Saturday, November 23, 2013

बढ़ रहा है शर्मा का जनाधार, कम नहीं है गुर्जर के जीतने के आसार

लखन सालवी (भीलवाड़ा/माण्डल)-
माण्डल विधानसभा क्षेञ में वोटों के ध्रुवीकरण से राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे है। कांग्रेस के पूर्व विधायक रामलाल जाट द्वारा क्षेञ छोड़कर आसीन्द जाने और भाजपा द्वारा कालू लाल गुर्जर को प्रत्याशी घोषित करने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे है कि क्षेञ से कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाएगा वहीं भाजपा के लोग अपनी जीत लगभग तय मानकर निश्चिंत नजर आने लगे थे। जैसे ही कांग्रेस ने रामपाल शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो भाजपा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित-सी हो गई। उसके बाद नामांकन पञ दाखिल करने के दौरान भाजपा उम्मीदवार के साथ क्षेञ के हजारों कार्यकर्ताओं की रैली ने भी भाजपा उम्मीदवार के जीतने की संभावनाएं व्यक्त कर ही दी थी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस प्रत्याशी रामपाल शर्मा ने अपने प्रस्तावकों के साथ बिना किसी दिखावे के साधारण तरीके से नामांकन पञ दाखिल किया था। लेकिन ज्यों-ज्यों मतदान का दिन नजदीक आ रहा है त्यों-त्यों भाजपा उम्मीदवार के चुनाव जीत जाने की निश्चिंतता, जीत की सुनिश्चितता और जीत की संभावनाओं का आंकलन बिगड़ता नजर आ रहा है।

गुर्जर के वोट बैंक में शर्मा की सेंध

मोटा का खेड़ा में जनसभा को सम्बोधित करते रामपाल शर्मा
यूं तो जिले के माण्डल विधानसभा क्षेञ को गुर्जर बाहुल्य माना जाता है। हांलाकि जातिय जनगणना की रिपोर्ट जगजाहिर नहीं हुई है लेकिन राजनेताओं द्वारा अनुमानित तौर पर क्षेञ को किसी ना किसी जाति बाहुल्य बना दिया जाता हैं। चुनाव के पूर्व टिकट मांगने वालो ने भी अपनी-अपनी जाति की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और अपनी जाति का पूरा समर्थन प्राप्त होने की बातें भी कही। भाजपा उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर अपने जाति का पूरा समर्थन प्राप्त होने की बात कहते हुए अपने आप सर्वाधिक मजबूत मान रहे है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या गुर्जर जाति के सभी मतदाता भाजपा के गुर्जर उम्मीदवार को वोट देंगे ? देखने में तो नहीं लेकिन सुनने में यही आता है कि गुर्जर मतदाता गुर्जर उम्मीदवार को वोट देंगे। दूसरी तरफ क्षेञ में चुनाव प्रचार कर रहे कांग्रेस उम्मीदवार रामपाल शर्मा के लिए गुर्जर बाहुल्य गांवों में गुर्जर जाति के लोगों का समर्थन मिल रहा हैं। उल्लेखनीय है कि उपरमाळ क्षेञ को गुर्जर बाहुल्य क्षेञ माना जाता है और कथित तौर पर गुर्जर जाति के मतदाता भाजपा के उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर के साथ हैं। दूसरी तरफ आजकल उपरमाळ क्षेञ में रामपाल शर्मा का व्यापक जनसम्पर्क चल रहा है। उन्होंने करेड़ा, मरवेड़ा, सेहणुन्दा, मोटा का खेड़ा सहित दर्जन भर गुर्जर बाहुल्य गांवों में जनसम्पर्क किया है। इस दौरान गांवों में गुर्जर जाति के लोगों ने रामपाल शर्मा का भव्य स्वागत करते हुए गांव की चौपालों पर जाजम बिछा कर न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैठने की जगह दी बल्कि शर्मा को जीताने की हुंकार भी भरी है।  कीडिमाल के पूर्व सरपंच उंकार लाल गुर्जर, पंचायत समिति सदस्य घीसू लाल गुर्जर, मोटा का खेड़ा के आसूराम गुर्जर, थाणा गांव के छोगा लाल गुर्जर, ज्ञानगढ़ के पूरणमल गुर्जर, गोरख्या के नैनालाल गुर्जर सहित दर्जनों गुर्जर नेता कांग्रेस प्रत्याशी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनसम्पर्क करते नजर आ रहे है इससे साफ जाहिर है कि कालू लाल गुर्जर के वोट बैंक में सेंध लग गई है और गुर्जर मतदाता एकमत होकर भाजपा उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर के साथ नहीं है। हालांकि कांग्रेस के पास क्षेञ के एक वरिष्ठ गुर्जर नेता पहले से ही साथ है लेकिन यह गुर्जर नेता इन दिनों चुनाव प्रचार में नजर नहीं आ रहे है। वो घर बैठकर ही स्वजातिय लोगों को सामूहिक निर्णय करने के लिए अपने घर आने का न्यौता दे रहे है लेकिन उनके स्वजातिय लोगों का कहना है कि जब कांग्रेस ने टिकट रामपाल शर्मा को दे दिया है, हम पार्टी के साथ है तो फिर निर्णय किस बात का करना है, सो वे वरिष्ठ गुर्जर की बात को अनसुना कर लगातार रामपाल शर्मा के साथ जनसम्पर्क में जुटे हुए है। 

हो रहा है वोटों का ध्रुवीकरण, लामबंद्ध हो रहे गैरगुर्जर मतदाता

गुर्जरों के लामबंद्ध होने की कथित सूचनाओं के बाद क्षेञ के अन्य जातियों व वर्गों के लोग लामबंद्ध हो कर कांग्रेस के पक्ष में खड़े दिख रहे है।  जीत या हार का सेहरा बंधवाने वाला दलित वोट बैंक भी कांग्रेस के पलड़े में जा रहा है, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी का रामपाल शर्मा के साथ दिखना, इस बात का पुख्ता प्रमाण है।
इस चुनाव में ब्राह्मण मतदाता भी लामबंद्ध होकर कांग्रेस से जुड़ रहे है। ब्राह्मणों की इस एकजूटता का सारा श्रेय रामपाल शर्मा को जाता है। दूरदर्शी सोच रखते हुए अदृश्य रहकर वर्तमान की राजनीति करने में माहिर शर्मा ने पंचायतीराज चुनाव में गोपाल सारस्वत को प्रधान बनवाकर ब्राह्मण समुदाय को राजनीति के करीब लाने का सफल प्रयास किया और उसके बाद करेड़ा क्षेञ में पांव जमाने के लिए अदृश्य रहकर अपने चेहते विनोद तिवारी को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनवाया। गत वर्षों में प्रधान व ब्लॉक अध्यक्ष ने मिलकर ब्राह्मण मतदाताओं को कांग्रेस से जोडऩे के प्रयास किए है, जिसका फायदा इस चुनाव में रामपाल शर्मा को मिलता दिखाई दे रहा है। एक तरफ रामपाल शर्मा क्षेञ के गांवों-गांवों में जाकर सभी वर्गों के मतदाताओं से सम्पर्क कर रहे है वहीं ब्लॉक अध्यक्ष विनोद तिवाड़ी, प्रधान गोपाल सारस्वत, निम्बाहेड़ा जाटान के पूर्व सरपंच गोपाल लाल तिवाड़ी सहित एक दर्जन ब्राह्मण नेता समाज को कांग्रेस के पक्ष में लाने के लिए कमर कसे हुए है। वहीं दूसरी तरफ सीसीबी अध्यक्ष चेतन डिडवाणिया, उदयलाल गाडऱी जैसे लोग जीत के लिए अपने-अपने  स्तर पर प्रयास कर रहे है। कान्फेड अध्यक्ष मोना शर्मा ने भी महिलाओं की टुकड़ी के साथ मोर्चा संभाला हुआ वह घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार पार्टी प्रतिबद्धता के चलते ब्राह्मण मत शत प्रतिशत कांग्रेस खाते में नहीं जायेगा लेकिन बीते चुनावों की अपेक्षा इस चुनाव में कांग्रेस के खाते में ब्राह्मण मतों की बढ़ोतरी जरूर होगी। जनसम्पर्क के दौरान करेड़ा में अपार जन समर्थन से इस बात का अंदेशा सहज ही लगाया जा सकता है।

ससुराल व ननिहाल से विश्वास

क्षेञ में ससुराल व ननिहाल होने का फायदा भी शर्मा को मिलेगा। जानकारी के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी रामपाल शर्मा का ससुराल करेड़ा में है जो कि उपरमाळ क्षेञ का ह्दय स्थल है वहीं ननिहाल माण्डल विधानसभा के ही भगवानपुरा गांव में है।  शर्मा अपने आप को क्षेञ का दामाद व भाणेज बताकर मतदाताओं से वोट की मांग कर रहे है।  शर्मा को विश्वास है कि क्षेञ में ससुराल व ननिहाल होने से उन्हें जरूर फायदा मिलेगा।

यहां भाजपा का जनाधार

समर्थकों के साथ कालू लाल गुर्जर  
ऐसा नहीं है कि हर गांव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन मिल रहा हो। उपखण्ड मुख्यालय के पास की पीथास, अमरगढ़, चांखेड, बागौर, बावलास सहित दर्जनभर ग्राम पंचायतों में कांग्रेस की हालात ठीक नहीं है। इन ग्राम पंचायतों के सैकड़ों गांवों में कालू लाल गुर्जर का बोलबाला है। जनसम्पर्क के दौरान के माहौल के अनुसार इस क्षेञ में रामपाल शर्मा को बढ़त मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे है। बागौर सरपंच कालू लाल जाट, चांखेड सरपंच पुत्र मदन लाल जाट जैसे दर्जनों जनाधार खो चूके नेताओं की बदौलत इस क्षेञ में गैरजाट, दलित व अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस से बिखरे हुए है। 

कांग्रेस का बागी, भाजपा के लिए दु:खदायी 

कांग्रेस से बागी उम्मीदवार दुर्गपाल सिंह अपने समर्थकों सहित क्षेञ में जनसम्पर्क में लगे हुए है। वे क्षेञ के सभी बूथों पर अपने बूथ कार्यकर्ता लगा पायेंगे इसमें अभी संशय है लेकिन राजपूत व मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल हो सकते है ऐसा होने पर कांग्रेस की बजाए भाजपा को अधिक नुकसान होने के आसार है। माण्डल के पूर्व चैयरमेन रमेश बूलिया, पूर्व सरपंच जाकिर खां, महिपाल वैष्णव, आबिद हुसैन शेख सहित दर्जन भर वरिष्ठ कार्यकताओं के साथ क्षेञ में जनसम्पर्क कर रहे राजपुरा के दुर्गपाल सिंह कांग्रेस को शायद ही अधिक नुकसान पहुंचा पायेंगे। जानकारी के अनुसार न तो रामपाल शर्मा और न ही कांग्रेस पार्टी के किसी पदाधिकारी ने बागी उम्मीदवार दुर्गपाल सिंह को मनाने की चेष्टा की है। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस यहां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रही है। जानकारी के अनुसार दुर्गपाल सिंह क्षेञ के मुस्लिम व राजपूत मतदाताओं को लुभाने में सफल हो सकते है। दूसरी तरफ  गुर्जरों का रामपाल शर्मा के प्रति जुड़ाव व राजपूत एवं मुस्लिम वोट बैंक का दुर्गपाल सिंह की ओर झुकाव कालू लाल गुर्जर के लिए माथे का दर्द बनता जा रहा है। 
बहरहाल भाजपा प्रत्याशी अपने स्वजाति मतदाताओं के मतों के आधार पर चुनाव जीतने का तो कांग्रेस उम्मीदवार गुर्जर वोट बैंक में सेंध कर व ब्राह्मण मतदाताओं को एक जाजम पर लाकर चुनाव जीतने का सपना देख रहे है वहीं बागी उम्मीदवार अपने स्वजाति व अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने साथ मिलाने का भ्रम पालते हुए कांग्रेस उम्मीदवार की लूटिया डूबोने  का सपना देख रहे है वहीं दूसरी ओर क्षेञ में तीव्र गति से वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है जो भाजपा उम्मीदवार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। राजनीतिक अनुभवियों की माने तो भाजपा प्रत्याशी कालूलाल गुर्जर को हराना आसान नहीं है, वे परिपक्व राजनीतिज्ञ है और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में माहिर है।

Tuesday, October 22, 2013

अभी तो मैं जवान हुआ हूं – गुर्जर

विधानसभा चुनाव होने वाले है . . . गिनती के दिन शेष रहे है . . . हालांकि अभी तक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। पार्टियां अपने प्रत्याशी घोषित करने में ज्यों-ज्यों देरी कर रही है त्यों-त्यों टिकट की दावेदारी करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई दिग्गजों को टिकट प्राप्त करने में पसीने छूट रहे है तो कई सत्ता लोलुप्ता के चलते जयपुर से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काट रहे है।
कालु लाल गुर्जर
भीलवाड़ा जिले की माण्डल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कालू लाल गुर्जर पुनः माण्डल से प्रबल दावेदारी ठोक रहे है। पूर्व वसुंधरा राजे की सरकार में मंत्री रह चुके कालू लाल गुर्जर से लखन सालवी की बातचीत के संपादित अंश -
आप कहां से दावेदारी कर रहे है ?
मैं पहले माण्डल से चुनाव लड़ चुका हूं, यहां की जनता से मेरा जुड़ाव है इसलिए इस बार भी माण्डल से ही दावेदारी कर रहा हूं।
आप सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी है, वहां आपके चुनाव जीतने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है, आप वहां से क्यों चुनाव नहीं लड़ते है ?
सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रतिशत जीत की संभावना है लेकिन माण्डल से दावेदारी करने के दो महत्वपूर्ण कारण है। पहला मैं इस क्षेत्र से हटता हूं तो यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाएगी, जो मैं नहीं चाहता। दूसरा मैंनें पिछला चुनाव माण्डल विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था तथा मामूली वोटों के अंतर से मैं चुनाव हार गया था और हार कर क्षेत्र छोड़ना मुझे मंजूर नहीं।
अगर माण्डल क्षेत्र में पार्टी किसी ओर को टिकट देती है तो आप क्या करेंगे ?
देखिए अव्वल तो पार्टी मुझे ही टिकट देगी, हां पार्टी किसी दिग्गज को टिकट देती है तो अलग बात है।
सुनने में आया है कि पार्टी आपको आसीन्द से टिकट दे रही है ? आसीन्द गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है।
मैं किसी भी सूरत में माण्डल के अलावा कहीं ओर से चुनाव नहीं लडूंगा। मेरा जुड़ाव माण्डल क्षेत्र के लोगों से रहा है, पिछले 2 दशक से मेरा कार्य क्षेत्र माण्डल है, ऐसे में अन्य किसी क्षेत्र में जाकर चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं।
आप बुजुर्ग है, आपको नहीं लगता है कि युवाओं को आगे आने का मौका देना चाहिए ?
कौन कहता है मैं बुढ़ा हूं ? अभी तो मैं जवान हुआ हूं। आपको बता दूं कि 50 वर्ष की आयु तक तो राजनीतिक परिपक्वता आती ही नहीं है, लगभग 60 से 70 वर्ष की आयु राजनीतिक व्यक्ति राजनीति में परिपक्व होता है तो बताइयें राजनीतिक रूप से मैं बूढ़ा हूं या जवान।
लेकिन आप तो युवा उम्र में मंत्री बने थे ।
हां मैं 36 वर्ष की आयु में मंत्री बना था। मंत्रियों में सबसे छोटा था, उस वक्त हमारी ही पार्टी के दिग्गज मेरा विरोध करते थे, कहते थे कि ‘‘ये अभी क्या समझता है राजनीति में, इसे क्यूं मंत्री बना दिया।’’
आपके अनुसार युवाओं को टिकट नहीं देना चाहिए ?
नहीं . . .नहीं . . मेरा मतलब ये नहीं है लेकिन अभी राजस्थान में भाजपा की सरकार लाना है तो नए चेहरों की बजाए जिताउ दावेदारों को ही टिकट दिए जाने चाहिए।
आपको माण्डल विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलता है तो आप किन मुद्दों पर चुनाव लडेंगे ?
पार्टी के घोषणा पत्र के आधार पर चुनाव लडूंगा। लेकिन भ्रष्टाचार व विकास अह्म मुद्दे होंगे।
आपको बता दे कि माण्डल से कालू लाल गुर्जर के बाद बनेड़ा पूर्व उपप्रधान गजराज सिंह राणावत की मजबूत दावेदारी दिखाई पड़ रही है। वहीं बावलास के जसवंत सिंह, युवा नेता कमल सिंह पुरावत व मणिराज सिंह भी टिकट की दावेदारी प्रस्तुत कर चुके है। राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह अपने पुत्र अभिजीत सिंह को माण्डल से चुनाव लड़वाना चाह रहे है।
बहरहाल कालू लाल गुर्जर माण्डल क्षेत्र को किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाह रहे है, वहीं वी.पी. सिंह के चलते भाजपा कालू लाल गुर्जर को आसीन्द से चुनाव लड़ाने पर आमादा है। अब देखना है कि वी.पी सिंह अपने पुत्र को चुनावी रण में माण्डल के मैदान में उतार पाते है या नहीं, वहीं गजराज सिंह राणावत टिकट पाने में किस हद तक सफल होंगे और कालू लाल गुर्जर की हठ कितनी रंग ला पाऐगी।

Monday, October 21, 2013

कार्य ऐसा करे जिस पर समाज गर्व करे-मेघवंशी

सिंगोली/भीलवाड़ा - रिखियों के समाज में कई संत महापुरूषों ने जन्म लिया, स्वामी गोकुलदास जी जैसे संत ने समाज को दिशा दी। वर्तमान में समाज उनके बताए हुए मार्ग पर संगठित होकर  चल रहा है वहीं समाज उन्हें पूज रहा है। केवल गोकुलदास जी महाराज ही नहीं वरन् समाज के जिन लोगों ने समाज व देश हित में कार्य किया आज उन्हें भी पूजा जा रहा है, हमें भी कुछ ऐसा करना है जिस पर समाज गौरवान्वित हो सके। ये कहा रामदेव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंवर मेघवंशी ने। वे रविवार को माण्डलगढ़ तहसील के सिंगोली (चारभुजा) गांव में अखिल मेघवंशी (बलाई) समाज महासभा की जिला शाखा द्वारा आयोजित जिला स्तरीय प्रतिभा एवं संत समागम समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत रत्न बाबा भीमराव अम्बेडकर ने दलित उत्थान का महत्त्वपूर्ण कार्य किया और सबको एक वोट देने का अधिकार दिया। मेघवंशी ने समाज के युवाओं को इशारा करते हुए कहा कि राजनीति व सत्ता में भागीदारी के बगैर समाज का विकास दूर की कौड़ी है। उन्होंने अपील की कि पिछले पंचायतीरात चुनाव में समाज ने एकजूट होकर जिस प्रकार समाज की बेटी का समर्थन किया और जिला परिषद का चुनाव जीतवाकर जिले का प्रथम पद दिलवाया उसी प्रकार आगामी विधानसभा चुनाव में भी समाज को आगे लाए।

समारोह का शुभारम्भ साध्वी माया भारती ने समाज के आराध्य देव बाबा रामदेव महाराज के भजन गाकर किया। उसके बाद समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का तथा नव नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता जिला मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष भवानीराम मेघवंशी ने की वहीं मुख्य अतिथि रामदेव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंवर मेघवंशी थे। साथ ही अखिल मेघवंशी महासभा पुष्कर की जिला शाखा भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष मदन लाल मेघवंशी,  जिला मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष भवानीराम मेघवंशी, उपाध्यक्ष प्रहलाद मेघवंशी, अखिल भारतीय मेघवंशी (सालवी) सेवा संस्थान के जिलाध्यक्ष बहादुर मेघवंशी, पुष्कर महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष नाथूलाल बलाई, मेघवंशी (बलाई) युवा महासभा के जिलाध्यक्ष गोवर्धन लाल बलाई, सुरेश मेघवंशी सरपंच (रूपपुरा-आसीन्द) ब्यावर मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष अर्जुनराम दुखाडि़या, ब्यावर मेघवंशी विवाह समिति के अध्यक्ष हजारी लाल चेपूल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

समारोह में समाज के दूर दराज के लोगों ने शिरकत की। मेघवंशी (बलाई) जिला युवा महासभा के जिला प्रवक्ता राजेन्द्र बलाई ने बताया कि समारोह में मेवाड़, मारवाड़ व हाड़ौती क्षेत्र के सैकड़ों समाजबंधु उपस्थित थे।

सत्यनारायण मेघवंशी, धनराज मेघवंशी सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों का फूलमालाएं पहनाकर व साफा बंधवाकर स्वागत किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि राजकुमार बादल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे साथ ही उन्होंने मंच संचालन भी किया। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि युवा साथियों ने एक नई परम्परा की शुरूआत की जो समाज को नई दिशा में ले जाएगी। सम्मान पाकर समाज की प्रतिभाएं निश्चित ही उत्कृष्ट कार्य करेंगी।’’

Monday, September 16, 2013

बंजर धरती उगलने लगी है सोना


  • लखन सालवी 

भीलवाड़ा जिला खानों के कारण प्रसिद्ध रहा है। नवीन जिंदल जैसे लोग भी इस जिले में आने से अपने आप को रोक नहीं सके। जिले के भूगर्भ में कहीं सैंड स्टोन है तो कहीं ग्रेनाइट की चट्टानें फैली हुई है। न जाने कहां कहां से लोग भीलवाड़ा की धरा पर आकर धरती को पोली कर रहे है। करेंगे भी क्यों नहीं . . . आखिर इस धरा ने अपने भीतर खजाना जो समेट रखा है।

भीलवाड़ा जिले में दो क्षेत्र ऐसे है जो उपरमाल के नाम से जाने जाते है। एक उपरमाल जिला मुख्यालय के पूर्व की ओर स्थित है वहीं दूसरा जिला मुख्यालय के पश्चिम में स्थित है। दोनों ही उपरमाल क्षेत्र व्यापारिक दृष्टि से भीलवाड़ा जिले को विश्वपटल पर पहचान दिला रहे है। पूर्वी उपरमाल क्षेत्र सेंड स्टोन की बदौलत प्रसिद्ध है वहीं पश्चिमी उपरमाल ग्रेनाइट उत्पादन के लिए मशहूर हो रहा है। दो दशक पूर्व इस क्षेत्र में प्रचूर मात्रा में विद्यमान काले पत्थर की पहचान जब ग्रेनाइट के रूप में हुई तो अन्य जिलों व राज्यों के ग्रेनाइट उद्यमी भी यहां आकर कारोबार करने लगे। पश्चिमी उपरमाल में स्थापित हो चुके ग्रेनाइट उद्योग पर रिपोर्ट - 

जिले के करेड़ा कस्बे के पश्चिम की ओर उपरमाल क्षेत्र है। करीब एक दशक पूर्व यहां ग्रेनाइट की दर्जनों खानें शुरू हुई और तब से इनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। खास बात यह है कि छोटे-छोटे उद्यमियों ने मिलकर इस उद्योग को पनपाया है। ग्रेनाइट की गुणवत्ता व प्रचुरता को देखते हुए अन्य जिलों व राज्यों के उद्यमी भी यहां आए है। वैसे अधिकतर उद्यमी स्थानीय गांवों के किसान परिवारों के लोग ही है, जिन्होंने न केवल भूगर्भ में छिपे पत्थर की पहचान ग्रेनाइट पत्थर के रूप में की बल्कि दूरदर्शिता और मेहनत के बूते धरती के गर्भ से इस काले पत्थर को बाहर निकाल कर इस उद्योग को आगे बढ़ाया है।

कभी इस क्षेत्र में हर तरफ काला पत्थर ही दिखाई देता था और इस पत्थर को यहां के लोग कोसते थे। लेकिन इस काले पत्थर ने उपरमाल की काया पलट दी। आज क्षेत्र में दर्जनों ग्रेनाइट की खाने संचालित है। जिनसे न केवल यहां के लोग आर्थिक सुदृढ़ हो रहे है बल्कि राजकीय कोष में भी वृद्धि कर रहे है। 

ग्रेनाइट खानें के मालिक विनोद तिवारी के अनुसार ग्रेनाइट उद्योग की बदौलत सरकार को वर्ष 2009 में 3 लाख 99 हजार का राजस्व प्राप्त हुआ जो निरन्तर बढ़ता ही गया। वर्ष 2010 में राजस्व आय बढ़कर 46 लाख रुपए हो गई। वहीं इस वर्ष 3 करोड़ 21 लाख की राजस्व आय हुई है अर्थात् ग्रेनाइट व्यवसाय केवल उद्यमियों को नहीं बल्कि सरकार को भी आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहा है।

यूं शुरू हुआ ग्रेनाइट उद्योग

गोवर्धनपुरा गांव के एक किसान परिवार में जन्में तथा 5वीं तक पढ़े नाथू लाल गुर्जर (58 वर्ष) जानमाने ग्रेनाइट व्यवसायी है। यही वे शख्स है जिन्होंने सबसे पहले इस क्षेत्र के काले पत्थर को भूगर्भ से बाहर निकाला और उसकी कटिंग इत्यादि करवाकर ग्रेनाइट को उजागर किया और वर्तमान में गुणवत्तायुक्त ग्रेनाइट का उत्पादन कर रहे है। नाथू लाल गुर्जर सरपंच भी रहे। सरपंच रहते हुए ग्राम पंचायत क्षेत्र में बेहतर कार्य करवाए जिस पर इन्हें राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। 

क्षेत्र के पूर्व विधायक कालू लाल गुर्जर के करीबी माने जाने वाले नाथू लाल गुर्जर बताते है कि दो दशक पूर्व इस क्षेत्र में न कोई उद्योग धंधे थे और ना ही किसी प्रकार का रोजगार ही उपलब्ध था। 1992 में माण्डल विधानसभा क्षेत्र के विधायक कालु लाल गुर्जर राजस्थान सरकार में मंत्री थे। उन्होंने उपरमाळ क्षेत्र में ग्रेनाइट पत्थर होने का इशारा किया था। तब मैंनें सन् 1993 में काले पत्थर को निकाला और उसे कटवाकर उस पर पाॅलिस करवाई तो पता चला कि वह साधारण पत्थर नहीं वरन् ग्रेनाइट है। जब ग्रेनाइट होने की पुष्टि हो गई तो क्षेत्र के लोगों के खानों (माइन्स) के लिए लगभग 1500 फाइलें लगाई गई थी। कईयों के एक-एक हैक्टयर की खानें आवंटित भी हुई लेकिन आर्थिक कमजोरी के कारण अधिकतर लोग खानें शुरू नहीं कर पाए। दरअसल खानें आरम्भ करने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनों की आवश्यकता थी। लोगों के पास इतना पैसा नहीं था कि मशीनरी खरीद पाते। लेकिन उद्यमियों में दूरदर्शिता थी, उन्होंने कड़ी मेहनत की और विभिन्न देशी उपायों से पत्थर को बाहर निकालने और बेचने लगे। नतीजतन छोटे उद्यमी समृद्ध हुए। अब वे तकनीक तथा बड़ी-बड़ी मशीनों का उपयोग कर काले पत्थर को भूगर्भ से बाहर निकाल रहे है।

पहले कोई बेटी नहीं देता था अब रिश्तेदारो की कतार है

नाथू लाल गुर्जर बताते है कि एक समय था जब कोई भी व्यक्ति उपरमाल क्षेत्र में अपनी बेटी देना पसंद नहीं करता था। कारण था यहां न किसी प्रकार का उद्योग था और ना ही खेती योग्य धरती थी। ग्रेनाइट के उत्पादन के बाद यह क्षेत्र समृद्ध हो गया है। लोगों की बंजर जमीनें मंहगे दामों में बिक रही है वहीं बेरोजगारों को भी रोजगार मिला है। चूंकि क्षेत्र के लोग आर्थिक रूप से सम्पन्न हुए है तो रिश्ते भी आगे होकर आ रहे है। 

अब वेस्टेज से काॅबल बनाने तैयारी 

टीआर ग्रेनाइट की मालिक गीता देवी गुर्जर का सपना ग्रेनाइट पत्थर के काॅबल बनाने का है। उनका मानना है कि सेंड स्टोन के वेस्टेज पत्थरों से काॅबल बनाए जा सकते है तो ग्रेनाइट के वेस्टेज का उपयोग कर अवश्य ही काॅबल बनाए जा सकते है। उल्लेखनीय है कि छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों यानि कि वेस्टेज पत्थर से ईंट के आकार का ब्लाॅक बनाया जाता है जिसे काॅबल कहा जाता है। गीता देवी ग्रेनाइट पत्थर की कटिंग को सबसे बड़ी चुनौती मानती है। उन्होंने बताया कि वायरसा नामक मशीन से पत्थर के बड़े ब्लाॅक तो काटे जा सकते है लेकिन भारत में ऐसी कोई मशीन नहीं जिससे ग्रेनाइट पत्थर के ईंट के साइज के ब्लाॅक काटे जा सके। उन्होंने बताया कि चीन ने ऐसी मशीन इजाद कर ली है हम उस मशीन को मंगवाने की तैयारी कर रहे है। 

चुनौतियां का सामना करते हुए कर रहे है उज्जवल भविष्य का निर्माण

सवाईभोज, टीआर, नवकार, तिरूपति, अनमोल, बालाजी, सिद्धी विनायक, भैरूनाथ, राधिका, कविता, शान, जगदम्बा, जैसी दर्जनों ग्रेनाइट माइन्सें क्षेत्र को बेहतर ग्रेनाइट उत्पादन का केंद्र बना रही है। ग्रेनाइट माइन्स से पत्थर निकालने के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग करने में माहिर ग्रेनाइट व्यवसायी राजमल जैन का कहना है कि ग्रेनाइट उद्योग को ऊंचाई प्रदान करने में लगे क्षेत्र के छोटे-छोटे उद्यमियों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है लेकिन वे चुनौतियों का सामना करते हुए ग्रेनाइट उद्योग को बढ़ाने में लगे है। उन्होंने बताया कि वैश्विक मंदी का असर इस कारोबार पर भी पड़ रहा है। वहीं क्षेत्र के कुछ हिस्से में क्रेक जोन होने के कारण भी उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में कुछ उद्यमी बिजली कनेक्शन के लिए दौड़ रहे है। बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण बड़े-बड़े जनरेटरों से बिजली बनाकर मशीनरी को चला रहे है। ईंधन पर अधिक खर्च हो रहा है जबकि खर्च की एवज में उत्पादन कम हो रहा है। 

ग्रेनाइट व्यवसायी व राजनेता लाखाराम गुर्जर ने बताया कि कई लोगों को विद्युत हेतु बड़े ट्रांसफार्मर की आवश्यकता है। विद्युत विभाग के अधिकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि ट्रांसफार्मर के लिए हैदराबाद में आवेदन करना होगा। बहरहाल विद्युत के अभाव में कईयों की माइन्सें नुकसान में चल रही है। लेकिन उद्यमी इन समस्याओं का डटकर सामना कर रहे है, वर्तमान में कई उद्यमी जीरो प्रोफिट पर माइन्स संचालित कर इस उद्योग को जीवित रखने का प्रयास कर रहे है।

बालाजी ग्रेनाइट के मालिक विनोद तिवाड़ी बताते है कि बड़े उद्यमी इस क्षेत्र में नहीं आए है इस कारण भी इस कारोबार को व्यापक पहचान नहीं मिल पाई है इस कारण इस व्यवसाय को ऊंचाई पर पहुंचने में समय लग रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े उद्यमियों को जमीनों के बड़े भाग नहीं मिल पा रहे है इस कारण वे यहां आने के इच्छुक नही है। उन्होंने बताया कि छोटे उद्यमियों ने समूह बनाकर इस कारोबार को ऊंचाई देने के लिए कमर कस ली है।

दोहन ही नहीं करते वरन पर्यावरण के प्रति सजग भी है हम - तिवाड़ी

युवा नेता विनोद तिवाड़ी ने बताया कि ग्रेनाइट माइन्सों के अलग-अलग कलस्टर बने हुए है। कलस्टर वार अलग-अलग समिति बनी हुई है। कलस्टर संख्या 2 व 3 के अध्यक्ष नाथू लाल गुर्जर है, उनकी अध्यक्षता वाला फाकोलिया-धुंवाला ग्रेनाइट एसोसिएशन भी बना हुआ है। एसोसिएशन के सचिव तिवाड़ी ने बताया कि एसोसिएशन के मार्फत हम पर्यावरण विकास पर खास ध्यान दे रहे है। उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने देना चाहते है इसके लिए हम समय-समय पर पेड़-पौधे भी लगाते है। 

तिवाड़ी ने बताया कि कलस्टर ने करेड़ा स्थित सरकारी अस्पताल को भी गोद लिया है। इस अस्पताल में 3 सालों में 7 लाख रुपए खर्च किए जाने है जिनमें से एक लाख रुपए खर्च किए जा चुके है। 

एसोसिएशन उपाध्यक्ष राजमल जैन ने बताया कि कलक्टर ओंकार सिंह ने हमें जमीन आवंटित करने के लिए आश्वस्त किया है। अगर जमीन आवंटित की जाती है तो हम उसमें भारी संख्या में पेड़-पौधे लगाकर उस पर विकास करवायेंगे।

बहरहाल उपरमाल क्षेत्र के लोग बरसों से पड़ी बंजर जमीनों को उद्यमियों को बेच रहे है वहीं दूर दराज के उद्यमी जमीनों को खरीद कर अपना भाग्य आजमा रहे है। ग्रेनाइट उद्योग की शुरूआत करने वाले नाथू लाल गुर्जर अपने सपनों को साकार करते हुए आगे बढ़ रहे है। उनका कहना है कि ‘‘कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं हो सकता है, तबीयत से एक पत्थर तो उछालों यारों’’। 

बूथ जीते तो हम जीते : कार्यक्रम एक नतीजे अनेक


  • लखन सालवी

टिकीट किसे मिलेगा ? कौन किसके साथ होगा ? और कौन जीतेगा ? सब कुछ भविष्य की गर्त में छिपा हुआ है, लेकिन ‘‘बूथ जीते तो हम जीते’’ कार्यक्रम से कुछ लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। उनके लिए फायदा ऐसा रहा कि ‘‘सांप भी मर गया और लाठी भी ना टूटी’’।

भाजपा अपने बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को सशक्तः बनाने के लिए हर जिले में तहसीलवार बूथ लेवल के साधारण सदस्यों की बैठकें करवा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे ने इन बैठकों का प्रयोजन भी स्पष्ट रखा है कि ‘‘बूथ जीते तो हम जीते’’। यह गतिविधि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने ठीक समय पर की है। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम के कई नतीजे सामने आ रहे है। जिससे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को दोहरे-तिहरे लाभ मिल रहे है। जिलास्तर व बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं का समन्वय तो हो ही रहा है साथ ही संगठन के कार्यकर्ताओं के आपसी मतभेद उजागर होने के साथ कार्यकर्ताओं के सुझाव और आगामी विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से जिताऊ उम्मीदवार कौन है, इसके रूझान भी मिल रहे है। और यह सब सूबे का ताज हासिल करने के प्रयास में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए मददगार साबित हो रहे है। वहीं राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोगों को अपना दमखम बताने का मौका मिल रहा है। 

हाल ही में भीलवाड़ा जिले में तहसीलवार बूथ लेवल के साधारण सदस्यों की बैठकें आयोजित की गई। इन बैठकों में भाजपा जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्ष, मण्डल अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया। सम्बंधित विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा से उम्मीदवारी की मांग कर रहे लोगों ने भी इन बैठकों में भाग लिया। जिनमें भाजपा से उम्मीदवारी जता रहे लोगों की संगठन में पैठ व काबिलियत की असलियत देखने को मिली। 


17 अगस्त को बनेड़ा तहसील के सभी बूथ लेवल के साधारण सदस्यों की बैठक आयोजित की गई। बनेड़ा के मण्डल अध्यक्ष पंचायत समिति के पूर्व प्रधान गजराज सिंह राणावत के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में 3000 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जिनमें से लगभग 2700 तो साधारण सदस्य ही थे। साधारण सदस्यों में भी अधिकतर युवा थे। साधारण सदस्यों की भारी तादाद और बूथ को मजबूत बनाने के लिए उनके सुझावों को सुनकर राज्यसभा सांसद के मुंह से भी तारीफ निकली। राजनीतिक जानकारों के अनुसार युवाओं के धड़े का बनेड़ा मण्डल अध्यक्ष गजराज सिंह राणावत के साथ होना महत्वपूर्ण है। इस बैठक में राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह, जिला महामंत्री कैलाश काबरा, भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष प्रशान्त मेवाड़ा, भीलवाड़ा विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी सहित भाजपा समर्थित बनेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के सरपंच व पंचायत समिति सदस्य उपस्थित थे।

बैठक के दौरान मंच से गजराज सिंह राणावत को माण्डल से प्रत्याशी बनाने की मांग की गई, वहीं बैठक में आए लोगों ने भी हाथ खड़े कर इस मांग का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि गजराज सिंह राणावत बनेड़ा पंचायत समिति के पूर्व प्रधान है तथा वर्तमान में उनकी पत्नि पुष्प कंवर राणावत पंचायत समिति की प्रधान है। जाहिर है कि गजराज सिंह राणावत की बनेड़ा क्षेत्र की जनता में गहरी पैठ है। 

 वहीं माण्डल तहसील के भगवानपुरा में भी साधारण सदस्यों की बैठक हुई। मकसद वही - बूथ जीतेगा तो हम जीतेंगे। बैठक माण्डल के मण्डल अध्यक्ष मणिराज सिंह के नेतृत्व में आयोजित की गई थी वहीं राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह बतौर मुख्य अतिथि तथा भाजपा जिलाध्यक्ष सुभाष बेहडिया व बनेड़ा मण्डल अध्यक्ष गजराज सिंह राणावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। बैठक में सुशील नुवाल, किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष रामेश्वर जाट, जिला परिषद के प्रतिपक्ष के नेता कमल सिंह पुरावत, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के हमीद शेख सहित कई सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित थे। यहां स्थानीय युवा कार्यकर्ताओं ने अपने क्षेत्र के पूर्व विधायक व मंत्री कालू लाल गुर्जर का विरोध कर दिया, विरोध से नाराज हुए गुर्जर ने वरिष्ठ भाजपाईयों की मौजुदगी में मंच पर अपशब्द कह डाले जिससे माहौल और खराब हो गया। यही नहीं कालू लाल गुर्जर के गुट के लोगों व भाजपा युवा कार्यकर्ताओं के साथ हाथापाई तक की नौबत आ गई। युवा कार्यकर्ताओं ने गुर्जर हाय-हाय के नारे भी लगाए और वी.पी. सिंह से गुर्जर को टिकिट नहीं देने की मांग भी की। कई कार्यकर्ताओं ने तो बैठक का बहिष्कार तक कर दिया। वहां साफ जाहिर हुआ कि क्षेत्र के जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकर्ता पूर्व विधायक कालू लाल गुर्जर से खफा है। इस घटना पर वरिष्ठ भाजपाईयों का कहना है कि कालू लाल गुर्जर वरिष्ठ है उन्हें संयम रखना चाहिए था तथा अपने उपर लग रहे आरोपों के खण्डन में अपना पक्ष रखना था। कार्यकर्ता के हाथ से माइक छीनना गुर्जर जैसे कार्यकर्ता को शोभा नहीं देता। 

बैठक में हुए विवाद को लेकर कालू लाल गुर्जर ने अब भी अडि़यल रैवेया अपना रखा है और इसी अडि़यल रैवये के कारण क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में गुर्जर के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। भगवानपुरा में आयोजित बैठक में माण्डल कस्बे के प्रद्युम्न जोशी व विनोद सुवालका जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं ने गुर्जर की खिलाफत की थी, जिसे लेकर गुर्जर व गुर्जर के समर्थकों व माण्डल क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। उस विवाद पर कालु लाल गुर्जर का कहना है कि पार्टी से जुड़े कुछ नए कार्यकर्ताओं ने गलत कहा था जिन्हें मेरे समर्थकों ने समझा दिया। दूसरी तरफ माण्डल के युवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कालू लाल गुर्जर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करते है, जिस बारे में बैठक में मुद्दा उठाया था लेकिन कालु लाल गुर्जर ने हमें नहीं बोलने दिया और माइक छीन लिया बाद में गुर्जर के स्वजाति बंधुओं ने हमारे साथ अभ्रद व्यवहार किया। 
कालू लाल गुर्जर के स्वजाति बंधुओं ने जब भाजपा युवा कार्यकर्ताओं से विवाद किया तो भाजपा युवा कार्यकर्ताओं ने उनसे कहा कि यह भाजपा की बैठक ना कि किसी जाति विशेष और बैठक में बोलने का सभी को अधिकार है।

माण्डल की बैठक में कालू लाल गुर्जर का विरोध हुआ, युवा कार्यकर्ताओं में वरिष्ठ नेता गुर्जर के प्रति भारी आक्रोष व्याप्त था जबकि बनेड़ा के बूथ लेवल के साधारण सदस्यों की बैठक में कार्यकर्ताओं में समन्वय व एकजूटता नजर आई। गजराज सिंह राणावत की माण्डल क्षेत्र में मजबूत पकड़ है वहीं कालू लाल गुर्जर का भारी विरोध हो रहा है। वैसे राणावत का कहना है कि पार्टी का निर्णय अंतिम है और मैं पार्टी के निर्णय के साथ रहूंगा।

बहरहाल माण्डल में भाजपा से पूर्व मंत्री कालू लाल गुर्जर, बनेड़ा मण्डल अध्यक्ष गजराज सिंह राणावत, जिला परिषद नेता प्रतिपक्ष कमल सिंह पुरावत व माण्डल मण्डल अध्यक्ष मणिराज सिंह दावेदारी कर रहे है। हालांकि राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह अपने बेटे के लिए माण्डल में नई जगह तलाश रहे थे लेकिन भगवानपुरा में आयोजित बैठक की आंखों देखी के बाद शायद उन्होंने माण्डल से ऐसी उम्मीद छोड़ दी है। भगवानपुरा में हुई साधारण सदस्यों की बैठक में कालू लाल गुर्जर व युवा कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद को देखकर तो राज्यसभा सांसद इतने दुःखी हुए है कि मंच से कह तक दिया कि ऐसी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। वैसे दावेदारी कर रहे लोगों की जमीनी स्थिति भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक निश्चित ही पहुंच ही रही होगी। 

टिकीट किसे मिलेगा ? कौन किसके साथ होगा ? और कौन जीतेगा ? सब कुछ भविष्य की गर्त में छिपा हुआ है, लेकिन ‘‘बूथ जीते तो हम जीते’’ कार्यक्रम से कुछ लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। उनके लिए फायदा ऐसा रहा कि ‘‘सांप भी मर गया और लाठी भी ना टूटी’’।

Thursday, July 25, 2013

बिखरी-बिखरी है भाजपा वहीं सिमटी-सिमटी है कांग्रेस

  • लखन सालवी


राजस्थान विधानसभा चुनाव नजदीक है। भाजपा जहां बिना चुनाव लड़े ही सत्ता अपनी मुट्ठी में देख रही है वहीं भारी उठापटक के कारण कांग्रेस को सत्ता वापसी की चिंता हो रही है। ज्यों-ज्यों चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, राज्यभर में दोनों की प्रमुख दलों के लोगों में आपसी खिंचतान के साथ गुटबाजी सामने आ रही है। कांग्रेस का सीमित होना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को चिंतित कर रहा है वहीं भाजपा में बिखराव वसुंधरा राजे को परेशान कर रहा है।

इन दिनों भीलवाड़ा में भाजपा व कांग्रेस में जबरदस्त हलचल मची हुई है। गली मोहल्लों में राजनीतिक चर्चाओं से माहौल गरम है तो राजनीतिक गलियारों में तो यह चर्चाएं उफान पर होनी लाजमी है ही। 

कांग्रेस की बजाए भाजपा में गुटबाजी व खिंचतान अधिक हो रही है। भाजपा के लोगों के बीच की गुटबाजी जिले की जनता के सामने आ चुकी है। हाल ही में वसुंधरा राजे ने सुराज संकल्प यात्रा के बहाने जिले में भाजपा की स्थिति की जानकारी ली। यात्रा के दौरान भी पार्टी से जुड़े लोगों में एकजुटता नहीं दिखी। 

जिले की स्थितियों को सुधारने एवं फीडबैक लेने के लिए वसुंधरा राजे ने प्रभारी नियुक्त किए है। ये प्रभारी समय-समय पर जिले में आकर फीडबैक ले रहे है तथा रणनीति के तहत तैयारियां कर अमली जामा पहना रहे है। 20 जुलाई को भाजपा राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री श्योदान सिंह, पार्टी प्रदेश महामंत्री सतीश पूनिया एवं पूर्व सांसद व भाजपा जिला प्रभारी मानवेन्द्र सिंह भीलवाड़ा आए हालांकि इन नेताओं ने बताया वे पदाधिकारियों एवं जिला पदाधिकारियों से चर्चा कर बूथ लेवल पर कार्यकर्ता तैनाती के बारे में चर्चा करने आए है लेकिन उन्होंने वास्तव में तो इस दौरे से जिले में भाजपा की स्थिति का आंकलन किया। उन्होंने जिले के पदाधिकारी, मण्डल अध्यक्ष एवं महामंत्री, प्रकोष्ठों एवं मोर्चों के जिलाध्यक्ष एवं महामंत्री, पूर्व विधायक, पंचायत समिति प्रधान, नगरीय निकाय अध्यक्ष, निवर्तमान जिला एवं मण्डल अध्यक्ष के साथ बैठक कर विस्तृत जानकारी ली। बैठक के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष सुभाष बहेडि़या के खिलाफ नारेबाजी की। नारेबाजी करने वाले भी कोई सामान्य कार्यकर्ता नहीं थे। पार्षद प्रशान्त त्रिवेदी व भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के शहर अध्यक्ष संजय ढ़ाबरिया सहित कई जानेमाने प्रमुख भाजपा कार्यकर्ता थे। बैठक के दौरान कईयों ने तो अपने बायोडेटा देते हुए टिकीट की मांग भी कर दी। जिलाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की घटना भाजपा में असंतुष्टि की ओर इशारा कर रही है। 

जिले में भाजपा के तीन धडे है। एक धड़ा जिलाध्यक्ष सुभाष बहेडि़या का है तो दूसरा विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी का। ये दोनों धड़े संघ से जुड़े हुए है। तीसरा धड़ा राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह के साथ है जो प्योर वंसुधरा राजे गुट से है। 

भाजपा के पास जनाधार वाले नेता नहीं है और ना ही कोई प्रमुख मुद्दा ही है। जिले में 7 विधानसभा सीटें है जिनमें से वर्तमान में 3 सीटें भाजपा के खाते में है। भाजपा के इनसे ज्यादा सीटें जीतने के आसार भी नजर नहीं आ रहे है। 

भाजपा न केवल जिलास्तर पर बल्कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में भी गुटों में बिखरी हुई है। सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र में एक तरफ पूर्व खाद एवं बीज मंत्री डाॅ. रतन लाल जाट है तो दूसरी तरफ पिछले विधानसभा चुनाव में वंचित कर दिए गए रूप लाल जाट है। डाॅ. रतन लाल जाट से असंतुष्ट लोगों का भी एक अलग गुट है जिसने डाॅ. जाट को पिछले दो विधानसभा चुनावों में हराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। डाॅ. जाट पिछले दो विधानसभा चुनाव हार चुके है, इस बार उनके पुत्र सुरेश चैधरी ने दावेदारी की है। 

माण्डल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के पूर्व मंत्री कालू लाल गुर्जर की प्रबल दावेदारी मानी जा रही है लेकिन इनके खिलाफ राजपूत ग्रुप सक्रिय है। सुजुकी ग्रुप आॅफ इंडस्ट्रीज के वाइस पे्रसिडेंट (कार्मिक) गजराज सिंह राणावत भी प्रबल दावेदारी प्रस्तुत कर चुके है। जिला परिषद सदस्य कमल सिंह पुरावत, छोटु सिंह (मेजा) सहित कई राजपूत नेता न केवल दावेदारी पेश कर रहे है बल्कि लामबंद हो रहे है। सूत्रों के अनुसार सांसद वी.पी. सिंह अपने पुत्र को माण्डल से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे है। ऐसे में राजनीतिक जानकारों के साथ जनता को भाजपा की खिंचतान साफ दिखाई दे रही है और बिखरती जा रही भाजपा के चर्चे चाय की दूकानों पर खूब हो रहे है। 

आसीन्द विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा 3 जातियों के गुटों में बटी है। यहां मुख्यतः गुर्जर, ब्राह्मण व राजपूत समुदाय के भाजपा के परम्परागत वोट है। गुर्जर वोट विधायक राम लाल गुर्जर, मोहरा के सरपंच हरजीराम गुर्जर (भाजपा जिला महामंत्री) व धनराज गुर्जर में बटे हुए है जबकि तीनों में खींचतान है। वहीं ब्राह्मण वोट विट्ठल शंकर अवस्थी (भीलवाड़ा विधायक) के साथ है। भीलवाड़ा विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी आसीन्द विधानसभा क्षेत्र के बदनोर कस्बे के मूल निवासी है तथा क्षेत्र में अपने समुदाय में पकड़ रखते है। राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह इस विधानसभा क्षेत्र के ही है। वे राजपूत समुदाय पर पकड़ रखते है। इन तीनों जातियों का नेतृत्व करने वालों में आपस में समन्वय नहीं है अर्थात स्पष्ट रूप से बिखराव की स्थिति है।

विधानसभा क्षेत्र शाहपुरा भी गुटबाजी से अछूता नहीं है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां भाजपा के कैलाश काबरा, रघुनन्दन सोनी व गजराज सिंह प्रमुख लोग है जो हार-जीत को प्रभावित करते है। बीजेपी के 35 लोगों की उम्मीदवारी की लम्बी सूची भाजपा में फूट को दर्शा रही है। यहां बाहरी भाजपा नेता भी हस्तक्षेप करना चाह रहे है। पिछले दो-तीन माह में कैलाश मेघवाल ने बार-बार शाहपुरा आकर अपनी उम्मीदवारी जता दी है वहीं शंभूदयाल बडगुर्जर भी उम्मीदवार की कतार में है। 

माण्डलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कीर्ति कंवर उम्मीदवारी जता रही है। पिछले चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इस बार वह पुरजोर उम्मीदवारी जता रही है वहीं राजनीति में खिलाड़ी बद्रीप्रसाद गुरूजी, करण सिंह ओस्तवाल, राजकुमार आंचलिया इत्यादि भी उम्मीदवारी कर रहे है। जिनमें से शायद ही कोई चुनाव जीत पाएगा लेकिन हां कोई भी किसी को जीतने नहीं देगा। 

पिछले चुनाव में पूरे जिले में गुटबाजी से कोई अछूता है तो वह है जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र। यहां विधायक शिवजीराम मीणा का कोई विकल्प ही नहीं है और ना ही किसी प्रकार की गुटबाजी सामने आई है।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की गुटबाजी साफ दिखाई दे रही है। वहीं भीलवाड़ा शहर की भाजपा की स्थिति को ठीक नहीं कहा जा सकता है। यह भाजपा की परम्परागत सीट है। यहां भी भाजपा 3 गुटों में बट चुकी है। जिलाध्यक्ष सुभाष बहेडि़या और विट्ठल शंकर अवस्थी में घमासान है वहीं दामोदर अग्रवाल भी प्रभावी है। उद्यमी बहेडि़या अपने कद पर तो विधायक विट्ठल शंकर अवस्थी को अपने समुदाय के वोटरों का दंभ है वहीं दामोदर अग्रवाल भी अपने समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए काटाफासी करेंगे ही। 

आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी जता रहे भाजपा के लोग गुटबाजी व राजनीतिक महत्त्वकांक्षा के चलते पार्टी सिद्धांतों को ताक में रख चुके है। सत्ता पर कौन काबिज होगा यह तो भविष्य की गर्त में छुपा है लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में भाजपा बिखरी-बिखरी हुई है। 

सिमटी-सिमटी है कांग्रेस

राजनीतिक जानकारों की माने तो बिखरने पर किसी दल को जितना नुकसान होता है उतना ही नुकसान सिमट जाने पर भी होता है। वर्तमान में जिले में कांग्रेस 3 लोगों में सिमट गई है। इन सिमटें हुए लोगों की बदौलत पार्टी केंद्रीय मंत्री डाॅ. सी.पी. जोशी पर केंद्रीत हो गई है। जिले में डाॅ. जोशी के दाएं-बाएं दो व्यक्ति है, एक तरफ पूर्व मंत्री व विधायक राम लाल जाट तथा दूसरी ओर यूआईटी चैयरमेन रामपाल शर्मा। ये दोनों की व्यक्ति जिले की कांग्रेस की कमान संभालें हुए है। इनके बूते कांग्रेस जिले में जीत का परचम लहरापाएगी ! इसमें हरेक को संशय है। 

वरिष्ठ कांग्रेसजन देवेन्द्र सिंह सहित धीरज गुर्जर, हगामी लाल मेवाड़ा जैसे असंतुष्ट लोगों की भी भरमार है। वहीं विधायक कैलाश त्रिवेदी व विधायक महावीर मोची जैसे लोग मझधार में है। मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री के दो अलग-अलग गुट है जो एक दूसरे को ठिकाने लगाने के प्रयास करेंगे। जानकारी के अनुसार वन एवं पर्यावरण मंत्री बीना काक का दामाद रिझु झुनझुनवाला भी भीलवाड़ा में अपने लिए नई जगह तलाश रहे है जो कि डाॅ. जोशी के विरोधी गुट के माने जाते है। 

बहरहाल जिले में बिखरी-बिखरी भाजपा की स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है, गुटबाजी, खिंचतान व अंतर्कलह के चलते राजनीतिक समीकरण अभी से बिगड़ने लगे है। वहीं सिमटी-सिमटी कांग्रेस सिमटते-सिमटते 2-3 लोगों में ही सिमट जाएगी जो ना एक संगठन के लिहाज से ठीक है और ना ही आगमी विधानसभा चुनाव के लिहाज से ठीक है। हालांकि चुनाव में कौन-किसको मात देगा इस पर अभी कुछ बताना जल्दबाजी होगी क्योंकि टिकट वितरण भी चुनाव में हार-जीत को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।

Tuesday, June 25, 2013

निजी बस पलटी, 2 की मौत, दो दर्जन से अधिक घायल

लखन सालवी/माण्डल/भीलवाड़ा  
दुर्घटनाग्रस्त बस को जप्त कर थाने ले जाते हुए 
25 June 2013- दोपहर करीब 1 बजे करेड़ा से भीलवाड़ा आ रही एक निजी बस माण्डल कस्बे के निकट स्थित तालाब की पाळ के पास विकट मोड़ पर अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दुर्घटना में 2 लोगों की मौत हो गई तथा दो दर्जन से अधिक यात्री घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार तालाब की पाळ के पास मोड़ पर अचानक सामने से जेसबी मशीन आ गई, बस ड्राइवर ने जेसीबी मशीन से भीडंत को बचाना चाहा और बस को नीचे उतारना चाहा, हड़बड़ाहट में बस  अनियंत्रित होकर पलटी खा गई। इस दुर्घटना में दो दर्जन से अधिक जने घायल हो गए। घायलों को माण्डल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया जहां दो दर्जन घायलों का उपचार किया गया शेष गंभीर घायलों को भीलवाड़ा रेफर किया गया। 

धीरज माली, मदन माली, रामकन्या, सम्पत हरिजन, नन्द गाडरी, प्रकाश तेली, रवि जाट, विष्णु, लादू तेली, नारायण जाट, डिम्पल कोली, हर्षिता सोनी, राजी माली, किरण कंवर और लक्की सिंह को माण्डल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जबकि 20 घायलों को महात्मा गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां घायलों का उपचार किया जा रहा है। 

2 लोगों की मौत

दुर्घटना में करेड़ा निवासी बंशीलाल सालवी व अज्ञात 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक के पास 46 हजार 500 रुपये की नकदी भी मिली है।

ये हुए घायल, जिनका महात्मा गांधी चिकित्सालय में ईलाज चल रहा है

चिलेश्वर निवासी नन्दु कंवर पत्नी शंभू राजपूत (45) भगवानपुरा निवासी शांतिदेवी पत्नी लक्ष्मीलाल पारासर (55), बगता का खेड़ा निवासी मियाराम पिता रमेमा गुर्जर (40), मालास निवासी किस्मत कंवर पुत्री पुष्करसिंह राजपूत (9 ) जगदीश कंवर पत्नी पुष्कर सिंह राजपूत (28), छोटी रूपाहेली निवासी गोटिया पिता अमरसिंह राजपूत(10), करेड़ा निवासी शबनम पत्नी वसीम बिसायती (21) मनोहरपुरा निवासी उगमनाथ पिता देवानाथ योगी (45), शिवनाथ पिता देवानाथ योगी (54), कबराडिया निवासी जमनालाल पिता काशीराम जोशी (47), चावण्डिया निवासी देऊ पत्नी नन्दलाल बलाई (55) नन्दलाल पिता मांगीलाल बलाई (35), बोरखेड़ा निवासी मिठू कंवर पत्नी धनसिंह राजपूत (40), गलवा निवासी नन्दकंवर पत्नी महेन्द्रसिंह (30), करेड़ा निवासी भंवरी बाई पत्नी भीखा गुवारिया (45), कबराडिया निवासी सीतादेवी पत्नी कैलाश चन्द्र जोशी (42), चिलेश्वर निवासी प्रमोद कंवर पत्नी गणपतसिंह राजपूत (18)।

महात्मा गांधी चिकित्सालय में
घायलों की कुशलक्षेम पूछते जनप्रतिनिधि
प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी पहुंचे घायलों की सुध लेने

दुर्घटना की सूचना मिलने के तुरन्त बाद माण्डल क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने महात्मा गांधी चिकित्सालय पहुंचकर घायलों की सुध ली। 

प्रशासनिक अधिकारियों में माण्डल के उपखण्ड अधिकारी नरेन्द्रसिंह तथा तहसीलदार गोपीलाल चन्देल घायलों से मिले। वहीं जनप्रतिनिधियों में भाजपा के बनेड़ा मण्डल अध्यक्ष गजराज सिंह राणावत, अनुसूचित जाति मोर्चा (भाजपा) के मण्डल अध्यक्ष राजमल खींची, माण्डल के प्रधान गोपाल सारस्वत, पूर्व मंत्री कालू लाल गुर्जर व डेयरी चेयरमेन रतन लाल चौधरी तथा सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी, महिपाल वैष्णव, गौभक्त देबी लाल मेघवंशी, लादू लाल मेघवंशी इत्यादि ने घायलों से मिलकर कुशलक्षेम पूछी व घायलों के परिजनों को ढांढस बंधाया। 

कौन था ड्राइवर, किसकी है बस ?

पुलिस को अभी तक ड्राइवर की जानकारी नहीं मिल पाई है। माण्डल थाने से प्राप्त सूचना के अनुसार दुर्घटना के बाद से ही ड्राइवर का पता लगाया जा रहा है लेकिन अभी तक बस ड्राइवर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। बस के कंडेक्टर का मोबाइल स्वीच आॅफ पाया गया जिस कारण ड्राइवर व बस मालिक के बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं मिल पाई है। 

बस ( आरजे 06 पीए 2851) को जप्त कर लिया गया है। ड्राइवर के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है तथा बस के कागजात नहीं मिल पाने के कारण बस मालिक के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।- गौरव यादव, थानाधिकारी-माण्डल।