Friday, April 22, 2016

सुन लो दलित विरोधियों . . . अब हम स्वतंत्र हैं, तुम अपनी पाचन शक्ति बढ़ा लो

बच नहीं सकती गोगुन्दा पुलिस, एफआईआर दर्ज करनी ही होगी

  • राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुन्दा से

एक वक्त था जब दलित जातियों को कतिपय ऊंची जातियों के लोगों ने गुलाम बना रखा था। उन्होंने लम्बे समय तक दलितों का शोषण किया। उन्हें मानसिक तौर पर गुलाम बना दिया गया। शोषित दलितों ने गुलामी को ही अपनी नियति समझ ली। ऐसा कई युगों तक हुआ। अंग्रेजों के शासन के दौरान देश अंग्रेजों का गुलाम हो गया लेकिन इस काल में दलितों को कुछ हद तक ऊंची जातियों की गुलामी से मुक्ति मिली। उसके बाद अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त होने के बाद भारत का संविधान बनाया गया। भारत के संविधान में देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार, जीने का अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार सहित मूलभूत अधिकार प्रदान किए गए। ये अधिकार केवल दलितों को ही प्रदत्त नहीं हैं, ये अधिकार देश के तमाम नागरिकों को प्रदत्त हैं। 

कई बरसों तक इन अधिकारों की जानकारी दलित समुदायों के लोगों तक नहीं पहुंची। अशिक्षा सबसे बड़ा कारण रहा। देश के कई गैर दलित लोग जिनके मन में दलितों के प्रति संवेदनाएं थी, उन्होंने तथा दलित समुदायों के पढ़े-लिखे लोगों ने इन अधिकारों को दलित समुदायों में फैलाने में योगदान दिया।

संविधान लागू होने के बाद से आजतक समाज में कई परिवर्तन हुए। जहां ‘‘सबका साथ-सबका विकास’’ परिकल्पना पर चलने वाले लोग देश में सामाजिक एकता के लिए प्रयास कर रहे हैं। सम्प्रभू व अखण्ड़ भारत की स्थापना करने में लगे हैं वहीं दूसरी और खासकर ग्रामीण भारत में कई गैर दलितों द्वारा दलितों की स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा हैं। कहीं उन्हें दलितों का अच्छे कपड़े पहनना नहीं पच रहा हैं, कईयों को दलित महिलाओं के अच्छे आभूषण धारण करना नहीं भा रहा हैं। कईयों को दलितों के अच्छे मकान सूंई की तरह चुभ रहे हैं। अनेक को दलितों समुदायों द्वारा सामाजिक कार्यक्रम करना पंसद नहीं आ रहा हैं। देखा जाए तो गैर दलित कतिपय लोग दलितों की समृद्धि से कुंठित हो गए हैं। वे दलितों को गुलाम बना कर ही रखना चाहते हैं। वे चाहते हैं दलित अब भी वो ही कार्य करें जो गैर दलित चाहते हैं। वे उनसे अपने घरों व खेतों में काम करवाना चाहते हैं और मानसिक गुलाम बनाए रखना चाहते हैं।

21 अप्रेल 2016 की रात को गोगुन्दा तहसील के ओबरा कलां गांव में मेघवाल समुदाय के एक परिवार में विवाह आयोजन था। इस परिवार के युवा गुजरात राज्य के शहर में व्यवसाय करते हैं। कड़ी मेहनत कर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया हैं। विवाह के शुभ प्रसंग पर परिवार के लोगों ने दुल्हें की घोड़े पर बिन्दौली निकालने का निर्णय किया। बैण्ड बाजे मंगवाए गए, घोड़ा मंगवाया गया। घोड़े को सजाया गया। दूल्हा भी बड़ी ही खुशी के साथ घोड़े पर सवार हुआ। बैण्ड़ बाजे वालों ने ‘‘आज मेरे यार की शादी हैं’’ नामक गाने की धुन छेड़ी। समुदाय की युवक-युवतियां, महिला-पुरूष, बच्चें और दूल्हें के साथी सजधज कर बिन्दौली में आए थे। दरअसल विवाह आयोजन में बिन्दौली एक रस्में हैं, बिन्दौली निकालने से गांव के प्रत्येक परिवार को मालूम हो जाता हैं कि किस परिवार के किस सदस्य का विवाह हो रहा हैं। मतलब बिन्दौली विवाह के सार्वजनिक प्रचार-प्रसार का माध्यम हैं। और बिन्दौली दूल्हें के करीबी लोगों के आनन्द लेने का अवसर भी होता हैं।

बीते बुधवार यानि 21 अप्रेल 2016 की रात को मेघवाल परिवार के युवक की बिन्दौली परवान पर थी। बिन्दौली में समुदाय के महिला-पुरूष हर्षोंल्लास के साथ नाच गा रहे थे। तभी कतिपय गैर दलित लोग बिन्दौली के आड़े आ गए और बिन्दौली निकालने पर नाराजगी जताते हुए गाली गलौच करने लगे। उनका कहना था कि ‘‘तुम नीची जाति के होकर इस प्रकार से बिन्दौली कैसे निकाल सकते हो ?’’ वे बेचारे गफलत हैं, उन्हें मालूम नहीं हैं कि देश में 1949 से संविधान लागू हैं। मेघवाल समुदाय के लोग उनकी तरह गूंपे नहीं हैं। उन्हें अपने संवैधानिक हकों की जानकारी हैं। इस बार वे चूके नहीं। तुरन्तु पुलिस थाने में फोन कर बताया कि उनके संवैधानिक हकों का हनन किया गया हैं। कुछ समाज कंटकों ने बिन्दौली को रूकवाया हैं, जबरन दूल्हें को घोड़े पर से उतारा हैं और जातिगत गांलियां निकाली हैं। पीडि़तों की शिकायत के बाद कुछ ही देर बाद गोगुन्दा पुलिस थाने की गाड़ी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने आरोपियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस के आते ही आरोपी भी रफ्फूचक्कर हो गए। अंततः पुलिस जाप्ते में बिन्दौली निकाली गई।

गैर दलित कतिपय लोगों को मेघवाल समुदाय के दूल्हे की बिन्दौली नहीं अखरी। उन्होंने बिन्दौली को रोकना चाहा लेकिन अंततः क्या हुआ ? उन कतिपय लोगों को मूंह की खानी पड़ी। बिन्दौली रोकने वाले अब थूंक कर चाट रहे हैं, पुलिस थाने में कह रहे हैं कि हमने बिन्दौली को नहीं रूकवाया। ओबरा कलां के मेघवाल समुदाय के युवाओं का तो इन थूंक कर चाटने वाले जैसे लोगों से यहीं कहना हैं कि भाईयों अब तुम्हारे दादा-परदादा वाला समय नहीं रहा हैं। जितना अत्याचार करना था, जितना गुलाम बनाकर रखना था तुमने बना लिया हमारे पुरखों को। अब हम पर गुलामी लादने का प्रयास मत करो।

ओबरा कलां के मेघवालों ने हिम्मत दिखाई, संवैधानिक हक को पाने के लिए बस एक फोन ही किया और नतीजा सामने हैं। उन्होंने बिन्दौली रोकने वालों के विरूद्ध गोगुन्दा पुलिस थाने में रिपोर्ट दी हैं। वहीं गोगुन्दा थाने से जानकारी मिली कि ओबरा कलां के गोपी लाल मेघवाल की रिपोर्ट पर कार्यवाही करते हुए आरोपियों को पाबंद किया गया हैं। पुलिस थाने की इस मामूली सी कार्यवाही का विरोध करते हुए मेघवाल समुदाय के लोगों ने बताया कि अगर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्यवाही नहीं की तो वे आन्दोलन करेंगे। मेघवाल समुदाय के अन्य गांवों के लोग ओबरा कलां के लोगों से कह रहे हैं कि ‘‘तुम संघर्ष करों, हम तुम्हारे साथ हैं।’’
मामले की जानकारी मिलने पर दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के संस्थापक भंवर मेघवंशी ने कहा कि दलित की बिन्दौली को रोकने, जातिगत गांलिया देने के आरोपियों के विरूद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की जानी चाहिए।

बाडमेर के गणपत मेघवाल का कहना हैं कि भारत की आजादी के बाद से कई दलित समुदायों के लोग गुलाम मानसिकता से आजाद हुए हैं। उन्हें संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, वे समानता के लिए लड़ रहे हैं, व्यवसायों में आगे बढ़े हैं, अच्छे घर बना रहे हैं, आर्थिक प्रगति की हैं और मजे से जी रहे हैं। अब जरूरत हैं दलित विरोधी उन गैर दलितों को अपनी पाचन शक्ति बढ़ाने की, उन्हें दलितों की इस आर्थिक प्रगति को पचाना होगा, उनकी स्वतंत्रता को पचाना होगा, उनकी ताकत भी पचाना होगा। अगर अब स्वतंत्रता के अधिकार, समानता के अधिकार का उल्लंघन किया या किसी प्रकार का अत्याचार करने की चेष्टा की तो अंजाम भुगतना होगा। हम अंत तक कानूनी लड़ाई लडेंगे।

जय भीम। 

Wednesday, April 20, 2016

श्रम मंत्री जी, क्या ऐसे होगा निर्माण श्रमिकों का कल्याण ?

लखन सालवी
राजस्थान सरकार के श्रम विभाग के मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टी.टी. श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। हाल ही में विभाग से सहबद्ध भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल की योजनाओं में परिवर्तन किए गए और योजनाओं में सहायता राशि बढ़ाने के साथ नवाचार भी किए गए। कई योजनाओं को बंद किया गया हैं जिससे श्रमिक वर्ग में नाराजगी भी हैं। विवाह सहायता जैसी महत्वाकांक्षी व बाल विवाह रोकने में सहायक रही इस प्रभावी योजना को पूर्णतः बंद कर दिया गया हैं। इस योजना के तहत हिताधिकारी को 51,000 रूपए की सहायता देय थी। साईकिल सहायता योजना को पूर्व में ही बंद कर दिया गया था। विश्वकर्मा पेंशन योजना के हाल किसी से छुपे नहीं हैं, श्रमिकों ने इस योजना के तहत रूपए जमा करवाए। यह योजना पूर्व सरकार के समय में बंद कर दी गई। जिन श्रमिकों ने अंशदान जमा करवाया उनको पेंशन का इंतजार हैं। 

वर्तमान में नई योजना के रूप में शुभ शक्ति योजना आरम्भ की हैं। इस योजना के तहत मण्डल से पंजीकृत श्रमिक की पुत्री को कौशल विकास हेतु, स्वरोजगार हेतु, शिक्षा हेतु या विवाह हेतु 55000 रूपए की सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें पात्रता के लिए पुत्री का 8वीं पास होना अनिवार्य हैं। श्रमिक वर्ग का मानना हैं कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में जहां पंचायतीराज चुनाव में सरपंच प्रत्याशी के लिए 8वीं पास महिला नहीं मिल पाती हैं वहां इस योजना की स्थिति क्या होगी इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता हैं। श्रमिक हितैषी एक बड़े तबके का मानना हैं कि राज्य सरकार को 8वीं पास की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करना चाहिए।

मण्डल की योजनाओं में सहायता राशि भी बढ़ाई गई हैं। महिला हिताधिकारी को प्रसूति सहायता के रूप में पुत्र होने पर 20,000 रूपए व पुत्री होने पर 21,000 रूपए की सहायता राषि प्रदान की जाएगी। दुर्घटना मृत्यु होने की दशा में 5 लाख रूपए व सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रूपए की सहायता राशि दी जाएगी। विदित रहे इससे पूर्व सामान्य मृत्यु की स्थिति में 75,000 रूपए की सहायता राशि दी जाती थी। हिताधिकारियों के शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों के लिए छात्रवृत्ति सहायता की राशि को भी बढ़ाया गया हैं। यही नहीं मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी बढ़ाई गई हैं। श्रमिकों के बीमें के लिए, उनकी भविष्य निधियों के लिए, इलाज करवाने के लिए भी सरकार ने अलग-अलग योजनाएं चला रखी हैं। हाल ही में इस मण्डल से जुड़ने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। अब श्रमिक ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से आॅनलाइन आवेदन कर सकेगा और श्रम निरीक्षक कार्यालय, पंचायत समिति में, अपनी ग्राम पंचायत में और श्रम से जुड़े अन्य कार्यालयों में आॅफलाइन आवेदन भी कर सकेगा। श्रम मंत्री के आदेश से नई योजनाएं व योजनाओं में परिवर्तन तथा नई प्रक्रिया जनवरी-2016 से लागू हैं। बावजूद जमीनी स्थिति बदहतर हैं। तीन माह गुजर जाने के बाद भी श्रम कार्यालयों में पंजीयन तक के आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। योजनाओं के आवेदनों की स्थिति तो और भी खराब हैं। 

इन सब से बेखबर अशिक्षित व वंचित श्रमिक वर्ग आज भी केवल अपनी बुनियादी जरूरतों के बंदोबस्त में लगा हुआ हैं। इस बंदोबस्त की जीवन शैली में भी श्रमिकों को जीने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही हैं। दमनकारी नीतियां इन्हें श्रम पर आधारित जीवन भी नहीं जीने दे रही हैं। दूसरी ओर श्रम कानूनों में संशोधन कर उनकी कमर तोड़ी जा रही हैं। श्रमिक हितैषी कहलवाने के लिए सरकारों ने श्रमिक की सामाजिक सुरक्षा के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं लेकिन राजनैतिक लोगों की इच्छाशक्ति में कमी व प्रशासनिक व्यवस्था की बेरूखी के कारण जरूरतमंद व पात्र श्रमिकों को इनका फायदा कम ही मिल पा रहा हैं। आंकड़ों के अनुसार राजस्थान सरकार ने गत बजट में इन योजनाओं के लिए 6000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया लेकिन महज 65 करोड़ रूपए ही खर्च किए गए अर्थात् बजट का मात्र 1 प्रतिशत ही खर्च किया गया। श्रम कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार व अधिकारियों की संवेदनहीनता भी इन योजनाओं के प्रति श्रमिकों के आर्कषण को कम कर रही हैं। 

श्रमिक संगठनों को कुचलने के प्रयास

उदयपुर के श्रम कार्यालय में मण्डल की योजनाओं में भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। कार्यालय में कर्मचारियों व अधिकारियों की असंवेदनशीलता व भ्रष्टाचार की प्रवृति देखने को मिलती हैं। यहां हितलाभ वितरण में भाई भतीजावाद की नीति अपनाई जा रही हैं। कार्यालय के इर्दगिर्द एजेण्टों की भरमार हैं। जो श्रमिक एजेण्टों के माध्यम से श्रम कार्यालय तक पहुंच रहे हैं, उन्हें योजनाओं के लाभ देने में देरी नहीं की जा रही हैं। दूसरी और जो श्रमिक, श्रमिक संगठनों से जुड़कर श्रम कार्यालय में विभिन्न सहायता योजनाओं के तहत आवेदन कर रहे हैं, श्रम विभाग द्वारा छोटी-छोटी कमियां ढूंढ कर उनके आवेदन निरस्त किए जा रहे हैं।  

जिले के श्रमिक संगठित हुए हैं। गोगुन्दा क्षेत्र में निर्माण क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के 4 संगठन हैं। बजरंग, जरगा व सायरा निर्माण श्रमिक संगठन (अपंजीकृत) गोगुन्दा क्षेत्र में हैं तथा बड़गांव क्षेत्र में महिला श्रमिकों का संगठन हैं, जिसे रानी लक्ष्मी बाई निर्माण श्रमिक संगठन के नाम से जानते हैं। इन श्रमिक संगठनों से 5000 से अधिक श्रमिक सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। इनसे जुड़ा प्रत्येक श्रमिक अन्य श्रमिकों के संवैधानिक हकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध नजर आता हैं। संगठन से जुड़े श्रमिक न तो रिश्वत देते हैं और न ही देने देते हैं। संगठन दिनों दिन मजबूत होता जा रहा हैं, जिससे श्रम कार्यालय के भ्रष्ट लोगों की गोगुन्दा क्षेत्र की उपरी आय कम होती जा रही हैं। श्रम कार्यालय के लोग इस संगठन को अपने काम में रोड़ा मान रहे हैं और इन संगठनों को कमजोर करने के लिए संगठन से जुड़े श्रमिकों के आवेदन निरस्त करके उनमें संगठन के प्रति विद्वेष की भावना जाग्रत करने के प्रयास कर रहे हैं। 

केस-1

उदयपुर जिले के गोगुन्दा निवासी मोती लाल मेघवाल विवाह सहायता आवेदन के निरस्त हो जाने से दुःखी हैं। वह भवन निर्माण कार्य में चिनाई का कार्य करता हैं तथा बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़ा हुआ हैं। उसने 21 अप्रेल 2015 को अपनी पुत्री नवली का विवाह करवाया था तथा विवाह सहायता के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय उदयपुर में आवेदन किया था। हाल ही में संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय से उसे सूचना दी गई कि उसका विवाह सहायता आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं। कारण पूछने पर बताया गया कि उसके नाम में अंतर हैं इसलिए आवेदन निरस्त हुआ हैं। 

जानकारी के अनुसार मोती लाल मेघवाल के पहचान के दस्तावेज यथा आधार कार्ड, राशन कार्ड में उसका नाम मोती लाल मेघवाल अंकित हैं लेकिन श्रम कल्याण बोर्ड द्वारा परिचय पत्र में उसका नाम मोती मेघवाल दर्ज हैं यानि उसके नाम में ‘‘लाल’’ शब्द अंकित नहीं हैं। बस इसी ‘‘लाल’’ शब्द के अंकित न होने के कारण संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा उसका विवाह सहायता आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं। 

मोती लाल ने विवाह सहायता दिलवाने की मांग को लेकर 8 फरवरी को जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया और उसके बाद 18 मार्च को राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई लेकिन उसकी शिकायत की अभी तक सुनवाई नहीं हुई हैं।

केस-2


विधवा के हक के हनन से भी नहीं चूका विभाग

आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र व श्रम कल्याण बोर्ड के परिचय पत्र में धापू गमेती के पति का नाम देवी गमेती दर्ज हैं। धापू बाई विधवा महिला हैं तथा 5 बच्चों का लालन-पालन कर रही हैं। राशन कार्ड में उसका नाम धापू बाई की बजाए धापूड़ी अंकित कर दिया गया और उसके पति का नाम देवी लाल की बजाए देवा अंकित कर दिया गया। धापू गमेती ने अपनी पुत्री मोवनी का विवाह 28 अप्रेल 2015 को करवाया और विवाह सहायता के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में आवेदन किया। 5 फरवरी 16 को संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय ने पत्र भेजकर सूचना दी कि उसके पति के नाम में अंतर होने की वजह से उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया हैं।

तो फिर कैसे मिली अंत्येष्ठि सहायता

दो वर्ष पूर्व धापू बाई के पति देवी लाल की मृत्यु हो गई। धापू बाई ने अंत्येष्ठि सहायता के लिए आवेदन किया, तब विभाग द्वारा उसे अंत्येष्ठि सहायता प्रदान की गई। उसका कहना हैं कि नाम में अंतर के कारण विवाह सहायता आवेदन को निरस्त कर दिया गया तो पति की मृत्यु पर अंत्येष्ठि सहायता कैसे जारी की गई। 

धापू बाई अशिक्षित हैं मगर जागरूक हैं। वह बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़ी हुई हैं तथा श्रमिकों के हकाधिकारों के लिए पैरवी करती हैं। वह आए दिन महिलाओं के विभिन्न मुद्दों पर पैरवी करने के लिए संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में जाती रहती हैं। वह विभाग के असंवेदनशील व अकर्मण्य कर्मचारियों व अधिकारियों की आंख की किरकिरी बनी हुई हैं। 

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि धापू बाई को विवाह सहायता नहीं देने के लिए सभी कर्मचारी एकजूट हैं। धापू बाई जैसी जागरूक व मजबूत महिलाओं के कारण उनकी उपरी आय पर असर पड़ता हैं इसलिए वे उसे विवाह सहायता का लाभ नहीं देकर उसे कमजोर करना चाहते हैं। 

बकौल धापू बाई वह किसी सरकारी योजना का लाभ लेने मात्र के लिए असंगठित मजदूरों के लिए काम नहीं कर रही हैं बल्कि असंगठित श्रमिक परिवारों के उत्थान के लिए कार्य करना चाहती हैं। उसे लेशमात्र भी दुःख नहीं हैं कि संगठन से जुड़े होने के कारण उसे लाभ नहीं दिया जा रहा हैं। 

वह विधवा हैं,  5 बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी उस पर हैं। वह विवाह सहायता योजना की असल पात्र हैं, मगर विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों की दुर्नीति के कारण उसे आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही हैं। उसने हाल ही में 16 मार्च को राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई हैं।

केस-3

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सायरा पंचायत समिति क्षेत्र के बौखाड़ा गांव के परताराम गुर्जर को भी विवाह सहायता योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा हैं। वह सायरा निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़े हुए हैं। मण्डल से जारी परिचय पत्र में इनकी बेटी मंथरा का नाम चंदा दर्ज हो गया हैं। इन्होंने पिछले वर्ष 28 अप्रेल 2015 को अपनी बेटी का विवाह करवाया और विवाह सहायता के लिए मण्डल में आवेदन किया। अब मण्डल उन्हें यह कह कर विवाह सहायता नहीं दे रहा हैं कि ‘‘तुमने आवेदन मंथरा के लिए किया हैं जबकि परिचय पत्र में मंथरा का नाम ही नहीं हैं।’’ परथाराम गुर्जर की बेटी का का मंथरा हैं और उसके समस्त सरकारी दस्तावेजों में भी नाम मंथरा ही अंकित हैं। आवेदन करने के बाद परताराम गुर्जर ने अपनी पुत्री का नाम मंथरा होने का शपथ पत्र देने के साथ मंथरा के जन्म प्रमाण की प्रति, अंकतालिका की प्रति व अन्य दस्तावेजों की प्रतियां भी दी। श्रम कार्यालय ने किस आधार पर परथाराम गुर्जर के परिचय पत्र में बेटी का नाम मंथरा दर्ज किया यह जांच का विषय हैं। लेकिन अभी तो मंथरा और चंदा के फेर में परताराम को विवाह सहायता की राशि जारी नहीं की जा रही हैं। 

यह तो महज चंद उदाहरण हैं। नामों में अंतर के ऐसे दर्जनों मामले हैं, जिनमें श्रम कार्यालय ने विभिन्न सहायता योजनाओं के आवेदनों को निरस्त कर दिया हैं। बहरहाल पीडि़त श्रमिकों ने जिला कलक्टर, श्रम मंत्री को अपनी समस्या से अवगत कराया हैं साथ ही राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई हैं। 

भारोड़ी गांव निवासी तख्त सिंह श्रमिक संगठन में पदाधिकारी हैं। उनकी पुत्रवधु लक्ष्मी देवी भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल से पंजीकृत हैं। वर्ष 2012 में उसने प्रसूति सहायता के आवेदन किया लेकिन उसे प्रसूति सहायता जारी नहीं की गई। लक्ष्मी देवी ने श्रम विभाग के सैकड़ों चक्कर काटे, अंत में तो उसे यह तक कह दिया गया कि उसका आवेदन कार्यालय में नहीं हैं। मार्च-2016 में तख्त सिंह ने कार्यालय में जाकर कर्मचारियों को खरी खोटी सुनाई तब जाकर उन्होंने रद्दी के रूप में पडे फाइलों के ढ़ेर से लक्ष्मी देवी की फाइल निकाली और संयुक्त श्रम आयुक्त ने प्रसूति सहायता राशि की स्वीकृति दी। 

गोगुन्दा-सायरा क्षेत्र में कार्यरत बजरंग, सायरा, जरगा व रानी लक्ष्मी बाई निर्माण श्रमिक संगठनों से जुड़े श्रमिक गेहरी लाल मेघवाल, देवी लाल गमेती, मोती लाल गमेती, धापू बाई मेघवाल सहित दर्जनों श्रमिकों का कहना हैं कि संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा श्रमिकों को हर मामले में परेशान किया जा रहा हैं। 

बजरंग निर्माण श्रमिक संगठन से जुड़े 100 से अधिक श्रमिकों ने बताया कि मार्च-2015 में गोगुन्दा में एक शिविर लगाया गया। उस शिविर में उन्होंने हिताधिकारी के रूप में पंजीकृत होने के लिए आवेदन किए लेकिन अभी तक उन्हें परिचय पत्र नहीं दिए गए हैं। जिन लोगों के परिचय पत्र बनाए गए उनमें जानबूझ कर भारी कमियां रखी गई हैं। हिताधिकारी के नाम, उनके परिजनों के नाम व उनकी उम्र गलत लिख दी गई। 

जसोदा को बनाया फफोड़ा
केस-1 
दादिया गांव के प्रकाश पिता भैरू लाल मेघवाल ने श्रम विभाग के कर्मकार मण्डल से जुड़ने के लिए आवेदन किया। श्रम विभाग उदयपुर द्वारा जारी किए गए हिताधिकारी परिचय पत्र में परिवार के सदस्यों के नाम भी गलत अंकित किए गए हैं। प्रकाश मेघवाल की पत्नि का नाम जसोदा बाई हैं जबकि परिचय पत्र में जसोदा बाई की जगह फफोड़ा अंकित किया गया हैं। 
कार्यस्थल का पता - नरेगा जी

केस-2
श्रम विभाग द्वारा जारी प्रभु लाल के परिचय पत्र में नियोजक का नाम नरेगाजी अंकित किया गया र्हैं। 


गांव का नाम नीचराय
केस-3
किशन लाल के पिता का नाम गलत दर्ज हुआ हैं। वहीं इसका निवास नीचराय में बताया हैं कि जबकि गोगुन्दा तहसील में नीचराय नाम का कोई गांव नहीं हैं। 


केस-4
सोवनी बाई परिचय पत्र में अपने नाम को सुधरवाने के लिए चक्कर काट रही हैं। उसका कहना हैं कि उसने परिचय पत्र बनवाने के लिए पहले से ही कई चक्कर काटे थे, अब परिचय पत्र में नाम सुधरवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिचय पत्र में उसका नाम सोवनी बाई की जगह सोवमीबा अंकित कर दिया गया हैं। 


पहले भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल की किसी भी योजना का लाभ करने के लिए आवेदन के साथ मूल परिचय पत्र देना पड़ता था। वर्ष 2014 तक जिन श्रमिकों ने योजनाओं के लिए आवेदन किए उनमें से कई श्रमिकों के मूल परिचय पत्र वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं। श्रमिकों के परिचय पत्रों को नवीनीकरण करवाने की तिथियां भी निकल चुकी हैं। 

श्रम कार्यालय में आलम यह हैं कि विभाग के अधिकारी जहां एजेण्टों के आगे नतमस्तक दिखाई पड़ते हैं वहीं श्रमिकों को देखकर भड़कते हैं। जिन-जिन श्रमिकों ने भ्रष्टाचार की खिलाफत की या लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया, अब उन श्रमिकों के हितलाभ आवेदनों को निरस्त कर विभागीय अधिकारी श्रमिकों को अपनी ताकत का अहसास करवा रहे हैं। 

श्रमिक संगठन से जुड़े गणेश लाल खैर ने मण्डल की विभिन्न योजनाओं के आवेदनों व स्वीकृति से सम्बधित सूचना चाहने हेतु संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय में सूचना के अधिकार के तहत सूचनाएं भी मांगी लेकिन सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।

अधिकतर श्रमिक श्रम मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह से उम्मीदें लगाए बैठे हैं कि जिस प्रकार उन्होंने नई योजना आरम्भ की व अन्य योजनाओं में सहायता राशि बढ़ाई, उसी प्रकार वे योजनाओं की क्रियान्विति के लिए भी नवाचार करेंगे।

Tuesday, March 22, 2016

होली रा राम-राम सा।

लखन सालवी री ओर सूं होली रा राम-राम सा।
वरिष्ठ नेता देवी लाल जी मेहता ने, कवि सोहन जी कोठारी ने
टेंट वाला सोनी जी ने और फल फ्रूट वाला जगदीश जी ने
होली रा राम-राम सा।

मण्डल अध्यक्ष (BJP)लक्ष्मण सिंह जी ने, वरिष्ठ नेता नाहर सिंह जी ने
कडेचावास वाला बाबू लाल जी ने और बीजेपी रा नेता ने
होली रा राम-राम सा।
मांगी लाल जी गरासिया ने, लाल सिंह जी झाला ने
नारायण पालीवाल ने, सगळा कांग्रेसी कार्यकर्ता ने
होली रा राम-राम सा।

विधायक प्रताप जी गमेती ने, प्रधान पुष्कर जी तेली ने
उपप्रधान पप्पू जी राणा ने और मेम्बर डी.सी. मेघवाल ने
होली रा राम-राम सा।

एसडीओ साब ने, तहसीदार साब ने
थानादार साब ने और एईएन साब (बिजली) ने
होली रा राम-राम सा।
नवा बीडीओ साब ने, पंचायत रा सचिव (साब) ने
सरपंच गागू लाल जी ने और सगळा वार्ड पंचा ने
होली रा राम-राम सा।

सरपंचा-वार्ड पंचा ने, बाबू-सचिवा ने
स्कूला रा मारसाबा ने और पटवारी-गिरदाला ने
होली रा राम-राम सा।
सेन्ट पॅाल री सिस्टर ने, विधा निकेतन रा कालू जी ने
आरसीएम वाला जगदीश जी ने और स्टारनेट वाला गणेश जी ने
होली रा राम-राम सा।

मूच्छया वाला अमर सिंह जी, केबल वाला महेन्द्र जी ने
काला कोट वाला कमलेश जी ने और सीमेन्ट वाला पन्न जी ने
होली रा राम-राम सा।

पटवारी साब का भाया ने, प्रिंसीपल साब का मोटियार ने
जेएमबी वाला ओम जी ने और समोसा वाला शिव जी ने
होली रा राम-राम सा।
जतन वाला ओम जी ने, कास वाला सरफराज जी ने
अलर्ट वाला गुप्ता जी ने और विकल्प वाला बेनजी (ऊषा चौधरी) ने
होली रा राम-राम सा।
पत्रिका का रा कपिल जी ने, भास्कर वाला किशन जी ने
नवज्योति रा सोनी जी ने और चाय वाला राजू भाई ने
होली रा राम-राम सा।
होटल वाला विष्णु जी ने, सेमटाल रा कपिल जी माराज ने
पेट्रोल - गैस वाला ने, पोया जलेबी वाला ने,
होली रा राम-राम सा।
सिंघाड़ा वाला ने, कांदा मरचियां वाला ने
मित्र भगवती लाल ने और सगळा म्हारां साथियां ने
गोगुनदावासिया ने
होली रा राम-राम सा ओ . . . राम-राम
Note : नरा लोगों रा नाम नी आया, नाराज मत विज्यों
smile emoticon

Monday, February 8, 2016

नौसिखिए नहीं, चाणक्य हैं विधायक गमेती



लखन सालवी

उदयपुर जिले गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रताप गमेती को राजनीतिक नौसिखियां समझने की भूल कर रहे हैं लोग। महाराणा प्रताप की कर्मभूमि में जन्में प्रताप गमेती को राजनीति विरासत में मिली हैं। उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्धी (अपने व विपक्षी) यह भूल जाते हैं कि प्रताप को राजनीति न केवल विरासत में मिली हैं बल्कि वे स्वयं बरसों से सक्रिय राजनीति में हैं। प्रताप गमेती के पिता भुरा लाल गमेती (भुरा भाई) एक बार सरपंच व दो बार विधायक चुने गए। वहीं प्रताप गमेती की माता रोड़ी बाई भी सरपंच रही। प्रताप गमेती स्वयं तीन बार सरपंच रहे। वर्तमान में उनकी बेटी अणछी गमेती भी सरपंच हैं। अर्थात् प्रताप गमेती को ही नहीं वरन् इनके पूरे परिवार को राजनीति विरासत में तो मिली हैं जिसे वे लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। प्रताप गमेती को आदिवासी समुदाय में जन्मा चाणक्य कह दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

स्वर्गीय भुरा लाल गमेती की राजनीति: जब-जब टिकट मिला, मुख्यमंत्री भाजपा का बना
प्रताप गमेती के पिता भुरा लाल गमेती अपने जमाने के पहुंचे हुए राजनेता थे। वे न केवल आदिवासी समुदाय के आगेवान थे बल्कि जनता दल से जुड़े क्षेत्र के पहले आदिवासी सक्रिय लीडर थे जो पहले सरपंच बने फिर दो बार क्षेत्र के विधायक रहे। उनके दोनों बार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेक्तावत रहे।

पहली बार: विधायक बने भुरा भाई, मुख्यमंत्री भैरों सिंह
1977 के विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी ने 152 सीटों के साथ सरकार बनाई। 22 जून 1977 को कद्दावर नेता भैरू सिंह शेक्तावत मुख्यमंत्री बने। उस विधानसभा चुनाव में पार्टी ने गोगुन्दा विधानसभा क्षेत्र से भुरा लाल गमेती को टिकट दिया। उन्हें 12 हजार 783 वोट मिले जबकि उनके विपक्ष में सीपीआई के मेघराज को महज 8743 वोट मिले।

1980 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भुरा लाल गमेती को पुनः टिकट दिया लेकिन इस बार सीपीआई के मेघराज तावड़ बाजी मार गए। वहीं कांग्रेस दूसरे नम्बर पर रही। इस बार मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाडि़या बने। इनके बाद शिवचरण माथूर मुख्यमंत्री बने।

1985 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भुरा लाल गमेती को पुनः टिकट दिया लेकिन इस बार कांग्रेस के देवेन्द्र मीणा ने 12081 वोटों से भुरा लाल गमेती को हरा दिया। इस बार मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी बने।

दूसरी बार: विधायक बने भुरा भाई, मुख्यमंत्री भैरों सिंह
1990 के चुनाव में भी भुरा लाल गमेती को टिकट दिया गया। इस चुनाव में उन्हें 23437 वोट मिले वहीं 8561 वोट लेकर कांग्रेस के देवेन्द्र मीणा दूसरे नम्बर पर रहे। इस चुनाव में भाजपा ने कुल 85 सीटें प्राप्त की और राजस्थान में भैरों सिंह शेक्तावत मुख्यमंत्री बने।

1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने महावीर भगोरा को अपना प्रत्याशी घोषित किया। इस चुनाव में भगोरा की जीत हुई। उसके बाद 1998 में जीत की गेंद कांग्रेस के पाले में चली गई। 1998, 2003 व 2008 तक कांग्रेस के मांगी लाल गरासिया चुनाव जीतते रहे और लगातार 15 वर्ष तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2008 की कांग्रेस सरकार में वे श्रम मंत्री भी रहे, श्रम मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के श्रमिक वर्ग के लिए जो कार्य किए वे अतुलनीय व प्रशसनीय भी हैं। 

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रताप गमेती को टिकट दिया। इस चुनाव में इन्होंने 3345 वोटों से मांगी लाल गरासिया को हराया। प्रताप गमेती को 69210 वोट मिले। इस बार राज्य ही नहीं वरन देश भर में भाजपा की लहर चली। जनता के अंदर का करन्ट चुनाव में बाहर निकला और केन्द्र व राज्यों में भाजपा की सरकारें बनी।

विधानसभा चुनाव की जीत की खुशी में प्रताप गमेती बहे नहीं। जीत के पीछे की ताकतों को पहचाना और निरन्तर उन ताकतों को और मजबूत करने पर लगे हुए हैं। क्षेत्र के लिए पेयजल की बात हो, सिंचाई जल की बात हो या वर्षा जल सरंक्षण, कृषि विकास या बिजली, पानी, सड़कों सहित मूलभूत सुविधाओं की बात हो, इन सबके पुख्ता बंदोबस्त के लिए विधायक लगातार प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं।

प्रताप गमेती की एक कमजोरी भी हैं, वो त्वरित व ठोस कार्यवाही को अंजाम नहीं दिलवा पाते हैं लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो यह कमजोरी भी उनकी मजबूती का आधार हैं। 

यह उनकी लम्बी व दूरगामी सोच का ही नतीजा हैं कि विपक्षियों व विरोधियों की लाख कोशिशों के बावजूद भी बसस्टेण्ड़ पर सुलभ शौचालय का निर्माण करवाया जो आज कस्बेवासियों, प्रवासियों व आगन्तुकों के लिए काम आ रहा हैं। विधायक के इस कार्य को हर वर्ग ने सराहा हैं। 

बायपास चौराहें पर चल रहे विकास कार्य के लिए विधायक ने भरसक प्रयत्न किए। नतीजा सामने हैं। वर्तमान में वे गोगुन्दा के बसस्टेण्ड का विकास करवाने के लिए प्रयासरत हैं। इसके लिए आजकल जयपुर में डेरा डाले हुए हैं। उनकी गाड़ी गोगुन्दा से जयपुर के बीच ज्यादा दौड़ती दिखाई पड़ रही हैं। उनकी गाड़ी का यूं दौड़ना गोगुन्दा के लिए शुकून की बात हैं।

यूं तो प्रताप गमेती पूरे विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य करवा रहे हैं लेकिन गोगुन्दा मुख्यालय पर विकास कार्यों में ज्यादा भाग ले रहे हैं। खास बात हैं कि गोगुन्दा के प्रधान पुष्कर तेली, उपप्रधान पप्पू राणा व सरपंच गागू लाल मेघवाल जैसे सकारात्मक ऊर्जा के धनी लोगों का भरपूर सहयोग मिल रहा हैं। विधायक गमेती का कहना हैं कि इन सभी लोगों के सहयोग के बिना गोगुन्दा का विकास संभव ही नहीं हैं।पिछले दो साल के कार्यकाल में दिखते हुए काम गोगुन्दा में हुए हैं। विकास को दर्शाने वाले इन कामों के लिए सरपंच गागू लाल मेघवाल को भी खूब सराहना मिली हैं। ग्राम पंचायत के सरंपच के तौर पर गोगुन्दा में हुए विकास कार्यों के संदर्भ में उन पर कम दबाव नहीं था लेकिन प्रधान पुष्कर तेली व विधायक प्रताप गमेती के सहयोग के बिना ग्राम पंचायत में इस स्तर के विकास कार्य करवा पाना मुश्किल था। हालांकि विधायक, प्रधान व सरपंच गोगुन्दा में हुए विकास कार्यों का श्रेय एक-दूसरे को दे रहे हैं लेकिन सच यह हैं कि सर्वाधिक श्रेय के योग्य तो सरपंच गागू लाल मेघवाल व ग्राम सेवक भूपेन्द्र सिंह झाला ही हैं।


चूंकि लेख की शुरूआत विधायक प्रताप गमेती की राजनीतिक परिपक्वता को लेकर हुई तो इसका समापन भी उसी बात के अंजाम से करना बेहतर होगा। अमूमन प्रताप गमेती कम बोलते हैं लेकिन जितना बोलते हैं सधा हुआ बोलते हैं। कम बोलना, सधा हुआ बोलना, विकास के मुद्दों पर अड़े रहना व सभी से नम्रतापूर्वक बात करना विधायक प्रताप गमेती की आदत में शुमार हैं। हाल में छाली ग्राम पंचायत के उण्ड़ीथल गांव में आयोजित संगोष्ठि में उपस्थित रहे लोगों ने इसका अहसास किया होगा। राज्यपाल कल्याण सिंह की मौजूदगी में विधायक ने बड़े ही साधारण व शांत तरीके से क्षेत्र के चार-पांच मुद्दों को रखा। मुद्दों को रखने के उनके तरीके से राजनीति के पुरोधा कल्याण सिंह ने जरूर उनकी राजनीतिक चेतना का अनुमान लगाया होगा। राजनीतिक भाषण की बजाए क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर बात करना ही आज के समय में अच्छी राजनीति हैं। वैसे हर व्यक्ति राजनीति को अपने-अपने तरीके से परिभाषित करता हैं लेकिन विधायक प्रताप गमेती क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करने को ही राजनीति का मुख्य भाग मानते हैं। इसलिए दावें के साथ कहा जा सकता हैं कि विधायक प्रताप गमेती नौसिखिए नेता नहीं बल्कि गोगुन्दा की राजनीति के चाणक्य हैं। उनके समर्थकों का कहना हैं कि राजनीति को चोटी वाले चाणक्य करते हैं, प्रताप गमेती तो बिना चोटी के चाणक्य हैं जो क्षेत्र का विकास कर रहे हैं। 

युवा प्रधान बहा रहा हैं विकास की बयार

उदयपुर जिले के गोगुन्दा पंचायत समिति के युवा प्रधान पुष्कर तेली अपनी कार्यशैली व विकास कार्य करवाने के अंदाज व अपनी पहल के कारण सुर्खियों में हैं। वे अपनी सुझबूझ से क्षेत्र में विकास करवा रहे हैं। प्रतिबद्धता व सकारात्मक सोच के कारण युवाओं के चहेते बनते जा रहे हैं।

हाल ही में पंचायतीराज चुनाव का एक वर्ष पूरा हुआ हैं। गोगुन्दा के युवा प्रधान पुष्कर तेली ने 07 फरवरी 2015 को पदभार ग्रहण किया था। तब उनकी उम्र 22 वर्ष थी। बीते एक वर्ष में इस युवा व सकारात्मक सोच के धनी प्रधान ने पंचायत समिति क्षेत्र में न केवल विकास कार्य करवाए हैं बल्कि युवा वर्ग को अपने साथ जोड़कर क्षेत्र के विकास के लिए नवाचार कर रहे हैं।
आजकल गोगुन्दा पंचायत समिति मुख्यालय व ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर हर चौराहें पर लोग विकास की बातें करते नजर आते हैं और विकास के साथ विकास करवाने वाले शख्स का नाम भी पूरे गूमान के साथ लेते हैं। मजेदार बात हैं कि विकास की मांग को लेकर नहीं वरन गोगुन्दा में हो रहे विकास कार्यों के बारे में चर्चाएं की जा रही हैं। ऐसा कम ही देखने को मिलता हैं। लोगों को विकास की चिंता नहीं हैं। वे निश्चिंत हो गए हैं कि अब गोगुन्दा का विकास हो के रहेगा। लोग यह भी कहते हैं कि आजादी के बाद पहली बार गोगुन्दा में गुणवत्ता वाले विकास कार्य होते नजर आ रहे हैं।

बनाई मजबूत टीम, लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

प्रधान पद संभालने के बाद कुछ माह तक सामान्य चलता रहा। उन्होंने राजनीतिक माहौल को समझा, कर्मचारियों व अधिकारियों की मंशा को भांपा, सहयोगी ग्रुप को पहचाना व युवाओं की एक टीम जुटाई, जिसमें सूचनाएं देने वाले, सूचनाएं पहुंचाने वाले, अच्छे सुझाव देने वाले व सहयोग देने वाले युवाओं को शामिल किया। ग्राम पंचायतों के सरपंचों से भी तालमेल बिठाया। युवा सरपंचों से लगातार सम्पर्क किया। उन्हें विकास कार्यों लिए उत्साहित किया। महज 6 माह के अल्प समय में प्रधान ने अपनी मजबूत टीम बना ली। जिनके बूते आज प्रधान विकास की नई इबारत लिख रहे हैं।

पहला अच्छा काम, जिसे जनता ने खूब सराहा

गोगुन्दा मोटागांव के नाम से भी जाना जाता हैं। गोगुन्दा उपखण्ड क्षेत्र में आदिवासी अंचल का यह सबसे बड़ा गांव हैं। पूर्व में यहां हाट लगती थी, जिसमें क्षेत्र के गांवों के लोग आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए आते थे। आज भी लोग अपनी जरूरतों के सामान लेने यहीं आते हैं। गोगुन्दा क्षेत्र से भारी संख्या में प्रवास भी होता हैं। यहां से रोजाना 10 से अधिक बसें गुजरात के शहरों में जाती हैं, जिनमें यहां के लोग प्रवास पर जाते हैं। इन लोगों को यहां से रवानगी व वापसी के दौरान सुलभ शौचालय की आवश्यकता थी। जोधपुर व सिरोही जाने वाली बसें भी यहां से होकर गुजरती हैं। सामान्य दिनों में भी बसस्टेण्ड पर यात्रियों व आगन्तुकों की भीड़ रहती हैं। उपखण्ड मुख्यालय होने के बावजूद बसस्टेण्ड़ पर मूत्रालय व शौचालय नहीं थे। यात्री व आमजन बसस्टेण्ड़ पर केबिनों के पीछे ही खुले में मूत्र त्याग करते थे। जिससे बसस्टेण्ड़ पर हर वक्त सडांध फैली रहती थी। 

प्रधान ने विधायक प्रताप गमेती के सामने इस मुद्दे की पैरवी की, फण्ड की समुचित व्यवस्था की। सरपंच गागू लाल मेघवाल का हौंसला बढ़ाया और बसस्टेण्ड़ पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया। यह कार्य आसान नहीं था। प्रतिद्वंद्धियों ने निर्माण में रोड़े लगाने के खूब जतन किए। निर्माण वाली जमीन को लेकर मुद्दा बनाया। बोगस व्यक्ति को जमीन का स्वामी बताकर ग्राम पंचायत का हौंसला कमजोर करने के प्रयास किए लेकिन प्रधान ने अपनी देखरेख में इस कार्य को अंजाम दिलवाया। 

इस कार्य की हर तरफ से सराहना हुई। गोगुन्दावासियों व क्षेत्रवासियों ने ही नही बल्कि यहां से होकर यात्रा करने वाले लोगों ने भी इस कार्य की खूब सराहना की। खासतौर पर महिला वर्ग ने इस कार्य को लेकर विधायक, सरपंच व प्रधान को शुभाशिष दिए।


प्रधान के पिता पन्ना लाल तेली व्यवसायी हैं और पिछले डेढ़ दशक से गोगुन्दा में बिल्डिंग मेटेरियल सप्लाई का व्यवसाय कर रहे हैं। पिछले वर्ष तक पुष्कर तेली पढ़ाई के साथ पिता के व्यवसाय में हाथ बटाते थे। राजनीतिक समझ स्कूल के दिनों से ही बढ़ने लगी थी। कम उम्र में ही राजनीतिक लोगों की मानसिकता व क्रियाकलापों से भली भांति अवगत हो चुके थे। साथ ही विकास कार्यों में उनकी भूमिका व कार्यप्रणाली को समझा था। सक्रिय राजनीति में जाने का मकसद नहीं था। इनके पिताजी के सम्पर्क जरूर राजनीतिक लोगों से थे। उन्हीं की बदौलत गत पंचायतीराज चुनाव में पंचायत समिति सदस्य का टिकिट मिला। भाजपा के बैनर से वार्ड संख्या-5 से चुनाव लड़ा और प्रतिद्वंद्धी राम सिंह चंदाना को 341 वोटों से हराकर पंचायत समिति सदस्य बने और बाद में प्रधान का चुनाव लड़ा और जीते।

इनके चुनाव जीतने के बाद गोगुन्दा क्षेत्र में चर्चाएं आम हुई कि - बच्चे को प्रधान बना दिया हैं। वह क्या विकास करवा पाएगा। वह तो बोल भी नहीं पाता हैं। उसे तो पंचायतीराज की समझ ही नहीं हैं। उसे तो राजनीतिक समझ भी नहीं हैं। उसे तो दूनियादारी का भान भी नहीं हैं वगैरह ... वगैरह।

प्रधान बनने के तुरन्त बाद जिन लोगों ने प्रधान को लेकर टिप्पणियां की या ताने मारे, वे लोग अब प्रधान द्वारा करवाए जा रहे कार्यों को देखकर दांतों तले उंगलियां चबा रहे हैं।

विकास कार्य करवाना और इसके लिए अन्य जनप्रतिधियों को प्रेरित करना व सब को साथ लेकर चलना प्रधान की खासियत हैं। इन्होंने ही युवा सरपंचों के साथ लगातार संपर्क कर उन्हें ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर गौरव पथ का निर्माण करवाने के लिए तैयार किया। आज गांवों में सीमेन्ट की अच्छी गुणवत्ता वाली सड़कें बनी हैं। काच्छबा ग्राम पंचायत के सरपंच तेजू लाल गमेती का कहना हैं कि प्रधान जी जब भी मिलते हैं, कुछ ना कुछ नया सुझाव देते हैं और गांवों में विकास के लिए प्रेरित करते हैं। पंचायत समिति के अधिकारियों से मुझे योजनाओं की जानकारी नहीं मिलती हैं उससे पहले प्रधान जी जानकारी दे देते हैं। उनके द्वारा सुझाए गए कार्य करवाए तो ग्रामीणों ने मुझे शुभकामनाएं दी। 

काच्छबा ग्राम पंचायत के सरपंच ही नहीं अपितू क्षेत्र के लगभग सभी सरपंचों का कहना हैं कि प्रधान मृदुभाषी, सकारात्मक सोच व प्रगतिशील विचारधारा के व्यक्ति हैं और गांवों के विकास के लिए पूरा सहयोग दे रहे हैं।


स्वच्छ भारत मिशन के प्रबल पक्षधर

प्रधान पुष्कर तेली हर क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं और सरकार की मंशा पूर्ण करने के लिए कृतसंकल्पित हैं। स्वच्छ भारत मिशन को इन्होंने आत्मसात किया हैं और पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के सरपंचों से सतत् सम्पर्क कर उन्हें अपनी पंचायत को शौचमुक्त बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। रावलियां खुर्द ग्राम पंचायत की सरपंच सविता कुंवर के पति जो कि सामाजिक कार्यकर्ता को भी इसके लिए प्रेरित किया। इस ग्राम पंचायत को शौच मुक्त बनाने के लिए इस गांव से जुड़े किसान नेता व पार्टी कार्यकर्ताओं को इस मिशन से सरपंच के साथ जोड़ा। गांव के लोगों की सोच बदलने के भरपूर प्रयास किए। उनकी यह साझी पहल सफल रही। 900 से अधिक परिवारों ने अपने घरों में शौचालय बनवाए हैं। इस योजना के प्रति ग्रामीणों की गलत मानसिकता न बन जाए इसलिए जिन लोगों ने शौचालयों का निर्माण करवाया उन्हें सहायता राशि दिलवाने में भी ढि़लाई नहीं बरती, फलस्वरूप 900 परिवारों को 1 करोड़ 8 लाख रूपए का भुगतान हो पाया हैं।

राजनीतिक जानकार व ब्यूरोक्रेसी को समझने वाले लोग निश्चित ही शौचमुक्त ग्राम पंचायत बनाने का श्रेय सरकार व जिला कलक्टर को दे सकते हैं लेकिन पर्दें के पीछे की कहानी यही हैं कि युवा वर्ग के प्रेरणास्त्रोत बने प्रधान पुष्कर तेली की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं।

6 ग्राम पंचायतों में पेयजल पहुंचाने की कवायद जारी

गोगुन्दा उपखण्ड मुख्यालय से 10 किलोमीटर के दायरे में आ रही 5 ग्राम पंचायतों (रावलिया कलां, रावलिया खुर्द, मजावड़ी, ओबरा कलां व दादिया) में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं हैं। प्रधान इन पांचों ग्राम पंचायतों में पेयजल आपूर्ति करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। यह कार्य करवाने के लिए सांसद, विधायक व सरपंचों से समन्वय कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी इन्होंने जमकर पैरवी की हैं। हाल ही में विभाग द्वारा सर्वे करवाया गया हैं और शीघ्र ही स्वीकृति की संभावना हैं।

गोगुन्दा में हो सरकारी काॅलेज

प्रधान पुष्कर तेली जनप्रतिनिधि भी हैं और स्वयंपाठी छात्र भी। वे वर्तमान में बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थी हैं। इस नाते युवा वर्ग से उनका गहरा जुड़ाव हैं, फलतः युवा वर्ग की समस्या से भी भलीभांति अवगत हैं। वे गोगुन्दा में सरकारी काॅलेज खुलवाने के प्रबल प्रस्तावक हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी काॅलेज के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, उन्होंने बताया कि गोगुन्दा के छात्रों को यह सौगात जल्दी ही मिलेगी।

वाकल के लिए भी किए काम

वाकल क्षेत्र। इस क्षेत्र में आती हैं गोगुन्दा पंचायत समिति की पड़ावली कला, पड़ावली खुर्द, वास, समीजा, मादड़ा व वीरपुरा ग्राम पंचायतें। विकास के संदर्भ में अमूमन इन ग्राम पंचायतों पर कम ध्यान दिया जाता रहा हैं। मगर युवा प्रधान ने इन ग्राम पंचायतों पर विशेष ध्यान दिया। नृसिंहपुरा में पेयजल के लिए 1 करोड़ की योजना स्वीकृत करवाई। वहीं इस क्षेत्र में नेशनल बैंक की शाखा खुलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं ताकि वित्तिय लेने-देने के लिए इस क्षेत्र के लोगों को गोगुन्दा न आना पड़े।

ताकि न रहे पेयजल की समस्या

पेयजल की समस्या से निबटने के लिए खराब पड़े हैण्डपम्पों को दुरूस्त करने की मुहिम चलाई। पंचायत समिति क्षेत्र के आधे से ज्यादा हैण्डपम्प खराब पड़े थे, जिन्हें ठीक कर देने पर पेयजल समस्या का निदान संभव था। तब प्रधान ने सभी हेण्डपम्प मिस्त्रियों को पंचायत समिति कार्यालय में उपस्थिति देने की व्यवस्था की। मिस्त्रियों ने बताया कि वे हेण्डपम्प ठीक करने जाते हैं पर समुदाय से लोग पाइप निकलवाने में मदद नहीं करते हैं, जिस कारण हेण्डपम्प खराब पड़े रह जाते हैं। प्रधान ने उन्हें पंचायत समिति की ओर से चौपहिया वाहन मुहैया करवाते हुए सुझाया गया कि वे 4 मिस्त्री साथ जाए और हेण्डपम्पों को ठीक करे। इस प्रकार अभियान चलाकर हेण्डपम्प ठीक करवाए गए। वहीं पेयजल की किल्लत को देखते हुए पिछले एक साल में 150 से अधिक नए हेण्डपम्प लगवाए गए हैं।


प्रधान अपनी सक्रिय टीम के सहयोग से हर क्षेत्र में पहल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में वे गांवों में शिविर लगाएंगे। उन शिविरों में योजनाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करेंगे तथा नागरिकों को जनकल्याणकारी योजनाओं के पति जागरूक करेंगे। उनकी तमन्ना हैं कि क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक का बैंक खाता हो, उसके 12 या 330 रूपए का बीमा हो। प्रधान ने जनसहयोग व निजी रूपयों से गरीब लोगों के बीमें करवाने की घोषणा भी की हैं। 

गोगुन्दा कस्बे में हुए विकास कार्य हम सब के सामने हैं, उनके बारे में ज्यादा लिखने या बताने की जरूरत नहीं हैं। पर पुष्कर जी जरूर कह रहे हैं कि -

"एक साल बीता, चार साल बाकी हैं। 
हुई हैं महज पहल, अभी तो कई हिसाब बाकी हैं।" - पुष्कर तेली

खासबात यह हैं कि प्रधान द्वारा करवाए गए एक भी कार्य पर किसी न अंगूली नहीं उठाई हैं। मतलब पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य किए जा रहे हैं। 

जिला स्तरीय मजदूर सम्मेलन सम्पन्न


निकाली रैली, दिया धरना, कलक्टर से मिलकर बताई पीड़ा

उदयपुर - अरावली निर्माण मजदूर सुरक्षा संघ, बजरंग, जरगा, सायरा, रानी बाई, वागड़, खडग व वेणेश्वर निर्माण श्रमिक संगठन के संयुक्त तत्वावाधान में उदयपुर के मोता पार्क में मजदूर सम्मेलन का आयोजन किया गया। सुबह 11 बजे आरम्भ हुए सम्मेलन में गोगुन्दा, सायरा, बड़गांव, खैरवाड़ा व सलूम्बर क्षेत्र के 800 से अधिक मजदूरों ने भाग लिया। सम्मेलन को एडवोकेट राजेश सिंघवी, कृष्णावतार शर्मा, संतोष पूनिया, अरावली निर्माण मजदूर सुरक्षा संघ के संरक्षक नाना लाल मीणा, अध्यक्ष अब्दुल जब्बार खान, उपाध्यक्ष में मोती लाल गमेती, गेहरी लाल मेघवाल, देवी लाल, धापू बाई, बंशी लाल व गोविन्द ओड़ तथा किसान संगठन के बी.एल. सालवान ने सम्बोधित किया। 

श्रम विभाग के व्यवहार से पीडि़त मजदूरों ने बताई पीड़ा

मजदूर सम्मेलन में आए बौखाड़ा निवासी परथाराम गुर्जर ने बताया कि उसकी पुत्री का नाम मथरा गुर्जर हैं। श्रम विभाग की डायरी में उसका नाम चम्पा गुर्जर लिख दिया गया। उसके विवाह के बाद आवेदन किया आवेदन के साथ नाम को लेकर शपथ पत्र प्रस्तुत कर दिया। बावजूद विवाह सहायता जारी नहीं की जा रही हैं। 


मोती लाल गमेती ने संयुक्त श्रम आयुक्त कार्यालय के कर्मियों की कार्यप्रणाली पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि हिताधिकारियों के आवेदनों के साथ संलग्न परिचय पत्र नहीं लौटाए जा रहे हैं, वहीं आवेदनों पर मनमर्जी से स्वीकृति जारी की जा रही हैं। पात्र हिताधिकारियों के आवेदनों को जानबूझ कर रद्द किया जा रहा हैं। किसी का नाम खेमाराम हैं और कुछ दस्तावेजों में उसका नाम खेमा हैं तो उसका आवदेन रद्द कर दिया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि अशिक्षित मजदूरों के विभिन्न प्रकार के दस्तावेज सरकारी विभागों से ही बने हैं, मजदूरों के नामों में फर्क सरकारी विभागों के कर्मचारियों की गलती से हुआ हैं। 

श्रम कार्यालय, पंचायत समिति व ग्राम पंचायत के बीच काट रहे हैं चक्कर 

भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल (बीओसीडब्ल्यू) से पंजीकृत होने की नई व्यवस्था को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में पंजीयन व नवीनीकरण का कार्य नहीं किया जा रहा हैं। जरगा संगठन के अध्यक्ष गेहरी लाल मेघवाल ने कहा कि पंजीयन व नवीनीकरण की नई व्यवस्था के लिए श्रम विभाग ने 28 जुलाई 2015 को राज्य के समस्त विकास अधिकारियों को पत्र भेजा था। बावजूद ग्राम पंचायतों द्वारा पंजीयन व नवीनीकरण का कार्य नहीं किया जा रहा हैं। मजदूर पंजीयन व नवीनीकरण के लिए श्रम कार्यालय, पंचायत समिति व ग्राम पंचायतों के बीच चक्कर काट रहे हैं। 

करणजी का गुढ़ा गांव की लीला मेघवाल ने बताया कि वह परिचय पत्र का नवीनीकरण करवाने के लिए बड़गांव गई, जहां से उसे ग्राम पंचायत में भेज दिया गया। ग्राम पंचायत के कर्मचारी ने नवीनीकरण करने से इंकार कर दिया। उसने बताया कि वह श्रम कार्यालय भी लेकिन वहां से पुनः पंचायत समिति जाने को कह दिया गया। 

शुभ शक्ति योजना के प्रावधान मंजूर नहीं, हटाया जाए 8वीं पास का नियम

मजदूर संगठनों के लोगों ने बताया कि विवाह सहायता योजना का नाम शुभ शक्ति योजना तो कर दिया लेकिन योजना के प्रावधानों में बदलाव कर योजना का लाभ लेने में रोड़ा अटका दिया हैं। खेमराज गमेती ने कहा कि सरकार ने 8वीं पास की अनिवार्यता लागू कर दी हैं, उन्होंने कहा कि सरपंच पद के लिए 8वीं पास महिला नहीं मिलती हैं, जिसकी वजह से ग्राम पंचायतों में सरपंच के पद रिक्त हैं। गणेष लाल खैर ने कहा कि सरकार को शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए इस योजना में बदलाव करने चाहिए। वर्ष 2009 में जिसकी आयु 6 वर्ष थी, उन्हीं के लिए 8वीं पास का नियम होना चाहिए। 8वीं पास के नियम को हटाने की मांग को प्रदर्शनकारियों ने जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भिजवाया। 

सड़क हो तो पांचवीं से आगे पढ़े

मादा ग्राम पंचायत क्षेत्र के राजस्व गांव बागदड़ा में जाने का रास्ता नहीं हैं। बागदड़ा जाने के लिए छाली ग्राम पंचायत भवन के पास से आम रास्ता हैं, जो थोरिया भीलवाड़ा होते हुए बागदड़ा तक जाता हैं। इसकी लम्बाई करीब 6 किलोमीटर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ता इतना खराब हैं कि चौपहिया वाहन तो दूर की बात पैदल जाने में भी परेशानी होती हैं। गांव के गणेश लाल खैर ने बताया कि सड़क न होने के कारण गर्भवती महिलाओं व बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती हैं। गांव के कई बच्चे 5वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। 


महानरेगा मजदूरों ने भी रखी मांगें

सम्मेलन में महानरेगा मजदूरों की संख्या अधिक थी। महानरेगा मजदूरों ने संभागीय आयुक्त के नाम जिला कलक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि ग्राम पंचायतों द्वारा महानरेगा में 100 दिन से अधिक का रोजगार नहीं दिया जा रहा हैं, साथ ही महानरेगा में 150 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाने की भी मांग की। जेमली की कमली बाई ने बताया कि महानरेगा में काम भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा हैं। वहीं छाली ग्राम पंचायत के उण्ड़ीथल के मजदूरों ने बताया कि उपखण्ड अधिकारी अपील अधिकारी होने के बावजूद महानरेगा की शिकायतों पर सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
उल्लेखनीय हैं कि हाल ही में छाली ग्राम पंचायत के उण्ड़ीथल गांव में आयोजित रात्रि चौपाल में जिला कलक्टर ने 150 दिन का रोजगार नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई, बावजूद भी लोगों को रोजगार नहीं दिया जा रहा हैं। 

महानरेगा में बकाया मजदूरी भुगतान की उठी मांग

काच्छबा, वास, मादड़ा, वीरपुरा व समीजा क्षेत्र के महानरेगा श्रमिकों ने बताया कि महानरेगा में किए गए कार्यों का भुगतान डेढ़ वर्ष से बकाया हैं। बकाया भुगतान की मांग को लेकर उपखण्ड अधिकारी से अपील करनी चाही तो उन्होंने अपील नहीं ली। उन्होंने बताया कि मजदूरी भुगतान की मांग विकास अधिकारी से भी की लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया गया हैं।

मोता पार्क से कलक्ट्रेट तक निकाली रैली, जिद कर कलक्टर से मिले

मोता पार्क से जिला कलक्ट्रेट तक रैली निकाली गई और कलक्ट्रेट के सामने बैठकर प्रदर्शन किया गया। एडीएम ग्रामीण ने प्रतिनिधि मण्डल से मजदूरों की मांगों के ज्ञापन लिए लेकिन मजदूर जिला कलक्टर से मिलने के लिए अड़ गए तब जिला कलक्टर ने प्रतिनिधि मण्डल को अपने कार्यालय में बुलाकर उनकी मांगों को सुना। 

प्रतिनिधि मण्डल में संतोष पूनिया, मंजू राजपूत, नाना लाल मीणा, अब्दुल जब्बार खान, गेहरी लाल मेघवाल, मोती लाल गमेती, देवी लाल व धापू बाई शामिल थे। 

प्रतिनिधि मण्डल के संतोष पूनिया ने बताया कि जिला कलक्टर ने मजदूरों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना और आश्वासन दिया कि मजदूरों की प्रत्येक शिकायत पर जांच कर कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि हिताधिकारी पंजीयन व नवीनीकरण के लिए समस्त विकास अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे साथ ही उन्होंने कहा कि जिस ग्राम पंचायत के कर्मचारी के विरूद्ध इस आशय की शिकायत आएगी उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी। 

हिताधिकारी के घोषणा पत्र को राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित करवाने व सत्यापित करने वाले अधिकारी की फोटो आईडी लेने की श्रम विभाग की व्यवस्था को जिला कलक्टर ने गलत करार देते हुए कहा कि संयुक्त श्रम आयुक्त को पत्र भेजकर सरकार के आदेश की पालना सुनिश्चित करवाई जाएगी। 

Monday, December 21, 2015

जवाबदेही यात्रा ने प्रशासन से मांगे जवाब

उदयपुर - ‘‘जवाबदेही यात्रा जवाब मांगे रे, जवाब दो प्रशासन वालों, जवाब देओ रे।’’ । ऐसे गीतों के माध्यम से जवाबदेही यात्रा के लोगों ने जनता की शिकायतों पर प्रशासन से जवाब मांगे। जयपुर से आरम्भ हुई जवाबदेही यात्रा जिले के कोटड़ा, झाड़ोल, गोगुन्दा होते हुए उदयपुर पहुंची। यहां लव कुश इन्डोर स्टेडियम में जनसुनवाई शिविर आयोजित किया गया। लोगों ने यहां अपनी समस्याओं को लेकर शिकायतें दर्ज करवाई। वहीं आदिवासी क्षेत्रों से आए लोगों ने अपनी समस्याएं बताते हुए प्रशासन से मांग की कि वो समस्याओं का समाधान कब करेंगे। 

 सम्बोधित करते डीएसओ व उपस्थित लोग
जिले में शिकायतों का अम्बार, खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सर्वाधिक शिकायतें

डिजीटल इंडिया फाउण्डेशन के इरफान खान ने बताया कि जिले से राशन न मिलने को लेकर सर्वाधिक शिकायतें मिली हैं। शिविर में आए लोगों ने बताया कि राशन डीलरों द्वारा समय पर राशन नहीं दिया जा रहा हैं, राशन के लिए आधार कार्ड मांगा जा रहा हैं। बिना आधार कार्ड के राशन नहीं दिया जा रहा हैं व आधान कार्ड बनाने के लिए ई-मित्र केंद्रों पर 250-400 रूपए लिए जा रहे हैं। भवन निर्माण एवं संनिर्माण कर्मकार मण्डल से पंजीकृत श्रमिक धापू बाई मेघवाल ने बताया कि 2012 में उसने अपनी बेटी का विवाह किया और विवाह सहायता के लिए आवेदन किया लेकिन अभी तक विवाह सहायता नहीं मिली हैं। गोगुन्दा तहसील के भारोड़ी गांव की लक्ष्मी बाई के 2012 में पुत्र का जन्म हुआ, उसने प्रसूति सहायता के लिए आवेदन किया लेकिन आजतक प्रसूति सहायता नहीं मिली। खान ने बताया कि यात्रा अब तक 7 जिलों में गई हैं। इस दौरान 2376 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जो सम्बधिंत जिला कलक्टर को सौंपी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जिले के कोटड़ा, झाड़ोल व गोगुन्दा तथा उदयपुर से 1000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 600 से अधिक शिकायतें खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़ी हैं तथा शेष शिकायतें पेंषन, आवास, महानरेगा से सम्बधित हैं। 

आधार कार्ड न होगा तो भी मिलेगा राशन

यात्रा के दौरान राशन डीलरों के सम्बंध में भी कई शिकायतें प्राप्त हुई। शिकायतें सुनने के बाद शिविर में आए जिला रसद अधिकारी हिम्मत सिंह भाटी ने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता हटा दी जाएगी, साथ ही उन्होंने कहा कि 10-15 दिन में राशन की दूकानों के बाहर लाभार्थियों की सूचियां चस्पा करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा सभी बीपीएल, स्टेट बीपीएल, अन्त्योदय परिवारों के साथ पेंशन पाने वाले खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र हैं। जो वंचित रह गए हैं वे ग्राम पंचायतों में आवेदन कर इस योजना से जुड़े। उन्होंने कहा कि राशन वितरण में अनियमितताओं की जितनी शिकायतें प्राप्त हुई हैं, उनकी जांच कर दोषी राशन डीलरों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।  

शिकायतें सौंपने कलक्ट्रेट जाते यात्री
वहीं महानरेगा में आवेदन की रसीद न देने, मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं करने व मुआवजा न देने सहित अन्य शिकायतों को सुनने के बाद एक्सईएन प्रज्ञा सक्सेना ने कहा कि देरी से भुगतान के मामलों में सुनवाई की व्यवस्था शीघ्र ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि महानरेगा से जुड़ी सभी शिकायतों पर सुनवाई ही त्वरित की जाएगी। 

शिविर में यूआईटी सचिव रामनिवास मेहता, जिला रसद अधिकारी हिम्मत सिंह भाटी, एक्सईएन प्रज्ञा सक्सेना (महानरेगा), सूचना एवं रोजगार का अधिकार अभियान के निखिल डे, शंकर सिंह व कमल टांक, आस्था संस्था के भंवर सिंह चंदाणा, आजीविका ब्यूरो के राजीव खण्डेवाल व आभा मिश्रा, प्रतिरोध संस्था के खेमराज चौधरी तथा सामाजिक कार्यकर्ता श्याम पुरोहित, चन्दन सिंह, सरफराज शेख, विकास सिंह, संतोष पूनिया, हरिओम सोनी, लखन सालवी तथा आदिवासी विकास मंच, बजरंग, जरगा, सायरा, रानी लक्ष्मी बाई निर्माण श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे। 

शिविर के बाद प्राप्त हुई सभी शिकायतों को जिला कलक्टर कार्यालय में सौंपी गई। राज्यपाल के दौरे में व्यस्तता के चलते जिला कलक्टर से यात्रियों की मुलाकात नहीं हो पाई। यात्री अमित कुमार ने बताया कि यात्रा का एक दल 23 दिसम्बर को जिला कलक्टर से मिलेगा। 

क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं जरूरी कार्ड 

शिविर के बाद लेकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेन्स को सम्बोधित करते हुए सूचना एवं रोजगार का अधिकार अभियान के निखिल डे ने कहा कि यह यात्रा बहूत ही महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह जवाबदेही की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार कानून की मांग को लेकर भी इसी प्रकार की यात्रा निकाली गई थी। पूरे राज्य के लोगों ने सूचना के अधिकार कानून की मांग की और अंततः सूचना का अधिकार कानून बना और लागू हुआ, जिसका उपयोग आज पूरा देश कर रहा हैं। जवाबदेही कानून की आवश्यकता के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि कई लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शिकायतें कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा हैं इसलिए जवाबदेही यात्रा के माध्यम से जवाबदेही कानून की मांग की जा रही हैं, जिसे आमजन का भरपूर समर्थन मिल रहा हैं। 

प्रेस को सम्बोधित करते हुए यात्रा के संयोजक शंकर सिंह ने कहा कि सरकार भामाशाह कार्ड, स्वास्थ्य कार्ड, आधार कार्ड जैसे कार्ड बनाने पर जोर दे रही हैं जबकि लोगों के पेट के लिए जरूरी जाॅब कार्ड व राशन कार्ड जैसे कार्ड नहीं बनाए जा रहे हैं। कई लोगों को पेंशन नहीं मिल रही हैं। इंदिरा आवास योजना के तहत आवासों के फोटो खिंचने के नाम पर ग्राम सचिव पैसे ले रहे हैं। ई-मित्र वाले मनचाहे रूपए ले रहे हैं। गोगुन्दा में राशन कार्ड के लिए 30 रूपए की जगह 200 रूपए लिए जा रहे हैं। आधार कार्ड के लिए 250-400 रूपए लिए जा रहे हैं। सरकार को आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए शिकायतें प्राप्त करने के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।