Sunday, May 27, 2012

पूरी हुई आसी की आस


लखन सालवी -  देर से ही सही एक महिला को डायन कह कर प्रताडि़त करने के दोषी 10 जनों को न्यायालय ने जेल भेज दिया है। मामले के अनुसार राजस्थान के राजसमन्द जिले के देवगढ़ थाना क्षेत्र के जीवा का खेड़ा की एक महिला को कुछ लोग डायन कह कर प्रताडि़त कर रहे थे। प्रताड़नाओं से परेशान होकर उस महिला ने पुलिस थाने में शिकायत की थी। जनवरी माह में दर्ज करवाई गई रिपोर्ट पर कार्यवाही करने से पुलिस बचती रही। अत्याचारों के खिलाफ आवाजें उठने के बाद जब जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ा तो अब जाकर आरोपियसों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों को 8 मई को कोर्ट में पेश किया जहां से उन सभी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
उल्लेखनीय है कि आसी बाई एक दलित परिवार ही है और उसने खाखरड़ा निवासी आरोपी प्रेमा गुर्जर, मांगु गुर्जर, जयराम गुर्जर, भोजराम गुर्जर, गोपीलाल गुर्जर, देवी लाल गुर्जर, रत्तु गुर्जर, प्रजा गुर्जर, शायरी गुर्जर व मनरूप गुर्जर के खिलाफ 2 जनवरी 2012 को देवगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। असल में आरोपी पीडि़ता की जमीन पर कब्जा कर रहे थे तथा पीडि़ता को डायन कहकर प्रताडि़त कर रहे थे। चूंकि पीडि़त एक दलित परिवार से है तथा आरोपी सवर्ण दबंग जाति के लोग है, इसी के चलते पुलिस कार्यवाही में लिपापोती करती रही।
जिला कलक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन करते लोग
हाल ही में 19 अप्रेल को दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के बैनर तले राजसमन्द जिला मुख्यालय पर दलित अत्याचारों के खिलाफ एवं आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें दलित समुदायों के हजारों लोगों ने भाग लिया। साथ ही डगर का प्रतिनिधि मण्डल अतिरिक्त जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से मिला और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाही का आश्वासन दिया था।
आसी देवी को आस (उम्मीद) थी कि पुलिस कार्यवाही करेगी, बहरहाल देर से ही सही पुलिस ने कार्यवाही की और मुकदमा दर्ज करवाने के चार माह बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरेगा और इस प्रक्रिया में खूब समय भी लगेगा लेकिन आशी की आस पूरी हुई है और वो खुश है कि आखिर उसे प्रताडि़त करने वालों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

जलदाय विभाग के कर्मचारियों व ग्राम पंचायत की मिलीभगत


लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, हेण्डपंप पानी की कमी को पूरा नहीं कर पा रहे है वहीं लोग टेंकरों से पानी मंगवा कर पी रहे है। गरीबों की दशा तो ओर भी खराब है। एनओसी व नक्सा बनाने के नाम पर ग्राम पंचायत व जलदाय विभाग के कर्मचारी हजारों रुपए ऐंठ रहे है। सैंकड़ो बार चक्कर लगाने पर कहीं जाकर नल कनेक्शन हो पा रहे है।  नल कनेक्शन हो जाने के बाद भी नलों में आवश्यकतानुसार पानी की  सप्लाई नहीं हो पा रही है। दूसरी और एक सज्जन ने जलदाय विभाग से नल कनेक्शन लेकर अपने खेत पर नल लगाया है, वो अपने खेत में नल से पिलाई करना चाहता है।

भीलवाड़ा जिले के कोशीथल गांव में जलदाय विभाग के कर्मचारी से मिलीभगत कर घर की बजाए खेत पर नल कनेक्शन करने का मामला सामने आया है। छोगा लाल तेली ने राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय के पीछे स्थित अपने खेत में नल कनेक्शन करवाया है। जानकारी के अनुसार छोगा लाल तेली के घर पर पहले से ही नल कनेक्शन के होने के बावजूद उसने नए नल कनेक्शन के लिए आवेदन किया। मजे की बात को यह है कि ग्राम पंचायत द्वारा भी बिना तहकीकात किए एनओसी पर हस्ताक्षर कर दिए।
वैसे ग्राम पंचायत भी 200-250 रुपए लेकर एनओसी जारी कर देती है, फिर एनओसी चाहने वाला बीपीएल हो या एपीएल। एनओसी मिलने के बाद जलदाय विभाग द्वारा छोगालाल को नल कनेक्शन स्वीकृत हो गया। छोगालाल ने उक्त कनेक्शन अपने घर पर न करवाकर जलदाय विभाग के स्थानीय कर्मचारियों से मिलीभगत कर खेत पर लगावा दिया। ग्रामीणों द्वारा मामले की शिकायत सरंपच से करने बाद सरपंच शंकरलाल देरासरिया ने भी छोगा लाल तेली के खिलाफ जलदाय विभाग को लिखित में शिकायत भेजी है वहीं ग्रामीणों ने भी शिकायत भेजकर विभाग के कर्मचारियों व छोगालाल के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

ग्राम पंचायत भी कर रही है एनओसी देने में मनमानी

कोशीथल ग्राम पंचायत द्वारा नल कनेक्शन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने के बदले 250 रुपए की राशि वसूली जा रही है। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत ली गई सूचनाओं से यह खुलासा हुआ है। कोशीथल के नारायण लाल तेली ने 21 सितम्बर 2011 को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करते हुए ग्राम पंचायत से जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्रों के संबंध में सूचनाएं मांगी। ग्राम पंचायत से मिली सूचना के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा हर वर्ग के व्यक्तियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की एवज में 250 रुपए की राशि वसूली गई है।
उल्लेखनीय है नल कनेक्शन करवाने के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना जलदाय विभाग द्वारा आवेदक को नल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है। नियमानुसार ग्राम पंचायत 20 रुपए की शुल्क अदायगी पर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम सचिव अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए 250 रुपए की वसूली करता है। यह राशि नहीं देने पर अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता है। जबकि जलदाय विभाग द्वारा 301 रुपए की फीस पर नल कनेक्शन मुहैया करवाया जाता है।
आवेदक किसी भी वर्ग का हो प्रत्येक से 250 रुपए वसूले जा रहे है। जनवरी 2007 से अगस्त 2011 तक अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के बदले ग्राम पंचायत ने कोशीथल के 46 लोगों से 11500 रुपए वसूल किए है। इनमें से 16 लोग अनुसूचित जाति के है तथा 7 बीपीएल परिवार के है। 7 बीपीएल में से भी 3 बीपीएल परिवार दलित है। बीपीएल परिवार के देवीलाल रेगर, जयचंद रेगर, कस्तुर सालवी, हजारी रेगर, भंवर माली सहित कईयों से 250 रुपए लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया।
नारायण तेली ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में यह भी जानना चाहा कि अनापत्ति प्रमाण पत्र के बदले 250 रुपए की राशि किस नियम व कानून के तहत वसूली गई ? जवाब में ग्राम सचिव ने ग्राम पंचायत के अपने अधिकार क्षेत्र के तहत यह राशि वसूलना बताया है।
गरीब व्यक्ति जैसे तैसे कर 250 रुपए ग्राम पंचायत में जमा करवाकर अनापत्ति प्रमाण पत्र ले लेता है। नल कनेक्शन के लिए जलदाय विभाग के अधिकारी फाइल के साथ नक्से की मांग करते है, नक्सा विभाग का स्थानीय कर्मचारी द्वारा बनाया जाता है। कोशीथल में कार्यरत कर्मचारी नक्सा बनाने की एवज में आवेदक से 800-900 रुपए वसूल रहे है।
भंवर माली, जगदीश माली, नारायण लाल तेली, महावीर टेलर, हेमराज सोनी दर्जनों लोगों ने जलदाय विभाग के कर्मचारियों को रुपए देकर कनेक्शन  करवाए है। जिन-जिन ने भी इस सिस्टम का विरोध किया वो कनेक्शन के लिए तरस रहे है।एक मात्र शख़्स है हिरालाल जीनगर जिसने नल कनेक्शन के लिए ग्राम पंचायत में एनओसी के बदले 250 रुपए नहीं दिए, जलदाय विभाग के कर्मचारियों को बिना पैसे खिलाए नल कनेक्शन करवाने में सफल रहा। हांलाकि उसे खूब चक्कर कटवाए गए लेकिन उसने हार नही मानी। जलदाय विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ तो उसने जयपुर स्थित जलदाय विभाग की हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज करवाई, तब कहीं जाकर कनेक्शन हो पाया। विकलांग असमल मोहम्मद छीपा नल कनेक्शन के लिए 4 माह तक जलदाय विभाग के दफ्तर के चक्कर लगाने पड़े।
एनओजी जारी करने के बदले 250 रुपए लेने के मामले में ग्राम सचिव सम्पत लाल बोहरा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि - "एनओसी जारी करने के लिए पूर्व में बतौर विकास शुल्क 250 रुपए, एनओसी चाहने वाले प्रत्येक से लिए गए थे लेकिन पिछले दो माह से बीपीएल गरीब परिवारों से यह शुल्क नहीं लिया जा रहा है।

Saturday, April 28, 2012

इन्श्योर कर लिजिए, अगली सरकार आपकी ही बनेगी


राज्य कर्मचारी संघ एवं शासन सचिवालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने दी सरकार बदल देने की चेतावनी
बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज करवाते कर्मचारी
लखन सालवी - सरकार बायोमेट्रिक हस्ताक्षर व्यवस्था लागू करने जा रही है, मुख्यमंत्री के व्यवस्था लागू करने की घोषणा करने महज से ही सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों के पसीने छूट गए और वे इस व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतर गए है। उनका कहना है कि बायोमेट्रिक हस्ताक्षर व्यवस्था लागू कर सरकार हमें अनपढ़ बनाना चाहती है।
जानकारी के अनुसार बायोमेट्रिक हस्ताक्षर व्यवस्था के तहत विभिन्न विभागों के कार्यालयों में बायोमेट्रिक हस्ताक्षर स्वीकार करने वाली मशीनें लगाई जाएगी। कार्यालय में पदस्थापित अधिकारी-कर्मचारी जब कार्यालय में आएंगे और जाएंगे तब उन्हें उस मशीन पर अपना अगूंठा लगाना होगा। मशीन अगूंठे के फिंगर प्रिन्ट को पढ़कर अधिकारी-कर्मचारी की उपस्थिति दर्ज करेगी, आने-जाने का समय दर्ज करेगी। इस व्यवस्था की जरूरत ही इसलिए पड़ी की अधिकारी-कर्मचारियों के आने जाने का समय रिकार्ड रह सके। समय पर कार्यालयों में उपस्थित नहीं होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के लिए जरूर यह व्यवस्था गले की फांद बन जाएगी।
उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान राजस्थान के द्वारा प्रदेश भर में मजदूर हक यात्रा निकाली गई थी और 2 अक्टूबर 2010 से 17 नवम्बर 2010 तक जयपुर में स्टेच्यू सर्किल के पास मजदूर हक सत्याग्रह किया गया था। जिसमें प्रदेश भर के लोगों ने भाग लिया था। उसी दौरान सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति का सर्वे किया गया था। उस सर्वे के अनुसार अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी समय पर कार्यालय में नहीं आए थे न ही पूरे समय कार्यालय में रूके थे। तब सूचना एवं रोजगार अधिकार अभियान राजस्थान द्वारा सरकार से बायोमेट्रिक व्यवस्था को लागू करने की मांग की थी। बायोमेट्रिक हस्ताक्षर व्यवस्था की मांग और भी कई लोगों ने की है।
इस व्यवस्था को लागू करने के पीछे सरकार का मकसद भी शुभ ही है, आज के दौर में सरकारी अधिकारी कर्मचारी ड्यूटी समय में भी कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते है। कार्यालय में आकर महज उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर कर वापस चले जाने की प्रथा चल पड़ी है। राजनीतिक लोगों से जुड़े सरकारी कर्मचारी तो ड्यूटी पर जाने को अपनी शान के खिलाफ समझते है, वो एक माह बाद कार्यालय में जाकर एक साथ पूरे माह के हस्ताक्षर कर देते है। सरकारी दफ्तरों में ऐसा भ्रष्टाचार दीमक की तहर फैल चुका है। इस दीमक को समाप्त करने के लिए एक उपाय है बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली। दफ्तर में नहीं आने के बावजूद पूरा वेतन पाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसके पीछे भी कई कारण है। मॅानिटरिंग करने के लिए सरकार के पास कोई और उपर्युक्त व्यवस्था है नहीं। इसलिए बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली ही सबसे उत्तम तरीका है।
कई देशों में बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली लागू है। मॅानिटरिंग का यह बेहतर तरीका है, जिसमें कम मानव संसाधन की आवश्यकता  होती है और भ्रष्टाचार करने की गुंजाइस भी नहीं रहती। राजस्थान शासन सचिवालय के अधिकारी कर्मचारी तो उन देशों में इस पद्धति का उपयोग कर रहे लोगों को अनपढ़ ही कहेंगे। और आप क्या कहिएगा ? वो सभी अनपढ़ है ?
बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली को राजस्थान सरकार लागू करने जा रही है तो सरकारी अधिकारी-कर्मचारी मुख्यमंत्री को आंख दिखा रहे है, अगली बार सरकार नहीं आने देने की धमकी दे रहे है, जैसे कोई इन 7 लाख अधिकारी-कर्मचारियों की की मर्जी के बिना सरकार बनेगी ही नहीं। वैसे राज्य के आलाकमान इन लोगों से बहुत डरते है। सपेरे की बीन के आगे नाचने वाले नाग के जैसी दशा हो रही है आलाकमान की।
बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली के खिलाफ किसने, क्या कहा
सचिवालय अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पूरण झरीवाल ने कहा कि - ‘‘सरकार पढ़े लिखे लोगों को अंगूठा छाप बनाना चाहती है, एडवांस टेक्नोलॅाजी के युग में अधिकारियों व कर्मचारियों से अंगूठा लगवाया जा रहा है।’’
सचिवालय के कर्मचारी नेता महेष व्यास ने कहा कि - ‘‘आगे भी गहलोत जी ने अधिकारियों व कर्मचारियों से पंगा लिया था। अब पुनः सत्ता के मद में उन्हें परेशान कर रहे है।’’
राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष (जयपुर) संतोष विजय ने कहा कि - ‘‘ हमें इस व्यवस्था से दिक्कत कुछ भी नहीं है, बस कर्मचारियों में अविश्वास की स्थिति बन रही है।’’
बेहरहाल सचिवालय अधिकारी कर्मचारी संघ व राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने तो मुख्यमंत्री को धमकी दे दी है कि बायोमेट्रिक हस्ताक्षर प्रणाली को लागू न करे अन्यथा हम सरकार नहीं आने देंगे। अगर वास्तव में सरकार बनाना इन्हीं 7 लाख अधिकारियों व कर्मचारियों के हाथ की बात है तब तो मुख्यमंत्री को अधिकारी-कर्मचरियों को बात मानकर इन्श्योर कर लेना चाहिए कि अगली सरकार उन्हीं की बनेगी। और हां अगली ही क्यों उनकी तन्ख्वाह, यात्रा भत्ते आदि इत्यादि बढ़ा बढू कर यह भी इन्ष्योर कर लेना चाहिए भविष्य में राजस्थान में कभी किसी अन्य पार्टी की सरकार नहीं बनेगी।

Saturday, April 21, 2012

सामाजिक संस्थाओं के काले कारनामें


कानून बनाने व कानून लागू करने की मांग करने वाले स्वयं कानूनों की अवहेलना कर रहे है

बारां जिले का एक एनजीओ कई सालों से भ्रष्टाचार कर रहा है

अनियमितता के मामले में उसके खिलाफ कोर्ट में मामला विचाराधीन है

बंधुआ मजदूरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले इस एनजीओ का डायरेक्टर खुद बंधुआ मजदूरी करवाता है।

महिला अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने वाला खुद महिलाओं के साथ अत्याचार करता है।

इस एनजीओ में कार्यरत कई कार्यकर्ता शादीसुदा होने के बावजूद एनजीओ में ही कार्य कर रही बालाओं से शारीरिक संबंध रखते है। अपनी सेलेरी का आधा हिस्सा उन खुबसूरत बालाओं पर खर्च कर देते है, और वो बात करते है महिला अत्याचारों की खिलाफत की, बात करते है कानूनों की पालना करने की ...... क्या वो कर रहे है हिन्दू मैरिज एक्ट की पालना?

सूचना के अधिकार के कानून को लागू करवाने के लिए किए गए आंदोलन में भाग लेने वाला यह शख्स अपनी संस्था की सूचनाएं नहीं देता है।

ग्राम पंचायतों द्वारा किए गए कार्यो का सामाजिक अंकेक्षण करने का ठेका लेने वाले इस एनजीओ का सामाजिक अंकेक्षण करना जरूरी है। एक ग्राम पंचायत का सामाजिक अंकेक्षण इस एनजीओ ने किया, सरपंच ने इस एनजीओ के कारनामे उजागर करने की धमकी दी तो सामाजिक अंकेक्षण का लचीला कर दिया। अर्थात् सरकारी ओडिटर्स की तरह ले दे के मामला ठण्डे बस्ते में डाल दिया।

इस एनजीओं के खिलाफ . . . .  मेरी एक खास रिपोर्ट . . .  जल्दी ही . . .

एनजीओ - सरकार के बाद करप्शन की सबसे बड़ी दूकानें (कुछ को छोड़ कर) है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले अधिकतर एनजीओ भ्रष्टाचार में लिप्त है।
ऐसे एनजीओ के खिलाफ भी हमें आवाज उठानी होगी, वरना ऐसे लोग समाज को दीमक भांति चट कर जाएंगे।

ऐसे एनजीओ के खिलाफ अब आप क्या कहिएगा ?

Friday, April 20, 2012

धरना प्रदर्शन सफल, आरोपी गिरफ्तार

दलितों ने भरी हुंकार, शांति से रहने दो नहीं तो होगा प्रदेश स्तरीय आंदोलन
दलित अत्याचारों के विरोध में राजसमन्द के पुरानी कलक्ट्रेट के परिसर में विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में राजसमन्द, उदयपुर व भीलवाड़ा जिले के करीबन 5000 ने लोगों ने भाग लेकर जिले में बढ़ रही दलित अत्याचार के घटनाओं पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया।
19 अप्रेल को ‘‘जय भीम’’ के उद्घोष के साथ भीम से मोटर साइकिल रैली रवाना हुई जो दोपहर 12 बजे राजसमन्द पहुंची। गांवों-गांवों से लोग राजसमन्द पहुंचे और पुराने जिला कलक्ट्रेट परिसर में इक्कट्ठा हुए। वहां सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पीडि़त दलितों ने अपनी पीड़ा बताई। देवगढ़ तहसील के सोंलकियों का गुढ़ा गावं की टमु बाई ने बताया कि गांव के गुर्जर जाति के लोग उसे 10 सालों से परेशान कर रहे है। उसे डायन कहते है और अपमानिक करते है।
भीम तहसील के 40 मील गांव की अणछी बाई ने बताया कि वह 27 मार्च को महानरेगा के कार्यस्थल पर पानी पिलाने का कार्य कर रही थी कि वहां पर सुखदेव सिंह नाम का लड़का आया और पानी की मटकियों को लात मार कर फोड़ दिया। विरोध करने पर जातिगत गालियां दी। अणछी बाई ने बताया कि उसने थाने में रिपोर्ट दी लेकिन सुखदेव सिंह अभी तक खूलेआम घूम रहा है। नाथद्वारा थाना क्षेत्र में दलित मानवाधिकार कार्यकर्ता शंकर लाल रेगर ने बताया कि अक्षय पात्र के मैनेजर चन्द्रसिंह राठौड़ ने महज इस बात के लिये उन्हें जातिगत गाली गलौज व मारपीट करके अपमानित किया क्योंकि उन्होंने अक्षयपात्र में दलित आदिवासी युवाओं को काम दिलाने की मांग उठाई। शंकर लाल रेगर ने बताया कि अक्षय पात्र के मैनेजर चन्द्रसिंह राठौड़ के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 341, 323 तथा अनुसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 3 (1) (10) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया किन्तु कोई कार्यवाही अभी तक नहीं की गई।
सभा के दौरान एक और मामला सामने आया कि राजनगर थाना क्षेत्र के राज्यावास की निवासी 32 वर्षीय जीएनएम नर्स जो कि आर.के. हॅास्पीटल में कार्यरत है, 10 फरवरी 2012 की शाम जब वह अपनी स्कूटी से घर जा रही थी तब अमलोई निवासी निर्भय सिंह राव ने बिना नम्बर प्लेट की मोटर साइकिल से पीछा करते हुये स्कूटी के टक्कर मारकर दलित नर्स तारा यादव को नीचे गिरा दिया, उसका दुपट्टा छीना, झापट मारी तथा सरेआम छेड़छाड की। नीचे गिरने से तारा यादव के घुटनों पर चोंट लगी और स्कूटी भी टूट गई। आरोपी निर्भय सिंह राव ने दलित नर्स को कहा कि - ‘‘चमारनी यदि इस रोड़ से निकलना है तो मुझे सलाम करके निकलना पड़ेगा वरना नहीं जाने दूंगा और सीधे तरीके से आना।’’ इतना ही नहीं बल्कि आरोपी राव दलित नर्स के साथ और बदतमीजी करने लगा, नर्स के चिल्लाने पर राहगीरों ने आकर उसकी लाज बचाई, इससे पूर्व भी तकरीबन छह माह से आरोपी निर्भय सिंह दलित नर्स तारा यादव के साथ छेड़छाड, रास्ता रोकना, जातिगत गालियां देना आदि कर रहा था, मगर लोकलाज के भय से तारा यादव चुप रही, जब आरोपी की हरकतें बर्दाश्त के बाहर हो गई तो वह मामला पुलिस के समक्ष ले गई। थाने में मामला तो दर्ज कर लिया गया मगर कार्यवाही के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। वहीं इस बारे में पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एक्सीडेंट का मामला था, थाने में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और जांच कार्यवाही की जा रही है।
सभा को राजसमन्द के जिला प्रमुख किशन लाल गमेती, दलित अधिकार नेटवर्क राजस्थान के राज्य संयोजक तुलसीदास राज, दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान (डगर) के संस्थापक भंवर मेघवंशी, डगर के प्रदेश संयोजक परशराम बंजारा, रमा झावडि़या सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
गुर्जर को किया गिरफ्तार, जिला प्रमुख ने पीडित को बंधवाई काबरिया रंग की पगड़ी
पुलिस ने दलित की पगड़ी को जलाने वाले मामले में आरोपी किशन लाल गुर्जर को विरोध प्रदर्शन की पूर्व की रात को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपी किशन लाल गुर्जर को 18 अप्रेल को गिरफ्तार कर लिया गया और कोर्ट में पेश कर दिया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। दूसरी तरफ विरोध प्रदर्शन के दौरान आयोजित की गई सभा में राजसमन्द के जिला प्रमुख किशन लाल गमेती ने गोवर्धन लाल बलाई को काबरिया रंग की पगड़ी बंधवाकर उसकी हौसला अफजाई की।
उल्लेखनीय है कि गुणिया गांव के गोवर्धन बलाई के माथे पर बंधी काबरिया रंग की पगड़ी को बियाना गांव के किशन लाल गुर्जर ने 11 मार्च को यह कहते हुए छीन ली थी कि काबरिया रंग की पगड़ी तो गुर्जर जाति के लोग ही बांध सकते है। उसने गोवर्धन की पगड़ी को न केवल छीना बल्कि जलती हुई भट्टी में डाल दिया। गोवर्धन लाल को धमकी दी कि आज के बाद गुर्जरों के जैसी पगड़ी मत बांधना वरना भट्टी में डालकर जिंदा जला दूंगा। गोवर्धन बलाई ने इसकी शिकायत दिवेर थाने में की थी। थाने वालों ने रिपोर्ट तो दर्ज कर ली मगर किशनलाल गुर्जर को गिरफ्तार नहीं किया था।
पुरानी कलक्ट्री से नई कलक्ट्री तक निकाली रैली
सभा के बाद विशाल रैली निकाली गई। अलग-अलग गांवो से आए महिला पुरूषों ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लोगों के साथ छुआछूत एवं उत्पीडऩ के विरोध में जमकर कर नारे लगाए। जय भीम, बाबा साहब अमर रहे, दलितों पर अत्याचार, बंद करो बंद करो, एक दो तीन चार, नहीं सहेंगे अत्याचार जैसे नारे लगाते हुए पुरानी कलक्ट्री से नई कलक्ट्री तक पहुंचे।
अतिरिक्त जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक ने दिया कार्यवाही करने का आश्वासन
प्रदर्शनकारियों की ओर से डगर के संस्थापक भंवर मेघवंशी की अगुवाई में एक दल जाकर अतिरिक्त जिला कलक्टर से मिला और दलित अत्याचार के मामलों में कार्यवाही की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने दलित अत्याचार के सभी मामलों में शीघ्र कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। अतिरिक्त जिला कलक्टर ने दलितों की जमीनों पर से अतिक्रमण हटाने व बासनी गांव के मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलवाने का आश्वासन दिया।
दल के लोग पुलिस अधीक्षक से भी मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा। पुलिस अधीक्षक ने दल के लोगों को बताया कि पगड़ी छीनकर जलाने के मामलें में बियाना गांव के आरोपी किशन लाल गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि महानरेगा कार्यस्थल पर पानी पिला रही 40 मील गांव की दलित महिलाओं की मटकियों को फोड़ने व उन्हें जातिगत गालियां देने के मामलें के आरोपी सुखदेव सिंह को 107 व 151 में गिरफ्तार कर लिया गया था, अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जांच पुलिस उपाधिक्षक को सौंपी गई है, वो जांच कर रहे है।
डगर के संस्थापक भंवर मेघवंशी व दलित अधिकार नेटवर्क राजस्थान के राज्य संयोजक तुलसीदासराज ने बताया कि प्रशासन ने कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है अगर कार्यवाही नहीं की जाएगी तो राज्य स्तरीय आन्दोलन किया जाएगा।

Tuesday, April 17, 2012

दलित अत्याचार के विरोध में राजसमन्द में प्रदर्शन कल

राजसमन्द जिले में बढ़ रहे दलित अत्याचारों में प्रशासन के रूखे रवैये से रूष्ठ दलित समुदाय के लोग कल जिला कलक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। दलित आदिवासी एवं घुमन्तु अधिकार अभियान राजस्थान के राजसमन्द जिला संयोजक सोहन लाल भाटी ने बताया कि जिले में दलित अत्याचार की घटनाएं बढ़ती जा रही है। दलितों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्यवाही नहीं कर रही है। धरना प्रदर्शन में जिले भर से करीबन 5000 लोगों के पहुंचने की संभावना है साथ ही दलित अत्याचारों के कई मामलों में कार्यवाही की मांग को लेकर जिला कलक्टर को ज्ञापन भी दिया जाएगा।
भाटी ने बताया कि पिछले महीने राजसमन्द जिले के बियाना गांव के किशन लाल गुर्जर ने गुणिया गांव के गोवर्धन लाल बलाई की पगड़ी को छीनकर भट्टी में जला दिया, अपमानित किया और आगे से गुर्जरों के जैसी पगड़ी बांधने पर जान से मारने मी धमकी दी। गोवर्धन लाल बलाई ने दिवेर थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई, आरोपी खुल्लेआम घूम रहा है और पीडि़त को भयभीत कर रहा है। वहीं भीम तहसील के 40 मील गांव में चल रहे महानरेगा कार्यस्थल पर सुखदेव सिंह रावणा राजपूत ने दो दलित महिलाओं को जातिगत गांलिया दी और उनके पानी के मटकों को फोड़ दिया। महिलाओं द्वारा थाने में रिपोर्ट दी गई, पुलिस अधीक्षक से भी मिली नहीं आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। 
भाटी ने कहा कि पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है, जबकि दलितों पर अत्याचार जारी है। सरकार भी कुंभकर्णिय नींद सो रही है, उसे जगाने के लिए यह दलितों का यह विरोध प्रदशर्न शंखनाद होगा।

Sunday, April 15, 2012

42 वर्ष बाद मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा



रामदेव पीर से प्रेरणा लें - कोठारी
मेघंवशी  समाज सीरडि़यास की ओर से बाबा रामदेव मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं कलशारोहण का कार्यक्रम प्रसिद्ध गौभक्त अशोक कोठारी के मुख्य आतिथ्य एवं बामणिया आश्रम के बुजुर्ग संत स्वामी अनन्तानंद जी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। 
सीरडि़यास के पूर्व सरपंच नारायण लाल मेघवंशी एवं पंचायत समिति के पूर्व सदस्य राजूलाल मेघवंशी ने जानकारी दी कि मूर्ति स्थापना के बाद उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुये गौभक्त व्यवसायी अशोक कोठारी ने कहा कि लोगों को रूणेजा के पीर रामदेव जी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये। स्वामी अनन्तानंद जी महाराज ने विस्तारपूर्वक रामदेव पीर के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाष डाला। 
उल्लेखनीय है कि सीरडि़यास गांव में तकरीबन 42 वर्ष पूर्व रामदेवजी का मंदिर पूरे गांव ने मिलकर बनाया था लेकिन बाद में मेलमिलाप नहीं रहने के चलते मंदिर में मूर्ति स्थापना नहीं हो पाई, यह अद्भूत संयोग ही रहा कि जिस मंदिर को दादाओं ने बनाया उसकी प्रतिष्ठा उनके पोतों द्वारा हो पाई, क्योंकि 42 साल लग गये ग्रामीणों के ‘‘मन मिलने में, लेकिन जब दिल मिले तो अम्बेडकर जयन्ती के मौके पर रामदेव मंदिर में मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा तथा कलशारोहण का कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया। 
इस ऐतिहासिक मौके पर क्षेत्र के विधायक रामलाल जाट, नगर विकास न्यास के अध्यक्ष रामपाल शर्मा, माण्डल एसडीएम कैलाशचंद्र लखारा, सीईओ जिला परिषद के.सी.मीणा, पुलिस उपाधीक्षक बुगलाल मीणा सहित सैंकड़ों गणमान्य लोग व साधु संत व श्रृद्धालु लोग उपस्थित थे। 
प्राण प्रतिष्ठा व कलशारोहण कार्यक्रम को प्रेमचंद मेघवंशी, सांवरलाल चौहान, अशोक मेघवंशी, रमेश मेघवंशी, जगदीश मेघवंशी, महेन्द्र मेघवंशी, रामस्वरूप, प्रभुलाल, देवेन्द्र, ललित, ममता, विमला, माया, गीता, अर्चना, रामेदव कुलदीप, महादेव, मदनलाल, लहरूलाल, मंशा, माया, परमेश्वर, लक्ष्मणलाल, भैरूलाल, बाबू लाल, अमितकुमार, धन्ना लाल इत्यादि की टीम ने सफल बनाया।