Wednesday, March 19, 2014

नानी का प्यार अमर रहे

केवलूपोश कमरे के एक कोने में लकड़ी के छोटे दरवाजे वाली कोठी (भण्डार गृह), दूसरे कोने में मिट्टी का चुल्हा, तीसरे कोने में दलिया बनाने की घट्टी और चैथे कोने की दिवार में बनी ताक (आलमारी) में नानी की लोहे की पेटी और उसी दिवार पर नानी-नानी की तस्वीर व साथ में उसकी बहिन की बेटी व दामाद की एक तस्वीर टंगी हुई है। उन दो तस्वीरों के पास एक हाथ पंखा लटका हुआ है। नानी के घर के एक कमरे की यही दशा है। मैं 20 साल पहले से ये दशा देखता आ रहा हूं, कुछ भी नहीं बदला है नानी के इस कमरे में, ना कमरे की सूरत बदली, ना नानी का व्यवहार ना हमारे प्रति उसका प्यार।
हम 5 भाई बहिन है। सबसे बड़ा मैं, मेरे से छोटी एक बहिन, उससे छोटी एक बहिन, उससे छोटी एक और बहिन और उससे छोटा एक भाई। हम सभी नानी के प्यारे रहे है। मेरे और मुझ से दो छोटी बहिनों के संतानें है। अब नानी हमसे ज्यादा हमारी संतानों को प्यार करने लगी हैं। वह उन्हें बहुत दुलारती है, उनका खूब ख्याल करती है। 
इस बार होली पर मेरी सभी बहिनें ससुराल से आई हुई थी। होली के दूसरे दिन बोली की नानी के घर जाना है। मैं भी कई बरसों से गया नहीं था तो जाने का मन बना लिया। अपनी कार में 4 बड़ी सवारियों के साथ 5 छोटी सवारियों को ठूंसा, भला हो हुंडई कम्पनी वाले का जिसने सेंट्रो जैसी मजबूत कार बनाई। हम नानी के पास पहुंचे। सभी बच्चे नानी के इर्दगिर्द बैठ गए, नानी बीच में। बातों का सिलसिला आरम्भ हो गया। मैं फिजीकल रूप से तो वहीं था लेकिन मन मेरा जीवन संगिनी में अटका हुआ था। आंखों के सामने उसका चेहरा बार-बार आ रहा था, कार में जगह नहीं थी इस कारण वह नहीं आ पाई। मैंनें घर से रवाना होते समय उसकी मनःस्थिति भांप ली थी लेकिन क्या कर सकता था ? कोई उपाय नहीं था। मैं नानी के घर की पोळ में बैठा हुआ था। अचानक उठा और उस कमरे में गया जिसमें बचपन में मैंनें कई रातें गुजारी थी। 
कमरे में घुसते ही सामने की दिवार में नजर पड़ी। कुछ नहीं बदला था वहां, 20 साल में कुछ भी नवाचार नहीं हुआ। दिवार पर दो तस्वीरों के पास एक हाथ पंखा लटक रहा था। दिवार में बनी हुई एक परमानेंट अलमारी में नानी की लोहे की पेटी रखी हुई थी
वह आज भी मुझे ‘‘भाया’’ कहकर बुलाती है और 20 साल पहले भी ‘‘भाया’’ कहकर बुलाती थी। नानी की उम्र करीब 80 वर्ष है। उसने अपने में जीवन बहुत मेहनत की। नाना जी स्व. श्री उदयराम जी देवनारायण भगवान के मंदिर के पुजारी थे। गांव वाले नाना जी को ‘‘भोपाजी’’ कहते थे और नानी जी को ‘‘भोपी मां’’, आज भी नानी देवरिया में ‘‘भोपी मां’’ के नाम से ही जानी जाती है।  
ननिहाल देवरिया गांव, हमारे गांव से 5 किलोमीटर दूर ही है और हमारे खेतों वाले रास्ते से जाया जाए तो महज 3 किलोमीटर ही पड़ता है। बचपन में मैं महिने में एक-दो बार नानी के पास चला जाया करता था, नानी से 10-20 रुपए जो मिलते थे। हालांकि कमी किसी बात की हमारे घर में भी नहीं थी, पिताजी ने जीवन में कभी घी नहीं खाया लेकिन हमारे लिए दुधारू गाय अथवा भैंसें हमेशा पाली। दुध, घी, छाछ, राबड़ी की कभी कमी नहीं आने दी। बावजूद हमें पिताजी से बहुत डर लगता था, किसी काम में कुछ गलती हो जाने पर पिताजी बहुत डांटते थे, वहीं मम्मी से तो ओर अधिक डर रहता था। गलती करने पर मम्मी डांटती नहीं, मारती थी वो भी लकड़ी के डण्डे से (गेती, कुल्हाड़ी या फावड़े के बेसे से)। तो भय के मारे मम्मी-पाप्पा का हमारे प्रति सारा प्रेम गौण हो गया। बस एक मात्र नानी ही थी, जिस पर हमारा सारा जोर चलता था। हमारे सारे नाटक नानी को देखने-सुनने पड़ते, हमारी सारी मांगे नानी को ही पूरी करनी पड़ती थी, वैसे मांगे भी बड़ी से बड़ी 10-20 रुपए तक ही सीमित थी। 
आज नानी के कमरे को देखते-देखते मैं बचपन में चला गया, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे 10 साल का लखन नानी के घर आया है। कमरे के कोने में बनी हुई कोठी आज भी वैसी की वैसी है, जिसमें नानी महीने भर की अपनी यात्रा के दौरान जुटाई गई सामग्री को रखती है। यथा कहीं से मिठाई आई तो उसे कोठी में रखेगी, कहीं से फल मिले तो उन्हें भी कोठी में रखेगी, कहीं मंदिर से प्रसाद मिला तो उसे भी कोठी में रखेगी और फिर उस दिन, जिस दिन वह हमारे घर आती है तो कोठी में से सारी सामग्री निकाल कर ले आती है।
आज नानी ने सबको रूकने के लिए कहा लेकिन बहिनों ने व्रत किए थे और वे वापस कोशीथल जाना चाहती थी, मैं चाह रहा था कि आज की रात नानी के घर रूका जाए लेकिन मनमसोस कर वापस रवाना होना पड़ा। 
उससे पहले नानी ने अपने सब नवासे-नवासियों को खर्च के लिए 10-10 रुपए दिए। उसके पास इतने खुल्ले रुपए नहीं थे। मैं वहीं था इसलिए मुझसे मांग लिए, वरना मोहल्ले में जाती, खुल्ले लेकर आती और सब को बांटती।
नानी से रुपए पाकर बच्चे बड़े खुश हुए . . . नानी का प्यार अमर रहे 

Sunday, February 16, 2014

ताणवाण में प्रतिभा सम्मान समारोह सम्पन्न


  • लखन सालवी 

अब ग्रामीण क्षेत्र के दलित समुदायों में भी शिक्षा के प्रति चेतना आई है, दलित बुनकर समुदाय के लोग अपने समुदाय के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित करने लगे है जो शिक्षा के प्रति उनकी जागरूकता को प्रकट कर रहा है। 
हाल ही में 16 फरवरी को राजसमन्द जिले के आमेट कस्बे के निकट ताणवाण गांव में स्थित देवनारायण मार्बल परिसर में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान, जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले तथा नवोदय विद्यालय में प्रवेश के लिए परीक्षा उत्र्तीण करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रसस्ति पत्र व प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। 
इस कार्यक्रम की आयोजन समिति के सदस्य प्यार चन्द सालवी ने बताया कि यह द्वितीय सम्मान समारोह है, इससे पूर्व गत वर्ष प्रथम समारोह का आयोजन किया गया था। राजसमन्द जिले की आमेट व देवगढ़ तहसील क्षेत्र के समुदाय शिक्षित युवाओं व जागरूक दानदाताओं ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने का बीड़ा उठाया है। 
कुंभलगढ़ के ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि हम समाज की प्रतिभाओं को तरासने के लिए तत्पर है। उन्होंने समारोह को सम्बोधित करते हुए बेटे-बेटियों को समानता से शिक्षा देने पर जोर दिया, साथ ही उन्होंने कहा कि प्रतिभावान छात्र-छात्रों के बायोडेटा मंगवाकर उनके मार्गदर्शन के लिए केरियर काउंसलिंग भी करवानी चाहिए ताकि उचित समय पर प्रतिभाओं को उचित निर्णय लेने में मदद मिल सके। 
समारोह को सम्बोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने कहा कि बुनकर समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। इस समुदाय में जन्में कई लोगों ने राष्ट्रहित में बलिदान किए, धार्मिक प्रवृति के कारण ख्याति प्राप्त की। उन्होंने बताया कि इतिहासकारों ने भी बुनकर समुदाय पर कुठाराघात किया गया है, मेहरानगढ़ के किले के लिए राजाराम मेघवाल ने बलिदान दिया लेकिन इतिहास ने कहीं भी उस बलिदान का जिक्र नहीं किया, पिछोला की झील के मन्ना जी मेघरिख कुर्बान हुए जिसे भी इतिहास ने ओझल कर दिया, बीकानेर के करणी मंदिर के बारे में तो खूब गुणगान किए जाते है लेकिन उस मंदिर के लिए कुबार्न हुए दरशरथ मेघवाल के बारे में उल्लेख नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि चित्तौडगढ़ के उदय सिंह को बचाने के लिए पन्नाधाय के बलिदान की कहानियां तो खूब लिखी जाती है, बार-बार अहसास करवाया जाता है लेकिन उदय सिंह को कड़े पहरे के बीच झूठे पत्तल-दोने की टोकरी में छिपाकर ले जाने वाले ‘किरत बारी’ के समर्पण व निडरता की कहानी को दो पंक्तियों में समाप्त कर दिया जाता है अगर किरत बारी ने निडरता नहीं दिखाई होती, अगर उसने त्याग, समर्पण की भावना को छोड़कर बनवीर के साथ हाथ मिला लिया होता तो क्या होता . . न उदय सिंह बचता और न ही महाराणा प्रताप होते। मेघवंशी ने कहा कि दलितों के गौरवशाली इतिहास को आज ही नहीं युगों से दबाया जाता रहा है लेकिन अब हमें अपना इतिहास हमें खुद ही लिखना होगा। 
उन्होंने डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों से अवगत कराते हुए कहा कि वर्तमान में दलितों को पुनः हासिए पर धकलने के प्रयास किए जा रहे है, हमें उन्हें समझकर दलित उत्थान विरोधी ताकतों को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि दलित विरोधी ताकतें ‘‘आरक्षण’’ को घृणित बताने में लगी हुई है तथा अयोग्य बताकर दलितों को पदौन्नति में आरक्षण से वंचित करने की साजिशें की जा रही है। अब समय आ गया है दलितों को संगठित होकर आवाज उठाने का। 
समारोह के दौरान आईडाणा के बाबू लाल सालवी ने घोषणा की कि समाज के जो भी छात्र-छात्राएं माध्यमिक शिक्षा में राज्य स्तर पर मेरिट में स्थान में प्राप्त करेंगे उन्हें 21000 रुपए तथा जिला स्तर पर मेरिट में स्थान प्राप्त करेंगे उन्हें 11000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। 
सम्मान समारोह की अध्यक्षता गादरोला (जसवंतपुरा) के गोमाराम सालवी ने की, वहीं मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी थे। समारोह को सामाजिक कार्यकर्ता बाबू लाल सालवी, सालवी समाज मियाला के अध्यक्ष जेठाराम कतिरिया, व्याख्याता गणेश भाटी, जिला परिषद सदस्य बंशी लाल सालवी, ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी (कुंभलगढ़) मोहन लाल सालवी, सालवी समाज राजसमन्द के जिलाध्यक्ष देवी लाल सालवी, रूपाराम जलवाणिया इत्यादि ने सम्बोधित किया। समारोह का संचालन कवि खेमराज सालवी ने किया। 

Thursday, February 13, 2014

‘‘आप’’ को समर्पित राजस्थानी गानें


  • लखन सालवी
मेरे पड़ौस में शादी है, वैसे कई घरों में शादियां है, शादियों में डीजे का प्रचलन बढ़ गया है। चारों तरफ बड़े-बड़े लाउडस्पीकर कर्कश ध्वनि फैला रहे है। सायं 7 बजे से एक लेख लिखने का प्रयास कर रहा था लेकिन लाउडस्पीकर पर बज रहे राजस्थानी गानों के कारण लेख का एक पैरा पूरा नहीं कर पाया। जैसे ही लिखने लगता या तो गानों के रिदम मेरा मन खींच लेते या गानों की धुन मन मोह लेती। कुछ गानों ने तो बचपन की यादों को तरो ताजा कर दिया . . और मैं बचपन की यादों में खो गया . . अब गानें बजना बंद हो गए है . . . मैं भी यादों से बाहर बाहर निकल गया हूं। 

एक बात तो है, राजस्थानी, ग्रामीण परिवेश के गानों ने शहरी लोगों का भी मन मोह लिया है तभी तो हर्ष मना रहे है लोगों के घरों में बज रहे लाउडस्पीकरों में बार-बार राजस्थानी गानें सुनाई दे रहे है। 
आपा चकरी में झुलांगा, आपा डोलर में हिंदाला, लारे चालेनी . . . धापुड़ी ऐ
अर...र.र.रर.र.र. रे कोनी चालू रे बजरंगा, थारा दादा की मैं साली
इस गाने ने देसाई, लंगर बीड़ी की याद ताजा कर दी। गांवों में मेलों का बड़ा महत्व रहा है, मेलों में गांवों की संस्कृति की झलक मिलती थी, दोस्त मिलते थे, खूब जलेबियां और गुलाब जामुन खाए जाते, डोलर में हिंदे खाते, अपनी-अपनी गोपियों को पाटले, बिंदियां, पाउडर, चूडि़यां और न जाने क्या-क्या दिलाते थे। उन्हीं मेलों में देसाई बीड़ी, लंगर बीड़ी सहित कई बीड़ी कम्पनियां सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित करवाती थी, उन कार्यक्रमों में राजस्थानी गानों पर कलाकर नृत्य प्रस्तुत करते थे। उसी समय का मशहूर गाना है ये - आपा चकरी में झुलांगा, आपा डोलर में हिंदाला, लारे चालेनी . . . धापूड़ी ऐ 


आजकल एक अन्य गाने ने उत्सवों के मौसम को रंगीन बना रखा है. . . 
अमलीड़ो . . अमलीड़ो . . . अमलीड़ो घोड़ो
भगता ने लागो भालो, यो बाबो भोलो भालो, 
यो नाग पिलसवा वालो यो बाबो भालो अमलीड़ो
गांजा की चिलमा पीवे, यो भांग धतूरा खावे, यो बाबो भोलो अमलीड़ो
इस गाने ने काफी प्रसिद्धी पाई है, इस गाने के बोल आसानी से बोले जा सकते है ओर इसका रिदम ऐसा है कि हर कोई थिरकने पर मजबूर हो जाता है। 

ढ़ोल बाजे रे, डीजे बाजे, या तो छम्मक, छम्मक डीजे उपर गौरी नाचे
अरे बासा कांई देखरिया हो ?
चालबा दे चालबा दे, झणकार उडबा दे
या तो छम्मक, छम्मक डीजे पर गौरी नाचे
इस गाने ने कान पका दिए है। भई अब तो बस करो . . . मुझे लगता है कोई नहीं मानने वाला है . . सब इसके दिवाने हो रहे है।  

एक गाना तो बहूत ही शर्मिन्दा कर रहा है, मुझे लगता है कि परिजनों के सामने इस गाने को सुनना मेरे लिए मुमकिन नहीं है लेकिन शहरी युवा पीढ़ी (मेल-फिमेल) इस गाने पर जमकर एंजोय कर रहे है। गाने के बोल ठीक है लेकिन उच्चारण बेहूदा है . . .
गायक गा रहा है - ब्याण म्हारी, ब्याण म्हारी, ब्याण म्हारी
लेकिन उच्चारण में लगता है - गणमरी, गणमरी, गणमरी (यह शब्द एक गाली है।)

एक अजीब-सा गाना यह भी है . . . पर मस्त है, भीलवाड़ा जिले की बनेड़ा तहसील के निवासी पूसालाल माली ने इसे अच्छे रिदम पर गाया है - 
आज तो पीणो वे वे जितो पिलो, काले पीओला म्हारों डोपो
मूच्छया पर फेर लो जी, गुल्ली-डांडो मूच्छियां पर फेर लो जी 

‘‘बोल शंकरिया’’ भी अपडेट हो गया है - 
मंगरा का रे, मंगरा का रे, मंगरा का खेता में बकरियां बोली रे-बोल शंकरिया

डीजे पर राजस्थानी रिमेक्स गानों की भी भरमार है। डीजे औरतों की परेशानी का सबब बन गया है, जहां शहरी युवक-युवतियां डीजे पर राजस्थानी रिमिक्स गानों पर जमकर उछल-कूद रहे है वहीं औरतें सही से नाच नहीं पा रही है। राजस्थानी औरतें पहले धुन पकड़ती है फिर मूड बनाकर रिदम पर पैर उठाने लगती है फिर रंग में आकर पैरों को धीरे-धीरे उठाते हुए हाथों को लहराते हुए नाचने लगती है। डीजे पर बज रहे रिमिक्स गानें उनकी समझ से परे है। वह डीजे वालों पर चिल्लाती है, कहती है एक गाने को तो पूरा बजने दे लेकिन बेचारा डीजे वाला भी क्या करे ? 5 मिनिट के रिमिक्स गाने में कोई 10 से अधिक राजस्थानी गानें है। 

वीणा कैसेट के बारे में बताऊंगा तो राजस्थानी गानों की तौहीन मानी जाएगी। वीणा के गाने तो राजस्थान की शान है। वीणा कैसेट के गानें जरूर औरतों की मंशाएं पूर्ण कर रहे है। 

गाने बहुत है . . . बज रहे है . . . अब तो मैं भी पूरा रंग में हूं . . . हे शादियां करने वालो, हे डीजे पर नाचने वालों . . क्यूं सबको परेशान कर रहे हो, ये डीजे वाले गाने बेहूदा गाने ‘‘आप’’ को ही समर्पित, आप क्यूं नहीं चले जाते किसी टापू पर लो एक गाना में भी गाए देता हूं -
सबकी लगा के वाट
सबकी बणा के घाट
गाणे-वाणे बाजण दो, 
कानों में डाल के उंगली, मुझको तो सोण दो
सबकी लगा के वाट
गरम पाणी करके मुझको, एसएण्डएफ पी लेणे दो

Friday, December 20, 2013

रिखियां : सामाजिक जानकारियों का एक महाग्रंथ


प्रिय समाज बंधुओं,
सादर जय बाबा री,
आपको यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होगी कि हमारे समाज के बारे में विस्तृत जानकारियों से भरपूर एक महाग्रंथ ‘रिखिया’ नाम से प्रकाशित किया जा रहा है, जिसमें समाज का इतिहास, रीति-रिवाज, संत-महात्मा, अधिकारी-कर्मचारी, पंच-पटेल, भोपा-पुजारी, वकील, डाॅक्टर, इंजीनियर, जनप्रतिनिधि, उद्यमी, समाज सेवकों तथा मीडियाकर्मियों के बारे में विस्तृत जानकारियां समाहित होगी, आपसे अनुरोध है कि आप अपने इलाके से समाज के बारे में शीघ्र सप्रमाण जानकारियां भिजवावें तथा व्यक्तिगत जानकारी आपके तथा आपके परिवार के बारे में भी भिजवाने की कृपा करावें। 
फोटो
नाम ः
पिता का नाम ः
गौत्र ः 
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गौत्र ः
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गौत्र पता ः
व्यवसाय ः
शैक्षणिक योग्यता ः
जन्म दिनांक ः 
विशेष जानकारी ः

आप अपना व्यक्तिगत ब्यौरा हमें ईमेल के जरिए भेजना चाहते है तो इस ईमेल पते पर भेजें - bhanwarmeghwanshi@gmail.com
अधिक जानकारी के लिए 98280-81636 पर काॅल करे।

Saturday, November 23, 2013

बढ़ रहा है शर्मा का जनाधार, कम नहीं है गुर्जर के जीतने के आसार

लखन सालवी (भीलवाड़ा/माण्डल)-
माण्डल विधानसभा क्षेञ में वोटों के ध्रुवीकरण से राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे है। कांग्रेस के पूर्व विधायक रामलाल जाट द्वारा क्षेञ छोड़कर आसीन्द जाने और भाजपा द्वारा कालू लाल गुर्जर को प्रत्याशी घोषित करने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे है कि क्षेञ से कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाएगा वहीं भाजपा के लोग अपनी जीत लगभग तय मानकर निश्चिंत नजर आने लगे थे। जैसे ही कांग्रेस ने रामपाल शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया तो भाजपा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित-सी हो गई। उसके बाद नामांकन पञ दाखिल करने के दौरान भाजपा उम्मीदवार के साथ क्षेञ के हजारों कार्यकर्ताओं की रैली ने भी भाजपा उम्मीदवार के जीतने की संभावनाएं व्यक्त कर ही दी थी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस प्रत्याशी रामपाल शर्मा ने अपने प्रस्तावकों के साथ बिना किसी दिखावे के साधारण तरीके से नामांकन पञ दाखिल किया था। लेकिन ज्यों-ज्यों मतदान का दिन नजदीक आ रहा है त्यों-त्यों भाजपा उम्मीदवार के चुनाव जीत जाने की निश्चिंतता, जीत की सुनिश्चितता और जीत की संभावनाओं का आंकलन बिगड़ता नजर आ रहा है।

गुर्जर के वोट बैंक में शर्मा की सेंध

मोटा का खेड़ा में जनसभा को सम्बोधित करते रामपाल शर्मा
यूं तो जिले के माण्डल विधानसभा क्षेञ को गुर्जर बाहुल्य माना जाता है। हांलाकि जातिय जनगणना की रिपोर्ट जगजाहिर नहीं हुई है लेकिन राजनेताओं द्वारा अनुमानित तौर पर क्षेञ को किसी ना किसी जाति बाहुल्य बना दिया जाता हैं। चुनाव के पूर्व टिकट मांगने वालो ने भी अपनी-अपनी जाति की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बताई और अपनी जाति का पूरा समर्थन प्राप्त होने की बातें भी कही। भाजपा उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर अपने जाति का पूरा समर्थन प्राप्त होने की बात कहते हुए अपने आप सर्वाधिक मजबूत मान रहे है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या गुर्जर जाति के सभी मतदाता भाजपा के गुर्जर उम्मीदवार को वोट देंगे ? देखने में तो नहीं लेकिन सुनने में यही आता है कि गुर्जर मतदाता गुर्जर उम्मीदवार को वोट देंगे। दूसरी तरफ क्षेञ में चुनाव प्रचार कर रहे कांग्रेस उम्मीदवार रामपाल शर्मा के लिए गुर्जर बाहुल्य गांवों में गुर्जर जाति के लोगों का समर्थन मिल रहा हैं। उल्लेखनीय है कि उपरमाळ क्षेञ को गुर्जर बाहुल्य क्षेञ माना जाता है और कथित तौर पर गुर्जर जाति के मतदाता भाजपा के उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर के साथ हैं। दूसरी तरफ आजकल उपरमाळ क्षेञ में रामपाल शर्मा का व्यापक जनसम्पर्क चल रहा है। उन्होंने करेड़ा, मरवेड़ा, सेहणुन्दा, मोटा का खेड़ा सहित दर्जन भर गुर्जर बाहुल्य गांवों में जनसम्पर्क किया है। इस दौरान गांवों में गुर्जर जाति के लोगों ने रामपाल शर्मा का भव्य स्वागत करते हुए गांव की चौपालों पर जाजम बिछा कर न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बैठने की जगह दी बल्कि शर्मा को जीताने की हुंकार भी भरी है।  कीडिमाल के पूर्व सरपंच उंकार लाल गुर्जर, पंचायत समिति सदस्य घीसू लाल गुर्जर, मोटा का खेड़ा के आसूराम गुर्जर, थाणा गांव के छोगा लाल गुर्जर, ज्ञानगढ़ के पूरणमल गुर्जर, गोरख्या के नैनालाल गुर्जर सहित दर्जनों गुर्जर नेता कांग्रेस प्रत्याशी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जनसम्पर्क करते नजर आ रहे है इससे साफ जाहिर है कि कालू लाल गुर्जर के वोट बैंक में सेंध लग गई है और गुर्जर मतदाता एकमत होकर भाजपा उम्मीदवार कालू लाल गुर्जर के साथ नहीं है। हालांकि कांग्रेस के पास क्षेञ के एक वरिष्ठ गुर्जर नेता पहले से ही साथ है लेकिन यह गुर्जर नेता इन दिनों चुनाव प्रचार में नजर नहीं आ रहे है। वो घर बैठकर ही स्वजातिय लोगों को सामूहिक निर्णय करने के लिए अपने घर आने का न्यौता दे रहे है लेकिन उनके स्वजातिय लोगों का कहना है कि जब कांग्रेस ने टिकट रामपाल शर्मा को दे दिया है, हम पार्टी के साथ है तो फिर निर्णय किस बात का करना है, सो वे वरिष्ठ गुर्जर की बात को अनसुना कर लगातार रामपाल शर्मा के साथ जनसम्पर्क में जुटे हुए है। 

हो रहा है वोटों का ध्रुवीकरण, लामबंद्ध हो रहे गैरगुर्जर मतदाता

गुर्जरों के लामबंद्ध होने की कथित सूचनाओं के बाद क्षेञ के अन्य जातियों व वर्गों के लोग लामबंद्ध हो कर कांग्रेस के पक्ष में खड़े दिख रहे है।  जीत या हार का सेहरा बंधवाने वाला दलित वोट बैंक भी कांग्रेस के पलड़े में जा रहा है, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी का रामपाल शर्मा के साथ दिखना, इस बात का पुख्ता प्रमाण है।
इस चुनाव में ब्राह्मण मतदाता भी लामबंद्ध होकर कांग्रेस से जुड़ रहे है। ब्राह्मणों की इस एकजूटता का सारा श्रेय रामपाल शर्मा को जाता है। दूरदर्शी सोच रखते हुए अदृश्य रहकर वर्तमान की राजनीति करने में माहिर शर्मा ने पंचायतीराज चुनाव में गोपाल सारस्वत को प्रधान बनवाकर ब्राह्मण समुदाय को राजनीति के करीब लाने का सफल प्रयास किया और उसके बाद करेड़ा क्षेञ में पांव जमाने के लिए अदृश्य रहकर अपने चेहते विनोद तिवारी को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बनवाया। गत वर्षों में प्रधान व ब्लॉक अध्यक्ष ने मिलकर ब्राह्मण मतदाताओं को कांग्रेस से जोडऩे के प्रयास किए है, जिसका फायदा इस चुनाव में रामपाल शर्मा को मिलता दिखाई दे रहा है। एक तरफ रामपाल शर्मा क्षेञ के गांवों-गांवों में जाकर सभी वर्गों के मतदाताओं से सम्पर्क कर रहे है वहीं ब्लॉक अध्यक्ष विनोद तिवाड़ी, प्रधान गोपाल सारस्वत, निम्बाहेड़ा जाटान के पूर्व सरपंच गोपाल लाल तिवाड़ी सहित एक दर्जन ब्राह्मण नेता समाज को कांग्रेस के पक्ष में लाने के लिए कमर कसे हुए है। वहीं दूसरी तरफ सीसीबी अध्यक्ष चेतन डिडवाणिया, उदयलाल गाडऱी जैसे लोग जीत के लिए अपने-अपने  स्तर पर प्रयास कर रहे है। कान्फेड अध्यक्ष मोना शर्मा ने भी महिलाओं की टुकड़ी के साथ मोर्चा संभाला हुआ वह घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रही है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार पार्टी प्रतिबद्धता के चलते ब्राह्मण मत शत प्रतिशत कांग्रेस खाते में नहीं जायेगा लेकिन बीते चुनावों की अपेक्षा इस चुनाव में कांग्रेस के खाते में ब्राह्मण मतों की बढ़ोतरी जरूर होगी। जनसम्पर्क के दौरान करेड़ा में अपार जन समर्थन से इस बात का अंदेशा सहज ही लगाया जा सकता है।

ससुराल व ननिहाल से विश्वास

क्षेञ में ससुराल व ननिहाल होने का फायदा भी शर्मा को मिलेगा। जानकारी के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी रामपाल शर्मा का ससुराल करेड़ा में है जो कि उपरमाळ क्षेञ का ह्दय स्थल है वहीं ननिहाल माण्डल विधानसभा के ही भगवानपुरा गांव में है।  शर्मा अपने आप को क्षेञ का दामाद व भाणेज बताकर मतदाताओं से वोट की मांग कर रहे है।  शर्मा को विश्वास है कि क्षेञ में ससुराल व ननिहाल होने से उन्हें जरूर फायदा मिलेगा।

यहां भाजपा का जनाधार

समर्थकों के साथ कालू लाल गुर्जर  
ऐसा नहीं है कि हर गांव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन मिल रहा हो। उपखण्ड मुख्यालय के पास की पीथास, अमरगढ़, चांखेड, बागौर, बावलास सहित दर्जनभर ग्राम पंचायतों में कांग्रेस की हालात ठीक नहीं है। इन ग्राम पंचायतों के सैकड़ों गांवों में कालू लाल गुर्जर का बोलबाला है। जनसम्पर्क के दौरान के माहौल के अनुसार इस क्षेञ में रामपाल शर्मा को बढ़त मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे है। बागौर सरपंच कालू लाल जाट, चांखेड सरपंच पुत्र मदन लाल जाट जैसे दर्जनों जनाधार खो चूके नेताओं की बदौलत इस क्षेञ में गैरजाट, दलित व अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस से बिखरे हुए है। 

कांग्रेस का बागी, भाजपा के लिए दु:खदायी 

कांग्रेस से बागी उम्मीदवार दुर्गपाल सिंह अपने समर्थकों सहित क्षेञ में जनसम्पर्क में लगे हुए है। वे क्षेञ के सभी बूथों पर अपने बूथ कार्यकर्ता लगा पायेंगे इसमें अभी संशय है लेकिन राजपूत व मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल हो सकते है ऐसा होने पर कांग्रेस की बजाए भाजपा को अधिक नुकसान होने के आसार है। माण्डल के पूर्व चैयरमेन रमेश बूलिया, पूर्व सरपंच जाकिर खां, महिपाल वैष्णव, आबिद हुसैन शेख सहित दर्जन भर वरिष्ठ कार्यकताओं के साथ क्षेञ में जनसम्पर्क कर रहे राजपुरा के दुर्गपाल सिंह कांग्रेस को शायद ही अधिक नुकसान पहुंचा पायेंगे। जानकारी के अनुसार न तो रामपाल शर्मा और न ही कांग्रेस पार्टी के किसी पदाधिकारी ने बागी उम्मीदवार दुर्गपाल सिंह को मनाने की चेष्टा की है। इससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस यहां अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रही है। जानकारी के अनुसार दुर्गपाल सिंह क्षेञ के मुस्लिम व राजपूत मतदाताओं को लुभाने में सफल हो सकते है। दूसरी तरफ  गुर्जरों का रामपाल शर्मा के प्रति जुड़ाव व राजपूत एवं मुस्लिम वोट बैंक का दुर्गपाल सिंह की ओर झुकाव कालू लाल गुर्जर के लिए माथे का दर्द बनता जा रहा है। 
बहरहाल भाजपा प्रत्याशी अपने स्वजाति मतदाताओं के मतों के आधार पर चुनाव जीतने का तो कांग्रेस उम्मीदवार गुर्जर वोट बैंक में सेंध कर व ब्राह्मण मतदाताओं को एक जाजम पर लाकर चुनाव जीतने का सपना देख रहे है वहीं बागी उम्मीदवार अपने स्वजाति व अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने साथ मिलाने का भ्रम पालते हुए कांग्रेस उम्मीदवार की लूटिया डूबोने  का सपना देख रहे है वहीं दूसरी ओर क्षेञ में तीव्र गति से वोटों का ध्रुवीकरण हो रहा है जो भाजपा उम्मीदवार के लिए चुनौती बनता जा रहा है। राजनीतिक अनुभवियों की माने तो भाजपा प्रत्याशी कालूलाल गुर्जर को हराना आसान नहीं है, वे परिपक्व राजनीतिज्ञ है और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में माहिर है।

Tuesday, October 22, 2013

अभी तो मैं जवान हुआ हूं – गुर्जर

विधानसभा चुनाव होने वाले है . . . गिनती के दिन शेष रहे है . . . हालांकि अभी तक पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। पार्टियां अपने प्रत्याशी घोषित करने में ज्यों-ज्यों देरी कर रही है त्यों-त्यों टिकट की दावेदारी करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई दिग्गजों को टिकट प्राप्त करने में पसीने छूट रहे है तो कई सत्ता लोलुप्ता के चलते जयपुर से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काट रहे है।
कालु लाल गुर्जर
भीलवाड़ा जिले की माण्डल विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कालू लाल गुर्जर पुनः माण्डल से प्रबल दावेदारी ठोक रहे है। पूर्व वसुंधरा राजे की सरकार में मंत्री रह चुके कालू लाल गुर्जर से लखन सालवी की बातचीत के संपादित अंश -
आप कहां से दावेदारी कर रहे है ?
मैं पहले माण्डल से चुनाव लड़ चुका हूं, यहां की जनता से मेरा जुड़ाव है इसलिए इस बार भी माण्डल से ही दावेदारी कर रहा हूं।
आप सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी है, वहां आपके चुनाव जीतने की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही है, आप वहां से क्यों चुनाव नहीं लड़ते है ?
सहाड़ा-रायपुर विधानसभा क्षेत्र में 100 प्रतिशत जीत की संभावना है लेकिन माण्डल से दावेदारी करने के दो महत्वपूर्ण कारण है। पहला मैं इस क्षेत्र से हटता हूं तो यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाएगी, जो मैं नहीं चाहता। दूसरा मैंनें पिछला चुनाव माण्डल विधानसभा क्षेत्र से लड़ा था तथा मामूली वोटों के अंतर से मैं चुनाव हार गया था और हार कर क्षेत्र छोड़ना मुझे मंजूर नहीं।
अगर माण्डल क्षेत्र में पार्टी किसी ओर को टिकट देती है तो आप क्या करेंगे ?
देखिए अव्वल तो पार्टी मुझे ही टिकट देगी, हां पार्टी किसी दिग्गज को टिकट देती है तो अलग बात है।
सुनने में आया है कि पार्टी आपको आसीन्द से टिकट दे रही है ? आसीन्द गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है।
मैं किसी भी सूरत में माण्डल के अलावा कहीं ओर से चुनाव नहीं लडूंगा। मेरा जुड़ाव माण्डल क्षेत्र के लोगों से रहा है, पिछले 2 दशक से मेरा कार्य क्षेत्र माण्डल है, ऐसे में अन्य किसी क्षेत्र में जाकर चुनाव नहीं लड़ना चाहता हूं।
आप बुजुर्ग है, आपको नहीं लगता है कि युवाओं को आगे आने का मौका देना चाहिए ?
कौन कहता है मैं बुढ़ा हूं ? अभी तो मैं जवान हुआ हूं। आपको बता दूं कि 50 वर्ष की आयु तक तो राजनीतिक परिपक्वता आती ही नहीं है, लगभग 60 से 70 वर्ष की आयु राजनीतिक व्यक्ति राजनीति में परिपक्व होता है तो बताइयें राजनीतिक रूप से मैं बूढ़ा हूं या जवान।
लेकिन आप तो युवा उम्र में मंत्री बने थे ।
हां मैं 36 वर्ष की आयु में मंत्री बना था। मंत्रियों में सबसे छोटा था, उस वक्त हमारी ही पार्टी के दिग्गज मेरा विरोध करते थे, कहते थे कि ‘‘ये अभी क्या समझता है राजनीति में, इसे क्यूं मंत्री बना दिया।’’
आपके अनुसार युवाओं को टिकट नहीं देना चाहिए ?
नहीं . . .नहीं . . मेरा मतलब ये नहीं है लेकिन अभी राजस्थान में भाजपा की सरकार लाना है तो नए चेहरों की बजाए जिताउ दावेदारों को ही टिकट दिए जाने चाहिए।
आपको माण्डल विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलता है तो आप किन मुद्दों पर चुनाव लडेंगे ?
पार्टी के घोषणा पत्र के आधार पर चुनाव लडूंगा। लेकिन भ्रष्टाचार व विकास अह्म मुद्दे होंगे।
आपको बता दे कि माण्डल से कालू लाल गुर्जर के बाद बनेड़ा पूर्व उपप्रधान गजराज सिंह राणावत की मजबूत दावेदारी दिखाई पड़ रही है। वहीं बावलास के जसवंत सिंह, युवा नेता कमल सिंह पुरावत व मणिराज सिंह भी टिकट की दावेदारी प्रस्तुत कर चुके है। राज्यसभा सांसद वी.पी. सिंह अपने पुत्र अभिजीत सिंह को माण्डल से चुनाव लड़वाना चाह रहे है।
बहरहाल कालू लाल गुर्जर माण्डल क्षेत्र को किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाह रहे है, वहीं वी.पी. सिंह के चलते भाजपा कालू लाल गुर्जर को आसीन्द से चुनाव लड़ाने पर आमादा है। अब देखना है कि वी.पी सिंह अपने पुत्र को चुनावी रण में माण्डल के मैदान में उतार पाते है या नहीं, वहीं गजराज सिंह राणावत टिकट पाने में किस हद तक सफल होंगे और कालू लाल गुर्जर की हठ कितनी रंग ला पाऐगी।

Monday, October 21, 2013

कार्य ऐसा करे जिस पर समाज गर्व करे-मेघवंशी

सिंगोली/भीलवाड़ा - रिखियों के समाज में कई संत महापुरूषों ने जन्म लिया, स्वामी गोकुलदास जी जैसे संत ने समाज को दिशा दी। वर्तमान में समाज उनके बताए हुए मार्ग पर संगठित होकर  चल रहा है वहीं समाज उन्हें पूज रहा है। केवल गोकुलदास जी महाराज ही नहीं वरन् समाज के जिन लोगों ने समाज व देश हित में कार्य किया आज उन्हें भी पूजा जा रहा है, हमें भी कुछ ऐसा करना है जिस पर समाज गौरवान्वित हो सके। ये कहा रामदेव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंवर मेघवंशी ने। वे रविवार को माण्डलगढ़ तहसील के सिंगोली (चारभुजा) गांव में अखिल मेघवंशी (बलाई) समाज महासभा की जिला शाखा द्वारा आयोजित जिला स्तरीय प्रतिभा एवं संत समागम समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत रत्न बाबा भीमराव अम्बेडकर ने दलित उत्थान का महत्त्वपूर्ण कार्य किया और सबको एक वोट देने का अधिकार दिया। मेघवंशी ने समाज के युवाओं को इशारा करते हुए कहा कि राजनीति व सत्ता में भागीदारी के बगैर समाज का विकास दूर की कौड़ी है। उन्होंने अपील की कि पिछले पंचायतीरात चुनाव में समाज ने एकजूट होकर जिस प्रकार समाज की बेटी का समर्थन किया और जिला परिषद का चुनाव जीतवाकर जिले का प्रथम पद दिलवाया उसी प्रकार आगामी विधानसभा चुनाव में भी समाज को आगे लाए।

समारोह का शुभारम्भ साध्वी माया भारती ने समाज के आराध्य देव बाबा रामदेव महाराज के भजन गाकर किया। उसके बाद समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का तथा नव नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता जिला मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष भवानीराम मेघवंशी ने की वहीं मुख्य अतिथि रामदेव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भंवर मेघवंशी थे। साथ ही अखिल मेघवंशी महासभा पुष्कर की जिला शाखा भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष मदन लाल मेघवंशी,  जिला मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष भवानीराम मेघवंशी, उपाध्यक्ष प्रहलाद मेघवंशी, अखिल भारतीय मेघवंशी (सालवी) सेवा संस्थान के जिलाध्यक्ष बहादुर मेघवंशी, पुष्कर महासभा के पूर्व जिलाध्यक्ष नाथूलाल बलाई, मेघवंशी (बलाई) युवा महासभा के जिलाध्यक्ष गोवर्धन लाल बलाई, सुरेश मेघवंशी सरपंच (रूपपुरा-आसीन्द) ब्यावर मेघवंशी महासभा के जिलाध्यक्ष अर्जुनराम दुखाडि़या, ब्यावर मेघवंशी विवाह समिति के अध्यक्ष हजारी लाल चेपूल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

समारोह में समाज के दूर दराज के लोगों ने शिरकत की। मेघवंशी (बलाई) जिला युवा महासभा के जिला प्रवक्ता राजेन्द्र बलाई ने बताया कि समारोह में मेवाड़, मारवाड़ व हाड़ौती क्षेत्र के सैकड़ों समाजबंधु उपस्थित थे।

सत्यनारायण मेघवंशी, धनराज मेघवंशी सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने अतिथियों का फूलमालाएं पहनाकर व साफा बंधवाकर स्वागत किया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि राजकुमार बादल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे साथ ही उन्होंने मंच संचालन भी किया। उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि युवा साथियों ने एक नई परम्परा की शुरूआत की जो समाज को नई दिशा में ले जाएगी। सम्मान पाकर समाज की प्रतिभाएं निश्चित ही उत्कृष्ट कार्य करेंगी।’’