Sunday, February 3, 2013

मियाला में सालवी समाज का विवाह सम्मेलन सम्पन्न


29 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में 

  • लखन सालवी

1 फरवरी को राजसमन्द जिले के मियाला गांव में सालवी समाज द्वारा सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में 29 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। उल्लेखनीय है कि मियाला गांव में सालवी समाज के आराध्य देव रूणिचा के श्री बाबा रामदेव के काका श्री धनराजजी की समाधी स्थित है और प्रति वर्ष भादवा माह की बीज पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।

सम्मेलन में मेवाड़ व मारवाड़ क्षेत्र के सालवी समाज के करीबन 25000 महिला पुरूषों ने भाग लिया। सम्मेलन में पूर्व मंत्री कैलाश मेघवाल, डॅा. अशोक मेघवाल, पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह रावत, पूर्व विधायक बंशी लाल गहलोत, ब्यावर के अर्जुनराम दुखाडि़या, भीलवाड़ा के भंवर मेघवंशी, भीलवाड़ा जिला प्रमुख सुशीला सालवी, गंगापुर के मोहन लाल बलाई, आसीन्द के बहादुर मेघवंशी, देवगढ़ के किशन लाल सालवी, सहित कई समाजसेवियों ने भाग लिया।

ताकत पदों में नहीं . . . समाज में है - मेघवंशी

सम्मेलन के दौरान आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के दौरान सम्मेलन में आए मेवाड़ व मारवाड़ क्षेत्र की सभी बैठकों के अध्यक्षों एवं अतिथियों का साफा बंधवाकर स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने नव विवाहितों के मंगल जीवन की कामनाएं करते हुए कहा कि यह संतों का समाज है। इस समाज में गोकुलदास महाराज, गरीब साहेब महाराज, अणछी बाई जैसे ओजस्वी संतों ने जन्म लिया। हमें अपने समाज के महान संतों के उपदेशों को जीवन में उतारना चाहिए और बाबा भीमराव अम्बेडकर की विचारधारा पर चलते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह न केवल विवाह सम्मेलन है बल्कि समाज की एकजुटता का परिचायक है। सम्मेलन से समाज की एकजुटता व ताकत नजर आती है। उन्होंने कहा कि समाज के कई लोग समाज की बदौलत उच्चे पदों तक पहुंच जाते है। लोग समझने लगते है कि उच्चे पदों में ताकत होती है जबकि ताकत पदों में नहीं . . . समाज में होती है। 

भंवर मेघवंशी ने कहा कि कमजोर वर्ग के साथ छलावा हो रहा है और दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज को राजनैतिक रूप से मजबूत बनाना है और राजनीतिक ताकत को बढ़ाकर समाज को आगे लाना है। ना किसी एक राजनैतिक पार्टी से जुड़ना है और ना ही राजनीति से दूर रहना है। 

आशीर्वाद समारोह को सम्बोधित करते हुए पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह ने कहा कि होड़ के इस दौर में विवाह कार्यक्रमों में खर्च बढ़ता जा रहा है। बढ़ते हुए खर्च में लोग दबते जा रहे है। ऐसे में मितव्ययता की दिशा में इस प्रकार के विवाह सम्मेलन बहुत ही महत्वपूर्ण है। 

कार्यक्रम में शिरकत करने आई भीलवाड़ा की जिला प्रमुख सुशीला सालवी ने कहा कि समाज में जागृति आई है। समाज की बेटियां पढ़ लिख रही है और आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर बेटियों को सम्मान मिलेगा तो वो और आगे बढ़ पाएगी। 

बनाओं बाबा रामेदव सेना - मेघवाल

पूर्व मंत्री कैलाश मेघवाल ने समारोह में शिरकत कर रहे समाज के लोगों से आव्हान् करते हुए कहा कि सामूहिक विवाह की प्रवृति को अधिकाधिक प्रयोग में लाया जावें। उन्होंने कहा कि मन की भावना से इस प्रकार के आयोजन किए जाए। ऐसे आयोजन बहुउद्देशीय हो जाते है। यह आयोजन मितव्ययता का सार्थक परिणाम तो है ही साथ ही इस प्रकार के आयोजनों से समाज जुड़ता है तथा समाज के लोगों में परस्पर प्रेम भाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में कई लोग मंचों पर बोलना भी सीख रहे है, समाज की महिलाओं को भी बोलने का मौका मिल रहा है। महिलाएं आगे आई है और बोल रही है, भीलवाड़ा जिले की समाज की बेटी जिला प्रमुख बनी और राजनीति में भूमिका निभा रही है। आज उसे मंच पर बोलते देख अच्छा लगा कि वो बोलना सीख रही है। 

मेघवाल ने अपने संबोधन में समाज को संगठित होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि आज बुनकर समाज विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है। कहीं सूत्रकार तो कहीं सालवी, कहीं बुनकर तो कहीं बलाई, कहीं मेघवाल तो कहीं मेघवंशी के नाम से जाना जाता है। लेकिन विभिन्न नामों से जाने जाना वाले इस ‘सूत कातने वाले’ समाज को एकजूट होना है। उन्होंने कहा कि ‘सरनमे’ की कोई परवाह नहीं है, जिसे जो नाम अच्छा लगे वो उस नाम का उपयोग करें लेकिन जब समाज की एकजुटता की बात आए तो सभी एक जाजम पर एक साथ बैठे। 

मेघवाल ने कहा कि हम सभी बाबा रामदेव को मानने वाले है, सभी रामदेव पीर की जय बोलते है। राज्य की सबसे ज्यादा जनसंख्या अनुसूचित जाति व जनजाति की है। अनुसूचित जाति की बलाई, रेगर, बैरवा, सहित कई जातियों के लोग बाबा रामेदव को मानते है। ये सभी बाबा रामदेव को अपना आराध्य देव मानते है। दलितों के देव कहे जाने वाले बाबा रामदेव को सभी धर्मों के लोग मानते है। हिन्दू उन्हें अपने आराध्य देव मानते है वहीं वो मुसलमानों के पीर कहलाते है। साम्प्रदायिक सद्भाव का इससे बड़ा उदाहरण कहीं ओर देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने समाज को जागरूक होकर संगठित होने का आव्हान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है अपनी साम्प्रदायिक एकता को दिखाने का और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग को मिलकर बाबा रामदेव की सेना बनाने का।


अखिल भारतीय सालवी महासभा एवं विकास संस्थान की ओर से मियाला में हुए इस सामूहिक विवाह सम्मेलन में 29 वर-वधु परिणय सूत्र में बंधे। 1 फरवरी को सुबह 7 बजे से विवाह सम्मेलन की रस्में पूरी हुई। वर-वधुओं की बैंड-बाजों के साथ सामूहिक बिन्दौली निकाली गई।

आयोजन स्थल पर बनाए गए विशेष विवाह मण्डप में तोरण की रस्में हुई। पंडित मूलाराम आर्य व धर्मवीर आर्य ने पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न कराया। वहीं दोपहर में आयोजित हुए आशीर्वाद समारोह की अध्यक्षता पूर्व मंत्री कैलाश मेघवाल ने की। समारोह के मुख्य अतिथि सांसद गोपाल सिंह शेखावत थे। विशिष्ठ अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री लक्ष्मण सिंह रावत, पूर्व विधायक बंशीलाल गहलोत, भंवर मेघवंशी, भीलवाड़ा की जिला प्रमुख सुशीला सालवी व देवगढ़ के प्रधान हमीर सिंह रावत उपस्थित थे।अतिथियों का आयोजकों की ओर जेठाराम ने स्वागत किया। सम्मेलन को सफल बनाने में वेणाराम नागर, रूपाराम जलवाणिया, देवी लाल नगोड़ा, नाथूराम मेलका, अरूण कुमार बरोला, डाउराम मेमात, भीमराज भाटी, हरीश कुमार, गणेशराम भाटी, घीसूलाल, पुखरात, खीमाराम कटारिया, दुर्गालाल, कालूराम इत्यादी का सराहनीय सहयोग रहा।
बहरहाल क्षेत्र के 29 जोड़ों का विवाह सम्मेलन सम्पन्न हो गया है। दूल्हें अपनी दुल्हनों के साथ दाम्पत्य जीवन जीने के लिए अपने-अपने घरों में पहुंच चुके है वहीं सम्मेलन में आशीर्वाद समारोह में पूर्व मंत्री कैलाश मेघवाल द्वारा किए गए आव्हान् पर समाज के लोगों ने एकजुट होना आरम्भ कर दिया है और जमीनी स्तर पर बाबा रामदेव सेना का निर्माण आरम्भ हो गया है। वहीं क्षेत्र के भाजपा व कांग्रेस के नेताओं की नींद हराम हो गई है क्योंकि उन्हें दलित व अल्पसंख्यक वोट बैंक अपने पाले से बाहर जाता दिखाई दे रहा है।

Sunday, January 6, 2013

बलाई (बुनकर) अब नीच कैसे हो गए ?


हर जगह सुनने को मिलता है कि सूचना एवं क्रांति के इस आधुनिक युग में छुआछूत जैसी दुर्भावनाएं नहीं रही है, लेकिन ये सच नहीं है। कथित सवर्ण समुदायों के लोगों की सवर्णवादी मानसिकता बढ़ती जा रही है। वहीं दलित मुद्दों पर काम कर लोगों की माने तो उनका कहना है कि ‘‘सवर्ण समुदायों के लोगों की मंदिरों की सम्पत्ति पर गिद्ध दृष्टि है, वो माहौल बनाकर दलित पुजारियों को मंदिर से बेदखल करते है और फिर मंदिर की सम्पति पर कब्जा कर लेते है। मंदिरों से दलित पुजारियों को बाहर निकालने की घटनाओं पर नजर डाले तो इन दलित कार्यकर्ताओं की बातें कटु सत्य प्रतीत होती है। यह सच है, वरना थला गांव का बलाई जाति का परिवार बरसों बाद नीच कैसे हो गया ?

भीलवाड़ा जिले की रायपुर तहसील के थला गांव में दलित पुजारी को मंदिर व मंदिर की कृषि भूमि से यह कहते हुए बेदखल कर दिया कि ‘‘तुम नीच जात के हो, आज के बाद मंदिर में मत आना वरना गांव से बाहर कर देंगे।’’ यही नहीं बरसों पहले देवनारायण मंदिर परिसर में दलित पुजारी हजारी लाल बलाई द्वारा बनाई गई सार्वजनिक सराय को भी तोड़ दिया। 

जानकारी के अनुसार रायपुर तहसील के थला गांव के लेहरू लाल बलाई के पिता ने कई बरसों पूर्व गांव मंे ही स्थित देवनारायण मंदिर के पास लोगों के बैठने के लिए एक सार्वजनिक सराय का निर्माण करवाया था। तब से ही आमजन उस सराय का उपयोग करते आ रहे है। लेकिन 20 नवम्बर 2012 को सुबह कुमावत जाति के भगवान लाल, लादूलाल, गणेश लाल, पारस लाल, भैरू लाल व भोजाराम सहित कुमावत जाति के अन्य लोगों ने हमसलाह होकर उस सार्वजनिक सराय को तोड़ दिया। लेहरू लाल ने सराय को तोडने का विरोध किया तो आरोपियों ने उसके साथ दुव्यर्वहार करते हुए जातिगत गालियां निकाली। यही नहीं आरोपियों ने दलित लेहरू लाल को धारदार हथियार से मारने का प्रयास भी किया। लेहरू लाल बलाई ने रायपुर थाने में इस आशय की रिपोर्ट दी है। पुलिस राजनेताओं के दबाव में है और अभी तक आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है। भट्ट ग्रंथ (भाट की पौथी) के अनुसार लेहरू लाल के पूर्वज पीढि़यों से देवनारायण मंदिर की पूजा करते आ रहे है। 

मेरे दादाजी (अमरा लाल बलाई) ने बरसों पहले देवनारायण मंदिर का निर्माण किया था। मूर्ति स्थापना के बाद से ही मेरे दादाजी मंदिर की पूजा अर्चना करते रहे। बाद में मेरे पिता (हजारी लाल बलाई) ने मंदिर के पास ही एक सराय का निमार्ण किया। मंदिर की पूजा अर्चना शुरू से ही मेरे परिवारजन करते रहे लेकिन करीब 20 साल पहले कुमावत जाति के दंबग लोगों ने मेरे को पिता को मंदिर से बेदखल कर निकाल दिया और स्वयं पूजा करने लगे। मेरे पिता ने मंदिर से बेदखल करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। वो मामला अभी तक न्यायालय में विचाराधीन है। अब कुमावत जाति के लोगों ने मंदिर के नाम दर्ज कृषि भूमि पर से भी हमें बेदखल कर उस पर कब्जा कर लिया है। हमने न्यायालय की शरण ली है। - लेहरू लाल बलाई, गांव-थला, तहसील-रायपुर, जिला-भीलवाड़ा (राज.) 

भीलवाड़ा जिले के माण्डल विधानसभा क्षेत्र के सूलिया गांव में दलित पुजारी को मंदिर पर प्रवेश नहीं करने दिया गया नतीजा दलित संगठित हुए और आंदोलन किया और गुर्जर जाति के लोगों के भारी विरोध और धमकियों के बावजूद मंदिर में प्रवेश करके दम लिया। जानकारी के अनुसार सूलिया में स्थित देवनारायण मंदिर की पूजा पीढि़यों से बलाई समुदाय के पुजारी करते आ रहे थे। तत्कालीन गुर्जर जाति के लोगों को दलित पुजारियों से कोई आपत्ति नहीं हुई। लेकिन वर्ष 2006 (सूचना एवं क्रांति का समय) में गुर्जरों ने दलित पुजारियों को मारपीट कर मंदिर से बेदखल कर दिया। हालांकि दलित पुजारियों ने संघर्ष कर पुनः पूजा के अधिकार को प्राप्त कर लिया। माना जाता है कि इस मामले में तत्कालीन पूर्व मंत्री कालू लाल गुर्जर ने अपने समुदाय के लोगों की मदद की। गुर्जरों की दादागिरी से पीडि़त दलित वर्ग एकजुट हुआ आगामी विधानसभा चुनावों में कालु लाल गुर्जर को हार का मुंह देखना पड़ा।

कुछ महीनों पूर्व जिला प्रमुख सुशीला सालवी के पीहर थाणा गांव में दलित पुजारी जयराम बलाई को मंदिर और मंदिर की कृषि भूमि से बेदखल कर दिया। जयराम बलाई की निजी सम्पत्ति को भी गुर्जरों ने नष्ट कर दिया। जयराम बलाई की ओर से पुलिस थाना करेड़ा में 2 एफआईआर दर्ज है। अब 2012 के आखिरी माह में रायपुर तहसील के थला गांव में कथित सवर्ण कुमावत जाति के लोगों ने देवनारायण मंदिर परिसर में दलितों द्वारा बनाई गई सार्वजनिक सराय को यह कहते हुए ढ़हा दिया कि ‘‘बलाईयों द्वारा बनाई सराय को यहां नहीं रहने देंगे।’’ यही नहीं उन्होंने राजस्व रिकार्ड में दलित पुजारी के नाम दर्ज मंदिर की जमीन से दलित पुजारी के परिवार को बेदखल करते हुए उस पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

पिछले कुछ सालों में अकेले भीलवाड़ा जिले में दलितों को मंदिर में नहीं जाने देने व बरसों से मंदिर की पुजा अर्चना करते आ रहे दलित पुजारियों को मंदिर से बेदखल करने की कई घटनाएं हुई। लेकिन दलित संघर्ष कर अपने अधिकारों को पाने में कामयाब रहे - परसराम बंजारा, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान

*लेखक खबरकोश डॅाटकॅाम के सहसंपादक है। 

Wednesday, January 2, 2013

भीलवाड़ा जिले का सियासी हालचाल


  • लखन सालवी
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री डॅा. सी.पी. जोशी का संसदीय क्षेत्र भीलवाड़ा कभी राजनीतिक रूप से कांग्रेस के लिये गढ़ हुआ करता था वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिये भी अत्यन्त महत्वपूर्ण था, भीलवाड़ा जिले ने राज्य को 3 बार प्रतिनिधित्व करने वाला मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर दिया, कभी गिरधारी लाल व्यास प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे, इस तरह मेवाड़ में भीलवाड़ा अह्म स्थान रखता रहा है।
जाट                              जोशी                               शर्मा
कभी सत्ता की धुरी बने रहने वाला भीलवाड़ा अब राज्य मंत्रीमण्डल में एक अदद मंत्री पद के लिये भी तरसा हुआ है जबकि 7 विधानसभाओं में से 4 पर कांग्रेस काबिज है, कांग्रेस की आपसी फूट फजीहत और गुटबाजी के चलते सत्ता में होकर भी कांग्रेसजन सत्ता का स्वाद नहीं ले पा रहे है, विधानसभा चुनाव के बाद से ही रामलाल-रामपाल की जोड़ी ही जिले के हर फैसले करती रही है, बाद में लोकसभा में भीलवाड़ा से जीतकर पहुंचे डॅा. जोशी के बाद जाट-जोशी-शर्मा’ की तिकड़ी ने सत्ता प्रतिष्ठान पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली जिसके चलते विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, युवक कांग्रेस नेता धीरज गुर्जर तथा हगामी लाल मेवाड़ा जैसे कांग्रेस नेता हाशिये पर चले गये तथा जाट-जोशी-शर्मा’ समूह ने पूरी तरह शासन सत्ता और प्रशासन पर पकड़ बना ली। आज जबकि विधानसभा चुनावों में महज एक साल बचा है, ऐसे वक्त में भी जिले में कांग्रेस बुरी तरह से गुटबाजी की शिकार है और कांग्रेसी नेता एक दूसरे को निपटाने के लिये कमर कसे हुये है।
हरेक विधानसभा क्षेत्र का विश्लेषण करने से पहले हमें मुख्य विपक्षी दल भाजपा के अन्दरूनी हालातों पर भी नजर डाल लेनी चाहिए, कहा जा सकता है कि कांग्रेस के हालात से भी भाजपा के हालात अधिक बदतर है जिलाध्यक्ष सुभाष बहेडि़या जो कि नितिन गड़करी की भांति एक उद्यमी है तथा अपनी उद्यमिता एवं ऐश्वर्य के चलते संघ परिवार के आशीर्वाद के पात्र भी है, उनका भी एक गुट बना हुआ है जिसमें अधिकांशतः जनाधार विहीन नेता है, वहीं वसुंधरा राजे खेमे के खास सिपहसालार राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह का गुट हैं, संघ और वसु ग्रुप दोनों ही एक दूसरे को निपटाने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते है। फलस्वरूप एक रचनात्मक विपक्ष के बजाय भीलवाड़ा भाजपा गुटबाजियों में फंसा हुआ एक दबाव समूह ज्यादा दिखाई पड़ती है।
वर्तमान में जिले में भाजपा के 3 विधायक है। भीलवाड़ा से विट्ठल शंकर अवस्थी जो कि संघ के बेहद प्रतिबद्ध स्वयंसेवक और लोकप्रिय नेता है, उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है, वहीं आसीन्द विधायक रामलाल गुर्जर, अपनी सादगी और सरल स्वभाव के चलते तथा ‘ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर’ की नीति पर सतत चलायमान है किंतु यह माना जा रहा है कि इस बार उन्हें गुर्जर समाज के धर्म स्थल सवाईभोज के मुखिया मंहत भूदेवदास अथवा हरजीराम गुर्जर से कड़ी चुनौती मिल सकती है वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मावे के प्रतिष्ठित व्यवसायी शांति लाल गुर्जर को भी मैडम आसीन्द विधानसभा क्षेत्र से चांस दे सकती है। वहीं आसीन्द में कांग्रेस से रामलाल जाट का आगमन तय माना जा रहा है, वहीं नगर पालिका चैयरमेन हगामी लाल मेवाड़ा किसी भी कीमत पर चुनाव लड़ने पर आमदा है, अगर ऐसा होता है तो रामलाल जाट के लिए यह चुनाव काफी चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन गुटबाजी में बिखरी भाजपा उनके लिये सुकुन की बात होगी। आसीन्द में दलितों व आदिवासियों की भी मजबूत स्थिति है तथा वे अगर कांग्रेस का साथ नहीं देते है तो कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के लिये जीत हासिल कर पाना लगभग असंभव ही होगा।
धीरज गुर्जर
वहीं जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक शिवजीराम मीणा का कोई विकल्प नजर नहीं आता है, इस बार भी उन्हीं को टिकट मिलना तय माना जा रहा है और जीत के भी कयास लगाए जा रहे है क्योंकि जहाजपुर में कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार धीरज गुर्जर पूर्व मंत्री रतन लाल ताम्बी तथा यूआईटी भीलवाड़ा के चैयरमेन रामपाल शर्मा के चक्रव्यूह से जूझ रहे है। कहा जा रहा है कि डॅा. जोशी भी उन्हें नापसंद करते है। ऐसे में उनका जहाजपुर से टिकट भी खटाई में पड़ सकता है मगर हेम सुल्तानिया व पृथ्वीराज मीणा आदि धीरज गुर्जर के साथ पूरी शिद्दत से लगे हुए है। माण्डलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के वर्तमान विधायक पी.के. सिंह को प्रधान गोपाल मालवीय तथा पूर्व विधायक भंवर लाल जोशी से सावधान रहने की जरूरत है, वहीं बृजराज कृष्ण उपाध्याय, कैलाश मीणा तथा इंजिनियर कन्हैया लाल धाकड़ भी दौड़ में शरीक है, भाजपा के बागी बद्री प्रसाद गुरूजी भी भाजपा में वापसी का रास्ता तलाश रहे है, मगर उन्हें कोई खिड़की दरवाजा ही नजर नहीं आ रहा है।
भीलवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में बहेडिया की चाल गुलाबचंद कटारिया को लाकर विट्ठल शंकर अवस्थी को साफ कर देने की है मगर कटारिया छोटी सादड़ी के अपने पुराने क्षेत्र को टटोल रहे है, ऐसे में उनका भीलवाड़ा आना संदिग्ध ही है तब भाजपा की मजबूरी होगी कि वह अवस्थी को ही दोहराये। कांग्रेस के लिये तो अनिल डांगी, ओम नराणीवाल जैसे चूक चूके नेता ही बचे है भीलवाड़ा प्रयोग हेतु . ., लेकिन शहर के मुसलमानों की कांग्रेस से नाराजगी को दूर करने के लिये कांग्रेस यहां से अल्पसंख्यक कार्ड भी खेल सकती है तथा पूर्व विधायक हफीज मोहम्मद के पुत्र याकूब मोहम्मद को उम्मीदवारी मिल सकती है, वैसे लाइन में तो नगर परिषद में विपक्ष के नेता अब्दुल सलाम मंसूरी भी है मगर उन्हें कोई भी सीरियस नेता ही नहीं मानता है, शहर में अरविन्द केजरीवाल की ‘‘आप’’ समेत कई छुटपुट पार्टियां भी है मगर उन्हें जनता वोट देकर अपना मत गंवाना उचित नहीं समझेगी, फिल्म कलाकार राजू जांगिड़ भी इस बार भीलवाड़ा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दावेदारी कर रहे है वहीं कुछ लोग दबी जबान से यह भी कहते पाये जाते है कि कांग्रेस और भाजपा नों में ही बाहरी उम्मीदवार की संभावना है।
कालु लाल गुर्जर
गजराज सिंह राणावत
जिला मुख्यालय से निकटवर्ती माण्डल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के सबसे प्रबल दावेदार पूर्व मंत्री कालू लाल गुर्जर है, जिन्हें सुजुकी प्रोसेस के जनरल मैनेजर और बनेड़ा के पूर्व प्रधान गजराज सिंह की मजबूत चुनौती झेलनी पड़ रही है तथा राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि भाजपा इस बार माण्डल क्षेत्र में राजपूत समाज के गजराज सिंह को टिकट देने का मन बना चुकी है क्योंकि कालु लाल गुर्जर से कार्यकर्ता तो नाराज है ही, गुर्जर समुदाय के उम्मीदवार से दलित सहित कई जातियां भी नाखुश है।
कांग्रेस के वर्तमान विधायक तथा पूर्व मंत्री राम लाल जाट के क्षेत्र बदलने की चर्चा जोरों पर है, ऐसे में उनके विकल्प के रूप में रामपाल शर्मा अथवा उनकी पत्नि मोना शर्मा को लोग स्वाभाविक रूप से उम्मीदवार के रूप में देख रहे है। निम्बाहेड़ा जाटान के पूर्व सरपंच गोपाल तिवाड़ी ने अपनी आर्थिक सुदृढ़ता और अपने छोटे भाई विनोद तिवाड़ी को ब्लॅाक कांग्रेस का अध्यक्ष बनवाकर राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया है तथा उन्होंने कांग्रेस टिकट की दावेदारी करने तथा टिकट नहीं मिलने पर बसपा अथवा निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली है ऐसा बताया जा रहा है। प्रबल दावेदार के रूप में पूर्व विधायक विजय सिंह के सुपुत्र राजपुरा ठाकुर दुर्गपाल सिंह का भी नाम सामने आ रहा है, उन्होंने भी टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा करके सबको चकित कर दिया है।
कैलाश त्रिवेदी
रायपुर-सहाड़ा क्षेत्र की भाजपा डॅा. रतन लाल जाट तथा रूप लाल जाट नामक दो खेमों में स्पष्ट विभक्त है, लादू लाल पितलिया की इस बार उम्मीदवारी प्रबल है मगर पूर्वमंत्री डॅा. रतन लाल जाट की पकड़ क्षेत्र व ऊपर मजबूत हुई है। इस बार उनका पुत्र कमलेश चौधरी (प्रधान-पंचायत समिति सहाड़ा) भी है तथा डॅा. जाट पूरे वक्त खूब सक्रिय है, ऐसे में उन्हीं को टिकट मिलेगा, ऐसा माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस के वर्तमान विधायक कैलाश त्रिवेदी को भूमि विकास बैंक के चैयरमेन चेतन प्रकाश डिडवाणिया के अलावा कोई खास चुनौती नहीं है तथा उन्होंने भी अपनी पकड़ बरकरार रखी है।
बनेड़ा-शाहपुरा की सुरक्षित सीट पर वर्तमान में महावीर जीनगर कांग्रेस के विधायक है, इस बार जाट-जोशी-शर्मा’ तिकड़ी जिला प्रमुख सुशीला सालवी को उम्मीदवार बनाने जा रही है, जिनकी बहुत बुरी हार की भविष्यवाणी अभी से की जा सकती है। वहीं जिला चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॅा. आर.सी. सामरिया के भी चुनाव मैदान में कांग्रेस से उतरने की संभावना है। प्यारे लाल खोईवाल जैसे नेताओं के भी नाम यदाकदा सामने आते है। कहा जा रहा है कि जनता इन्हें वोट नहीं देगी इसलिये पार्टी भी इन्हें टिकट नहीं देगी। मगर कुछ स्थानीय नेता जरूर कोशिश में लगे हुये है जिनमें अम्बेड़कर मंच के नेता देबी लाल बैरवा का नाम प्रमुख है। भाजपा इस बार शाहपुरा से पूर्व मंत्री मदन दिलावर को उम्मीदवार बनाने जा रही है, संघ के लोग भी दिलावर को चाहते है मगर वसु खेमा उन्हें निपटाने के लिये कमर कसे हुये है वहीं सुभाष बहेडि़या मदन दिलावर को लाने पर आमदा है जिसका तमाम स्थानीय लोग अभी से विरोध जता रहे है, वहीं कालु लाल गुर्जर रामदेव बैरवा नामक (बसपा से कांग्रेस होते हुये भाजपा में पहुंचे) युवानेता को आगे किये हुये है वहीं भवानी राम मेघवंशी, गोपाल बुनकर, नाथु लाल बलाई, राजू खटीक, प्रभु खटीक, अविनाश जीनगर, मोहर रेगर आदि भी चुनाव तैयारियों में जुटे हुये है लेकिन भाजपा हो अथवा कांग्रेस शाहपुरा में दोनों पार्टियां आपसी गुटबाजी व सिर फुटौव्वल के चलते एक दूसरे को ठिकाने लगाने में मशगूल है, रिजर्व सीट का निर्णय जनरल लोगों के जरिये ही होता है जबकि जनरल सीटों का निर्णय जिले में दलित आदिवासी करते है, ऐसे में देखते है कि किसका भाग्य प्रबल होता है जो राज्य विधानसभा की दहलीज तक पहुंचता है। फिलहाल तो चौसर बिछ रही है, शतरंज के पासे अभी चलने बाकी है। किसी ने ठीक ही तो कहा है - चांदनी बाकी है और शराब बाकी है, अभी तो तेरे मेरे बीच सैकड़ों हिसाब बाकी है। तो इंतजार कीजिये राजनीतिक नफे नुकसान और सियासी हिसाब किताब का।
 लेखक  www.khabarkosh.com के Sub-editor है।

Saturday, November 17, 2012

दलित महिला से सामूहिक बलात्कार की कोशिश


नाकाम रहने पर पांव तोड़ा, पीडि़ता के परिवार ने गांव छोड़ा 

पीडि़ता कमला बलाई (बदला हुआ नाम) पैर पर लगी चोट दिखते हुए
भीलवाड़ा (लखन सालवी) - जिले के दंतेड़ी गांव के दो गुर्जर युवकों ने एक दलित परिवार की विवाहिता महिला के साथ न केवल बलात्कार करने का प्रयास किया बल्कि विरोध करने पर उसके घर पर धावा बोल कर उसके पति, ससुर, सास तथा देवर के साथ लाठियों से मारपीट की और पीडि़ता का पांव तोड़ दिया।
करेड़ा क्षेत्र में जमीनों को बेचने से मिले अपार धन के मद में मस्त लोगों की दादागिरी साफ दिखाई दे रही है। दंतेड़ी में बलाई जाति की विवाहित महिला के साथ हुआ बलात्कार का प्रयास इसी का एक उदाहरण है।
करेड़ा थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार 25 अगस्त को 23 वर्षीय कमला देवी (बदला हुआ नाम) अपने खेतों में बकरियां चरा रही थी। सायं करीब 4 बजे दंतेड़ी गांव के गुर्जर जाति के दो युवक गेहरू व भालू गुर्जर वहां आए। उन्होंने दूर से ही कमला को आवाज देकर कुकर्म करवाने को कहा। जब कमला उनके पास नहीं गई तो दोनों उसके पास पहुंच गए और उसे पकड़ कर उसके साथ छेडछाड़ की, उसे घसीटते हुए दूर तक ले गए और निर्वस्त्र कर बलात्कार करने की कोशिश की। बचाव के लिये कमला जोर-जोर से चिल्लाई तो वो दोनों उसे छोड़कर भाग छूटे। कमला वहां से तुरन्त घर गई और अपने पति को पूरी बात बताई। इतने में वो गेहरू व भालू गुर्जर पीडि़ता के घर से बाहर होकर जाते हुए दिखे तो पीडि़ता के पति ने उन्हें उलाहना दिया। इस पर वो पीडि़ता के पति को जातिगत गालियां निकालते हुए तथा जान से मार देने की धमकी देते हुए वहां से चले गए।
अत्याचारियों का इतने से भी मन नहीं भरा तो सायं करीब 6.30 बजे गेहरू व भालू गुर्जर अपनी जाति के अन्य 20-25 लोगों के साथ हाथों में लाठियां लेकर पीडि़ता के घर पहुंचे और गालियां देते हुए पीडि़ता के परिवार पर हमला कर दिया। पीडि़ता ने बताया कि गेहरू व भालू ने यह कहते हुए मुझे उठाकर पटका कि-बलाइटी तूने खेत वाली बात अपने पति को क्यों बताई ? उसने बताया कि जातिगत गालियां निकालते हुए केसु पिता नगजीराम गुर्जर, रेखा पिता बख्तावर गुर्जर, गिरधारी पिता बख्तावर गुर्जर, नारायण पिता बक्षु गुर्जर, मिट्ठु पिता बक्षु गुर्जर, नारायण पिता भोजा गुर्जर, ईश्वर पिता हीरा गुर्जर, राजु पिता हीरा गुर्जर ने मेरे पति, सास-ससुर एवं देवर सहित परिवार के सभी जनों के साथ लाठियों से बुरी तरह मारपीट की और भाग गए। परिवार के हम सभी लोग चोटिल हो गए, मेरा पति लहुलुहान हो गया तथा मेरा पैर फेक्चर हो गया। रात में हम भीलवाड़ा गए और चिकित्सालय में इलाज करवाया।
पीडि़ता ने 25 अगस्त को ही रात 11.15 बजे करेड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी। पुलिस ने भारतीय दण्ड संहिता की धारा 143, 323, 447, 354, 452 तथा अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (i)(iii)(x)(xi)(xii) के तहत मामला दर्ज किया तथा मामले की जांच गंगापुर वृत्त के पुलिस उपाधीक्षक सत्यनारायण कन्नौजिया कर रहे है।
डीवाईएसपी सत्यनारायण कन्नोजियां ने बताया कि पीडि़ता की लिखित रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है। मौका परचा बना लिया गया है तथा पीडि़तों के बयान ले लिए गए है। 30 अगस्त को दंतेड़ी के गुर्जर जाति के लोग मेरे पास आए, उनका कहना है कि कमला बलाई ने कई निर्दोष युवकों के खिलाफ भी रिपोर्ट दी है। कन्नोजिया ने कहा कि 3 सितम्बर को दोनों पक्षों को आमने सामने बिठाकर असली आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी।
अभी तक पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। आरोपी खुलेआम हाथों में लाठियां लेकर घूम रहे है। वहीं दंतेड़ी गांव में दलित बलाई समुदाय के 30-40 परिवार है। इस पूरे घटनाक्रम से सभी परिवारों के लोग सहमें हुए है। पीडि़त परिवार के लोग तो गांव छोड़कर अन्यत्र चले गए है। परिवार के मुखिया का कहना है कि आरोपी हम पर पुनः हमला कर हमें मार सकते है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही क्षेत्र में राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस व भाजपा से जुड़े गुर्जर नेता अपनी जाति के लोगों को बचाने की जुगत में लग गए है। वो पीडि़त पक्ष के लोगों को भावनाओं में बांधकर समझौता कर लेने के प्रयास कर रहे है। कुछ लोग डरा-धमका कर समझौता करने की प्रयास कर रहे है। तंग आकर दलित परिवार गांव छोड़कर अन्यत्र चला गया है।
शुद्र विकास सेवा संस्थान के संस्थापक गोपाल लालावत का कहना है कि गुर्जरों ने हमसलाह होकर दलित परिवार की महिलाओं व पुरूषों पर लाठियों से हमला कर उन्हें घायल कर दिया, विवाहित महिला के साथ बलात्कार करने की कोशीश की। इतने बड़े संगीन अपराध करने वालों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है, इससे साफ जाहिर है कि जिले का पुलिस प्रशासन दलितों के प्रति संवेदनशील नहीं है और ना ही यहां के जनप्रतिनिधि संवेदनशील है।
दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के जिला संयोजक महादेव रेगर ने कहा कि अगर दलितों पर अत्याचार करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय पर विशाल जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।

ये सरकार बदलने की शुरूआत है


भीलवाड़ा (लखन सालवी). भीलवाड़ा नगर परिषद के पार्षद के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत और बारां के अटरू में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत को वर्तमान कांग्रेस सरकार को बदल देने का आगाज माना जा रहा था। लेकिन हाल में हुए कॉलेज चुनावों से यह स्पष्ट हो गया है कि अब हर कोई इस सरकार को बदलने पर आमादा है। कॉलेज चुनावों के परिणामों के बाद से लोगों में सरकार को लेकर खासी चर्चा है। लोग कह रहे है कि सरकार बदलने की शुरूआत युवाओं ने कर दी है और आगामी चुनावों में कांग्रेस सरकार को हार का मुंह देखना पड़ेगा।
भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और विकास के नाम में महज घोषणाओं के साथ ही कांग्रेस पार्टी की अन्दरूनी खींचातान ही उसे गर्त में लिए जा रही है जिसे बचा पाना शायद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बस की बात भी नहीं रही है।
19 अगस्त को भीलवाड़ा के माणिक्य लाल वर्मा ब्व्यॅाज कॉलेज, सेठ मुरलीधर मानसिंहका गर्ल्स कॉलेज, शाहपुरा के प्रतापसिंह बारहठ राजकीय महाविद्यालय, मांडलगढ़ के श्री शिवचरण माथुर राजकीय महाविद्यालय एवं गंगापुर के श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय के चुनाव परिणाम आए। इन पांचों कॉलेजों में एबीवीपी के प्रत्याशी अध्यक्ष बने।
उल्लेखनीय है इन कॉलेजों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व संयुक्त सचिव पदों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें में से महज श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय गंगापुर में सचिव व संयुक्त सचिव पद पर एनएसयूआई के प्रत्याशियों की जीत हुई। बाकी सभी कॉलेजों में सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशी जीते है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी के संसदीय क्षेत्र में एनएसयूआई की करारी हार हुई है। विदित रहे कि भीलवाड़ा के माणिक्य लाल वर्मा ब्व्यॅाज कॉलेज में पिछले 15 सालों से एनएसयूआई के प्रत्याशी ही जीतते आए है। इस बार सभी पदों पर एबीवीपी के प्रत्याशियों की जीत हुई है। सेठ मुरलीधर मानसिंहका गल्र्स कॉलेज में भी एबीवीपी ने ही परचम लहराया है। भीलवाड़ा, मांडलगढ़, शाहपुरा व गंगापुर (सहाड़ा) चारों ही विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान में कांग्रेस के विधायक है। गंगापुर (सहाड़ा) के श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय के अलावा सभी कॉलेजों में एबीवीपी ने एकछत्र परचम लहराया है।
राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस की गुटनीति को एनएसयूआई की हार का कारण बता रहे है। वैसे पिछले वर्ष के छात्रसंघ चुनाव से ही कांग्रेस की गुटनीति जगजाहिर हो गई थी। इस बार भी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव को जाट बनाम गुर्जर चुनाव करार दिया जा रहा था।
श्री आचार्य तुलसी महाविद्यालय इस जिले का एक मात्र ऐसा महाविद्यालय है जहां छात्र संघ के दो पदों (सचिव व संयुक्त सचिव) पर एनएसयूआई के प्रत्याशी जीत पाए है। देखा जाए तो यहीं एक मात्र कॉलेज है जहां अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में बहुत ही कम मतों के अन्तर से एबीवीपी के प्रत्याशियों की जीत हुई है।
यह कॉलेज विधायक कैलाश त्रिवेदी के क्षेत्र में है। सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति का केंद्र गंगापुर है। इस क्षेत्र में कभी भाजपा के डॉ. रतन लाल जाट (पूर्व खाद एवं बीज मंत्री) का दबदबा रहा था। पिछले 7-8 सालों से कांग्रेस के विधायक कैलाश त्रिवेदी की साख बनी है। वो लगातार दो बार डॉ. रतन लाल जाट को शिकस्त देकर विधायक चुने गए है। छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई का अध्यक्ष पद का प्रत्याशी केसरमल जाट एबीवीपी के बलवीर सिंह से महज 28 वोटों से हारा जबकि उपाध्यक्ष पद का प्रत्याशी दिनेश जाट 8 वोटों से हारा।
जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर सहित राज्य के 9 विश्वविद्यालयों में से एक में भी एनएसयूआई की जीत नहीं हुई। जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उदयपुर में केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. जोशी, अजमेर में संचार मंत्री सचिन पायलेट, कोटा में नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल व वीरेन्द्र बेनीवाल का जादू नहीं चला।राजस्थान के 128 महाविद्यालयों में 107 महाविद्यालयों के चुनाव परिणाम घोषित हुए। इनमें से 38 में एनएसयूआई तथा 22 में एबीवीपी जीती है। शेष  पर निर्दलीय तथा अन्य ने जीत हासिल की है।
बहरहाल लोग एबीवीपी की जीत से आगामी विधानसभा चुनावों का अंदाजा लगा रहे है। लोगों का मानना है कि हालात देखते हुए आगामी सरकार भाजपा की ही बनेगी।

ये गुटों की खींचतान है या दिग्गजों की आपसी रंजिसों का नतीजा


  • लखन सालवी।
राजनीतिक संगठनों में राज्य, जिला व ग्राम स्तर पर कार्यकर्ताओं में निरन्तर खींचतान बढ़ती जा रही है। संगठन खेमों में बंटते जा रहे है और इन खेमों के लोग सक्रिय होकर स्वार्थ सिद्ध करने में लगे है। गुटों की खींचतान के कारण कांग्रेस संगठन के सभी कार्यक्रम फिस्स हो चुके है। न बूथ लेवल एजेन्टों की नियुक्तियां हुई ना ही पंचायत और वार्ड कमेटियों को गठन हो पाया। कुछ राजनीतिक सम्मेलन आयोजित हो पाए जिनमें भी गुटों की खींचतान सामने आई।
गुटों की शाखाएं तेजी से बढ़ रही है और ये शाखाएं मजबूत होकर पार्टियों को गर्त में ले जाने का कार्य कर रही है। गुटबाजी के मामले में कांग्रेस अव्वल है। अब तो छात्रसंघ के चुनावों में गुटबाजी सामने आने लगी है। भीलवाड़ा में राजनीति में प्रवेश की पहली सीढ़ी (छात्र राजनीति) ही गुटबाजी का शिकार हो रही है गुटों में बंट रहे पार्टियों के कार्यकर्ता न केवल एक दूसरे की टांग खींच रहे है बल्कि लात घुसे बरसाने तक से परहेज नहीं कर रहे है।
हाल ही में भीलवाड़ा में जिला कांग्रेस कार्यालय में एनएसयूआई के दो गुटों के बीच जूतम् पेजार (लात-घूसे) हुई। उल्लेखनीय है कि छात्रसंघ के चुनाव होने वाले है। चुनावों के मद्देनजर एनएसयूआई के चुनाव पर्यवेक्षक विकास बेनीवाल टिकट के दावेदारों से मिलने के लिए 7 अगस्त को भीलवाड़ा आए थे। वे कांग्रेस कार्यालय में जिलाध्यक्ष अनिल डांगी के साथ दावेदारों से मिल रहे थे। उनके साथ चुनाव प्रभारी राजू जाट भी मौजूद थे। राजू जाट को वहां देखकर एनएसयूआई के एक गुट के कार्यकर्ता भड़क गये और राजू जाट पर गत चुनाव में बागी उम्मीदवार का सहयोग देने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। कार्यकर्ताओं का कहना था कि राजू जाट ने खुल्लेआम बागी उम्मीदवार का सहयोग किया था तो किस आधार पर उसे चुनाव प्रभारी बनाया गया। पूर्व चुनाव में एनएसयूआई के अध्यक्ष पद हेतु प्रत्याशी रहे किशन जाट व भंवर गुर्जर ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल डांगी पर भी बागी गुट का सहयोग करने का आरोप लगाया। कांग्रेस जिला सचिव व चुनाव प्रभारी राजू जाट को तो धक्केमार कर कांग्रेस कार्यालय से ही बाहर निकाल दिया।
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एनएसयूआई के एक कार्यकर्ता ने बताया कि गत वर्ष के चुनाव में एनएसयूआई की ओर से किशन जाट को उम्मीदवार बनाया गया था। जबकि कांग्रेस के मुख्य लोगों ने बागी उम्मीदवार कैलाश जाट को चुनाव जीताया। वहीं से एनएसयूआई दो गुटों में विभाजित हो गया।
जगजाहिर है कि किशन जाट को एनएसयूआई अध्यक्ष का टिकिट एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष धीरज गुर्जर के कारण मिला था यानि प्रदेशाध्यक्ष किशन जाट के पक्ष में थे। वहीं कैलाश जाट को निर्दलीय चुनाव लड़वाने में कांग्रेस के युवा नेता रामलाल जाट व डेयरी अध्यक्ष रतन लाल जाट का नाम सामने आया। यह जगजाहिर हो गया कि एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष धीरज गुर्जर किशन जाट के पक्ष में थे, जबकि पूर्व मंत्री रामलाल जाट कैलाश जाट के पक्ष में।
राजू जाट ने युवा जाट नेता की शह पर बगावत की और निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट का खुलकर सहयोग किया। एनएसयूआई के उम्मीदवार को हराकर निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट को जीताया। उल्लेखनीय है कि निर्दलीय उम्मीदवार कैलाश जाट का सहयोग करने के कारण पूर्व मंत्री रामलाल जाट से खफा किशन जाट के समर्थकों ने रामलाल जाट पर पत्थर भी फैंके थे।
बहरहाल राजनैतिक दिग्गजों के इशारों में स्थानीय छात्र नेता किशन जाट और कैलाश जाट गुट के बीच घमासान मचा हुआ है। छात्रसंघ अध्यक्ष कैलाश जाट गुट का नेतृत्व राजू जाट कर रहे है। इस गुट के दिनेश जाट ने अध्यक्ष, मुकेश विश्नोई ने उपाध्यक्ष, मयंक सुवालका ने महासचिव व सत्यनारायण तिवाड़ी ने संयुक्त सचिव के लिए टिकट मांगा है। गर्ल्स कॅालेज में अंकिता दाधीच ने अध्यक्ष, सरोज जाट ने उपाध्यक्ष, ज्योति लौहार ने महासचिव व चेतना सेन ने संयुक्त सचिव के लिए टिकट मांगा है। जबकि किशन जाट गुट का नेतृत्व पूर्व जिलाध्यक्ष रामेश्वर जाट कर रहे है। इस गुट के तीन जने अध्यक्ष पद के लिए टिकट मांग रहे है (विनोद जाट, गोपाल चौधरी व गौतम महावार)। कमलेश सिंह ने उपाध्यक्ष, मदन अहीर ने महासचिव व रमेश अहीर, ओमप्रकाश रेगर ने संयुक्त सचिव के लिए दावेदारी जताई है। गर्ल्स कॅालेज में राजकुमारी चौधरी ने अध्यक्ष, सोनल जांगिड़ ने उपाध्यक्ष, रूख्सार खान ने महासचिव व दीपाली पांडे ने सचिव के लिए दावेदारी जताई है। वहीं लोग इस चुनाव को छात्रसंघ चुनाव की बजाए धीरज गुर्जर बनाम रामलाल जाट का चुनाव करार दे रहे है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनिल डांगी का कहना है कि एनएसयूआई पार्टी का अग्रिम संगठन है। छोटे मोटे हो जाते है, हम मिलकर निपटायेंगे। एनएसयूआई जिसे टिकट देंगे हम उसी प्रत्याशी के साथ रहेंगे। राजू जाट को चुनाव प्रभारी लगाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दो वरिष्ठ पदाधिकारियों की टीम और लगा देंगे।
वहीं टिकट के दावेदारों से मिलने आए चुनाव पर्यवेक्षक विकास बेनीवाल ने बताया कि हम कॅालेज के छात्रों से फीडबैक लेंगे तथा उसी को टिकट दिया जाएगा जो अनुशासन में रहेगा। गुटों के बारे में उन्होंने कहा कि हम शीघ्र ही बैठक करेंगे, कोशिश करेंगे कि गुट एक हो जाए।
गुटों की राजनीति के इस मामले में खबरकोश डॅाटकॅाम के उपसंपादक लखन सालवी ने धीरज गुर्जर से बातचीत की। उनसे हुई बातचीत के सम्पादित अंश यहां प्रकाशित किए जा रहे है - 
एनएसयूआई में गुटों में बंटता जा रहा है क्या कारण है ?
बड़ा संगठन है, विचारों में मतभेद हो सकते है, जिन्हें मिलकर निपटा लिए जाएंगे। सभी एक हो जाएंगे। वैसे मतभेद तो है नहीं पार्टी में।
गत चुनाव में किशन जाट को आपने टिकट दिलवाया ? पार्टी व संगठन से जुड़े लोगों ने बागी उम्मीदवार का सहयोग किया? इसके पीछे क्या कारण रहा ?
हां एनएसयूआई ने किशन जाट को टिकट दिया था। पार्टी से जुड़े कुछ राजनैतिक लोगों ने बागी उम्मीदवार का सहयोग किया। वो अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए छात्र संगठन को बांटने की कोशिशें कर रहे है, लेकिन वो इस बार सफल नहीं होंगे।
गत चुनाव में एनएसयूआई के प्रत्याशी को हराया गया, इसमें रामलाल जाट व उनके सहयोगियों का हाथ था ?
हां हां बिलकुल सही है, यह जगजाहिर हो चुका है, अखबारों में आ चुका है।
संगठन की बजाए गुट मजबूत होते जा रहे है, आप क्या करेंगे ?
मैंने अपने हाथों से एनएसयूआई को खड़ा किया है, छात्र शक्ति को जोड़ा है। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि एनएसयूआई राजनीति का अखाड़ा न बने।

वे अब हुए आजाद



  • लखन सालवी 
मीडिया पैरवी और लोगों की जागरूकता से आखिरकार आजादी की तहरीक के महानायक चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति अतिक्रमण से मुक्त हो गई।
उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित आजाद चौक में लगी चन्द्रशेखर आजाद की मूर्ति के आगे व्यवसायियों ने अस्थाई दूकानें बनाकर अतिक्रमण कर लिया था। जिस कारण आजाद की मूर्ति दिखाई ही नही पड़ रही थी।
अतिक्रमणकारियों के हौसेलें इतने बुलन्द थे कि आजाद चौक में जाने में मुख्य द्वारा को भी अवरूद्ध कर दिया। द्वार के पास लगी आजाद की मूर्ति की परवाह भी नही की। एक अस्थाई दूकान वाले ने कुछ माह पूर्व तक करीबन 8 फीट जगह पर अतिक्रमण किया था अब उसने करीब 40 फीट 25 फीट लम्बी व 8 फीट चौड़ी अस्थाई दूकान बना ली थी। जागरूक लोगों ने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन किसी ने अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाई। लोगों का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय नेताओं से जुड़े लोग अतिक्रमण करवाने में मदद कर रहे है और वो शिकायतों पर कार्यवाही नहीं होने दे रहे थे।

जागरूक जनता के प्रयासों से हटा अतिक्रमण

‘‘जिसने देश को आजादी दिलाई वो खुद आज अतिक्रमण झेल रहा है। 23 जुलाई को आजाद की जयंती थी लेकिन जयंती मनाने कोई नहीं आया। युवा क्रांतिकारी शहीद को सच्ची श्रृद्धाजंली उसी वक्त होगी जब वे आजाद को अतिक्रमण से मुक्त करायेंगे। ये लिखा हुआ एक बड़ा होर्डिंग आजाद चौक पर कुछ जागरूक लोगों ने लगवाया। इस होर्डिंग में एसपी व कलक्टर से गुहार की गई कि वे आजाद की मूर्ति को अतिक्रमण से मुक्त करावें। उसके बाद अनिल बदल्वा सहित जिला परिषद के 5-7 पार्षदगण पहूंचे थे।
उल्लेखनीय है कि जुलाई के प्रथम अंक में डायमण्ड इंडिया ने अतिक्रमण का मामला उठाया था। दूसरी ओर आजाद जयंती के अवसर पर जागरूक लोगों ने बड़ा बैनर लगवाकर अतिक्रमण का विरोध किया। नजीता यह रहा कि प्रशासन हरकत में आया और तुरन्त अतिक्रमण हटवाया। अतिक्रमण हटवाए जाने के बाद लोगों ने कहा कि आजाद अब हुए आजाद।
भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद की जयंती थी, आजाद को सलाम करने के लिए चंद राजनेताओं के अलावा कोई आया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कहां गए वो देशप्रेमी जो अपने आप को हिन्दू राष्ट्र के प्रति समर्पित बताते है।