Monday, July 4, 2016

राजनीतिक का अखाड़ा बना प्रताप का जन्म दिवस

महाराणा प्रताप जयंती पर गोगुन्दा को मिली कई सौगातें
भाजपा के राजनाथ सिंह, वसुंधरा राजे व कांग्रेस के सचिन पायलेट व अमरिन्दर सिंह भी पहुंचे गोगुन्दा

07 जून को राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के गोगुन्दा गांव में महाराणा प्रताप की 476वीं जन्म जयंती को भव्य रूप से मनाया गया। ऐसा पहली बार हुआ कि क्षेत्र की 20 हजार से भी अधिक जनता ने जयंती समारोह में भाग लेकर महाराणा प्रताप को नमन किया। न केवल क्षेत्र की जनता ने अपितू राजनीतिक दलों ने भी हर्षोल्लास के साथ जयंती मनाई। राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित जयंती समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, अमेरिन्द्र सिंह राजा, विधायक अशोक चान्दणा तथा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, जनजाति मंत्री नन्द लाल मीणा व जिले के प्रभारी मंत्री राजकुमार रिणवा सहित कई दिग्गज नेताओं के भाग लिया। क्षेत्र की जनता के साथ राजनीतिक दलों के दिग्गजों की उपस्थिति से गोगुन्दा का गौरव और बढ़ गया। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराणा प्रताप राजनीति के कारण नहीं वरन वीरता, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान व बलिदान के कारण जाने जाते है। उन्होंने राष्ट्ररक्षा के लिए हर वर्ग को साथ लेकर संघर्ष किए। उनका मानना है कि राजनीतिक पार्टियां प्रताप की जयंती को राजनीति का अखाड़ा बनाकर राजनीति करना चाह रही है। 

प्रताप जयंती के अवसर पर भाजपा व कांग्रेस ने जमकर अपना दमखम दिखाया। जहां भाजपा ने गोगुन्दा मण्डल के बैनर तले रामदेव चौगान में तकरीबन 12,000 लोगों के साथ बड़ी सभा का आयोजन किया वहीं महाराणा प्रताप राज तिलक सेवा समिति के बैनर तले कांग्रेस ने करीब 5000 लोगों को राज तिलक स्थल पर एकत्र कर अपना वजूद दिखाया। दिन भर हर आम व खास स्थान पर चर्चा प्रताप जयंती की बजाए यह होती रही कि किस सभा में कितनी संख्या थी। दोनों की दलों ने बसें, जीपें लगाकर गांव-गांव से लोग जुटाए। उनके लिए पानी के पाउच व भेाजन के पैकेट की व्यवस्था की तब जाकर प्रताप जयंती मनाई जा सकी। चर्चा यह भी रही कि लोग जुटाने में किसका पलड़ा भारी रहा। भाजपा में जहां विधायक प्रताप गमेती अव्वल रहे वहीं कांग्रेस में पूर्व मंत्री मांगी लाल गरासिया की तूती बोलती दिखाई दी। 

प्रताप जयंती को राजनीतिक अखाड़ा बनाने के बावजूद भाजपा द्वारा आयोजित समारोह में कंेद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया व जनजाति मंत्री नन्द लाल मीणा का आना और क्षेत्र के विकास के लिए करोड़ों रूपए की योजनाओं की घोषणा करना महत्वपूर्ण रहा। अनमने मन से ही सही बसों व जीपों में सवार होकर आए आमजन को तपती हुई दोहपरी में पाण्डालों में गर्मी सहन करने की एवज में सामूहिक लाभ मिला। समारोह में अपने सम्बोधन में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व वसुंधरा राजे ने क्षेत्र के विकास के लिए करोड़ों की लागत की योजनाओं की घोषणा की, जिनकी उम्मीद आमजन को नहीं थी। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने तो मेवाड़ में इंडिया रिर्जव बटालियन खोलने की घोषणा कर क्षेत्र के युवाओं को सौगात ही दे दी। 

सभा के दौरान विधायक प्रताप गमेती की क्षेत्रीय विकास की मांगों को स्वीकारते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मेवाड़ काॅप्लेक्ष योजना के तहत 1.63 करोड़ रूपए, महाराणा प्रताप की समाधि स्थल के विकास के लिए 65 लाख और गोगुन्दा-मजावद-उबेश्वर रोड़ के लिए 10 करोड़, पेयजल योजना के लिए करदा में 3.5 करोड़ व पदाराड़ा में 4 करोड़ व देवास जल योजना से झाड़ोल तक पानी पहुंचाने के लिए 1.5 करोड़ की घोषणा की। मानसी वाकल डेम से गोगुन्दा को जल सप्लाई के लिए 11 करोड़ की योजना को स्वीकृति दी। 

गोगुन्दा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों को लेकर विधायक प्रताप गमेती ने गोगुन्दा को टूरिस्ट सर्किट बनाने की मांग भी की। इस पर राजे ने कहा कि इसके लिए बजट की कोई समस्या नहीं है लेकिन समस्या तब है जब उन स्थानों पर रखरखाव नहीं हो। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय मेवाड़ काॅम्पलेक्ष योजना के तहत राज तिलक स्थल का विकास करवाया गया। कांग्रेस शासन में उसकी अनदेखी की गई, वे उसकी मरम्मत तक नहीं करवा पाए, नतीजा सबके सामने है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों के विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं है लेकिन किसी व्यक्ति संस्था या एजेन्सी को रखरखाव की जिम्मेदारी लेनी होगी। 

हमें अनेक भामाशाहों की जरूरत है - राजे
वसुंधरा राजे ने भामाशाह का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र को बचाने के लिए महाराणा प्रताप का साथ भामाशाह जैसे लोगों ने दिया। वे न केवल वित्तिय सहायता प्रदान करते थे बल्कि पूंजीपतियों को प्रेरित कर वित्त एकत्र कर प्रबंधन करते थे। अगर भामाशाह न होते तो शस्त्रों, अश्वों, सैनिकों के लिए वित्त का प्रबंधन भी प्रताप को करना पड़ता, जो इतना आसान नहीं था। आज राजस्थान को सम्पन्न और प्रगतिशील बनाने के लिए हमें एक नहीं बल्कि कई भामाशाहों की जरूरत है। सबके साथ से प्रदेश आगे बढ़ेगा। 

30 जून तक पूरे हो जाए जल स्वावलंबन के कार्य - राजे
राजे ने अपनी महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना पर बल देते हुए कहा कि भामाशाहों व आमजन के सहयोग से प्रदेश में जल संरक्षण के कई कार्य हुए है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में आमजन को सहयोग करना होगा। उदयपुर जिले में भी कई कार्य हो रहे है। जिला कलक्टर की ओर देखते हुए राजे ने कहा कि 30 जून तक सभी कार्य पूरे हो जाए ताकि बारिस के पानी का उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि भगवान इस बारे अच्छी बारिस करेंगे। 

राजनाथ सिंह ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की शोर्य, बलिदान और संघर्ष की गाथाएं स्कूलों की किताबों में पढ़ने का मिलती थी। उनमें इतिहासकारों ने इतिहास को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत किया और प्रताप के पराक्रम में कमी ला दी। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों की मर्जी है कि वो जिसे चाहे महान कह दे। मैं उनसे सहमत नहीं हूं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि महाराणा प्रताप ग्रेट क्यों नहीं हो सकते है। उन्हें ग्रेट किंग महाराणा कहा जाना चाहिए। प्रताप व अकबर के बीच हुए युद्ध को कुछ लोगों ने हिन्दू-मुस्लिम युद्ध कह कर दुष्प्रचारित किया है। यह उनका गलत कृत्य है। प्रताप ने मेवाड़ की रक्षा व स्वाभिमान के लिए युद्ध लड़ा था। प्रताप के सेनापति हकीम खां सूर थे तो अकबर की सेना में भी कई हिन्दू थे। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप से जुड़ी कहानियां बच्चे-बच्चे के जुबां पर पहले तो बहुत रहा करती थी लेकिन इतिहासकारों ने कुछ हालात पैदा कर दिए है कि लोगों की जुबां पर जितनी चर्चा महाराणा प्रताप के जीवन इतिहास की होनी चाहिए उसमें कमी आई है। उन्होंने कहा कि मैं अपनी सरकार की ओर से आप लोगों को यकीं दिलाना चाहता हूं कि जब तक हम है महाराणा को हिन्दूस्तान के लोगों की जुबां से हटने नहीं देंगे। राजनाथ सिंह के भाषण का युवाओं पर बड़ा असर दिखाई दिया। भाषण के दौरान पाण्डाल में बैठे युवाओं की ओर से ‘‘जय श्री राम’’ के नारे लगे।

सम्बोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने भी दो बड़ी घोषणाएं की। घोषणा की कि मेवाड़ में महाराणा प्रताप इंडिया रिर्जव बटालियन खोली जाएगी। जिसमें पसीना बहाने वाले मेहनतकसों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने जोधपुर में ग्लोबल सेंटर फोर काउण्टर टेरेरिज्म और राजस्थान में अटकी पड़ी पुलिस आधुनिकीकरण योजना को भी हरी झण्डी दी। 

विधायक प्रताप गमेती ने अपने दो साल के कार्यकाल में विधानसभा क्षेत्र में करवाए गए कार्यों का ब्यौरा स्मारिका में प्रकाशित करवाया। समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा स्मारिका का विमोचन किया गया। वहीं प्रधान पुष्कर तेली ने गोगुन्दा क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के की जानकारियों युक्त 6 पृष्ठ की पुस्तक अतिथियों को भेंट की। प्रधान ने इन स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग की। 

समारोह को विशाल बनाने के लिए जोरशोर से की थी तैयारियां
भाजपा द्वारा प्रताप जयंती समारोह की तैयारियां जोरों शोरों से की गई। पंचायत समिति के युवा प्रधान पुष्कर तेली की जिद्द के आगे प्रशासनिक अधिकारियों व सरकार के प्रतिनिधियों को बायपास चौराहें पर महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित करने के मशक्कत करनी पड़ी और अंततः मूर्ति लगाने व सर्किल निर्माण के लिए स्वीकृति देनी ही पड़ी। बायपास चौराहें पर सर्किल का निर्माण करवाया गया और अश्वारूढ़ महाराणा प्रताप की मूर्ति स्थापित की गई। 

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष महाराणा प्रताप जयंती मनाई जाती है। महाराणा प्रताप राज तिलक सेवा समिति द्वारा जयंती समारोह को धूमधाम तरीके से मनाया जाता रहा है। पहली बार भाजपा विधायक प्रताप गमेती व प्रधान पुष्कर तेली की अगुवाई में प्रताप जयंती को भव्य रूप से मनाने की तैयारियां की गई। बायपास से बसस्टेण्ड तक सड़क के दोनों ओर सरकारी भवनों की दिवारों पर केसरिया रंग पुतवाया गया। जगह-जगह तौरण द्वार सजाए गए। मुख्य बसस्टेण्ड के पास स्थित बाबा रामदेव चौगान में विशाल पाण्डाल लगाया गया जिसमें तकरीबन 15000 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। वहीं समारोह से पूर्व विशाह वाहन रैली निकाली गई। जिसमें विभिन्न झांकियां तैयार की गई। बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रैली बायपास चौराहें से राज तिलक पहुंची जहां विधायक प्रताप गमेती, प्रधान पुष्कर तेली, उपप्रधान पप्पू राणा भील, सरपंच गागू लाल मेघवाल, उपसरपंच दया लाल चौधरी, भाजपा मण्डल अध्यक्ष प्रकाश पुरोहित सहित अन्य पदाधिकारियों ने महाराणा प्रताप की मूर्ति को फूल मालाएं अर्पित कर श्रद्धांजली दी। वहां से रैली पुनः रवाना होकर गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई रामदेव चौगान स्थित समारोह स्थल पर पहुंची। 

सायं 4 बजे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाब चन्द कटारिया सेना के हेलिकाॅप्टर से गोगुन्दा के पास सेमटाल काॅलेज परिसर में बनाए गए हेलिपेड पर उतरे। जहां केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया। यहां विधायक प्रताप गमेती, विधायक फूल सिंह, विधायक अमृत लाल मीणा, विधायक गौतम लाल, नाना लाल अहारी, भाजयुमों अक्षय जोशी, जिला प्रमुख शांति लाल मेघवाल, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला व प्रधान पुष्कर तेली ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। 

राज तिलक पर प्रताप व राणा पूंजा को पुष्प अर्पित किए
बायपास पर महाराणा प्रताप की मूर्ति का किया अनावरण
अतिथियों ने राज तिलक पर महाराणा प्रताप व राणा पूंजा भील की प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर राज तिलक स्थल का जायजा लिया। उसके बाद बायपास चौराहें पर पहुंचे। यहां ग्राम पंचायत द्वारा अतिथियों का ढोल नगाड़ों के साथ तिलक लगाकर स्वागत किया गया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ मूर्ति का अनावरण किया। इस दौरान भाजपा मण्डल अध्यक्ष प्रकाश पुरोहित, विधायक प्रताप गमेती, प्रधान पुष्कर तेली, गोगुन्दा सरपंच गागू लाल मेघवाल, उपसरपंच दया लाल चौधरी व वार्ड पंच रोशन लाल वेद सहित कई लोग मौजूद थे। गुलाब चन्द कटारिया ने प्रधान पुष्कर तेली के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि इस युवा की जिद्द के कारण यह मूर्ति लग पाई है। राजनाथ सिंह व वसुंधरा राजे ने पुष्कर तेली को बधाई दी। 

उल्लेखनीय है कि बायपास चौराहें का सौन्दर्यीकरण करवाने की पहल प्रधान पुष्कर तेली ने ही की थी। इसके लिए सांसद मद से 5 लाख रूपए की स्वीकृति भी कराई। इस कार्य के लिए भामाशाहों को भी तैयार किया। सर्किल निर्माण एवं मूर्ति के लिए जनसहयोग से 10.5 लाख रूपए एकत्र किए। सर्वाधिक जनसहयोग तिरूपति रोड़ लाईन्स (उदयपुर) ने किया। उन्होंने 6.50 लाख रूपए का आर्थिक सहयोग प्रदान किया। 

राज तिलक सेवा समिति के बैनर तले कांग्रेस ने भी मनाई जयंती
महाराणा प्रताप राजतिलक सेवा समिति द्वारा सुबह 9 बजे से 12 बजे तक राज तिलक स्थल पर महाराणाा प्रताप जन्म जयंती समारोह आयोजित किया गया। समारोह में कांग्रेस के प्रदेशाध्क्ष सचिन पायलेट, पूर्व केंद्रीय मंत्री डाॅ. गिरिजा व्यास, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरिन्द्र सिंह राजा, विधायक अशोक चान्दणा, पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा ने सम्बोधित किया। वहीं गोपाल सिंह, पूर्व श्रम मंत्री मांगी लाल गरासिया, पूर्व विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत, अर्जुन लाल बामणिया, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ व कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष लाल सिंह झाला समारोह में उपस्थित रहे।

समारोह से पूर्व कांग्रेस ब्लाॅक अध्यक्ष हरी सिंह झाला के नेतृत्व में मोटर साईकिल रैली निकाली गई जो मुख्य मार्गों से होते हुए राज तिलक स्थल पर पहुंची। जहां पर अतिथियों ने महाराणा प्रताप व राणा पूंजा भील को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजली दी।

समारोह को सम्बोधित करते हुए सचिन पायलेट ने कहा कि महाराणा प्रताप के संघर्ष से सबको प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने न केवल आनबान की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में दुश्मनों का डट कर सामना किया बल्कि राष्ट्र रक्षा के लिए हर वर्ग को साथ लिया। वहीं अमरिन्द्र सिंह राजा ने युवा वर्ग को आगे आकर कांग्रेस से जुड़कर राष्ट्रहित के कार्य करने की बात कही। 

2 घंटे में हो गया समारोह, पूर्व मंत्री को नहीं दिया बोलने का मौका
महाराणा प्रताप राजतिलक सेवा समिति को समारोह के आयोजन के लिए प्रशासन ने दोपहर 12 बजे तक का ही समय दिया था। समिति ने समारोह की शुरूआत करने में देर कर दी। राज तिलक पर 11.30 बजे सभा आरम्भ की। 12 बजे बाद गोगुन्दा के भाजपा मण्डल की ओर से आयोजित रैली राज तिलक पर पहुंचनी थी। 12.30 बजे तक परिसर में सभा चलती रही। उधर भाजपा मण्डल की ओर से पुलिस पर दबाव बढ़ता गया। अंततः पुलिस ने समिति के पदाधिकारियों से बात कर सभा के समापन की घोषणा कर 1.30 बजे परिसर खाली करवाया। परिसर खाली करने के चक्कर में समारोह में आए अतिथियों को बोलने का समय भी नहीं दिया गया। सभा में आए लोग पूर्व मंत्री मांगी लाल गरासिया को सुनना चाहते थे लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। सचिन पायलेट के सम्बोधन के बाद 1.00 बजे समारोह समापन की घोषणा कर दी गई। उल्लेखनीय है कि समारोह में 5000 से अधिक महिला-पुरूष मौजूद थे, जिनमें पूर्व श्रम मंत्री मांगी लाल गरासिया के गृह क्षेत्र के लोगों की संख्या ज्यादा थी। मांगी लाल गरासिया का भाषण नहीं होने से उन्हें हताश होना पड़ा। 

Wednesday, May 11, 2016

कोशीथल में एक हुआ समाज, बाबा रामेदव की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न

  • लखन सालवी


सालवी समाज के एकता की बात की जा रही हो और कोशीथल के झगड़े का जिक्र ना हो, पिछले 15 सालों में तो ऐसा कभी नहीं हुआ। पर अब जब कभी भी एकता की बात होगी तो कोशीथल की एकता का जिक्र भी अवश्य किया जाएगा। 15 साल पुराने झगड़े को समाप्त कर बाबा रामदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर कोशीथल के सालवी समाज के युवाओं, बुजुर्गों व महिलाओं ने सामाजिक एकता की मिशाल पेश की है।

उल्लेखनीय है कि कोशीथल में एक मुद्दे को लेकर सालवी समाज के परिवारों में आपसी फूट पड़ गई थी। वो फूट धीरे-धीरे रंजिश में तब्दील हो गई। परिवार ही नहीं वरन रिश्तेदारियां टूट गई। कोशीथल की फूट ने चौखले व परचैखले पर भी असर डाला। चौखले व परचौखले में भी फूट व्याप्त हो गई। तारतार जोड़कर कपड़े बनाना वाला समाज खुद तार-तार हो गया। 15 साल बाद कोशीथल में समाज पुनः एकजुट हुआ हैऔर घोर कलयुग में इस एकता के पीछे सायर सुत बाबा रामदेव प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। 

विदित रहे कि 30 साल पूर्व गांव में बाबा रामदेव का मंदिर बनाया गया था। मंदिर में मूर्ति स्थापित करने को लेकर लम्बे समय तक विचार विमर्श चलता रहा। उसी दरमियां विभिन्न मुद्दों पर मतभेदों के चलते समाज के परिवार टूटते चले गए। वर्ष 2003 में एक ऐसे मुद्दे ने जन्म लिया, जिसने समाज को छिन्न-भिन्न कर दिया। समाज के तीन गुट हो गए। दो गुटों में ऐसी खिंचताने हुई कि भाई-भाई एक दूसरे के घौर विरोधी हो गए। एक ही मां के दो पुत्रों ने मां के देहावसान होने के बाद अलग-अलग शोक मनाया। यह संबंध विच्छेद की पराकाष्ठा थी। 

इन गुटों के कारण समाज में व्याप्त हुई दूरियां अब मिट चुकी है, यह कहना तो मुश्किल है लेकिन हां इतना जरूर कहा जा सकता है कि दूरियों को समाप्त करने की शुरूआत हो चुकी है। समाजनों में एक आयु वर्ग के धड़े ने बाबा रामदेव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संयुक्त रूप से कर लेने की पहल का आगाज किया। एक से दो परिवार जुड़े, दो से तीन परिवार जुड़े और ऐसा करते-करते 35 परिवार जुड़ गए। मंदिर में बाबा रामदेव, डाली बाई व हरजी भाटी की मूर्ति तथा रामदेव की का पगलिया स्थापित करने पर सहमति बनी। सभी परिवारों ने मिलकर कुछ राशि एकत्र की। गड़ात परिवार के गोवर्धन जी ने आगेवानी की। बड़े पिता मोहन लाल जी ने गुओं के बीच संयोजन किया। मेरे पिता प्यारचन्द जी के नेतृत्व में एक दल मूर्तियां देखने गया और मूर्तियां चिन्हित कर ली। मूर्तिकार को मूर्तियों के निर्माण की राशि का भुगतान कर दिया गया। अब अन्य खर्चों के लिए उगाही की जाने की सहमति बनी। जैसे ही उगाही आरम्भ की, समाज के कुछ जन आड़े-तिरछे चलने लगे। आड़े-तिरछे चलने वालों को ट्रेक पर लाने में 11 माह लगे। अंततः कुछ आगेवानों की मेहनत रंगलाई और सभी परिवार एकता के सूत्र में बंधे। परिवार वार राशि एकत्र की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में बालूराम जी कटारिया, प्यारचन्द जी कटारिया, घीसू लाल जी जामेरा, भैरू लाल जी काला, कस्तुर चन्द जी जलवाणिया, गोमाराम जी भागड़ा, मुकेश जी भागड़ा, शंकर जी भागड़ा, लादू लाल जी भागड़ा, बालूराम जी मूमतिया, भैरू लाल जी गड़ात, भैरू लाल जी जामेरा, शिव जी गड़ात के परिवार के सभी युवा सदस्य व बंशी लाल जी भागड़ा का विशेष योगदान रहा।
07 व 08 मई 2016 का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया। पत्रिका छपवाई गई, घीसू जी जामेरा के घर पर विनायक स्थापना हुई। वहां 5 दिन तक भजन किर्तन किए गए, महिलाओं ने मंगलाचरण गाये। कार्यक्रम में चौकी परचौकी के गांवों के समाजजनों को निमंत्रण दिए गए। 07 मई 2016 को दोपहर में 11 हवन वेदियों 40 जोड़ों ने आहूतियां दी। राजसमन्द जिले के शक्करगढ़ गांव निवासी श्री मूलाराम आचार्य, भादाराम जी व प्रकाश शास्त्री जी ने मंत्रोच्चारण के साथ आहूतियां दिलवाकर यज्ञ सम्पूर्ण करवाया। इसके बाद बैंड बाजे के साथ 101 कलशों सहित कलश यात्रा निकाली गई। उसी रात सत्संग आयोजित की गई। समाज के संतप्रवृति
के कई लोगों ने भजन प्रस्तुत किए। सत्संग में लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता भंवरजी मेघवंशी (बलाई), रामदेव सेना के प्रदेश अध्यक्ष व श्री महावीर गौशाला करजालिया के संचालक श्री  देबी लाल जी मेघवंशी, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के डाल चन्द जी मुण्डेतिया व डगर के आसीन्द तहसील संयोजक लादू लाल जी मेघवंशी ने भी शिरकत की।  उल्लेखनीय हैं कि श्री भंवर जी मेघवंशी ने बाबा रामदेव से जुड़े तथ्यों पर शोध किया था। इन्होंने बाबा रामदेव पीर: एक पुनर्विचार नामक पुस्तक का लेखन, सम्पादन व प्रकाशन किया था। इस पुस्तक में बाबा रामदेव जी से जुड़ी सत्यतताओं को तथ्यात्मक रूप से लिपिबद्ध किया गया हैं। उसके बाद श्री मेघवंशी ने हाल ही में एक पुस्तक ‘‘मेघवंशी बाबा रामदेव’’ का लेखन, सम्पादन व प्रकाशन किया है, जो इन दिनों काफी प्रसिद्ध हो रही है। 

सत्संग के बीच श्री मेघवंशी ने पाण्डाल में मौजूद समाजजनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कपड़े बुनने वाला यह समाज रिखियों का समाज है और इस समाज के लोग हमेशा आगे रहे है इसीलिए कहा जाता है कि - रिखियां जुगां-जुंगा अगवाण हुया। उन्होंने संविधान निर्माता डॅा. भीमराव अम्बेडकर के बारे में बात करते हुए कहा कि - उनके बिना दलितों को सम्मान मिलना असंभव था। अम्बेडकर ने अपने जीवन में दलित वर्ग के उत्थान के लिए खूब संघर्ष किए। उन्होंने युवाओं से आव्हान् करते हुए कहा कि समाज के युवाओं को संगठित होकर आगे आना चाहिए। समाज के आंतरिक कलेह को समाप्त कर आज एकजुट होकर सुन्दर कार्यक्रम आयोजित किया है, इसके लिए गांव के युवा साथी बधाई के पात्र है।

08 मई 2016 रविवार सुबह 4 बजे हवन किया गया। उसके बाद शुभ मुहुर्त पर मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के साथ-साथ ध्वजादण्ड व मंदिर मुकुट चढ़ाए गए। 

प्रगतिशील विचारधारा के श्री भंवर जी मेघवंशी ने समाज की एकता की सराहना करते हुए समाज के युवाओं से संगठित होकर आगे आने की बात कही। उम्मीद है बाबा रामदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अवसर पर हुई एकता अनन्त तक रहेगी . . . . जय बाबा री।



भंवर जी के बारे में :

भंवर जी मेघवंशी के व्यक्तित्व के बारे में तो आप सभी समाजजन वाकिफ होंगे, मैं थोड़ा और जोड़ दूं कि श्री मेघवंशी माण्डल तहसील के सीरडियास गांव के श्री नारायण लाल जी के कनिष्ठ पुत्र है और दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के संरक्षक है। इन्होंने दलित, आदिवासी एवं घुमन्तु समुदायों के सैकड़ों पीड़ित लोगों को न्याय दिलवाया है और दलितों, दमितों व वंचितों की आवाज बनने में अग्रणी रहते हैं। इन्होंने इन समुदायों के हजारों हजार युवाओं को संगठित कर इस अभियान से जोड़ा हैं। इन समुदायों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर इनकी समझ का कोई सानी नहीं हैं। विभिन्न विषयों को लेकर बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ, राजनेता, ब्यूरोक्रेटस, सामाजिक कार्यकर्ता, संतजन इनके विस्तृत ज्ञान, इनकी कुशाग्र बुद्धि व इनकी वाकप्रबुद्धता के कायल है।

Friday, April 22, 2016

सुन लो दलित विरोधियों . . . अब हम स्वतंत्र हैं, तुम अपनी पाचन शक्ति बढ़ा लो

बच नहीं सकती गोगुन्दा पुलिस, एफआईआर दर्ज करनी ही होगी

  • राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुन्दा से

एक वक्त था जब दलित जातियों को कतिपय ऊंची जातियों के लोगों ने गुलाम बना रखा था। उन्होंने लम्बे समय तक दलितों का शोषण किया। उन्हें मानसिक तौर पर गुलाम बना दिया गया। शोषित दलितों ने गुलामी को ही अपनी नियति समझ ली। ऐसा कई युगों तक हुआ। अंग्रेजों के शासन के दौरान देश अंग्रेजों का गुलाम हो गया लेकिन इस काल में दलितों को कुछ हद तक ऊंची जातियों की गुलामी से मुक्ति मिली। उसके बाद अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होने के बाद भारत का संविधान बनाया गया। भारत के संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार, जीने का अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार सहित मूलभूत अधिकार प्रदान किए गए। ये अधिकार केवल दलितों को ही प्रदत्त नहीं हैं, ये अधिकार देश के तमाम नागरिकों को प्रदत्त हैं। 

कई बरसों तक इन अधिकारों की जानकारी दलित समुदायों के लोगों तक नहीं पहुंची। अशिक्षा सबसे बड़ा कारण रहा। देश के कई गैर दलित लोग जिनके मन में दलितों के प्रति संवेदनाएं थी, उन्होंने तथा दलित समुदायों के पढ़े-लिखे लोगों ने इन अधिकारों को दलित समुदायों में फैलाने में योगदान दिया।

संविधान लागू होने के बाद से आजतक समाज में कई परिवर्तन हुए। जहां ‘‘सबका साथ-सबका विकास’’ परिकल्पना पर चलने वाले लोग देश में सामाजिक एकता के लिए प्रयास कर रहे हैं। सम्प्रभू व अखण्ड़ भारत की स्थापना करने में लगे हैं वहीं दूसरी और खासकर ग्रामीण भारत में कई गैर दलितों द्वारा दलितों की स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा हैं। कहीं उन्हें दलितों का अच्छे कपड़े पहनना नहीं पच रहा हैं, कईयों को दलित महिलाओं के अच्छे आभूषण धारण करना नहीं भा रहा हैं। कईयों को दलितों के अच्छे मकान सूंई की तरह चुभ रहे हैं। अनेक को दलितों समुदायों द्वारा सामाजिक कार्यक्रम करना पंसद नहीं आ रहा हैं। देखा जाए तो गैर दलित कतिपय लोग दलितों की समृद्धि से कुंठित हो गए हैं। वे दलितों को गुलाम बना कर ही रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं दलित अब भी वो ही कार्य करें जो गैर दलित चाहते हैं। वे उनसे अपने घरों व खेतों में काम करवाना चाहते हैं और मानसिक गुलाम बनाए रखना चाहते हैं।

21 अप्रेल 2016 की रात को गोगुन्दा तहसील के ओबरा कलां गांव में मेघवाल समुदाय के एक परिवार में विवाह आयोजन था। इस परिवार के युवा गुजरात राज्य के शहर में व्यवसाय करते हैं। कड़ी मेहनत कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया हैं। विवाह के शुभ प्रसंग पर परिवार के लोगों ने दुल्हें की घोड़े पर बिन्दौली निकालने का निर्णय किया। बैण्ड बाजे मंगवाए गए, घोड़ा मंगवाया गया। घोड़े को सजाया गया। दूल्हा भी बड़ी ही खुशी के साथ घोड़े पर सवार हुआ। बैण्ड़ बाजे वालों ने ‘‘आज मेरे यार की शादी हैं’’ नामक गाने की धुन छेड़ी। समुदाय की युवक-युवतियां, महिला-पुरूष, बच्चें और दूल्हें के साथी सजधज कर बिन्दौली में आए थे। दरअसल विवाह आयोजन में बिन्दौली एक रस्में हैं, बिन्दौली निकालने से गांव के प्रत्येक परिवार को मालूम हो जाता हैं कि किस परिवार के किस सदस्य का विवाह हो रहा हैं। मतलब बिन्दौली विवाह के सार्वजनिक प्रचार-प्रसार का माध्यम हैं। और बिन्दौली दूल्हें के करीबी लोगों के आनन्द लेने का अवसर भी होता हैं।

बीते बुधवार यानि 21 अप्रेल 2016 की रात को मेघवाल परिवार के युवक की बिन्दौली परवान पर थी। बिन्दौली में समुदाय के महिला-पुरूष हर्षोंल्लास के साथ नाच गा रहे थे। तभी कतिपय गैर दलित लोग बिन्दौली के आड़े आ गए और बिन्दौली निकालने पर नाराजगी जताते हुए गाली गलौच करने लगे। उनका कहना था कि ‘‘तुम नीची जाति के होकर इस प्रकार से बिन्दौली कैसे निकाल सकते हो ?’’ वे बेचारे गफलत हैं, उन्हें मालूम नहीं हैं कि देश में 1949 से संविधान लागू हैं। मेघवाल समुदाय के लोग उनकी तरह गूंपे नहीं हैं। उन्हें अपने संवैधानिक हकों की जानकारी हैं। इस बार वे चूके नहीं। तुरन्तु पुलिस थाने में फोन कर बताया कि उनके संवैधानिक हकों का हनन किया गया हैं। कुछ समाज कंटकों ने बिन्दौली को रूकवाया हैं, जबरन दूल्हें को घोड़े पर से उतारा हैं और जातिगत गांलियां निकाली हैं। पीडि़तों की शिकायत के बाद कुछ ही देर बाद गोगुन्दा पुलिस थाने की गाड़ी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने आरोपियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस के आते ही आरोपी भी रफ्फूचक्कर हो गए। अंततः पुलिस जाप्ते में बिन्दौली निकाली गई।

गैर दलित कतिपय लोगों को मेघवाल समुदाय के दूल्हे की बिन्दौली नहीं अखरी। उन्होंने बिन्दौली को रोकना चाहा लेकिन अंततः क्या हुआ ? उन कतिपय लोगों को मूंह की खानी पड़ी। बिन्दौली रोकने वाले अब थूंक कर चाट रहे हैं, पुलिस थाने में कह रहे हैं कि हमने बिन्दौली को नहीं रूकवाया। ओबरा कलां के मेघवाल समुदाय के युवाओं का तो इन थूंक कर चाटने वाले जैसे लोगों से यहीं कहना हैं कि भाईयों अब तुम्हारे दादा-परदादा वाला समय नहीं रहा हैं। जितना अत्याचार करना था, जितना गुलाम बनाकर रखना था तुमने बना लिया हमारे पुरखों को। अब हम पर गुलामी लादने का प्रयास मत करो।

ओबरा कलां के मेघवालों ने हिम्मत दिखाई, संवैधानिक हक को पाने के लिए बस एक फोन ही किया और नतीजा सामने हैं। उन्होंने बिन्दौली रोकने वालों के विरूद्ध गोगुन्दा पुलिस थाने में रिपोर्ट दी हैं। वहीं गोगुन्दा थाने से जानकारी मिली कि ओबरा कलां के गोपी लाल मेघवाल की रिपोर्ट पर कार्यवाही करते हुए आरोपियों को पाबंद किया गया हैं। पुलिस थाने की इस मामूली सी कार्यवाही का विरोध करते हुए मेघवाल समुदाय के लोगों ने बताया कि अगर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्यवाही नहीं की तो वे आन्दोलन करेंगे। मेघवाल समुदाय के अन्य गांवों के लोग ओबरा कलां के लोगों से कह रहे हैं कि ‘‘तुम संघर्ष करों, हम तुम्हारे साथ हैं।’’
मामले की जानकारी मिलने पर दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के संस्थापक भंवर मेघवंशी ने कहा कि दलित की बिन्दौली को रोकने, जातिगत गांलिया देने के आरोपियों के विरूद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की जानी चाहिए।

बाडमेर के गणपत मेघवाल का कहना हैं कि भारत की आजादी के बाद से कई दलित समुदायों के लोग गुलाम मानसिकता से आजाद हुए हैं। उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, वे समानता के लिए लड़ रहे हैं, व्यवसायों में आगे बढ़े हैं, अच्छे घर बना रहे हैं, आर्थिक प्रगति की हैं और मजे से जी रहे हैं। अब जरूरत हैं दलित विरोधी उन गैर दलितों को अपनी पाचन शक्ति बढ़ाने की, उन्हें दलितों की इस आर्थिक प्रगति को पचाना होगा, उनकी स्वतंत्रता को पचाना होगा, उनकी ताकत भी पचाना होगा। अगर अब स्वतंत्रता के अधिकार, समानता के अधिकार का उल्लंघन किया या किसी प्रकार का अत्याचार करने की चेष्टा की तो अंजाम भुगतना होगा। हम अंत तक कानूनी लड़ाई लडेंगे।

जय भीम। 

Wednesday, April 20, 2016

श्रम मंत्री जी, क्या ऐसे होगा निर्माण श्रमिकों का कल्याण ?

लखन सालवी
राजस्थान सरकार के श्रम विभाग के मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टी.टी. श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। हाल ही में विभाग से सहबद्ध भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल की योजनाओं में परिवर्तन किए गए और योजनाओं में सहायता राशि बढ़ाने के साथ नवाचार भी किए गए। कई योजनाओं को बंद किया गया हैं जिससे श्रमिक वर्ग में नाराजगी भी हैं। विवाह सहायता जैसी महत्वाकांक्षी व बाल विवाह रोकने में सहायक रही इस प्रभावी योजना को पूर्णतः बंद कर दिया गया हैं। इस योजना के तहत हिताधिकारी को 51,000 रूपए की सहायता देय थी। साईकिल सहायता योजना को पूर्व में ही बंद कर दिया गया था। विश्वकर्मा पेंशन योजना के हाल किसी से छुपे नहीं हैं, श्रमिकों ने इस योजना के तहत रूपए जमा करवाए। यह योजना पूर्व सरकार के समय में बंद कर दी गई। जिन श्रमिकों ने अंशदान जमा करवाया उनको पेंशन का इंतजार हैं। 

वर्तमान में नई योजना के रूप में शुभ शक्ति योजना आरम्भ की हैं। इस योजना के तहत मण्डल से पंजीकृत श्रमिक की पुत्री को कौशल विकास हेतु, स्वरोजगार हेतु, शिक्षा हेतु या विवाह हेतु 55000 रूपए की सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें पात्रता के लिए पुत्री का 8वीं पास होना अनिवार्य हैं। श्रमिक वर्ग का मानना हैं कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जहां पंचायतीराज चुनाव में सरपंच प्रत्याशी के लिए 8वीं पास महिला नहीं मिल पाती हैं वहां इस योजना की स्थिति क्या होगी इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता हैं। श्रमिक हितैषी एक बड़े तबके का मानना हैं कि राज्य सरकार को 8वीं पास की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करना चाहिए।

मण्डल की योजनाओं में सहायता राशि भी बढ़ाई गई हैं। महिला हिताधिकारी को प्रसूति सहायता के रूप में पुत्र होने पर 20,000 रूपए व पुत्री होने पर 21,000 रूपए की सहायता राषि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना मृत्यु होने की दशा में 5 लाख रूपए व सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपए की सहायता राशि दी जाएगी। विदित रहे इससे पूर्व सामान्य मृत्यु की स्थिति में 75,000 रूपए की सहायता राशि दी जाती थी। हिताधिकारियों के शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के लिए छात्रवृत्ति सहायता की राशि को भी बढ़ाया गया हैं। यही नहीं मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी बढ़ाई गई हैं। श्रमिकों के बीमें के लिए, उनकी भविष्य निधियों के लिए, इलाज करवाने के लिए भी सरकार ने अलग-अलग योजनाएं चला रखी हैं। हाल ही में इस मण्डल से जुड़ने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। अब श्रमिक ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से आॅनलाइन आवेदन कर सकेगा और श्रम निरीक्षक कार्यालय, पंचायत समिति में, अपनी ग्राम पंचायत में और श्रम से जुड़े अन्य कार्यालयों में आॅफलाइन आवेदन भी कर सकेगा। श्रम मंत्री के आदेश से नई योजनाएं व योजनाओं में परिवर्तन तथा नई प्रक्रिया जनवरी-2016 से लागू हैं। बावजूद जमीनी स्थिति बदहतर हैं। तीन माह गुजर जाने के बाद भी श्रम कार्यालयों में पंजीयन तक के आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। योजनाओं के आवेदनों की स्थिति तो और भी खराब हैं। 

इन सब से बेखबर अशिक्षित व वंचित श्रमिक वर्ग आज भी केवल अपनी बुनियादी जरूरतों के बंदोबस्त में लगा हुआ हैं। इस बंदोबस्त की जीवन शैली में भी श्रमिकों को जीने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही हैं। दमनकारी नीतियां इन्हें श्रम पर आधारित जीवन भी नहीं जीने दे रही हैं। दूसरी ओर श्रम कानूनों में संशोधन कर उनकी कमर तोड़ी जा रही हैं। श्रमिक हितैषी कहलवाने के लिए सरकारों ने श्रमिक की सामाजिक सुरक्षा के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं लेकिन राजनैतिक लोगों की इच्छाशक्ति में कमी व प्रशासनिक व्यवस्था की बेरूखी के कारण जरूरतमंद व पात्र श्रमिकों को इनका फायदा कम ही मिल पा रहा हैं। आंकड़ों के अनुसार राजस्थान सरकार ने गत बजट में इन योजनाओं के लिए 6000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया लेकिन महज 65 करोड़ रूपए ही खर्च किए गए अर्थात् बजट का मात्र 1 प्रतिशत ही खर्च किया गया। श्रम कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार व अधिकारियों की संवेदनहीनता भी इन योजनाओं के प्रति श्रमिकों के आर्कषण को कम कर रही हैं। 

श्रमिक संगठनों को कुचलने के प्रयास

उदयपुर के श्रम कार्यालय में मण्डल की योजनाओं में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कार्यालय में कर्मचारियों व अधिकारियों की असंवेदनशीलता व भ्रष्टाचार की प्रवृति देखने को मिलती हैं। यहां हितलाभ वितरण में भाई भतीजावाद की नीति अपनाई जा रही हैं। कार्यालय के इर्दगिर्द एजेण्टों की भरमार हैं। जो श्रमिक एजेण्टों के माध्यम से श्रम कार्यालय तक पहुंच रहे हैं, उन्हें योजनाओं के लाभ देने में देरी नहीं की जा रही हैं। दूसरी और जो श्रमिक, श्रमिक संगठनों से जुड़कर श्रम कार्यालय में विभिन्न सहायता योजनाओं के तहत आवेदन कर रहे हैं, श्रम विभाग द्वारा छोटी-छोटी कमियां ढूंढ कर उनके आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।  

जिले के श्रमिक संगठित हुए हैं। गोगुन्दा क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के 4 संगठन हैं। बजरंग, जरगा व सायरा निर्माण श्रमिक संगठन (अपंजीकृत) गोगुन्दा क्षेत्र में हैं तथा बड़गांव क्षेत्र में महिला श्रमिकों का संगठन हैं, जिसे रानी लक्ष्मी बाई निर्माण श्रमिक संगठन के नाम से जानते हैं। इन श्रमिक संगठनों से 5000 से अधिक श्रमिक सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। इनसे जुड़ा प्रत्येक श्रमिक अन्य श्रमिकों के संवैधानिक हकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध नजर आता हैं। संगठन से जुड़े श्रमिक न तो रिश्वत देते हैं और न ही देने देते हैं। संगठन दिनों दिन मजबूत होता जा रहा हैं, जिससे श्रम कार्यालय के भ्रष्ट लोगों की गोगुन्दा क्षेत्र की उपरी आय कम होती जा रही हैं। श्रम कार्यालय के लोग इस संगठन को अपने काम में रोड़ा मान रहे हैं और इन संगठनों को कमजोर करने के लिए संगठन से जुड़े श्रमिकों के आवेदन निरस्त करके उनमें संगठन के प्रति विद्वेष की भावना जाग्रत करने के प्रयास कर रहे हैं। 

केस-1

उदयपुर जिले के गोगुन्दा निवासी मोती लाल मेघवाल विवाह सहायता आवेदन के निरस्त हो जाने से दुःखी हैं। वह भवन निर्माण कार्य में चिनाई का कार्य करता हैं तथा बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़ा हुआ हैं। उसने 21 अप्रेल 2015 को अपनी पुत्री नवली का विवाह करवाया था तथा विवाह सहायता के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय उदयपुर में आवेदन किया था। हाल ही में संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय से उसे सूचना दी गई कि उसका विवाह सहायता आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं। कारण पूछने पर बताया गया कि उसके नाम में अंतर हैं इसलिए आवेदन निरस्त हुआ हैं। 

जानकारी के अनुसार मोती लाल मेघवाल के पहचान के दस्तावेज यथा आधार कार्ड, राशन कार्ड में उसका नाम मोती लाल मेघवाल अंकित हैं लेकिन श्रम कल्याण बोर्ड द्वारा परिचय पत्र में उसका नाम मोती मेघवाल दर्ज हैं यानि उसके नाम में ‘‘लाल’’ शब्द अंकित नहीं हैं। बस इसी ‘‘लाल’’ शब्द के अंकित न होने के कारण संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा उसका विवाह सहायता आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं। 

मोती लाल ने विवाह सहायता दिलवाने की मांग को लेकर 8 फरवरी को जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया और उसके बाद 18 मार्च को राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई लेकिन उसकी शिकायत की अभी तक सुनवाई नहीं हुई हैं।

केस-2


विधवा के हक के हनन से भी नहीं चूका विभाग

आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र व श्रम कल्याण बोर्ड के परिचय पत्र में धापू गमेती के पति का नाम देवी गमेती दर्ज हैं। धापू बाई विधवा महिला हैं तथा 5 बच्चों का लालन-पालन कर रही हैं। राशन कार्ड में उसका नाम धापू बाई की बजाए धापूड़ी अंकित कर दिया गया और उसके पति का नाम देवी लाल की बजाए देवा अंकित कर दिया गया। धापू गमेती ने अपनी पुत्री मोवनी का विवाह 28 अप्रेल 2015 को करवाया और विवाह सहायता के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में आवेदन किया। 5 फरवरी 16 को संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय ने पत्र भेजकर सूचना दी कि उसके पति के नाम में अंतर होने की वजह से उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं।

तो फिर कैसे मिली अंत्येष्ठि सहायता

दो वर्ष पूर्व धापू बाई के पति देवी लाल की मृत्यु हो गई। धापू बाई ने अंत्येष्ठि सहायता के लिए आवेदन किया, तब विभाग द्वारा उसे अंत्येष्ठि सहायता प्रदान की गई। उसका कहना हैं कि नाम में अंतर के कारण विवाह सहायता आवेदन को निरस्त कर दिया गया तो पति की मृत्यु पर अंत्येष्ठि सहायता कैसे जारी की गई। 

धापू बाई अशिक्षित हैं मगर जागरूक हैं। वह बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़ी हुई हैं तथा श्रमिकों के हकाधिकारों के लिए पैरवी करती हैं। वह आए दिन महिलाओं के विभिन्न मुद्दों पर पैरवी करने के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में जाती रहती हैं। वह विभाग के असंवेदनशील व अकर्मण्य कर्मचारियों व अधिकारियों की आंख की किरकिरी बनी हुई हैं। 

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि धापू बाई को विवाह सहायता नहीं देने के लिए सभी कर्मचारी एकजूट हैं। धापू बाई जैसी जागरूक व मजबूत महिलाओं के कारण उनकी उपरी आय पर असर पड़ता हैं इसलिए वे उसे विवाह सहायता का लाभ नहीं देकर उसे कमजोर करना चाहते हैं। 

बकौल धापू बाई वह किसी सरकारी योजना का लाभ लेने मात्र के लिए असंगठित मजदूरों के लिए काम नहीं कर रही हैं बल्कि असंगठित श्रमिक परिवारों के उत्थान के लिए कार्य करना चाहती हैं। उसे लेशमात्र भी दुःख नहीं हैं कि संगठन से जुड़े होने के कारण उसे लाभ नहीं दिया जा रहा हैं। 

वह विधवा हैं,  5 बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी उस पर हैं। वह विवाह सहायता योजना की असल पात्र हैं, मगर विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की दुर्नीति के कारण उसे आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही हैं। उसने हाल ही में 16 मार्च को राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई हैं।

केस-3

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सायरा पंचायत समिति क्षेत्र के बौखाड़ा गांव के परताराम गुर्जर को भी विवाह सहायता योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा हैं। वह सायरा निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़े हुए हैं। मण्डल से जारी परिचय पत्र में इनकी बेटी मंथरा का नाम चंदा दर्ज हो गया हैं। इन्होंने पिछले वर्ष 28 अप्रेल 2015 को अपनी बेटी का विवाह करवाया और विवाह सहायता के लिए मण्डल में आवेदन किया। अब मण्डल उन्हें यह कह कर विवाह सहायता नहीं दे रहा हैं कि ‘‘तुमने आवेदन मंथरा के लिए किया हैं जबकि परिचय पत्र में मंथरा का नाम ही नहीं हैं।’’ परथाराम गुर्जर की बेटी का का मंथरा हैं और उसके समस्त सरकारी दस्तावेजों में भी नाम मंथरा ही अंकित हैं। आवेदन करने के बाद परताराम गुर्जर ने अपनी पुत्री का नाम मंथरा होने का शपथ पत्र देने के साथ मंथरा के जन्म प्रमाण की प्रति, अंकतालिका की प्रति व अन्य दस्तावेजों की प्रतियां भी दी। श्रम कार्यालय ने किस आधार पर परथाराम गुर्जर के परिचय पत्र में बेटी का नाम मंथरा दर्ज किया यह जांच का विषय हैं। लेकिन अभी तो मंथरा और चंदा के फेर में परताराम को विवाह सहायता की राशि जारी नहीं की जा रही हैं। 

यह तो महज चंद उदाहरण हैं। नामों में अंतर के ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनमें श्रम कार्यालय ने विभिन्न सहायता योजनाओं के आवेदनों को निरस्त कर दिया हैं। बहरहाल पीडि़त श्रमिकों ने जिला कलक्टर, श्रम मंत्री को अपनी समस्या से अवगत कराया हैं साथ ही राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई हैं। 

भारोड़ी गांव निवासी तख्त सिंह श्रमिक संगठन में पदाधिकारी हैं। उनकी पुत्रवधु लक्ष्मी देवी भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल से पंजीकृत हैं। वर्ष 2012 में उसने प्रसूति सहायता के आवेदन किया लेकिन उसे प्रसूति सहायता जारी नहीं की गई। लक्ष्मी देवी ने श्रम विभाग के सैकड़ों चक्कर काटे, अंत में तो उसे यह तक कह दिया गया कि उसका आवेदन कार्यालय में नहीं हैं। मार्च-2016 में तख्त सिंह ने कार्यालय में जाकर कर्मचारियों को खरी खोटी सुनाई तब जाकर उन्होंने रद्दी के रूप में पडे फाइलों के ढ़ेर से लक्ष्मी देवी की फाइल निकाली और संयुक्त श्रम आयुक्त ने प्रसूति सहायता राशि की स्वीकृति दी। 

गोगुन्दा-सायरा क्षेत्र में कार्यरत बजरंग, सायरा, जरगा व रानी लक्ष्मी बाई निर्माण श्रमिक संगठनों से जुड़े श्रमिक गेहरी लाल मेघवाल, देवी लाल गमेती, मोती लाल गमेती, धापू बाई मेघवाल सहित दर्जनों श्रमिकों का कहना हैं कि संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा श्रमिकों को हर मामले में परेशान किया जा रहा हैं। 

बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़े 100 से अधिक श्रमिकों ने बताया कि मार्च-2015 में गोगुन्दा में एक शिविर लगाया गया। उस शिविर में उन्होंने हिताधिकारी के रूप में पंजीकृत होने के लिए आवेदन किए लेकिन अभी तक उन्हें परिचय पत्र नहीं दिए गए हैं। जिन लोगों के परिचय पत्र बनाए गए उनमें जानबूझ कर भारी कमियां रखी गई हैं। हिताधिकारी के नाम, उनके परिजनों के नाम व उनकी उम्र गलत लिख दी गई। 

जसोदा को बनाया फफोड़ा
केस-1 
दादिया गांव के प्रकाश पिता भैरू लाल मेघवाल ने श्रम विभाग के कर्मकार मण्डल से जुड़ने के लिए आवेदन किया। श्रम विभाग उदयपुर द्वारा जारी किए गए हिताधिकारी परिचय पत्र में परिवार के सदस्यों के नाम भी गलत अंकित किए गए हैं। प्रकाश मेघवाल की पत्नि का नाम जसोदा बाई हैं जबकि परिचय पत्र में जसोदा बाई की जगह फफोड़ा अंकित किया गया हैं। 
कार्यस्थल का पता - नरेगा जी

केस-2
श्रम विभाग द्वारा जारी प्रभु लाल के परिचय पत्र में नियोजक का नाम नरेगाजी अंकित किया गया र्हैं। 


गांव का नाम नीचराय
केस-3
किशन लाल के पिता का नाम गलत दर्ज हुआ हैं। वहीं इसका निवास नीचराय में बताया हैं कि जबकि गोगुन्दा तहसील में नीचराय नाम का कोई गांव नहीं हैं। 


केस-4
सोवनी बाई परिचय पत्र में अपने नाम को सुधरवाने के लिए चक्कर काट रही हैं। उसका कहना हैं कि उसने परिचय पत्र बनवाने के लिए पहले से ही कई चक्कर काटे थे, अब परिचय पत्र में नाम सुधरवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिचय पत्र में उसका नाम सोवनी बाई की जगह सोवमीबा अंकित कर दिया गया हैं। 


पहले भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल की किसी भी योजना का लाभ करने के लिए आवेदन के साथ मूल परिचय पत्र देना पड़ता था। वर्ष 2014 तक जिन श्रमिकों ने योजनाओं के लिए आवेदन किए उनमें से कई श्रमिकों के मूल परिचय पत्र वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं। श्रमिकों के परिचय पत्रों को नवीनीकरण करवाने की तिथियां भी निकल चुकी हैं। 

श्रम कार्यालय में आलम यह हैं कि विभाग के अधिकारी जहां एजेण्टों के आगे नतमस्तक दिखाई पड़ते हैं वहीं श्रमिकों को देखकर भड़कते हैं। जिन-जिन श्रमिकों ने भ्रष्टाचार की खिलाफत की या लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया, अब उन श्रमिकों के हितलाभ आवेदनों को निरस्त कर विभागीय अधिकारी श्रमिकों को अपनी ताकत का अहसास करवा रहे हैं। 

श्रमिक संगठन से जुड़े गणेश लाल खैर ने मण्डल की विभिन्न योजनाओं के आवेदनों व स्वीकृति से सम्बधित सूचना चाहने हेतु संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं भी मांगी लेकिन सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।

अधिकतर श्रमिक श्रम मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह से उम्मीदें लगाए बैठे हैं कि जिस प्रकार उन्होंने नई योजना आरम्भ की व अन्य योजनाओं में सहायता राशि बढ़ाई, उसी प्रकार वे योजनाओं की क्रियान्विति के लिए भी नवाचार करेंगे।

Tuesday, March 22, 2016

होली रा राम-राम सा।

लखन सालवी री ओर सूं होली रा राम-राम सा।
वरिष्ठ नेता देवी लाल जी मेहता ने, कवि सोहन जी कोठारी ने
टेंट वाला सोनी जी ने और फल फ्रूट वाला जगदीश जी ने
होली रा राम-राम सा।

मण्डल अध्यक्ष (BJP)लक्ष्मण सिंह जी ने, वरिष्ठ नेता नाहर सिंह जी ने
कडेचावास वाला बाबू लाल जी ने और बीजेपी रा नेता ने
होली रा राम-राम सा।
मांगी लाल जी गरासिया ने, लाल सिंह जी झाला ने
नारायण पालीवाल ने, सगळा कांग्रेसी कार्यकर्ता ने
होली रा राम-राम सा।

विधायक प्रताप जी गमेती ने, प्रधान पुष्कर जी तेली ने
उपप्रधान पप्पू जी राणा ने और मेम्बर डी.सी. मेघवाल ने
होली रा राम-राम सा।

एसडीओ साब ने, तहसीदार साब ने
थानादार साब ने और एईएन साब (बिजली) ने
होली रा राम-राम सा।
नवा बीडीओ साब ने, पंचायत रा सचिव (साब) ने
सरपंच गागू लाल जी ने और सगळा वार्ड पंचा ने
होली रा राम-राम सा।

सरपंचा-वार्ड पंचा ने, बाबू-सचिवा ने
स्कूला रा मारसाबा ने और पटवारी-गिरदाला ने
होली रा राम-राम सा।
सेन्ट पॅाल री सिस्टर ने, विधा निकेतन रा कालू जी ने
आरसीएम वाला जगदीश जी ने और स्टारनेट वाला गणेश जी ने
होली रा राम-राम सा।

मूच्छया वाला अमर सिंह जी, केबल वाला महेन्द्र जी ने
काला कोट वाला कमलेश जी ने और सीमेन्ट वाला पन्न जी ने
होली रा राम-राम सा।

पटवारी साब का भाया ने, प्रिंसीपल साब का मोटियार ने
जेएमबी वाला ओम जी ने और समोसा वाला शिव जी ने
होली रा राम-राम सा।
जतन वाला ओम जी ने, कास वाला सरफराज जी ने
अलर्ट वाला गुप्ता जी ने और विकल्प वाला बेनजी (ऊषा चौधरी) ने
होली रा राम-राम सा।
पत्रिका का रा कपिल जी ने, भास्कर वाला किशन जी ने
नवज्योति रा सोनी जी ने और चाय वाला राजू भाई ने
होली रा राम-राम सा।
होटल वाला विष्णु जी ने, सेमटाल रा कपिल जी माराज ने
पेट्रोल - गैस वाला ने, पोया जलेबी वाला ने,
होली रा राम-राम सा।
सिंघाड़ा वाला ने, कांदा मरचियां वाला ने
मित्र भगवती लाल ने और सगळा म्हारां साथियां ने
गोगुनदावासिया ने
होली रा राम-राम सा ओ . . . राम-राम
Note : नरा लोगों रा नाम नी आया, नाराज मत विज्यों
smile emoticon

Monday, February 8, 2016

नौसिखिए नहीं, चाणक्य हैं विधायक गमेती



लखन सालवी

उदयपुर जिले गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रताप गमेती को राजनीतिक नौसिखियां समझने की भूल कर रहे हैं लोग। महाराणा प्रताप की कर्मभूमि में जन्में प्रताप गमेती को राजनीति विरासत में मिली हैं। उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्धी (अपने व विपक्षी) यह भूल जाते हैं कि प्रताप को राजनीति न केवल विरासत में मिली हैं बल्कि वे स्वयं बरसों से सक्रिय राजनीति में हैं। प्रताप गमेती के पिता भुरा लाल गमेती (भुरा भाई) एक बार सरपंच व दो बार विधायक चुने गए। वहीं प्रताप गमेती की माता रोड़ी बाई भी सरपंच रही। प्रताप गमेती स्वयं तीन बार सरपंच रहे। वर्तमान में उनकी बेटी अणछी गमेती भी सरपंच हैं। अर्थात् प्रताप गमेती को ही नहीं वरन् इनके पूरे परिवार को राजनीति विरासत में तो मिली हैं जिसे वे लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। प्रताप गमेती को आदिवासी समुदाय में जन्मा चाणक्य कह दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

स्वर्गीय भुरा लाल गमेती की राजनीति: जब-जब टिकट मिला, मुख्यमंत्री भाजपा का बना
प्रताप गमेती के पिता भुरा लाल गमेती अपने जमाने के पहुंचे हुए राजनेता थे। वे न केवल आदिवासी समुदाय के आगेवान थे बल्कि जनता दल से जुड़े क्षेत्र के पहले आदिवासी सक्रिय लीडर थे जो पहले सरपंच बने फिर दो बार क्षेत्र के विधायक रहे। उनके दोनों बार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेक्तावत रहे।

पहली बार: विधायक बने भुरा भाई, मुख्यमंत्री भैरों सिंह
1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने 152 सीटों के साथ सरकार बनाई। 22 जून 1977 को कद्दावर नेता भैरू सिंह शेक्तावत मुख्यमंत्री बने। उस विधानसभा चुनाव में पार्टी ने गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र से भुरा लाल गमेती को टिकट दिया। उन्हें 12 हजार 783 वोट मिले जबकि उनके विपक्ष में सीपीआई के मेघराज को महज 8743 वोट मिले।

1980 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भुरा लाल गमेती को पुनः टिकट दिया लेकिन इस बार सीपीआई के मेघराज तावड़ बाजी मार गए। वहीं कांग्रेस दूसरे नम्बर पर रही। इस बार मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडि़या बने। इनके बाद शिवचरण माथूर मुख्यमंत्री बने।

1985 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भुरा लाल गमेती को पुनः टिकट दिया लेकिन इस बार कांग्रेस के देवेन्द्र मीणा ने 12081 वोटों से भुरा लाल गमेती को हरा दिया। इस बार मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी बने।

दूसरी बार: विधायक बने भुरा भाई, मुख्यमंत्री भैरों सिंह
1990 के चुनाव में भी भुरा लाल गमेती को टिकट दिया गया। इस चुनाव में उन्हें 23437 वोट मिले वहीं 8561 वोट लेकर कांग्रेस के देवेन्द्र मीणा दूसरे नम्बर पर रहे। इस चुनाव में भाजपा ने कुल 85 सीटें प्राप्त की और राजस्थान में भैरों सिंह शेक्तावत मुख्यमंत्री बने।

1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने महावीर भगोरा को अपना प्रत्याशी घोषित किया। इस चुनाव में भगोरा की जीत हुई। उसके बाद 1998 में जीत की गेंद कांग्रेस के पाले में चली गई। 1998, 2003 व 2008 तक कांग्रेस के मांगी लाल गरासिया चुनाव जीतते रहे और लगातार 15 वर्ष तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2008 की कांग्रेस सरकार में वे श्रम मंत्री भी रहे, श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के श्रमिक वर्ग के लिए जो कार्य किए वे अतुलनीय व प्रशसनीय भी हैं। 

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रताप गमेती को टिकट दिया। इस चुनाव में इन्होंने 3345 वोटों से मांगी लाल गरासिया को हराया। प्रताप गमेती को 69210 वोट मिले। इस बार राज्य ही नहीं वरन देश भर में भाजपा की लहर चली। जनता के अंदर का करन्ट चुनाव में बाहर निकला और केन्द्र व राज्यों में भाजपा की सरकारें बनी।

विधानसभा चुनाव की जीत की खुशी में प्रताप गमेती बहे नहीं। जीत के पीछे की ताकतों को पहचाना और निरन्तर उन ताकतों को और मजबूत करने पर लगे हुए हैं। क्षेत्र के लिए पेयजल की बात हो, सिंचाई जल की बात हो या वर्षा जल सरंक्षण, कृषि विकास या बिजली, पानी, सड़कों सहित मूलभूत सुविधाओं की बात हो, इन सबके पुख्ता बंदोबस्त के लिए विधायक लगातार प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं।

प्रताप गमेती की एक कमजोरी भी हैं, वो त्वरित व ठोस कार्यवाही को अंजाम नहीं दिलवा पाते हैं लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो यह कमजोरी भी उनकी मजबूती का आधार हैं। 

यह उनकी लम्बी व दूरगामी सोच का ही नतीजा हैं कि विपक्षियों व विरोधियों की लाख कोशिशों के बावजूद भी बसस्टेण्ड़ पर सुलभ शौचालय का निर्माण करवाया जो आज कस्बेवासियों, प्रवासियों व आगन्तुकों के लिए काम आ रहा हैं। विधायक के इस कार्य को हर वर्ग ने सराहा हैं। 

बायपास चौराहें पर चल रहे विकास कार्य के लिए विधायक ने भरसक प्रयत्न किए। नतीजा सामने हैं। वर्तमान में वे गोगुन्दा के बसस्टेण्ड का विकास करवाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए आजकल जयपुर में डेरा डाले हुए हैं। उनकी गाड़ी गोगुन्दा से जयपुर के बीच ज्यादा दौड़ती दिखाई पड़ रही हैं। उनकी गाड़ी का यूं दौड़ना गोगुन्दा के लिए शुकून की बात हैं।

यूं तो प्रताप गमेती पूरे विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य करवा रहे हैं लेकिन गोगुन्दा मुख्यालय पर विकास कार्यों में ज्यादा भाग ले रहे हैं। खास बात हैं कि गोगुन्दा के प्रधान पुष्कर तेली, उपप्रधान पप्पू राणा व सरपंच गागू लाल मेघवाल जैसे सकारात्मक ऊर्जा के धनी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा हैं। विधायक गमेती का कहना हैं कि इन सभी लोगों के सहयोग के बिना गोगुन्दा का विकास संभव ही नहीं हैं।पिछले दो साल के कार्यकाल में दिखते हुए काम गोगुन्दा में हुए हैं। विकास को दर्शाने वाले इन कामों के लिए सरपंच गागू लाल मेघवाल को भी खूब सराहना मिली हैं। ग्राम पंचायत के सरंपच के तौर पर गोगुन्दा में हुए विकास कार्यों के संदर्भ में उन पर कम दबाव नहीं था लेकिन प्रधान पुष्कर तेली व विधायक प्रताप गमेती के सहयोग के बिना ग्राम पंचायत में इस स्तर के विकास कार्य करवा पाना मुश्किल था। हालांकि विधायक, प्रधान व सरपंच गोगुन्दा में हुए विकास कार्यों का श्रेय एक-दूसरे को दे रहे हैं लेकिन सच यह हैं कि सर्वाधिक श्रेय के योग्य तो सरपंच गागू लाल मेघवाल व ग्राम सेवक भूपेन्द्र सिंह झाला ही हैं।


चूंकि लेख की शुरूआत विधायक प्रताप गमेती की राजनीतिक परिपक्वता को लेकर हुई तो इसका समापन भी उसी बात के अंजाम से करना बेहतर होगा। अमूमन प्रताप गमेती कम बोलते हैं लेकिन जितना बोलते हैं सधा हुआ बोलते हैं। कम बोलना, सधा हुआ बोलना, विकास के मुद्दों पर अड़े रहना व सभी से नम्रतापूर्वक बात करना विधायक प्रताप गमेती की आदत में शुमार हैं। हाल में छाली ग्राम पंचायत के उण्ड़ीथल गांव में आयोजित संगोष्ठि में उपस्थित रहे लोगों ने इसका अहसास किया होगा। राज्यपाल कल्याण सिंह की मौजूदगी में विधायक ने बड़े ही साधारण व शांत तरीके से क्षेत्र के चार-पांच मुद्दों को रखा। मुद्दों को रखने के उनके तरीके से राजनीति के पुरोधा कल्याण सिंह ने जरूर उनकी राजनीतिक चेतना का अनुमान लगाया होगा। राजनीतिक भाषण की बजाए क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर बात करना ही आज के समय में अच्छी राजनीति हैं। वैसे हर व्यक्ति राजनीति को अपने-अपने तरीके से परिभाषित करता हैं लेकिन विधायक प्रताप गमेती क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करने को ही राजनीति का मुख्य भाग मानते हैं। इसलिए दावें के साथ कहा जा सकता हैं कि विधायक प्रताप गमेती नौसिखिए नेता नहीं बल्कि गोगुन्दा की राजनीति के चाणक्य हैं। उनके समर्थकों का कहना हैं कि राजनीति को चोटी वाले चाणक्य करते हैं, प्रताप गमेती तो बिना चोटी के चाणक्य हैं जो क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। 

युवा प्रधान बहा रहा हैं विकास की बयार

उदयपुर जिले के गोगुन्दा पंचायत समिति के युवा प्रधान पुष्कर तेली अपनी कार्यशैली व विकास कार्य करवाने के अंदाज व अपनी पहल के कारण सुर्खियों में हैं। वे अपनी सुझबूझ से क्षेत्र में विकास करवा रहे हैं। प्रतिबद्धता व सकारात्मक सोच के कारण युवाओं के चहेते बनते जा रहे हैं।

हाल ही में पंचायतीराज चुनाव का एक वर्ष पूरा हुआ हैं। गोगुन्दा के युवा प्रधान पुष्कर तेली ने 07 फरवरी 2015 को पदभार ग्रहण किया था। तब उनकी उम्र 22 वर्ष थी। बीते एक वर्ष में इस युवा व सकारात्मक सोच के धनी प्रधान ने पंचायत समिति क्षेत्र में न केवल विकास कार्य करवाए हैं बल्कि युवा वर्ग को अपने साथ जोड़कर क्षेत्र के विकास के लिए नवाचार कर रहे हैं।
आजकल गोगुन्दा पंचायत समिति मुख्यालय व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर हर चौराहें पर लोग विकास की बातें करते नजर आते हैं और विकास के साथ विकास करवाने वाले शख्स का नाम भी पूरे गूमान के साथ लेते हैं। मजेदार बात हैं कि विकास की मांग को लेकर नहीं वरन गोगुन्दा में हो रहे विकास कार्यों के बारे में चर्चाएं की जा रही हैं। ऐसा कम ही देखने को मिलता हैं। लोगों को विकास की चिंता नहीं हैं। वे निश्चिंत हो गए हैं कि अब गोगुन्दा का विकास हो के रहेगा। लोग यह भी कहते हैं कि आजादी के बाद पहली बार गोगुन्दा में गुणवत्ता वाले विकास कार्य होते नजर आ रहे हैं।

बनाई मजबूत टीम, लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

प्रधान पद संभालने के बाद कुछ माह तक सामान्य चलता रहा। उन्होंने राजनीतिक माहौल को समझा, कर्मचारियों व अधिकारियों की मंशा को भांपा, सहयोगी ग्रुप को पहचाना व युवाओं की एक टीम जुटाई, जिसमें सूचनाएं देने वाले, सूचनाएं पहुंचाने वाले, अच्छे सुझाव देने वाले व सहयोग देने वाले युवाओं को शामिल किया। ग्राम पंचायतों के सरपंचों से भी तालमेल बिठाया। युवा सरपंचों से लगातार सम्पर्क किया। उन्हें विकास कार्यों लिए उत्साहित किया। महज 6 माह के अल्प समय में प्रधान ने अपनी मजबूत टीम बना ली। जिनके बूते आज प्रधान विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।

पहला अच्छा काम, जिसे जनता ने खूब सराहा

गोगुन्दा मोटागांव के नाम से भी जाना जाता हैं। गोगुन्दा उपखण्ड क्षेत्र में आदिवासी अंचल का यह सबसे बड़ा गांव हैं। पूर्व में यहां हाट लगती थी, जिसमें क्षेत्र के गांवों के लोग आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए आते थे। आज भी लोग अपनी जरूरतों के सामान लेने यहीं आते हैं। गोगुन्दा क्षेत्र से भारी संख्या में प्रवास भी होता हैं। यहां से रोजाना 10 से अधिक बसें गुजरात के शहरों में जाती हैं, जिनमें यहां के लोग प्रवास पर जाते हैं। इन लोगों को यहां से रवानगी व वापसी के दौरान सुलभ शौचालय की आवश्यकता थी। जोधपुर व सिरोही जाने वाली बसें भी यहां से होकर गुजरती हैं। सामान्य दिनों में भी बसस्टेण्ड पर यात्रियों व आगन्तुकों की भीड़ रहती हैं। उपखण्ड मुख्यालय होने के बावजूद बसस्टेण्ड़ पर मूत्रालय व शौचालय नहीं थे। यात्री व आमजन बसस्टेण्ड़ पर केबिनों के पीछे ही खुले में मूत्र त्याग करते थे। जिससे बसस्टेण्ड़ पर हर वक्त सडांध फैली रहती थी। 

प्रधान ने विधायक प्रताप गमेती के सामने इस मुद्दे की पैरवी की, फण्ड की समुचित व्यवस्था की। सरपंच गागू लाल मेघवाल का हौंसला बढ़ाया और बसस्टेण्ड़ पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया। यह कार्य आसान नहीं था। प्रतिद्वंद्धियों ने निर्माण में रोड़े लगाने के खूब जतन किए। निर्माण वाली जमीन को लेकर मुद्दा बनाया। बोगस व्यक्ति को जमीन का स्वामी बताकर ग्राम पंचायत का हौंसला कमजोर करने के प्रयास किए लेकिन प्रधान ने अपनी देखरेख में इस कार्य को अंजाम दिलवाया। 

इस कार्य की हर तरफ से सराहना हुई। गोगुन्दावासियों व क्षेत्रवासियों ने ही नही बल्कि यहां से होकर यात्रा करने वाले लोगों ने भी इस कार्य की खूब सराहना की। खासतौर पर महिला वर्ग ने इस कार्य को लेकर विधायक, सरपंच व प्रधान को शुभाशिष दिए।


प्रधान के पिता पन्ना लाल तेली व्यवसायी हैं और पिछले डेढ़ दशक से गोगुन्दा में बिल्डिंग मेटेरियल सप्लाई का व्यवसाय कर रहे हैं। पिछले वर्ष तक पुष्कर तेली पढ़ाई के साथ पिता के व्यवसाय में हाथ बटाते थे। राजनीतिक समझ स्कूल के दिनों से ही बढ़ने लगी थी। कम उम्र में ही राजनीतिक लोगों की मानसिकता व क्रियाकलापों से भली भांति अवगत हो चुके थे। साथ ही विकास कार्यों में उनकी भूमिका व कार्यप्रणाली को समझा था। सक्रिय राजनीति में जाने का मकसद नहीं था। इनके पिताजी के सम्पर्क जरूर राजनीतिक लोगों से थे। उन्हीं की बदौलत गत पंचायतीराज चुनाव में पंचायत समिति सदस्य का टिकिट मिला। भाजपा के बैनर से वार्ड संख्या-5 से चुनाव लड़ा और प्रतिद्वंद्धी राम सिंह चंदाना को 341 वोटों से हराकर पंचायत समिति सदस्य बने और बाद में प्रधान का चुनाव लड़ा और जीते।

इनके चुनाव जीतने के बाद गोगुन्दा क्षेत्र में चर्चाएं आम हुई कि - बच्चे को प्रधान बना दिया हैं। वह क्या विकास करवा पाएगा। वह तो बोल भी नहीं पाता हैं। उसे तो पंचायतीराज की समझ ही नहीं हैं। उसे तो राजनीतिक समझ भी नहीं हैं। उसे तो दूनियादारी का भान भी नहीं हैं वगैरह ... वगैरह।

प्रधान बनने के तुरन्त बाद जिन लोगों ने प्रधान को लेकर टिप्पणियां की या ताने मारे, वे लोग अब प्रधान द्वारा करवाए जा रहे कार्यों को देखकर दांतों तले उंगलियां चबा रहे हैं।

विकास कार्य करवाना और इसके लिए अन्य जनप्रतिधियों को प्रेरित करना व सब को साथ लेकर चलना प्रधान की खासियत हैं। इन्होंने ही युवा सरपंचों के साथ लगातार संपर्क कर उन्हें ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर गौरव पथ का निर्माण करवाने के लिए तैयार किया। आज गांवों में सीमेन्ट की अच्छी गुणवत्ता वाली सड़कें बनी हैं। काच्छबा ग्राम पंचायत के सरपंच तेजू लाल गमेती का कहना हैं कि प्रधान जी जब भी मिलते हैं, कुछ ना कुछ नया सुझाव देते हैं और गांवों में विकास के लिए प्रेरित करते हैं। पंचायत समिति के अधिकारियों से मुझे योजनाओं की जानकारी नहीं मिलती हैं उससे पहले प्रधान जी जानकारी दे देते हैं। उनके द्वारा सुझाए गए कार्य करवाए तो ग्रामीणों ने मुझे शुभकामनाएं दी। 

काच्छबा ग्राम पंचायत के सरपंच ही नहीं अपितू क्षेत्र के लगभग सभी सरपंचों का कहना हैं कि प्रधान मृदुभाषी, सकारात्मक सोच व प्रगतिशील विचारधारा के व्यक्ति हैं और गांवों के विकास के लिए पूरा सहयोग दे रहे हैं।


स्वच्छ भारत मिशन के प्रबल पक्षधर

प्रधान पुष्कर तेली हर क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं और सरकार की मंशा पूर्ण करने के लिए कृतसंकल्पित हैं। स्वच्छ भारत मिशन को इन्होंने आत्मसात किया हैं और पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के सरपंचों से सतत् सम्पर्क कर उन्हें अपनी पंचायत को शौचमुक्त बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। रावलियां खुर्द ग्राम पंचायत की सरपंच सविता कुंवर के पति जो कि सामाजिक कार्यकर्ता को भी इसके लिए प्रेरित किया। इस ग्राम पंचायत को शौच मुक्त बनाने के लिए इस गांव से जुड़े किसान नेता व पार्टी कार्यकर्ताओं को इस मिशन से सरपंच के साथ जोड़ा। गांव के लोगों की सोच बदलने के भरपूर प्रयास किए। उनकी यह साझी पहल सफल रही। 900 से अधिक परिवारों ने अपने घरों में शौचालय बनवाए हैं। इस योजना के प्रति ग्रामीणों की गलत मानसिकता न बन जाए इसलिए जिन लोगों ने शौचालयों का निर्माण करवाया उन्हें सहायता राशि दिलवाने में भी ढि़लाई नहीं बरती, फलस्वरूप 900 परिवारों को 1 करोड़ 8 लाख रूपए का भुगतान हो पाया हैं।

राजनीतिक जानकार व ब्यूरोक्रेसी को समझने वाले लोग निश्चित ही शौचमुक्त ग्राम पंचायत बनाने का श्रेय सरकार व जिला कलक्टर को दे सकते हैं लेकिन पर्दें के पीछे की कहानी यही हैं कि युवा वर्ग के प्रेरणास्त्रोत बने प्रधान पुष्कर तेली की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं।

6 ग्राम पंचायतों में पेयजल पहुंचाने की कवायद जारी

गोगुन्दा उपखण्ड मुख्यालय से 10 किलोमीटर के दायरे में आ रही 5 ग्राम पंचायतों (रावलिया कलां, रावलिया खुर्द, मजावड़ी, ओबरा कलां व दादिया) में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं हैं। प्रधान इन पांचों ग्राम पंचायतों में पेयजल आपूर्ति करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। यह कार्य करवाने के लिए सांसद, विधायक व सरपंचों से समन्वय कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी इन्होंने जमकर पैरवी की हैं। हाल ही में विभाग द्वारा सर्वे करवाया गया हैं और शीघ्र ही स्वीकृति की संभावना हैं।

गोगुन्दा में हो सरकारी काॅलेज

प्रधान पुष्कर तेली जनप्रतिनिधि भी हैं और स्वयंपाठी छात्र भी। वे वर्तमान में बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थी हैं। इस नाते युवा वर्ग से उनका गहरा जुड़ाव हैं, फलतः युवा वर्ग की समस्या से भी भलीभांति अवगत हैं। वे गोगुन्दा में सरकारी काॅलेज खुलवाने के प्रबल प्रस्तावक हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी काॅलेज के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, उन्होंने बताया कि गोगुन्दा के छात्रों को यह सौगात जल्दी ही मिलेगी।

वाकल के लिए भी किए काम

वाकल क्षेत्र। इस क्षेत्र में आती हैं गोगुन्दा पंचायत समिति की पड़ावली कला, पड़ावली खुर्द, वास, समीजा, मादड़ा व वीरपुरा ग्राम पंचायतें। विकास के संदर्भ में अमूमन इन ग्राम पंचायतों पर कम ध्यान दिया जाता रहा हैं। मगर युवा प्रधान ने इन ग्राम पंचायतों पर विशेष ध्यान दिया। नृसिंहपुरा में पेयजल के लिए 1 करोड़ की योजना स्वीकृत करवाई। वहीं इस क्षेत्र में नेशनल बैंक की शाखा खुलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं ताकि वित्तिय लेने-देने के लिए इस क्षेत्र के लोगों को गोगुन्दा न आना पड़े।

ताकि न रहे पेयजल की समस्या

पेयजल की समस्या से निबटने के लिए खराब पड़े हैण्डपम्पों को दुरूस्त करने की मुहिम चलाई। पंचायत समिति क्षेत्र के आधे से ज्यादा हैण्डपम्प खराब पड़े थे, जिन्हें ठीक कर देने पर पेयजल समस्या का निदान संभव था। तब प्रधान ने सभी हेण्डपम्प मिस्त्रियों को पंचायत समिति कार्यालय में उपस्थिति देने की व्यवस्था की। मिस्त्रियों ने बताया कि वे हेण्डपम्प ठीक करने जाते हैं पर समुदाय से लोग पाइप निकलवाने में मदद नहीं करते हैं, जिस कारण हेण्डपम्प खराब पड़े रह जाते हैं। प्रधान ने उन्हें पंचायत समिति की ओर से चौपहिया वाहन मुहैया करवाते हुए सुझाया गया कि वे 4 मिस्त्री साथ जाए और हेण्डपम्पों को ठीक करे। इस प्रकार अभियान चलाकर हेण्डपम्प ठीक करवाए गए। वहीं पेयजल की किल्लत को देखते हुए पिछले एक साल में 150 से अधिक नए हेण्डपम्प लगवाए गए हैं।


प्रधान अपनी सक्रिय टीम के सहयोग से हर क्षेत्र में पहल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में वे गांवों में शिविर लगाएंगे। उन शिविरों में योजनाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करेंगे तथा नागरिकों को जनकल्याणकारी योजनाओं के पति जागरूक करेंगे। उनकी तमन्ना हैं कि क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक का बैंक खाता हो, उसके 12 या 330 रूपए का बीमा हो। प्रधान ने जनसहयोग व निजी रूपयों से गरीब लोगों के बीमें करवाने की घोषणा भी की हैं। 

गोगुन्दा कस्बे में हुए विकास कार्य हम सब के सामने हैं, उनके बारे में ज्यादा लिखने या बताने की जरूरत नहीं हैं। पर पुष्कर जी जरूर कह रहे हैं कि -

"एक साल बीता, चार साल बाकी हैं। 
हुई हैं महज पहल, अभी तो कई हिसाब बाकी हैं।" - पुष्कर तेली

खासबात यह हैं कि प्रधान द्वारा करवाए गए एक भी कार्य पर किसी न अंगूली नहीं उठाई हैं। मतलब पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य किए जा रहे हैं।