद रमेश बलाई, सीताराम मेघवंशी सहित 40 लोगों ने रक्तदान किया। स्वर्गीय हरलाल जी जोगचंद के पुत्र धनराज जोगचंद ने भी रक्तदान किया।
 
उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय श्री हरलाल जी जोगचंद रघुनाथपुरा गांव के निवासी थे तथा उन्होंने समाज में व्याप्त कुरितियों को मिटाने के लिए सफल कार्य किए थे। उन्होंने सामूहिक विवाह सम्मेलनों के आयोजन करवाए तथा गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए भी निरन्तर प्रयासरत थे। संस्थान से जुड़े लोगों ने पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी समाधी स्थल पर माल्यार्पण कर श्रद्धाजंली अर्पित की। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने कहा कि रक्तदान पूण्य कर्म है, क्योंकि समाज के कई गरीब लोगों को ईलाज के दौरान अस्पतालों में खून नहीं मिल पाता है। पैसों के अभाव में खून न मिलने पर जान तक गंवानी पड़ती है। इस प्रकार के शिविरों का आयोजन कर ब्लड बैंक में खून जमा करवाने जाने से जरूरतमंद लोगों को मदद की जा सकती है। उन्होंने आव्हान् किया कि समाज के लोग अधिकाधिक संख्या में रक्ततान करें ताकि कोई भी रक्त की कमी से न मर सके। रक्तदान शिविर में रामस्नेही चिकित्सालय की टीम ने भाग लिया।

Sunday, July 15, 2012

सम्मिलित रूप से करें सुरक्षा सामलात की - बारेठ


  • लखन सालवी
भीलवाड़ा. गांवों में सामलाती भूमियों की सुरक्षा व उनका विकास साझे प्रयासों से ही संभव है। गांवों में कुंआ, तालाब, बावडी, जमीनें, मंदिर सभी सामलाती होते है और इन्हें पवित्र माना जाता है लेकिन समय के साथ-साथ सामुदायिकता समाप्त होती जा रही है। ‘एक सब के लिए, सब एक के लिए’ जैसे नारे अब सुनाई नही पड़ रहे है। उन्होंने कहा कि सामुलात के बीच बढ़ रही दूरी को पाटने के लिए मीडिया अह्म भूमिका निभा सकता है और वो सामुदायिकता को बढ़ावा दे सकता है। उपरोक्त विचार व्यक्त किए बीबीसी हिन्दी के वरिष्ठ संवाददाता नारायण बारेठ ने।
वे फाउन्डेशन फॅार इकोलॅाजिकल सिक्योरिटी द्वारा भीलवाड़ा के एक होटल में सामलात संसाधनों के प्रति जागृति विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला के आरंभ में जिले के थाणा गांव की सामलात भूमि के लिए किए गए संघर्ष एवं वहां की सामलात भूमि पर किए गए विकास कार्यों पर बनी डॅाक्यूमेंट्री फिल्म को प्रदर्शित किया गया।
एफईएस के रीजनल टीम लीडर बी.के. शर्मा ने मीडिया कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया कि सरकार ने सामलाती भूमियों को बचाने एवं उनके सुरक्षा तथा विकास के लिए नीतियां बनाई है। नीतियों के अनुरूप  एफईएस द्वारा राज्य के 7 जिलों में कार्य किया जा रहा है। सामलाती भूमि में लगातार हो रही कमी पर चिंता प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी भूमियों में पिछले 20 वर्षों में 20 प्रतिशत की कमी आई है, अगर ऐसा ही चलता रहा तो सामलाती भूमि एक दिन गरीबों के हाथ से निकल जाएगी। उनका कहना था कि सामलाती जमीनों से हर ग्रामीण को लाभ मिलता है और सबसे गरीब व्यक्ति के लिए तो यह वरदान है। उनका परिवार ही सामलाती जमीन पर होने वाली उपज पर निर्भर करता है।
हिन्दुस्तान टाइम्स जयपुर के पूर्व सम्पादक व विकासशील समाज अध्ययनपीठ के सीनियर फैलो वरिष्ठ पत्रकार विपुल मुद्गल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया के सकारात्मक एवं सुझावात्मक लेखन से बड़े बदलाव आ सकते है। महानरेगा के तहत विभिन्न प्रकार के कार्य करवाने के सुझाव दिए जा सकते हैै। हस्तशिल्प जैसे कार्य महानरेगा के तहत करवाए जा सकते है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायते अपने अधिकारों एवं संसाधनों का उपयोग कर ग्राम पंचायतों को सशक्त बना सकती है। उन्होंने ग्रामीण विकास की योजनाएं ग्राम सभा के जरिये बनाये जाने पर भी जोर दिया।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में सामलात संसाधनों को बचाने में मीडिया की भूमिका विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में वैकल्पिक मीडिया की ओर से भंवर मेघवंशी, विविधा फीचर्स के सम्पादक बाबू लाल नागा, राजस्थान पत्रिका के उप संपादक निलेश कांठेड तथा दैनिक भास्कर के नवीन जोशी ने अपने विचार रखे। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवारी ने की।
पत्रिका के निलेश कांठेड ने कहा कि मीडिया सक्रियता से कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रशासन की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया द्वारा उठाए जाने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रशासन कार्यवाही क्यों नही करता है ? दैनिक भास्कर के संवाद प्रतिनिधि नवीन जोशी ने भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त सरपंचों के विरूद्ध प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नही करने के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि प्रशासन वैध मामलों में भी कार्यवाही नही करता है। उन्होंने बताया कि गंगापुर कस्बे के तालाब की जमीन (सामलाती भूमि) में कॅालोनी बन गई है, थाना भी तालाब की जमीन में बना दिया है। खबर प्रकाशित होने के बावजूद भी अभी तक प्रशासन ने कोई ठोस कार्यवाही आरंभ नहीं की है।
सत्र के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवारी ने कहा कि मीडिया की साख बरकरार है, प्रशासन कार्यवाही करता भी है। किसी मुद्दे पर प्रशासन कार्यवाही नही करता है तो पत्रकारों को हौंसला नही खोना चाहिए। कई मुद्दों पर कार्यवाही नही हो पाती है लेकिन पत्रकारों को अपना दायित्व निभाना चाहिए। उन्होंने सभी को सुझाव दिया कि सामलात भूमि की सुरक्षा व उसके विकास में सामलाती प्रयास करें।
वैकल्पिक मीडिया की ओर से खबरकोश डॅाटकॅाम के सम्पादक भंवर मेघवंशी ने कहा कि गांवों में सामलाती भूमियों की सुरक्षा की हालात बेहद खराब है। गांवों में सामलाती जमीनों को दबंगों ने अपने कब्जे में कर रखा है। उन्होंने सुझाव दिया एफईएस संस्था को पत्रकारों को या अन्य सामाजिक सरोकारों से जुड़े युवाओं का चयन कर उन्हें सामलात विषय पर मीडिया फैलोशिप देनी चाहिए ताकि वो सामलात भूमियों की सुरक्षा एवं उन पर हुए विकास पर लेखन कार्य कर सके। उनका लेखन देशभर में पहुंचेगा और उससे लोग जागरूक होकर इस दिशा में सोचना एवं कार्य करना आरंभ करेंगे।
कार्यक्रम का संचालन एफईएस के शांतनु सिंहा रॅाय ने किया। कार्यशाला को जोधपुर से आए राजस्थान उच्च न्यायालय के एडवोकेट एवं सामलाती भूमि के संदर्भ में कई पीआईएल दर्ज करवा चुके संजीव पुरोहित ने भी संबोधित किया। इस मौके पर जिले के विभिन्न हिस्सों से आये मीडियाकर्मी, स्वैच्छिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा अधिवक्ता व मीडिया स्टूडेन्ट्स भी मौजूद थे।

आखिर कब तक निकलवाते रहेंगे कॅाल डिटेल?


लखन सालवी
रायपुर के पास स्थित घाटी में बसे कालबेलिया परिवार की बेटी सविता (11 वर्ष) की हत्या हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है। जिस जगह पर सविता की लाश मिली, पुलिस की खोजी कुटीपी वहां से सूघंते-सूघंते कालबेलिया बस्ती में ही एक अन्य कालबेलिया परिवार के घर में गई, वहां उसने कपड़ों को मुंह में पकड़ा। कुटीपी की इस हरकत से सभी का शक उस परिवार के लोगों पर ही जा रहा है। जानकारी के अनुसार वो घर रायपुर पुलिस के एक कथित मुखबिर का है।
मृतका सविता का बचपन का फोटो
उल्लेखनीय है कि सूरमनाथ की बेटी सविता कालबेलिया (9 वर्ष) 21 अप्रेल को बकरिया चराने के लिए गई थी। उस दिन दोपहर का खाना खाने के लिए वह घर पर भी आई थी, खाना खाने के बाद वह वापस बकरियां चराने चली गई उसके बाद वह वापस घर नहीं लौटी। रात में परिवारजनों ने खूब तलाशा लेकिन वो नहीं मिली। दूसरे दिन सुबह सूरमनाथ अपनी छोटी बेटी कंचन कालबेलिया के साथ सविता को ढ़ूंढने के लिए गए। गांव के पास ही स्थित खंडहरों में एक कमरें में कंचन को सविता सोती हुई दिखाई दी, पास जाकर देखा तो सविता की पत्थरों से कुचली हुई लाश पड़ी थी। सविता की लाश को देखकर कंचन घबरा गई और उसने रोते चिल्लाते हुए अपने पिताजी को बुलाया। लाश देखकर वे दोनों जोर-जोर से रोने लगे। उनके रोने की आवाज सुनकर आस-पास के लोग वहां जमा हो गए। वहां से सूरमनाथ अन्य लोगों के साथ रायपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए रवाना हो गया। रास्ते में पप्पूनाथ नाम के व्यक्ति ने थाने में फोन कर वारदात की सूचना दे दी। तुरन्त मौके पर पुलिस पहुंच गई।
घटनास्थल पर आए पुलिस उपाधीक्षक सत्यनारायण कनौजिया व रायपुर थानाधिकारी ने लोगों से पूछताछ कर जानकारी ली। इसी दिन पुलिस की डॅाग स्क्वायर्ड ‘‘कुटीपी’ को लाया गया और उसे घटनास्थल पर छोड़ा गया। कुटीपी घटनास्थल से पास ही स्थित कालबेलिया बस्ती के डेरों की तरफ गई वहां वो शंभूनाथ कालबेलिया के घर में गई। कुटीपी के डेरों की ओर जाने व एक घर में घूसकर कपड़ों को सूंघने से सभी को यह तो साफ-साफ समझ आ गया कि हत्या करने वाला घटनास्थल से उक्त घर में गया था।
उस दिन के बाद से आज तक पुलिस का एक ही जवाब है कि कॅाल डिटेल निकलवाई जा रही है। समझ नहीं आ रहा है पुलिस कितने लोगों की कॅाल डिटेल निकाल रही है? आरम्भ में शक के दायरे में आ रहे लोगों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ करने की बजाए पुलिस ने मृतका के परिवार जनों को थाने में बुलाकर उन्हें डराया धमकाया। मृतका की बड़ी बहिन कंचन कालबेलिया (11 वर्ष) को थाने में प्रताडि़त किया गया। उसे कहा गया कि वो स्वीकार कर ले कि सविता की हत्या उसने व उसके पिता ने ही की है। कंचन ने उनकी बात नहीं मानी तो पुलिस ने जमकर अपना चरित्र दिखाया। उसे ड्रग्स दिया, पट्टों से उसकी पिटाई की, पैरों से रोंदा। उससे कहा कि तू और तेरी मां वेश्यावृति करती हो और पूछा कि तेरे बाप ने तेरे साथ कितनी बार संभोग किया ?
समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने इस मामले से पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया और पुलिस थाना रायपुर के थानाधिकारी के खिलाफ शिकायत की। पुलिस अधीक्षक से जांच अधिकारी बदल दिया और जांच पुलिस उपाधीक्षक (वृत्त गंगापुर) को सौपीं। जांच अधिकारी बदले हुए करीबन डेढ़ माह हो चुका है, लेकिन पुलिस अभी तक मामले से पर्दा नहीं हटा पाई है। हत्यारों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस उपाधीक्षक ने तो बातचीत में यहां तक कह दिया कि कालबेलिया बस्ती की लड़कियां वैश्यावृत्ति में लिप्त है। कन्नौजिया मामले के सामने आने के बाद से एक ही बात दोहरा रहे है कि ‘‘डॅाग डिटेल निकलवाई जा रही है।’’ कालबेलिया समुदाय के लोग अचंभित है कि आखिर इतनी कितनी डॅाग डिटेल निकलवाई जा रही है। उनका आरोप है कि सत्यनारायण कन्नौजिया डॅाग डिटेल निकालने के नाम पर जांच को ठंडे बस्ते में डाल रहे है। जबकि आरोपी खुलेआम घूम रहे है।

आजाद कब आजाद होंगे ?


  • लखन सालवी
यहां सूर्योदय के साथ ही स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति के आगे पर्दा ऐसे डलता है जैसे किसी रंगमंच पर कार्यक्रम के समाप्त होते ही पर्दा डला हो। भोर के साथ ही आजाद की मूर्ति पर्दो के पीछे ढ़क दी जाती है और देर रात वापस पर्दे हटा लिए जाते है, जब जगत सो चुका होता है।
आजाद चौक . . . भीलवाड़ा शहर के मध्य सार्वजनिक स्थान है। यहां चारदीवारी युक्त एक मैदान है और एक सभा भवन भी है। आए दिन इस मैदान में भजन संध्या, धार्मिक कथाओं, मेलों व सभाओं का आयोजन होता रहता है। इसके मुख्यद्वार पर चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति लगी हुई है, लेकिन आजकल यहां कुछ व्यापारियों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। अतिक्रमण इस कदर किया है कि आजाद की मूर्ति तो दिखाई ही नहीं देती है। सुबह होते ही मूर्ति के आगे कपड़े की अस्थाई दूकानें बना दी जाती है उन दूकानों में बैग, जूते इत्यादि का व्यापार किया जाता है और अंधेरा होने के साथ ही कपड़े की दूकानें समेट ली जाती है। हालात ऐसे है कि सूर्योदय के साथ ही किसी रंगमंच पर कार्यक्रम के पूरे हो जाने पर डलने वाले पर्दे की तरह आजाद की मूर्ति के आगे पर्दा डल जाता है। जब सारा शहर सो चुका होता है तब उसके आगे से पर्दा हटता है। उस समय मूर्ति को देखने वाला कोई नही होता है।
स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशप्रेम दिखाने वालों को भी आजाद की फिक्र नहीं है। अतिक्रमणकारियों के हौसेलें इतने बुलन्द है कि अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। एक अस्थाई दूकान वाले ने कुछ माह पूर्व तक करीबन 8 फीट जगह पर अतिक्रमण किया था अब उसने करीब 40 फीट 25 फीट लम्बी व 8 फीट चौड़ी अस्थाई दूकान बना ली है। इस दूकान में चार काउन्टर है। एक पर बैग, दूसरे पर जूते, तीसरे पर श्रृंगार सामग्री तो चौथे पर अण्डर गारमेन्ट बेचे जा रहे है।
आजाद चौक के पास ही है सूचना केंद्र चौराहा। जो आजकल चौपाटी जैसा बन गया है, लाजमी है कि शाम होते ही शहरवासी खरीददारी, खाने-पीने व मनोरजंन के लिए यहां आते है। इन दिनों आम का सीजन है तो यहां आम के ठेले वालों की भरमार है। वैसे तो 3-4 ट्रेफिक पुलिस कान्सटेबल यहां नियुक्त है लेकिन ठेले वालों के आगे उनकी क्या बिसात कि वो मार्ग अवरूद्ध होने से रोक ले। वो यदा कदा अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर ठेले वालों को वहां से रड़का देते है। लेकिन ठेले वाले वापस अपना कब्जा जमा लेते है।
खैर, सूचना केंद्र चौराहे पर भीड़ चलती रहती है। कुछ क्षण के लिए मार्ग बाधित होता है और फिर चल पड़ता है लेकिन आजाद चौक पर तो बैग और जूतों की अस्थाई दूकान वालों ने अतिक्रमण कर आजाद भवन में जाने का मार्ग पूर्ण बाधित कर दिया है। लोगों का कहना है कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कई बार शिकायतें की लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। अब तो लोगों ने शिकायतें करना ही बंद कर दिया। कुछ लोगों का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय नेताओं से जुड़े लोग अतिक्रमण करवाने में मदद कर रहे है और वो शिकायतों पर कार्यवाही नहीं होने देते है।
आजाद मैदान में नाट्क के आयोजन होते रहते है, वहां कार्यक्रम के दौरान पर्दे डलते है और उठते है। हजारों की संख्या में दर्शक देखते है। आजादी की तहरीक के महानायक आजाद की मूर्ति के आगे गिरते व उठते पर्दे को सिवाए आजाद की मूर्ति के अलावा कोई नहीं देख रहा है। आजाद हिन्दूस्तान के आजाद नागरिकों की करतूत को देखकर आजाद की आत्मा भी आंसू बहा रही होगी। बहरहाल आजाद हो इंतजार है कि वो इस अतिक्रमण से आजाद हो !

मैं चाहे ये करूं, चाहे वो करूं. . . मेरी मर्जी !


हाल - ए - नरेगा

लखन सालवी
भीलवाड़ा जिले में महानरेगा के तहत स्वीकृत हुए केटेगरी-4 के कार्य पूर्ण नहीं हो पाए है। 14,663 व्यक्तिगत कार्य स्वीकृत हुए थे। जिनमें से केवल 5,825 पर ही कार्य पूर्ण हुए है। जून माह तक 39 प्रतिशत कार्यों के लिए मस्टरोल जारी हो पाए है। शेष अधर झूल में है। प्रशासन का कहना है कि मजदूर नहीं मिल रहे है। ये प्रशासन का अपनी नाकामयाबी को छिपाने के लिए दिया गया बयान है।
काम पूरे नहीं हो पाने में मजदूरों की कमी को सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। जबकि स्थिति विपरीत है। मजदूर काम की मांग कर रहे है लेकिन उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है। कही मजदूरों को आवेदन की रसीद नहीं दी जा रही है तो कही उन्हें काम का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। जिले की सहाड़ा पंचायत समिति के उल्लाई गांव के लोगों ने महानरेगा में काम के लिए आवेदन किए। वो बताए अनुसार महानरेगा कार्यस्थल पर पहुंच गए लेकिन वहां पता चला कि उनके नाम मस्टरोल में थे ही नहीं। उनके लिए मस्टरोल ही जारी नहीं किए गए। अधिकतर महिला मजदूर थी वो धूप में पैदल कार्यस्थल पर गई और अगले दिन काम मिल जाने के आश्वासन पर पुनः घर को लौट आई।
रायपुर पंचायत समिति के रामा गांव में तो मजदूरों के नाम ही पंचायत समिति के कम्प्यूटरों से डिलीट कर दिए गए है। उन मजदूरों को महानरेगा में काम नहीं दिया जा रहा है। पूर्व सरपंच नंगजीराम सालवी ने पंचायत समिति के अधिकारियों व कर्मचारियों से कई बार शिकायत की लेकिन मजदूरों के नाम वापस नहीं जोड़े गए। नगंजीराम सालवी ने बताया कि जिन मजदूरों के नाम डिलीट हुए है उनमें अधिकतर अनुसूचित जनजाति के लोग हैै, जिनकी आजीविका महानरेगा ही है। काम नहीं मिलने से उन्हें भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने इस मामले से मजदूर किसान शक्ति संगठन (एमकेएसएस) के कार्यकर्ताओं को अवगत कराया। एमकेएसएस से जुड़े कमल टांक ने बताया कि विभाग के कार्यक्रम निदेशक से वे मिले, उन्होंने आश्वासन दिया कि वो जल्दी ही मजदूरों के नाम पुनः जुड़वायेंगे। बहरहाल रामा गांव के अनुसूचित जनजाति के मजदूरों को करीबन दो माह से काम नहीं मिला है, उन्हें परेशानियांे का सामना करना पड़ रहा है।
महुआ खुर्द में गांव में तो कुछ सर्वण जातियों के लोगों को तो केटेगरी-4 कांटे की तरह चुभ रहा है। वो इस कांटे को निकाल फैंकना चाह रहे है। सरकार भले ही महुआ खुर्द के अनुसूचित जाति एवं जनजाति व बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता देते हुए उनके खेतों में केटेगरी-4 के माध्यम से विकास करवाना चाह रही है, लेकिन यहां की कथित ऊंची जातियों के लोगों को यह मंजूर नहीं है। वो अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों के खेतों में महानरेगा के तहत काम करने नही जा रहे है, यही नही वो अन्य मजदूरों को भी काम पर नहीं जाने के लिए भड़का रहे है। एससी/एसटी के खेतों पर कार्य करने के लिए मस्टररोल जारी होने पर वो कार्य का ही बहिष्कार कर रहे है।
जहाजपुर पंचायत समिति के पण्डेर ग्राम पंचायत की सहायक सचिव तो पंचायत में अपनी मनमर्जी चला रही है। वो न तो मजदूरों के आवेदन प्रपत्र-6 भरती है और ना ही उन्हें पावती रसीद देती है। मजदूर आवेदन की रसीद मांगते है तो कहती है कि - ‘‘रसीद दूं या न दूं मेरी मर्जी’’ तुम्हें तो काम मिल जाएगा।
25 जून को कुछ महिला मजदूर राजीव गांधी सेवा केंद्र में महानरेगा के तहत काम के लिए आवेदन करने गई। महिला ने रोजगार सहायक रूकमणी लखारा को आवेदन पत्र भरने को कहा लेकिन रूकमणी ने आवेदन पत्र भरने से इंकार कर दिया। महिला मजदूरों ने हंगामा किया। वहां मौजूद कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं ने पंचायत समिति के विकास अधिकारी को अवगत कराया। विकास अधिकारी कन्हैया लाल वर्मा ने सहायक सचिव को फोन कर आवेदन पत्र भरने के निर्देश दिए। सहायक सचिव रूकमणी लखारा ने विकास अधिकारी के निर्देश की पालना नही करते हुए एक कागज पर सभी मजदूरों के नाम नोट कर उन्हें जाने को कह दिया। महिलाओं ने पावती रसीद की मांग करते हुए फिर से हंगामा किया। महिला मजदूरों एवं सहायक सचिव के बीच काफी देर तक बहस होती रही। वहां मौजूद सरपंच पति ने महिला मजदूरों को शांत कर घर भेजा।
एक रोजगार सहायक की इस प्रकार की कर्तव्य विमुखता व अधिकारी के निर्देश को हवा कर देने के रैवये से साफ जाहिर है कि ग्राम पंचायतों में महानरेगा श्रमिकों के अधिकारों का हृास किया जा रहा है। फिर ऐसे रैवये से गरीब मजदूरों को रोजगार गारण्टी योजना से मोह भंग नहीं होगा तो क्या होगा ?
राजनीतिक लोगों की भी ये मंशा नहीं है कि केटेगरी-4 के काम हो। कार्य संपादित करवाने वाली स्थानीय एजेन्सी ग्राम पंचायते भी केटेगरी-4 के कामों से मुंह फेरे बैठी है। सरपंचों को केटेगरी-4 के काम करवाने में कोई खास रूचि नहीं है। उन्हें रूचि है पक्के काम करवाने में। सरकार अगर पक्के कामों की स्वीकृति दे दे फिर तो उन्हें मजदूर भी मिल जाएंगे और वो कार्य भी नियत तिथि पूर्व ही पूर्ण भी करवा देंगे। प्रशासनिक अधिकारी भी बिना कमीशन के कार्यों में कोई खास रूचि नहीं लेते। ऐसी स्थिति में केटेगरी-4 के काम पूरे हो तो कैसे ?
प्रशासन व सरकार रोजगार गारण्टी योजना के नाम पर कितना ही भुनाने की कोशीश करे लेकिन हकीकत तो यही है कि इस प्रकार की घटनाओं से मजदूरों का महानरेगा के प्रति मोह निरन्तर कम होता जा रहा है।

पद बचाने के लिए कर दी कन्या भ्रूण हत्या !!


सरंपच की जघन्य करतूत!

बनेड़ा पंचायत समिति की महुआ खुर्द ग्राम पंचायत के सरपंच जगदीश भील ने अपनी सरपंचाई बचाने के चक्कर में 5 माह का गर्भ गिरवा दिया, जिसकी शिकायत उसके पंचायत क्षेत्र के निवासी रतनलाल ने जिला कलक्टर को कर दी तथा दस्तावेजी सबूत पेश कर कन्या भ्रूण  हत्या करवाने के आरोपी सरपंच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसके खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
यह अत्यंत दुःखद बात है कि एक तरफ सरकार, मीडिया, पंचायतराज संस्थाएं, स्वैच्छिक संगठन और पूरा समाज गिरते लिंगानुपात से चिंतित है तथा कन्या भ्रूण  हत्या के विरुद्ध देशव्यापी अभियान छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर पंचायत राज संस्थाओं के जिम्मेदार जन प्रतिनिधि जो कि तृणमूल स्तर के लोकतंत्र की केंद्रीय इकाई ग्रामसभा के कर्णधार है, वे स्वयं ही भ्रूण  हत्या में शामिल होकर ऐसी करतूतें कर रहे है कि सरकार और समाज के तमाम प्रयास व्यर्थ साबित हो रहे है।
जिला कलक्टर भीलवाड़ा औंकार सिंह को दिए ज्ञापन में ग्रामीण रतनलाल ने बताया कि जगदीश भील की पत्नी सजना भील को 5 माह का गर्भ था, बाल विकास परियोजना अधिकारी बनेड़ा के गर्भवती महिला रजिस्टर में सरपंच की पत्नी सजना भील का नाम ‘‘गर्भवती और धात्री महिलाओं’’ के रिकॅार्ड  में दर्ज है तथा 21 मार्च से 20 अप्रेल 2012 की अवधि में उसे 3 माह की गर्भवती होना दर्शाया गया है, 21 अप्रेल से 20 मई की अवधि में सरपंच पत्नी सजना भील को 4 माह का गर्भ था, 21 मई से 20 जून 2012 की अवधि में 5 माह का गर्भ होने का उल्लेख है मगर अचानक 14 जून 2012 को सरपंच से इस रिकॅार्ड में छेड़छाड़ करवा कर गर्भवती महिला सजना भील पत्नी जगदीश भील पर लाइन फिरवा दी और नाम हटवा दिया।
ग्रामीण रतनलाल के मुताबिक इसी दिन सरपंच अपनी पत्नी को लेकर एक जीएनएम के जरिए भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल पहुंचा तथा लिंग परीक्षण करवाया, जिसमें उसे पता चला कि उसकी पत्नी की कोख में पल रहा जीव ‘बेटा’ नहीं होकर ‘बेटी’ है तो उसे लगा कि एक बेटी के लिए सरपंच का पद गंवाना ठीक नहीं है अगर बेटा होता तो ठीक होता, क्योंकि सरपंच के जो संतानें है, कहा जाता है उसमें कोई बेटा नहीं है, बेटियां है तथा एक बच्चा है जो किन्नर है! गर्भ के भ्रूण  के लिंग परीक्षण से बेटी का पता चलने पर उसी दिन इस कन्या भ्रूण की हत्या सरपंच द्वारा करवा दी गई, इस बात की खबर ग्राम पंचायत क्षेत्र में फैलने से ग्रामीणों में काफी चर्चाएं खड़ी हो गई, चारों तरफ सरपंच जगदीश भील के कारनामों की ही चर्चा हो रही है।
अंततः एक ग्रामीण रतनलाल ने हिम्मत करके विकास अधिकारी बनेड़ा, उपखंड मजिस्टेªट बनेड़ा, सीईओ जिला परिषद भीलवाड़ा, जिला कलक्टर, संभागीय आयुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन तथा गर्भवती महिला का रजिस्टर की प्रतिलिपि भेजकर पूरे मामले की जांच किए जाने की मांग की है तथा कन्या भ्रूण  हत्या का जघन्य पाप करने के आरोपी सरपंच को बर्खास्त करने की मांग की है।

चुनौतियों से टकराती ये महिला सरपंच

लखन सालवी

महिला जनप्रतिनिधि ईमानदारी, पारदर्शिता और निडरता से राजनीति में भागीदारी निभा रही है। मुख्यतः गांव की राजनीति के बिगड़े स्वरूप को पुनः सुधार रही है। राजसमन्द जिले की कई ग्राम पंचायतों की महिला पंच सरपंच पंचायत का बेहतर संचालन कर रही है। अब इनके कार्यों को देखने से के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे है और इनके कार्यों से प्रेरणा लेकर जा रहे है। एक गीत की लाइनें है . . .


तोड़-तोड़ के बंधनों को देखो बहनें आती है,
ओ देखो लोगों देखो बहनें आती है,
आयेंगी, जुल्म मिटायेंगी, वो तो नया ज़माना लायेंगी  . . . 
वाकई में बहनें आगे आई है, वो जुल्म मिटा रही है और ज़माने को बदल रही है। वर्धनी पुरोहित, राखी पालीवाल, मांगी देवी जटिया, चुन्नी बाई, रूकमणी सालवी एवं गीता रेगर जैसी अनेक महिलाएं उदाहरण है। ये सभी सरपंच है और ग्राम पंचायतों का प्रतिनिधित्व कर रही है और गांवों की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभा रही है। इन्होंने उपरोक्त गीत के भावों को सार्थक कर दिखाया है।
जो ना कर सका कोई वो कर दिखाया वर्धनी पुरोहित ने
राजसमन्द जिले की ओड़ा ग्राम पंचायत की सरपंच वर्धनी पुरोहित ने हाल ही अवैध रेत के दोहन को रोकने की कार्यवाही की है। यूं तो बजरी का अवैध दोहन कई बरसों से चल रहा है। जब वर्धनी पुरोहित को पता चला कि अवैध बजरी दोहन को रूकवाना उसके अधिकार क्षेत्र में है तो उसने भारी विरोध और दबाव के बावूजद उसने अवैध दोहन रूकवा दिया और टोल वसूली शुरू करवा दी है। इससे ग्राम पंचायत की आय भी बढ़ी है। हाल ही उसने अवैध दोहन कर बजरी ले जा रहे ट्रेक्टर मालिकों के खिलाफ कार्यवाही करवाई है। उसकी शिकायत पर 17 ट्रेक्टर जब्त हुए है।
बालिका शिक्षा और ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी पर ध्यान दे रही है राखी
उम्र 24 साल, आंखों में तेज है और वो जुंजारू है। जब से समझदार हुई तब से एक सपना देखने लगी थी। सपना था गांव की राजनीति की बागडोर संभालने का, वह सरपंच बनाना चाहती थी। बताती है कि 1995 में उसके पिताजी सरपंच थे। सन् 2009 में खुद ने चुनाव लड़ने की सोची लेकिन पुरूष आरक्षित सीट होने के कारण सरपंच का चुनाव लड़ना सपना बन कर रह गया। लेकिन राजनीति में आने का मादा रखती थी सो उसने वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और निर्विरोध उपसरपंच निर्वाचित हुई। चुनाव जीतते ही कोई दर्जन भर चुनौतीपूर्ण कार्यों को सूची थी उसके पास।
यहां बात हो रही है खमनोर पंचायत समिति की उपली ओडण ग्राम पंचायत की उपसरपंच राखी पालीवाल की। वो बताती है कि गांव में गंदी राजनीति थी, अमीरों को गरीबी का तमगा दे दिया गया था जबकि गरीब परिवार बीपीएल में जोड़े जाने का इंतजार कर रहे थे। राखी ने तय कर लिया कि फर्जी बीपीएल परिवारों को बीपीएल सूची में से हटवाना है और वास्तविक गरीब लोगों को बीपीएल में जुड़वाना है। उसने यह कार्य करके दिखाया। फर्जी नामों को सूची से हटवाने के लिए वह जिला कलक्टर से मिली। तो कलक्टर ने अपात्र बीपीएल परिवारों की सूची एवं पात्र परिवारों की सूची उपखंड अधिकारी को देने के लिए कहा। 10 ऐसे परिवारों के नाम बीपीएल सूची मंे शामिल थे जो कि अमीर थे। राखी ने उन सभी अमीर परिवार वालों के नाम बीपीएल सूची से हटवाए और उतने ही गरीब परिवारों के नाम बीपीएल सूची में जुड़वाए।
राखी पालीवाल ने बालिका शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया। वो बाइक चलाती है, उसने गांव में घूमकर अपने स्तर पर अध्ययन किया तो पाया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की कई बालिकाएं शिक्षा से वंचित थी। तो उसने उन सभी बालिकाओं और उनके परिवार जनों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने का प्रयास किया, रैली निकाली। लगभग 35 बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने में कामयाब रही। राखी ने पहले माहौल तैयार किया, बालिकाओं से बात की। शिक्षा के प्रति उनकी रूचि को जाना। हालांकि पहले तो बालिकाओं के परिजन उन्हें पढ़ाने के लिए तैयार नही हुए। बालिकाओं का भी मानना था कि उनकी लड़कियां बड़ी हो गई है अब पहली, दूसरी कक्षा में पढ़ने के लिए जाएगी तो शर्म आएगी। लेकिन जब राखी ने उन्हें समझाया कि अब सरकार ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि अशिक्षित रह गए बच्चें उम्र के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश पा सकते है। इस बात की जानकारी अशिक्षित बालिकाओं व उनके परिजनों को नहीं थी। राखी ने हर एक वार्ड में जाकर बालिकाओं से बात की उन्हें शिक्षा का अधिकार कानून की जानकारी दी। परिणाम स्वरूप सैकड़ों अशिक्षित बालक-बालिकाएं शिक्षा से जुड़े।
राखी बताती है कि उप सरपंच बनने के बाद ग्राम पंचायत में जाकर अपने कत्र्तव्यों को निभाने को भी बड़ी चुनौती के रूप में ले रही थी। क्योंकि न तो पंचायतीराज की जानकारी थी और ना ही किन्हीं विकास योजनाओं की। यहां तक कि उप सरपंच के अधिकारों की जानकारी भी नहीं थी। उसने बताया कि क्षेत्र में कार्य कर रहे गैर सामाजिक संगठन ‘‘आस्था’’ एवं ‘‘जतन’’ के द्वारा समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेकर उसने पंचायतीराज को जाना एवं स्वयं के अधिकारों की जानकारी मिली। वो इन संस्थाओं को ही अपना गुरू मानती है।
वो बताती है कि उप सरपंच बनने के शुरूआती कुछ महिनों तक देखा कि ग्राम सभा में महिला वार्ड पंचों की व महिलाओं की उपस्थिति कम रहती थी। उसने ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में कार्य करना आरंभ किया। वह वार्डो में गई और महिलाओं तथा वार्ड पंचों को ग्राम सभा में भाग लेने को कहा। उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी दी और कोरम में उनकी भागीदारी की महत्ता के बारे में बताया। इतना कुछ करने के बावजूद भी जब ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ी तो राखी ने सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के सहयोग से 14 फरवरी 2012 को एक ग्राम सभा का आयोजन करवाया। इस ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए वो कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर गई और पीले चावल देकर ग्राम सभा में आमंत्रित किया। राखी का यह प्रयास सफल रहा। इस मेहनत का परिणाम यह रहा कि सभी वार्ड पंच महिलाएं ग्राम पंचायत में आई और अपने वार्ड के मुद्दे रखे। गांव की महिलाओं भी बढ़ चढ़कर ग्राम सभा में भाग लिया। अब राखी ने वार्ड पंच महिलाओं की टोली बना ली। वो उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ले जाती है। वे वार्ड पंच महिलाएं भी चेत रही है। वो महिलाओं को संगठित कर रही है और उन्हें रोजगार दिलवाने एवं विकास योजनाओं के लाभ दिलवाने के सतत प्रयासरत है।
बचपन से राखी को एक बात चुभती थी, वो देखती थी महिलाएं खुले में शौच करती थी। उपसरपंच बनने बाद शौचालय बनवाने की मांग प्रमुखता से की। वो महिलाओं को भी खुले में शौच न करने के लिए कहती। उससे कुछ हद तक फर्क पड़ा। लेकिन वो महिलाएं कहां जाए जिनके घरों में शौचालय नहीं थे। उसने शौचालय निर्माण के लिए ग्राम सभा में प्रस्ताव लिखवाए है तथा आजकल शौचालय निर्माण करवाने की जुगत में लगी है।
मुझे बताओं कि किस-किस ने कितने-कितने दिन काम किया ? 

गुंजोल ग्राम पंचायत की चुन्नी बाई ने राजीव गांधी सेवा केंद्र के निर्माण में ग्राम सचिव द्वारा की जा रही गड़बडि़यों को पकड़ लिया। केंद्र के निर्माण में प्रयुक्त हुए मस्टरोल में फर्जी हाजरियां भरी गई थी। जब सचिव मस्टरोल पर सरपंच के हस्ताक्षर करवाने आया तो सरपंच ने साफ कह दिया कि मैं हस्ताक्षर नहीं करूंगी। पहले मुझे बताओं कि किस-किस ने कितने-कितने दिन काम किया। ऐसे लोगों की हाजरियां भरी गई थी जो कभी काम पर आए है नहीं थे। फर्जी हाजरियों से लगभग 23000 रुपए का घोटाला ग्राम सेवक करता लेकिन ऐन वक्त पर चुन्नी बाई को जानकारी मिल जाने से उसने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। विकास अधिकारी ने भी चुन्नी बाई को हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया लेकिन वो टस की मस नहीं हुई और हस्ताक्षर नहीं किए। उसने 23000 रुपए घोटाल की भेंट चढ़ने से बचा लिए।
चुन्नी बाई कहती है कि सरपंच का चुनाव था, अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए आरक्षित सीट थी। तब तक दबंगों का राज रहा था ग्राम पंचायत पर तो कोई भी अनुसूचित जाति की महिला सरपंच का चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थी। मैं तो चुनाव लड़ने की सोच भी नहीं सकती थी। मुझे तो ग्राम पंचायत में क्या होता है इसकी जानकारी भी नहीं थी। चुनाव के ठीक 3 दिन पहले ही मुझे सरपंच बनाने की चर्चा चली। गांव के लोग हमारे घर आए और मुझे निर्विरोध सरपंच बनाने की बात कही। मैंने पहले तो मना कर दिया लेकिन ग्रामीणों एवं समुदाय के लोगों के आग्रह में मैं तैयार हो गई और निर्विरोध सरपंच चुनी गई।
बेबाकी से कर रही है गांव का विकास
राजसमन्द जिले की रेलमगरा पंचायत समिति की पछमता ग्राम पंचायत की सरपंच मांगी देवी ने कई दशकों से बिजली की बाट जोह रहे भील बस्ती व इंदिरा कॅालोनी के परिवारों को रोशन कर दिया है। वो बताती है कि गांव के सभी के घरों में बिजली थी लेकिन पास की भील बस्ती व इन्दिरा कॅालोनी में बसे परिवारों के घरों में अंधेरा था, वहां तक बिजली नहीं पहुंचाई गई थी। मैंने सरपंच बनते ही पहला काम उन बस्तियों में बिजली कनेक्शन करवाने का किया।
वो धमकियों के बावजूद दबंगों से कभी नहीं डरी। गांवों में दबंग लोग ग्राम पंचायत की भूमि पर अतिक्रमण कर लेते है। कई बार तो वो मुख्य मार्ग को भी अपने कब्जे में ले लेते है। मांगी बाई के गांव में भी ऐसा ही हुआ कुछ लोगों ने ग्राम पंचायत की भूमि पर अतिक्रमण करते हुए आम रास्ते को बाधित कर दिया लोगों को आने-जाने में परेशानी होने लगी। तब मांगी बाई ने प्रशासन की मदद लेकर अतिक्रमण को हटवाया। उसे काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा।
दलितों के लिए बेबाकी से काम किया। हरिजन बस्ती के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को दूर ले जाने के लिए नाली निर्माण करवाना था। जब नाली निर्माण का कार्य आरम्भ किया जो जाट समुदाय के लोगों ने विरोध कर दिया। दरअसल जाटों के मोहल्ले में पूर्व में नाली निर्माण हो चुका था। वो नहीं चाहते थे कि हरिजनों के घरों से निकला गंदा पानी उनके घरों के बाहर होकर निकले। तमाम विरोध के बावजूद मांगी बाई ने हरिजन बस्ती में नाली बनवाई। उसका कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा विकास कार्यों में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता है। सभी को समान अधिकार प्राप्त है। अधिकारों की जानकारी कहां से मिली ? इस प्रश्न के जवाब में वो कहती है संस्थाओं द्वारा हमें प्रशिक्षण दिए गए। उन प्रशिक्षणों में ही मैंने अपने अधिकारों और ग्राम पंचायतों के बारे में जानकारी हासिल की है।
पारदर्शिता की मिशाल बनी रूकमणी 
पारदर्शिता के मामले में भी महिला जनप्रतिनिधि अव्वल है। राजसमन्द जिले के विजयपुरा की सरपंच रूकमणी देवी की बदौलत ग्राम पंचायत में पूर्णपारदर्शिता स्थापित हो चूकी है। वो अपने हर काम के खर्च को ग्राम पंचायत क्षेत्र में जहां भी खाली दिवार दिखती है वहां पीला रंग पुतवा कर मंडवा देती है। कार्य में खर्च हुए का ब्यौरा कोई भी वहां पर देख सकता है। रूकमणी से पूर्व उसके पति कालूराम सालवी यहां के सरपंच थे। उन्होंने पारदर्शी ग्राम पंचायत का सपना देखा था और कार्य शुरू किया था। कालूराम के काम को रूकमणी ने और आगे बढ़ाया है। आदर्श ग्राम पंचायत बन चुकी विजयपुरा ग्राम पंचायत से प्रेरणा लेने आजकल देशभर के विभिन्न क्षेत्रों के पंच-सरपंच आ रहे है।
आड़े हाथों लेती है चुनौतियों को
राजसमन्द जिले की जूणदा ग्राम पंचायत की सरपंच गीता देवी रेगर नित नई चुनौतियों का सामना कर राजनीति में अपने आप को स्थापित कर रही है। उसके गांव में सर्वण जाति के लोग अनुसूचित जाति के लोगों के दूल्हे को घोड़ी पर बैठकर बिन्दौली नहीं निकालने देते थे। चुनाव से पहले ही अपने देवर की बिन्दौली निकलवा दी। कुछ समय बाद सरपंच का चुनाव लड़ा, चुनाव में घोड़ी पर बिन्दौली निकलवाने का दुस्साहस तकलीफदायी था। वो चुनाव जीतने पर आडे़ आ रहा था। लेकिन राजनीति का पहले पड़ाव को संघर्ष एवं सूझबूझ से पार कर लिया और सरपंच बन गई। सरपंच बनते ही उनके सामने चुनौती थी पिछले 24 वर्ष से बंद पड़ी रोड लाईट को 26 जनवरी को चालू करवाना। जिसे उसने चालू करवा दिया। रोड़ लाइट का पुराना बिल बकाया था। ग्राम पंचायत की आमदनी बढ़ाकर उसने रोड़ लाइट का बिजली बिल जमार करवा दिया और अब गांव में उजाला हो चुका है। आजकल वो पेयजलापूर्ति को चुनौती के रूप देख रही है। उसका कहना है कि इस वर्ष में पेयजल मुहैया करवाने के लिए पाइप लाइन व पानी की टंकी बनवाने के लिए कार्य प्रमुखता से करना है।
इन महिला जन प्रतिनिधियों के हौसलों को देखकर ऐसा है कि अब ये चेत (जागरूक) चूकी है और जमाने को बदलकर ही दम लेगी।